चाची की चुदाई से शुभारम्भ part 3

“जा…….मेरे कमरे से मेरा टोवेल ले आ.”,

मैं चाची के कमरे में गया, उनकी अलमारी खोली. इधर उधर देखा, टोवेल दिखा ही नहीं. नीचे ही नीचे के खाने में देखा तो…….
चाची की ब्रा और पेंटी पड़े थे. और वही पर टोवल था, मैंने टोवल उठाया और तभी मुझे एक ब्रा दिखी, चटक लाल रंग की……..
बिलकुल जैसी सनी लिओनी को पहने देखा था. वो लिफ्टर ब्रा थी, मगर उसका मटेरिअल पूरा नेट का था.

आर पार…….अगर चाची इसको पहन ले तो ऐसा क़यामत लगे की…………चाची कौन सी सनी लिओनी से कम हैं ………..

मैंने ब्रा उठा ली, इतना नरम मटेरिअल था जैसे मखमल हो……टोवेल और ब्रा ले कर आया
(पेंटी नहीं, क्यों की चाची पेंटी तो पहन ही नहीं रही थी. )

चाची तो बाथरूम के बहार ही खड़ी थी. मैंने सोचा की चाची को बोल दू,

“चाची…..वो….दरवाजे की सिटकनी ख़राब है…..”

“हाय राम…….ख़राब क्यों है…? अब क्या करे….? तू रूम से बाहर जाके बैठ ”

मैंने हिम्मत की….और कहा…”चाची, म म म मुझे कम्प्यूटर पर काम करना है…….अ अ आप कर लो…..मैं…….”

“अच्छा …….???”, चाची ने मुझे घुरा.

फिर कुछ सोच कर बोली…..”ठीक है लल्ला…..तू कम्प्यूटर पर काम कर ले…..मगर तांका झांकी मत करना”, चाची ने ऑंखें दिखा कर कहा.

मैंने मन ही मन सोचा की चाची आप जाओ तो सही…….फिर देखते है.

चाची के सामने मैंने भोले बच्चे जैसा सर हिलाया और कम्प्यूटर ऑन कर लिया. कुर्सी खिंची और बैठ गया.

चाची ने टोवेल उठाया, अचानक ब्रा उसमे से गिर गयी, चाची ने ब्रा को देखा फिर मुझे.

“क्यों रे लल्ला…..ये क्या उठा लाया ?”, उन्होंने ब्रा हाथ में हिलाते हुए पुछा.

“व व वो चाची……आप ही ने तो कहा था…..लाने को”

“अरे ….मैंने कब कहा की अंगिया भी लाना ?”

“व व व वो चाची …..म म मैंने सोचा की …..आप ने पहनी नहीं है……तो शायद अब पहनोगी”

ये बोलते ही मैंने अपनी जुबान कट ली……शीट….ये क्या बोल दिया.

चाची ने ऑंखें बाहर कर के पुछा, “क्यों रे बेशरम…….तुझे कैसे पता लगा की मैंने…….अंगिया नहीं पहनी”, चाची का चेहरा थोडा लाल हो गया.

मेरी फटफटी…….चल निकली……

मैं सकपका गया…..अब क्या बोलू…..?

थोड़ी हिम्मत जुटाई और कहा, “न न न नहीं चाची…..ऐसा नहीं है……व…व….व….वो आप के ब्लाउस…..म म म में से……
द द द दिखा की…..न न न नहीं पहनी होगी…..श श शायद…..इसी लिए ल ल ल ले आया”

“हाय राम…..लाया तो लाया…..मगर ऐसी ? “, चाची ने होंट दबा कर मुझे घुढकी दी.

“ये तो पहनी न पहनी बराबर ही है…….इतने छोटे छोटे तो कप है इसके……लल्ला तू न बहुत बदमाश हो गया है……”

लल्ला क्या बोलता……..लल्ला…..का लुल्ला और ज्यादा बदमाश.

“अब सीधे सीधे कम्प्यूटर पर काम करले……”, कह कर चाची बाथरूम में घुस गयी. उन्होंने दरवाजा लगाया और सिटकनी लगाने की कोशिश की……मगर भाई साहब……सिटकनी तो कुत्ते की पूंछ थी. नहीं मानी. चाची ने दरवाज ऐसे ही लगा दिया.

कुछ देर बाद अन्दर ले चिल्लाई…..”अरे लल्ला……ये क्रीम धो कर लगानी है या ऐसे ही….”

मैं उठ कर दरवाजे के पास गया….चाची तो दरवाजे के पीछे थी…..मगर मेरे बाथरूम की एक दिवार पर पूरा कांच था. चाची उसमे दिखाई दे रही थी. उन्होंने ट्यूब हाथ में पकड़ा था और…………..और उनकी साड़ी खुली हुयी थी.

वो सिर्फ ब्लाउस और पेटीकोट में खड़ी थी. मैंने कहा, “चाची पहले अच्छे से वाश कर लो……फिर लगाना, और लगा कर १५ मिनट रखना. फिर धो लेना……बस….”

“हाँ ठीक है……”, कहकर चाची ने अपने पेटीकोट का नाडा खोला.

उनका पेटीकोट खुल कर एक टायर की तरह उनके पेरों में इकठ्ठा हो गया.

चाची ने सच मुच पेंटी नहीं पहनी थी.

बाथरूम में ट्यूब लाइट की रौशनी में चाची का अधनंगा बदन चमक रहा था. मेरी ऑंखें चौंधिया गयी,

वो सिर्फ ब्लाउस में खड़ी थी. काले रंग का पतला सा ब्लाउस. उनके गोल गोल मम्मे साफ़ दिख रहे थे और दृष्टिगोचर हो रहे थे उनके वो खड़े हुए निप्पल. क्या नज़ारा था ……

मेरी नज़ारे उनके चिकने बदन पर नीचे फिसलने लगी. उनकी कमर का कटाव देख कर मेरी साँसें रुकने लगी और फिर तेज़ी से चलने लगी. मैं पहली बार उनको नंगा देख रहा था. उनका पेट हल्का सा बड़ा हुआ था. उसमे उनकी नाभि ऐसी लग रही थी मानो मुंह खोले कोई मछली हो. इतनी सेक्सी तो शिल्पा शेट्टी की नाभि भी नहीं है. मेरी नज़रे और नीचे फिसली………

चाची ने टांगे चिपका रखी थी पर उनकी झांट के बाल काफी ऊपर तक और बहुत थे.
ऐसे गुच्छे खाए हुए थे मानो लुटी हुयी पतंग की डोर हो. ये तो पक्का था की चाची ने कभी बाल साफ़ किये ही नहीं थे.

अचानक वो पलटी और मेरी नसों के गिटार ने झंकार मारी.

चाची के वो खुबसूरत नितम्ब, जिनको मैं आज सुबह ही नाप चुका था. मेरी नज़रों के सामने थे. मेर मुंह खुला का खुला रह गया. चाची की कमर से उठा कटाव उनके नितम्बो पर पुरे शबाब पर आ रहा था.

ऐसा कटाव था मानो शिमला की सड़कों के अंधे मोड़. चाची के नितम्ब बिलकुल गोल थे. मानो दो देसी तरबूज.
दोनों में प्रीति ज़िंटा के गालो जैसे डिम्पल पड़ रहे थे.

और वो दोनों तरबूज टिके थे, चाची की मोटी गदराई जांघो पर. चाची मोटी नहीं थी, बस गदराना शुरू ही किया था.

ऐसा नज़ारा था की जिसने देखा है, वो मेरी हालत समझ सकता है. गांड भी फटे जा रही थी और मज़ा भी आ रहा था.

चाची फिर से घूमी, उन्होंने अपनी टांगे थोड़ी चौड़ी कर ली थी, चूत तो अभी भी झांटो के घूँघट में छुपी थी, मगर मेरी नज़र फिर से चाची की जांघों पर गयी, उनकी दायीं जांघ पर बना हुआ गोदना ( tatoo ), दिखने लगा था. वो जिसे मैंने टंकी के अन्दर से देखा था मगर पढ़ नहीं पा रहा था. मैंने गर्दन थोड़ी टेडी की तो दिखा…..लिखा था…….

ब…….ल……..मा……………बलमा ??

बलमा ? मतलब ? ……शायद प्यार से चाची चाचा को बलमा बोलती हो ? मगर वो तो उन्हें ऐ जी…..कहती है.

बॉस…….यह बलमा का सीन क्या है ……? जांघ पर कोई भी औरत कुछ लिखा ले……ये छोटी मोटी बात नहीं….

तभी चाची ने कमोड का ढक्कन गिराया, एक पैर उस पर रखा और हैंड शावर चालू कर के अपनी मुनिया को धोने लगी.

झांटे गीली होते ही चाची के मुनिया का घूँघट खुल गया……चाची के जैसे उनकी मुनिया भी सांवली है….यह तो मैं टंकी के अन्दर से ही देख चुका था…..मगर मुनिया के होंट भी चाची के होटों जैसे रसीले है…..ये मैं अब देख रहा था……

चाची ने अपनी टांगे खोल रखी थी. एक पैर उठा कर कमोड पर रखा हुआ था……ऐसा लग रहा था मानो वो कामदेव की
पत्नी रति है. चाची अपनी मुनिया को ऊँगली से रगड़ रगड़ के धो रही थी. शायद उनको ऐसा करने में मज़ा भी आ रहा था क्योकि उनकी ऑंखें बंद थी और मुंह हल्का सा खुला हुआ था……………………………

ये नज़ारा देखा तो किसी बुड्ढे का बुझा चिराग भी भभक जाता . मैं तो फिर…..यूँही ठरकी no .1 था.
पजामे में ऐसा तम्बू बना हुआ था की क्या बोलू……उधर चाची भी बड़े इत्मिनान से अपनी मुनिया की धुलाई और रगड़ाई किये जा रही थी. शावर तो बंद कर दिया था मगर रगड़ना नहीं…..उनकी ऑंखें अधखुली थी और मुंह पूरा गोल खुला था जैसे वो “ओ” बोल रही हो.

तभी उनकी ऑंखें एकदम खुली…..मैं फटाफट दरवाजे से थोडा पीछे हट गया. धीरे धीरे से आगे बाद कर देखा तो चाची कमोड पर बैठी थी. उन्होंने कांच की तरफ मुह किया हुआ था और दोनों टांगे फैला ली थी.

कहते है की मुग़ल बादशाह जहाँगीर ने जब कश्मीर देखा था तो कहा था

“गर फिरदौस रॉय -ऐ -ज़मीं अस्त , हमीं अस्त -ओ हमीं अस्त -ओ हमीं अस्त .”

इसका मतलब था की अगर ज़मीं पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है यहीं हैं यहीं हैं …..

मुझे आज चाची की फैली हुयी टाँगें देख कर इन लाइनों का मतलब और भावना समझ आई.

चाची की टांगे खुलने से उनकी चूत का भरपूर दीदार हो रहा था. बिलकुल पनियाई हुयी थी , मुनिया के दोनों होंट खुल गए थे, ऐसा लग रहा था की किस करने का बुलावा दे रहे हो. रगड़ाई और मसलाई से उनकी चूत चमक उठी थी मगर चारो तरफ फैली झांट नज़ारा ख़राब कर रही थी.

उन्होंने ट्यूब हाथ में ली और थोडा सा आगे सरक के अपनी टांगो को और फैला लिया.
दबा दबा कर निकालने लगी , उन्होंने अच्छे से क्रीम को चूत के उपरी हिस्से पर फैला लिया और चूत के साइड के हिस्से में लगाने लगी ……उनकी गर्दन निचे झुकी थी और बड़े गौर से अपनी चूत की आस पास क्रीम लगा रही थी .

मुझे लगा की मेरी साँसें ही रुक जाएगी….

चाची के बारे में कुछ भी सोचना और बात थी और उनको सामने ऐसी हालत में देखना और बात. दिल इतनी जोर से धड़क रहा था की मुझे डर था की चाची को मेरी धड़कने ना सुने दे जाए. चाची तो पुरे मन से क्रीम लगा रही थी. उन्होंने पूरा ट्यूब ख़तम कर दिया और क्रीम को फैला रही थी. मुझे तो उनको क्रीम फैलाते देख कर ठरक चढ़ गयी. उन्होंने अपनी मुनिया के चारो तरफ अच्छे से क्रीम लगा ली थी. आज चाची मुनिया को चिकनी चमेली बनाकर ही छोड़ेगी.

चाची ने क्रीम लगा ली और पीछे टिक कर बैठ गयी. तभी उन्होंने अपने ब्लाउस के हुक खोलना शुरू किये और बड़ी अदा से ब्लाउस भी उतार दिया. मेरा बचा खुचा धैर्य भी ख़तम हो गया. चाची ने आज तो मेरे प्रेशर कुकर की सीटी बजाने का सोच ही लिया था.

हाय क्या सीन था……..

उपरवाले ने इतने दिनों तक बूंद बूंद देने के बाद आज तो झमाझम बारिश ही कर दी.

चाची ने ब्लाउस क्या उतारा मेरे दिल दिमाग में भूकंप आ गया. उन्होंने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा के अंगड़ाई ली और इधर मेरे डंडे ने भी मुसल का रूप धारण कर लिया.

लंड भी साला इच्छाधारी नाग जैसा है……..कभी तो इतना सा रहता है कमज़ोर और मासूम बन के……कोई लड़की गलती से देख ले तो जैसे छोटे बच्चो और कुत्ते के पिल्लो को देख कर जैसे उछल उछल कर खुश होती है वैसे ही छोटी ली लुल्ली को देख कर भी शायद खुश हो जाये ……wow कितना क्यूट है और जहाँ गलती से लुल्ली को हाथ लगाया तो ये रूप बदलकर ऐसा नागराज बनता है की देख के लौंडिया दौड़ लगा दे.

चाची के दोनों हाथ ऊपर होने से उनके दोनों मम्मे ऐसे तन गए जैसे कुंवारी कन्या के हो. चाची भले ही अभी माँ नहीं बनी थी मगर उनके निप्पल अच्छे खासे बड़े थे और क्या तने हुए थे …..

क्या नज़ारा था……चाची दोनों टांगे फैलाये कमोड पर पूरी नंगी बैठी थी….चूत के चारो तरफ क्रीम लगी थी……बैठने से उनकी जांघें और पिछवाडा फ़ैल गए थे और ऐसा घुमाव और कटाव दिखा रहे थे की नजरे नहीं हट पा रही थी. चाची के दोनों हाथ अभी भी ऊपर ही थे , ऐसा करने से उनका पेट अन्दर खिंच गया था और एक दम सपाट दिख रहा था और उनके मम्मे तो ऐसे तीखे तीखे दिख रहे थे मानो किसी राजपूत के भाले की नोक हो.

चाची ने हाथ नीचे किये और एक हाथ अपने मम्मे के नीचे लगा कर धीरे से सहला लिया…..उनके मुंह से सिसकारी फुट गयी……स्स्स् अआह…….बस मैं भी इंसान हूँ यार.
बहुत देर से झेले जा रहा था अब कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने पजामा निचे सरकाकर अपने महाराज को खुली हवा दिखा दी. ऐसा लगता है मानो लंड की भी ऑंखें होती है बाहर निकलते लंड ने ऐसा नज़ारा देखा तो लंड तो और तन गया. मैंने धीरे से लंड को सहलाया और जैसे रेस के घोड़े को रेस शुरू होने के पहले सहलाओ तो वो हिनहिनाता है वैसे ही लंड ने चाची को एक ठुनकी मार कर सलाम किया

अन्दर चाची ऑंखें बंद किये पूरा आनंद ले रही थी. उनको शायद याद नहीं था की वो मेरे रूम के बाथरूम में पूरी तरह ने नग्न बैठी है या फिर……….

या फिर…….उनको परवाह ही नहीं थी……जो भी हो भाई अपनी तो छप्पर फाड़ के खुल गयी थी. वो भी बड़े इत्मिनान से बाथरूम में कमोड पर बैठे बैठे अपने स्तनों की सहला रही थी और ये नज़ारा देख देख कर बाहर मेरा दिल दहल रहा था. जिस तरह वो मम्मे पर हाथ फेरती वैसे ही मैं अपने हिनहिनाते घोड़े को सहलाता.
कसम से अभी तो हिलाना भी शुरू नहीं किया और ऐसा मज़ा आ रहा था की क्या बोलू………..बस ऑंखें फाड़ फाड़ कर देख रहा था.

अचानक चाची की ऑंखें खुली, जैसे मानो उनको होश आ गया हो, वो अन्दर से चिल्लाई…..”अरे लल्ला……कितनी देर लगा के रखना है इसको…….”

मैं एक दम उछल गया.

मैं एक दम से घबरा गया……..और बिना सोचे मैंने बोल दिया..”चाची 15 मिनट रखना है”

मैंने दरवाजे के बाहर ही खड़ा था, मेरे एकदम बोल देने से कहीं चाची को शक तो नहीं हो गया ? चाची अन्दर से चिल्लाई, “अरे ….तो 15 मिनट हुए की नहीं”

अब की बार मैं थोडा पीछे गया और बोला, “हाँ चाची……म म म मेरा मतलब है की थोड़ी देर और रख लो……”

चाची ने दरवाजे पर हाथ रखा और थोडा सा दरवाजा खुल गया. मैं भाग कर कम्पुटर चेयर पर बैठ गया, दरवाजा मेरी पीठ की तरफ था इस लिए चाची को सिर्फ मेरी पीठ दिखती, यह नहीं दीखता की मेरा पजामा नीचे है और मेरा बाबुराव झूम रहा है.

उन्होंने दरवाजे से सिर्फ मुंह बाहर निकालकर कहा, “अरे लल्ला…..इतनी देर तो हो गयी…..ज्यादा देर लगा के रखने से कहीं और कुछ न हो जाए….पहले ही खुजली के मारे दुखी हूँ ”

मैंने कहा, ” न न न नहीं चाची…….1 2 मिनट और रख लो…….” यह कहकर मैं गर्दन घुमाने लगा तो चाची वहीँ से चिल्लाई……”हाय राम……इधर मत देख”

और उन्होंने दरवाजा फिर से बंद करने की कोशिश की……..मैंने जैसे तैसे थोड़ी हिम्मत और जुटाई और सोचा की चलो कुछ मिनट और शो देख लेंगे.

नल चलने की आवाज़ आने लगी……मैंने सोचा शायद चाची अपने हाथ धो रही होगी.

एक हाथ से अपने बेकाबू घोड़े को पुचकारते पुचकारते मैंने धीरे से बाथरूम की तरफ फिर कदम बढाये तभी भड़ाक से बाथरूम का दरवाज़ा खुला और चाची टॉवेल लपेटे और अपने कंधो पर साड़ी डाले बाहर आ गयी.

मैं वहीँ पर उनके सामने खड़ा था……..मेरा पजामा घुटने तक गिरा था और मेरा हाथ मेरे बाबुराव पर था जिसको मैं बड़े प्यार से धीरे धीरे हिला रहा था.

चाची ने सीधा मेरे लैंड को देखा और उनकी ऑंखें फटती चली गयी…..उनका मुंह खुला का खुला ही रह गया……

मुझे तो हार्ट अटैक ही आ गया…….इतनी जोर से चमका की क्या बोलू…….

मेरी गांड की फटफटी………………………………………………..फुल स्पीड में चालू. ………..

चाची जोर से चिल्लाई….”हाय राम…..बेशरम क्या कर रहा है ? ”

मेरी तो डर के मारे आवाज़ ही बंद हो गयी…….मैंने पहले तो अपने बाबुराव को हाथ से ढकने की कोशिश की मगर
उस साले को तो चिकनी चूत की खुशबु आ गयी…..जैसे कुत्ते को हड्डी की खुशबु मिल जाये तो वो अपने मालिक की नहीं सुनता और खोदता चला जाता है वैसे ही बाबुराव ने मेरे हाथों में छुपने से मानो इनकार ही कर दिया और जोर जोर से ठुनकी मारने लगा जैसे चाची की चूत को आवाज़ लगा रहा हो…….

उधर चाची की तो नज़रे ही नहीं हट रही थी बाबुराव के ऊपर से. वो ऑंखें खड़े बाबुराव को नजरो से सहला रही थी.
मेरे हिलाने और चाची को इस हालत में देख कर बाबुराव ने एक चमकती हुयी चिकनी बूँद बाहर निकाल दी थी.
ऐसी लग रहा था मानो ख़ुशी के मारे बाबुराव के आंसु निकल आये हो . वो बार बार ठुनकी मार रहा था मानो चाची से बोल रहा हो, ” क्या बोलती तू ? ”

चाची के चिल्लाने से मेरी गांड तो फट ही गयी थी उसके ऊपर से मेरे लंड ने भी अपनी औकात दिखा दी. मैं समझ गया की यह तो आज कहना नहीं मानेगा. मेरा पजामा मेरे पैरों में आकर इकठा हो गया था तो उसे भी ऊपर चडाने का कोई सवाल नहीं था. कुछ समझ नहीं आया तो मैं घूम गया और चाची की तरफ पीठ कर ली.

चाची गुस्से से बोली, “अरे बेशरम…….क्या कर रहा है ? ”

मैं तो कुछ बोल नहीं पा रहा था. मगर मेरा हाथ अभी भी धीरे धीरे लंड को मसल रहा था.

चाची थोड़ी जोर से बोली, “हट जा मेरे रस्ते से….बेशरम”

मैं तो बिना रुके हिला रहा था. जैसे ढलान पर एक बार दौड़ना शुरू करो तो रुकना मुश्किल हो जाता है वैसे ही मुझे लंड हिलाने में वो आनंद आ रहा था की अब रुकना मुश्किल था.

मैंने बड़ी मुश्किल से बोला, ” च च च चाची मुझे म म म माफ़ कर दो, प्लीज़ आप इधर मत आओ. मुझे बहुत शर्म आ रही है”

चाची गुस्से से बोली, “हाय राम….शर्म आ रही है ?….ऐसी हरकते करने में लाज नहीं आई और अब बड़ा लजा रहा है, हट जा….जाने दे मुझे”

मैंने कहा,”च च चाची……प्लीज़……इधर मत आओ……म म म म मेरा निकलने वाला है…..कहीं अ अ आप पर न गिर जाए….”

चाची जहाँ थी वहीँ पर रुक गयी, शायद उन्हें याद आ गया था की मेरा अमृत कैसे रोकेट जैसा उड़ता है…..पिछली बार भी उनके पैरों के पास जा गिरा था.

वो ठंडी सांस लेकर बोली, “हे भगवन……इतना बेशरम है रे…….जल्दी ख़त्म कर …..”

यह सुनते ही मैंने जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया…….

ख़ुशी की वो आंसु जो लंड ने निकाले थे वो अब सैलाब बन गए थे……बहुत सारा रस निकल कर मेरे लंड के चारो और फ़ैल गया था…….जिस से फच फच की आवाज़ आ रही थी.

मैं राजधानी ट्रेन की स्पीड से हिलाए जा रहा था……आनंद के मारे मेरी ऑंखें बंद हुयी जा रही थी मगर आज बाबुराव ठान कर आया था की मैदान-ऐ-जंग में आसानी से हार नहीं मानेगा. सारे राउंड खेलेगा.

थोड़ी देर में चाची बोली,” अरे जल्दी कर ना……मुझे जाना है……..मैं ऐसे ही टोवेल लपेट के खड़ी हूँ”

कहते है की लंड खड़ा होने के बाद आदमी का दिमाग काम करना बंद कर देता है. चाची टोवेल लपेट कर खड़ी है ये सुनकर मुझसे रहा नहीं गया. अभी तक मैं चाची की तरफ पीठ करके ही खड़ा था. चाची भी सिर्फ मेरा हिलता हुआ हाथ ही देख पा रही थी मगर वो सिर्फ टोवेल में है ये सुनकर मैं पलट गया.

कश्मीर मेरे सामने था.

चाची ने जल्दी जल्दी में टोवेल लपेट तो लिया था….मगर वो टोवेल उनके हुस्न को छुपाने की जगह चीख चीख कर बता रहा था. उन्होंने टोवेल को अपने मम्मो के ऊपर ऐसा बांधा था की वो छुपने की जगह उबल उबल कर बाहर आ रहे थे. सिर्फ निप्पल छुपे थे वर्ना पूरा भूगोल दिखाई दे रहा था. टोवेल उन्ही जांघों के आधे हिस्से को ही ढक पा रहा था.

चाची की जांघ पर बना “बलमा” का टेटू साफ़ दिखा रहा था. वैसे तो उन्होंने अपने कंधे पर सदी डाली हुयी थी मगर क्या फायदा……वैसे ही सब छन छन कर दिख रहा था.

इधर मैं तो चाही का मुआयना कर रहा था मगर चाची की नज़रे मेरे लपलपाते लंड पर थी. उनका मुंह आश्चर्य से खुला हुआ था…..आज वो पहली बार अपने लल्ला के लुल्ले का दीदार कर रही थी. उन्होंने अपने होंठ…..जो सुख गए थे..उनपर जुबान फेरी और मैंने जोर से आह भरी….

चाची बोली, “हाय राम….निकल रहा है क्या.,….? ”

मैंने ना में सर हिलाया और जोर जोर से हिलाता ही रहा……चाची कुछ देर तक मुंह खोले मेरे लंड को देखती रही फिर अचानक उन्होंने नज़रे उठाई और मुझे उनके मम्मो को घूरता पा कर शर्मा कर नज़रे इधर उधर कर ली.

चाची ने कहा, ” लल्ला….प्लीज़….जल्दी कर ले…….प्लीज़”

चाची विनती कर रही थी…..या तो घबराई हुयी थी या फिर उनका संयम टूट रहा था. मैं जोर जोर से हिलाता ही जा रहा था मगर बाबुराव भी पक्का पहलवान था……नहीं माना.

चाची ने फिर इधर उधर देखा और कनखियों से लंड को टापने लगी.

वो धीरे से बोली, “हाय राम….इतनी देर में तो सब का निकल जाता है……निकलता क्यों नहीं”

मेरे हाथ हिलाते हिलाते दुखने लगे थे…..मगर बाबुराव अब भी फुफकारी मार रहा था. आखिर मैंने हाथ हटा लिया.

चाची बोली, “अरे क्या हुआ……?”

मैंने कहा, “च च च च चाची म म म मेरे हाथ दुखने लगे है”

चाची ने बोला, “अरे …..जल्दी निकाल ले मुझे जाने दे…….”

मैंने हिम्मत करके कहा, “च च च चाची……आप हिला द द द दो ना…..प्लीज़…..”

चाची की ऑंखें बाहर ही आ गयी…..

चाची की ऑंखें बाहर ही आ गयी…..

चाची का मुंह बिलकुल लाल सुर्ख हो गया और उनकी साँसें तेज़ चलने लगी…..मेरी गांड फटी की शायद मैंने अब अति कर ही दी.

चाची बोली, “नासपीटे…..बेशरम……शर्म नहीं आती ऐसी बात बोलते हुए”

मगर उनकी ऑंखें मेरे बाबुराव पर ही थी. और वो चाची के सामने फुल की कुप्पा हुआ जा रहा था. मैं हिलाते हुए जैसे ही हाथ पीछे ले जाता……बाबुराव के सुपाड़े से स्किन उतर जाती और बिलकुल बिलकुल लाल लाल सुपाडा, मदन रस में भीगा हुआ चमकने लगता. सुपाडा भी लाल लाल…चाची का मुंह भी लाल लाल……..

लग रहा था मानो आज मेरे लंड को भी गुस्सा आ गया है. चाची की नज़रे अब तो लंड पर से हट ही नहीं पा रही थी.

मैंने फिर से चाची को पुचकारा, “चाची प प प्लीज़…..अब मुझे दुखने लगा है………”

दुखता वुखता तो क्या, मुझे तो मजा आ रहा था. आज इतनी हिम्मत कर लेने के बाद मैं मौका छोड़ना नहीं चाहता था.

चाची धीरे से बोली, “हाय राम…..दुःख रहा है क्या ? लल्ला तुझे कोई बीमारी है क्या ? इतनी देर से नहीं निकला ?”

मैंने सिसकारी मरते हुए कहा, “न न नहीं चाची……मुझे हमेशा इतनी ही द द द देर लगती है…….”

चाची ने फिर धीरे से कहा, “मगर तेरे चाचा तो 1 – 2 मिनट में ही…………….निपट जाते है ”

मेरे मुंह से निकल गया, “मुझे प प प पता है…….”

साला कहते है की इंसान को बनाने या बर्बाद करने में सबसे बड़ा हाथ उसकी जुबां का होता है. मेरे मुंह से हमेशा गलत समय पर गलत बात निकलती है.

चाची ने अपनों होटों को चबा कर कहा, “हाय राम……..तू पागल तो नहीं हो गया छोरे…..म म म म मैं कैसे हिला दूँ ……?”

मैंने हिलाते हिलाते ही चाची की आँखों में देखा मगर वो तो बाबुराव के दीदार में लगी थी.

मैंने कहा, “चाची…..प्लीज़…..म म म मैं किसी से नहीं कहूँगा ……..”

चाची ने मेरी बात सुनकर झटके से सर उठाया और ऑंखें सिकोड़ कर मुझे घूरने लगी.

हिलाने में इतना मज़ा आ रहा था की ऑंखें खुल ही नहीं पा रही थी. मैं कनखियों से उनको देख रहा था , वो अब सोच में पड़ गयी थी की क्या करे……….

घी सीधी उंगली से नहीं निकलता. थोडा सा हुल देना जरुरी था. मैंने ताबूत में आखिरी कील ठोक ही दी.

मैंने कहा, “च च च चाची मै किसी को नहीं बताऊंगा की आपने मेरे बाथरूम मे बाल साफ़ किये और आपकी ज ज ज ज जांघ पर क्या लिखा है”

चाची ने मुंह पर हाथ रख लिया, “हाय राम…….नासपीटे……..तू ताक झांक कर रहा था हरामी”

चाची को गुस्सा तो आया था, मगर उनकी ऑंखें मेरे लंड पर ही लगी थी. मैंने हिलाना बंद किया और हाथ पूरा पीछे तक ले गया. मेरे लंड का सुपाडा रोशनी मे चमकने लगा. इतना लाल हो गया था मानो गुस्से से फट पड़ेगा.

चाची ने फिर से अपने होटों पर जुबान फेरी. और मैं उनकी तरफ धीरे से बड़ा. चलने से मेरा लंड दाये बाए हो रहा था. मैं सीधा चाची के सामने खड़ा हो गया.

अब हिम्मत की ज़रूरत थी और अपुन दुनिया के सबसे बड़े गांडफट. मुझे कुछ समझ नहीं आया की क्या करू…….

मैंने धीरे से चाची का हाथ पकड़ा. उन्होंने झटके से छुड़ा लिया….

मैंने फिर उनका हाथ पकड़ा……उन्होंने फिर छुड़ा लिया…………

मैंने उनका हाथ फिर से पकड़ कर सीधा लंड पर रख दिया…और जोर से सिसकारी मार दी. मेरी सिसकारी सुनते ही चाची का हाथ मेरे लंड पर कस गया.

मैंने मन ही मन सोचा…….”शील बेटा तू तो गया काम से…..हसते हसते लग गए रस्ते”.

चाची के लंड पकड़ने से ही मुझे इतना मज़ा आया की मेरी ऑंखें बंद हो गयी. मैंने एक और सिसकारी मारी, “स स सस चाची प्लीज़ हिलाओ न……..”

चाची के हाथ ने हरकत शुरू कर दी…..धीरे धीरे उनका हाथ मेरे लंड को सहलाने लगा…..जैसे कोई सपेरन जहरीले काले नाग को वश मे करने के लिए सहलाती है.
चाची के सहलाने से ही इतना मज़ा आया की मुझे लगा की बॉस अब तो निकला……मगर मैंने बड़ी मुश्किल से अपने जज्बातों का समुन्द्र अपने सीने मे ….मेरा मतलब है की अपने गोटो मे रोक लिया. मैं धीरे धीरे सिसकार रहा था……..

मैंने धीरे से आंख खोली…देखा चाची मुझे ही देख रही है…….उनका चेहरा एकदम तना हुआ था……नाक के कोने फुले हुए थे…..ऐसा लग रहा था जैसे गुस्से मे हो.
जैसे ही हमारी नज़ारे मिली…..चाची ने लंड को उमेठना शुरू कर दिया……वो ऐसे कर रही थी मानो गाय का दूध निकाल रही हो.

हम दोनों की नज़रे आपस मे मिली हुयी थी. चाची मेरे लंड को हिलाए जा रही थी और मैं एकटक उनकी आँखों मे देखकर सिसकारी मारे जा रहा था.

मैंने धीरे से चाची की कमर पर हाथ रख दिया. चाची ने बिना मुझ पर से नज़ारे हटाये मेरा हाथ हटा दिया. अब तक उन्होंने दुसरे हाथ से अपने टोवेल संभाल रखा था. टॉवेल थोडा सा निचे सरक गया…..उनके मम्मे थोड़े और बाहर निकल आये……

मैंने फिर से हाथ उनकी कमर पर रखा…….अब की बार उन्होंने नहीं हटाया…..मेरा हाथ धीरे से उनके नितम्बो की तरफ गया…….मैंने टॉवेल के ऊपर से ही उनके नितम्बो को सहलाना शुरू कर दिया……वो अब भी मेरी आँखों मे ही देखे जा रही थी. उनका मुंह हल्का सा खुल गया था……

मैंने अपने हाथ थोडा निचे ले जाकर पीछे ने उनके टॉवेल के अन्दर घुसाने की कोशिश की. उन्होंने तुरंत मेरा हाथ फिर झटक दिया. उनका टॉवेल उनके सीने से और निचे ढलक आया….अब तो ऐसा लग रहा था मानो चाची के निप्पल ही उनकी इज्ज़त का पर्दा, वो टॉवेल संभाले हुए है.

मैंने फिर से चाची के जांघो पर हाथ रख कर ऊपर ले गया. अबकी बार उन्होंने हाथ नहीं झटका…..शायद वो समझ गयी थी की अगर उन्होंने अपने टॉवेल छोड़ा तो पर्दा उठ जायेगा. मैं हाथ धीरे धीरे सरकते हुय्र उनके तरबूज जैसे नितम्बो पर ले गया……अब तक हमारी नज़रे मिली हुयी थी हम दोनों एक दुसरे की आँखों मे देख रहे थे.
चाची अपने हाथ से मेरा लंड हिलाए जा रही थी. जैसे ही मैंने उनके नितम्बो पर हाथ रख कर दबाया और सहलाया…….

उन्होंने ने ऑंखें बंद कर ली और जिस तरह रानी मुखर्जी अपने होंट दबाये शरमाकर मुस्कुराती है वैसे ही वो भी होंट दबा कर मुस्कुराने लगी.

ओओओओ.हह……क्या सीन था…….उनके चेहरे के expressions ने मुझे पागल कर दिया. मैं उनके नितम्बो को जोर जोर से दबाने लगा…..हाथ मे आना तो दूर मैं उनकी विशाल गदराई गांड का हिसाब ही नहीं लगा पा रहा था.

मेरा हाथ उनकी गांड के सल के ऊपर आया…..और मैं एक उंगली को धीरे धीरे उनके सल को सहलाता हुआ नीचे ले जाने लगा…….उनको एहसास हो गया की मेरे इरादे क्या है…..उन्होंने एक दम अपनी गांड कड़क कर ली……मेरी उंगली उनके विशाल नितम्बो के बीच फंस गयी. मैंने जोर से उंगली नीचे के तरफ दबाई, चाची ने अपना दूसरा हाथ अपने सीने पर संभाले टॉवेल से हटाया और मेरा हाथ को कलाई से पकड़ लिया. मगर दुसरे हाथ से मेरा लंड हिलाना जारी रखा.

हाथ हटते ही निप्पलो ने बगावत कर दी. अब तक तो टॉवेल चाची के निप्पलो और हाथ के दम पर टिका था वो सेंसेक्स (sensex) की तरह एक झटके मे नीचे आ गया.

मुझ से एक सांस की दुरी पर चाची के मम्मे बड़ी शान से पर्वतों के जैसे सर उठा कर खड़े थे. मैं अपने हाथ चाची के नितम्बो से हटा कर उनके मम्मो की तरफ ले गया.
जैसे ही मैंने कांपते हाथों को चाची के मम्मो पर रखा ……चाची के मुंह ऐसी सिसकारी निकली की मेरा लंड उनके हाथ मे ही ठुनकी मारने लगा.

उन्होंने ने अपने मुंह थोडा सा मोड़ा कर ऊपर किया हुआ था….. उनकी ऑंखें बंद थी मगर मैं मेरी आँखों से उनके हुस्न का जाम भर भर के पी रहा था…..

चाची के निप्पल ऐसे लग रहे थे मानो डेरी मिल्क का पीस हो…..मखमली ….मगर कड़क. मैं अपनी हथेली उनके निप्पल पर रगडने लगा….और उन के मुंह से सिसकारी पर सिसकारी फुट रही थी……..मगर इतना सब होने के बाद भी उन्होंने मेरा लंड नहीं छोड़ा था…….हिलाए चली जा रही थी…….

ने चाची के दोनों मम्मे अपनों हाथों में थाम लिए………..इतने नरम थे की मेरे पकड़ते ही मेरे हाथों में समा गए…….

मैंने चाची के मम्मो को धीरे धीरे मसलना शुरू किया और चाची के मुंह से आवाज निकली …… ” आ आ अह हह हह हहा आ आ म म म म ”
और चाची ने मेरे लंड को हिलाना बंद कर दिया…….अब वो सिर्फ मम्मे दबाने के आनंद ले रही थी……..मैं भी बरसो से अपने अरमान दिल में दबाये बैठा था, बड़े मज़े से चाची की चुचे दबा रहा था…….चाची की गरम साँसें मेरे चेहरे से टकरा रही थी. ऐसा लग रहा था की चाची सांस नहीं गरमा गरम भाप छोड़ रही है.

उनकी ऑंखें अभी भी बंद थी और उनका मुंह ऐसा खुला हुआ था मानो पानी से बाहर निकली मछली हो……..

मैंने चाची के मम्मे दबाते दबाते ही उनके निप्पल जो बादाम जैसे बड़े और कड़क हो गए थे, उनको अपनी ऊँगली और अंगूठे के बीच ले कर धीरे से मसल दिया, चाची ने अपनी ऑंखें खोली और मुझसे नज़र मिला कर ऐसी सिसकारी मारी की मेरे पुरे शरीर में सनसनी मच गयी. उनकी नज़ारे तो मुझसे मिली हुयी थी मगर उनकी ऑंखें अब आधी ही खुली थी, वो पूरी तरह से मस्ता गयी थी. मैंने फिर चाची के दोनों निप्पलो को अपनी ऊँगली और अंगूठे के बिच लेकर मसला. उनका पूरा शरीर कांप गया.

तभी उन्होंने मेरे लंड के छेद को धीरे से अपने नाख़ून से रगड़ दिया. अब झटका खाने की बारी मेरी थी. मेरा मुंह खुल गया. चाची मेरी आँखों में ही देख रही थी.
उनके चेहरे पर वो ही टेडी मुस्कान नाचने लगी थी……..वो समझ गयी की लोंडे को क्या पसंद है.

मैंने फिर से उनके निपल को रगडा उन्होंने फिर से नाख़ून से मेरे सुपाड़े के छेद को रगड़कर अपना नाख़ून लंड के छेद से धीरे धीरे रगड़ती हुयी मेरे गोटे तक ले आई. मेरा पूरा बदन मस्ती की लहर में कांपने लगा. अब वो मेरे गोटो को अपने नाखुनो से धीरे धीरे रगड़ने लगी…..

कोई देखता तो शायद उसका बिना हिलाए ही निकल जाता……मैं और चाची, रूम के ठीक बिच में खड़े………चाची के खुबसूरत गदराये बदन पर एक कपडा नहीं…….उनके तरबूज जैसे उभरे हुए नितम्ब…….उनकी चिकनी चिकनी टांगे……..मस्त मोटी मोटी जांघे……नितम्ब और कमर के बीच का कटाव……..उनका जोबन जो मेरे हाथों में मसला जा रहा था…….और उनका हाथ तो मेरे गोटो को ऐसे रगड़ रहा था जैसे कद्दूकस पर नारियल घिस रही हो. और हम दोनों की एक दुसरे से मिली हुयी नज़र…….मुझे लंड हिलवाने से ज्यादा मज़ा चाची के आँखों में देखकर आ रहा था………चाची की आँखों में कोई शर्म नहीं थी…….उनकी आँखों में तो बस एक भूख थी ….एक प्यास थी…….और………..वासना थी.

मैं अपना एक हाथ चाची के मम्मे से नीचे लाने लगा…..उनके चिकने बदन पर मेरा हाथ ऐसा फिसल रहा था जैसे कांच पर पानी की बुँदे. मैंने उनकी गोल नाभि को धीरे से छेड़ दिया……एक उंगली से में उनके कमर और पेट पर कलम की तरह फिराने लगा…..मानो मैं एक पेंटर हूँ और उनका पेट मेरा केनवास ………जो पेंटिंग बन रही थी वो दुनिया की सबसे मादक तस्वीर थी.

अब मेरी उंगलिया…धीरे धीरे और नीचे जाने लगी..

चाची को एहसास हो गया था की मेरी उंगलियों की मंजिल कहाँ है………

उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ लिया और धीरे से गर्दन हिला के मना करने लगी…….मैंने भी अपने हाथ को रोक लिया और चाची की आँखों में देखते हुए धीरे से गर्दन हिला दी. अब तो कोई मेरे सर पर बन्दुक रख देता तो भी मैं रुकने वाला नहीं था.

चाची के मखमली पेट से फिसलता हुआ मेरा हाथ वहां जा रहा था, जहाँ के सिर्फ सपने ही मैंने देखे थे. हाँ टंकी में से और चाची को धोते हुए देख लिया था…मगर अब वक़्त था चाची की चिकनी चमेली की चिकनाहट देखने का…….

चाची थोडा सा घबरा गयी और पीछे हटने लगी, मैंने अपने दूसरा हाथ उनके मम्मे पर से हटाया और चाची की कमर में डाल कर चाची को अपनी तरफ खिंच लिया. अपनी चाची फस गयी थी. उनके दोनों मम्मे मेरे सीने में गड़ रहे थे और मेरा हाथ एक कीड़े की तरह कुल्बुलालाता हुआ उनकी मुनिया की तरफ बढ रहा था.

मैं चाची से थोडा सा लम्बा हूँ……चाची को जब मैंने अपने से चिपका लिया तो उनका उनका सर मेरे होटों के सामने आ गया…….मैंने उनका माथा चूम लिया……
मगर मेरी उंगलियों का तो अपने खुद का दिमाग था. चाची ने भले ही मेरे हाथ को पकड़ रखा था मगर मेरा हाथ उनके पेट के निचले हिस्से पर पहुँच चूका था.

मेरी उंगलिया उनकी गरमा गरम चूत तक पहुँचने ही वाली थी……..मैंने अपनी उंगलियों को और नीचे किया और उनको जन्नत मिल गयी.

कभी आपने अपनी ऊँगली से चाट कर हलवा खाया हो तो ही आप समझ सकते है की मेरी उंगलियों की क्या महसूस हुआ. चाची की चूत का सल जहाँ से शुरू होता है वो ही ऐसा लबालब चिकना था की मेरी उंगली ही फिसल गयी…….मेरी उंगली लगते ही चाची ने वो सिसकारी भरी की मेरे लंड ने उनके पेट पर जोर से ठुनकी मार दी.
लंड ऐसे झटके मार रहा था जैसे स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस का गेअर हो.

चाची ने मेरे लंड को फिर से पकड़ लिया. मेरी उंगलिया चाची की चूत का पूरा मुआयना कर रही थी, चाची की झांट पूरी तरह से साफ़ हो गयी थी, एक भी बाल नहीं बचा था. रस में डूबी चूत केटरीना के गालो से ज्यादा चिकनी हो गयी थी. आज मुझे पता लगा की चिकनी चमेली का मतलब क्या होता है.

इधर मैं अपनी उंगली उनके चूत के सल पर फिरा रहा था…….उनकी चूत का सल इतना मोटा और कसा हुआ था की मेरी उंगली उसके ऊपर ही घूम रही थी……मगर चाची की चूत ऐसे चासनी छोड़ रही थी मानो जलेबी हो. मैंने ऊँगली को थोडा सा दबाया और चाची की चूत के पट खोल दिए. जैसे से ही मेरी उंगलियों ने चाची के दाने को मतलब clit को छुआ चाची ने वो मादक सिसकारी मारी की अपने तो लंड का एक एक बाल खड़ा हो गया. मैंने फिर से दाने को रगडा और चाची ने जोश में आकर मेरे लंड को जोर जोर से दबाकर हिलाना शुरू कर दिया. वो इतनी उत्तेजित थी की लगतार सिस्कारिया मार रही थी. चाची थोड़ी से पीछे हुयी और उन्होंने मेरा हाथ छोड़ दिया. वो अपने दुसरे हाथ से मेरे नितम्बो पर नाख़ून चलाने लगी……मेरे नितम्बो पर नाख़ून रगड़ने से मुझे ऐसा आनंद आया की मैंने अपनी उंगली थोड़ी सी और दबा दी. मेरी उंगली सीधी फिसलती हुयी चाची की मुनिया के मुंह पर चली गयी. चाची ने अपनी चूत को मेरे हाथ पर दबा दिया और खड़े खड़े ही अपनी कमर हिलाने लगी.
साली…..मेरी उंगली को चोद रही थी. मैंने थोडा सा उंगली को और दबाया और मेरी उंगली चाची के स्वर्ग में दाखिल हो गयी. चाची की चूत में लबालब पानी था. इतनी चिकनी होने से मेरी उंगली फिसल रही थी और मेरी हथेली उनकी clit को रगड़ रही थी. चाची पुरे जोर शोर से मेरा लंड हिला रही थी. जैसे साप पकड़ने वाले उसकी गर्दन नहीं छोड़ते वैसे चाची ने मेरे लंड को इतना कास के पकड़ा था की छूट न जाए.

उनके हाथ मेरे नितम्बो को सहला रहे थे और थोड़ी थोड़ी देर में वो नाख़ून से रगड़ भी रही थी. उन्होंने अपने चेहरा उठाया और मेरी आँखों में देखा, मैंने अपनी उंगली को उनकी चूत में और अन्दर तक पेला और अचानक ही वो जोर जोर से सिसकारी मारने लगी……इनकी चूत अन्दर से इतनी गरम और चिकनी थी की मुझे लगने लगा की मेरी उंगली जल जाएगी, मैं तेज़ी से अपनी उंगली अन्दर बाहर करने लगा और हथेली उनकी clit पर रगड़ने लगा. उनकी कमर भी तेज़ तेज़ हिलने लगी. चाची की ऑंखें आधी बंद थी मगर उनकी नज़र मुझ पर ही थी. अचानक उनका मुंह खुला…..”आ आ आ आ ह हह ….उ उ उ उह …….” और चाची के पैर कांपने लगे….
उनकी चूत मेरे उंगली को ऐसे दबाने लगी जैसे वो मेरी उंगली को चूस रही हो. चाची का पानी सैलाब की तरह निकलने लगा……..और मेरे हाथ से होता हुआ उनकी जांघ भिगोने लगा. चाची एक दम से ढीली पड़ गयी.

मगर उन्होंने मेरे लंड को नहीं छोड़ा था. उन्होंने नशीली आँखों से मुझे देखा और बोली….”बरसो बाद आज तर हुयी हूँ ………लल्ला…..” उनकी आवाज़ अभी तक कांप रही थी. उन्होंने फिर से मेरे लंड के छेद पर उंगली घुमाई………..मेरे खुद के हाल बुरे थे…….इतना सब एकसाथ होने से मैं भी आखिरी मुकाम पर ही खड़ा था.

चाची ने मेरे लंड को उमेठना शुरू किया और मेरी ऑंखें बंद हो गयी……….

चाची बोली, “इस हरामी की सारी अकड़ निकलती हु………..”

उन्होंने मेरे गोटो को अपने दुसरे हाथ से पकड़ा और धीरे से दबा दिया, मैंने उछल गया. मेरे लंड की लार ऐसे टपक रही थी जैसे किसी भूखे को बरसो बाद रोटी मिली हो.
चाची ने जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया……..मैं समझ गया की अब ज्यादा खेल नहीं बचा है…..तभी उन्होंने अपनी उंगली से मेरे गोटो के पीछे नाख़ून से रगडा.

गांड के छेद और गोटों के बिच की वो जगह सबसे कोमल और कामुक होती है. अब सिसकारी मारने की बारी मेरी थी. चाची मेरी आँखों में देखते ही मस्त मुस्कान के साथ मेरी मूठ मार रही थी. उन्होंने फिर से वहीँ पर नाख़ून से रगडा और मेरा लावा मेरे गोटों में उबलने लगा.

चाची बोली, “हाय राम…..कुत्ते की तरह क्या देख रहा है……निकाल दे अब……..”

यह कहकर जैसे ही उन्होंने फिर से मेरे लंड के छेद को छेड़ा मेरे गोटों में सनसनी होने लगी मेरी ऑंखें बंद होने लगी ……एक पल में तारे दिख गए……

“फच” की आवाज़ के साथ मेरे लंड ने गोला दाग दिया. मेरा वीर्य उड़ता हुआ सीधा चाची के पेट पर गया तभी एक धार और निकली, चाची के मम्मो के निचले हिस्से पर जा गिरी…….एक धार उनकी जांघो पर गिरी. लंड तो मानो रिवाल्वर बन गया था…….एक के बाद एक 6 गोले छोड़े. चाची हैरत भरी नज़रो से कभी मेरे लंड को तो कभी मेरे चेहरे को देख रही थी. मेरे पुरे शरीर में आनंद की लहरें दौड़ रही थी……मैंने दोनों हाथ से चाची के मम्मे थाम लिया और कस के पकड़ लिए.

चाची ने लंड को दबाकर उसमे से आखिरी बूंद भी निकाल दी. वाह…..ऐसा मज़ा आज तक नहीं आया था.

तभी घडी ने 12 का घंटा बजा दिया. चाची ने चौंक कर घडी देखि और अपने कपडे समेटने लगी. मैंने वहीँ पर पड़ा कागज़ उठाया और अपने लंड को साफ़ किया और टेबल पर रख दिया. चाची मुस्कुराती हुयी अपने नितम्ब हिलाती हुयी चली गयी. मैंने लम्बी सांस ली. मेरा अच्छा समय शुरू हो गया था

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