खानदानी हिजब औरतें part 2

अपनी दोनो फुफियों को चोदने के तक़रीबन दो घंटे बाद हम फिर बैठ गए और बातें शुरू हो गईं. फूफी शहनाज़ हमें अपनी चूत देने के बाद अब परेशां नज़र नही आ रही थीं .
“ज़ाहिद यार चाची फ़हमीदा भी यहाँ होतीं तो मज़ा आ जाता.” मैंने कहा क्योंके मुझे याद था के फूफी खादीजा को चोदने के बदले में उस ने चाची फ़हमीदा को मुझ से चुदवाने का वादा किया था. फिर फूफी खादीजा भी यही चाहती थीं .
“हाँ ये ठीक है ज़ाहिद फोन करो उससे और बुला लो.” फूफी खादीजा ने ज़ाहिद से कहा.
“फ़हमीदा यहीं आ जायेगी तो बहुत बेहतर रहे गा घर पर कोई प्राब्लम ही ना बन जाए.” फूफी शहनाज़ ने भी उनकी हाँ में हाँ मिलाई.

में अपनी दोनो फुफियों की ग़मे समझ रहा था. वो चाहती थीं के चाची फ़हमीदा को नतियागली बुलवा कर चुदवाते हुए देखें और उनकी पोज़िशन खराब हो. वो शायद ये समझती थीं के में और ज़ाहिद चाची फ़हमीदा को चोदेंगे और वो तमाशा देखें गी. लेकिन ज़ाहिर है के चाची फ़हमीदा के साथ उन्हे भी चूत देनी थी और ऐसी सूरत में हिसब बराबर हो जाता और किसी की पोज़िशन भी खराब ना होती.

कुछ देर की बहस के बाद हम सब ने यही फ़ैसला किया के ज़ाहिद अपनी माँ को फोन कर के बुला ले जो पिंडी से कोच पर हसनबदल तक आ जाएं और ज़ाहिद कार पर जा कर उन्हे हसनबदल से नतियागली ले आइ. ज़ाहिद रात ही को कार ले कर निकल गया और हम तीनो सोने के लिये लेट गए.

सुबा कोई 11 बजे ज़ाहिद और चाची फ़हमीदा होटेल पुहँच गए. चाची फ़हमीदा की उमर भी 40 से ऊपर ही थी. वो बड़ी तेज़ थर्रार औरत समझी जाती थीं और दोनो फुफियों से कई बार उनका झगड़ा हो चुका था. इसी लिए वो दोनो खाहिसमंद थीं के चाची फ़हमीदा को किसी तरह नीचा दिखा सकैं. वो लंबे क़द की बड़े भारी बदन वाली औरत थीं . उनको मोटा तो हरगिज़ नही कहा जा सकता था क्योंके उनके जिसम का सारा चर्बी उनके चूतड़ों और मम्मों में थी. शादी शुदा औरतों की तरह उनका जिसम गोश्त से भरा हुआ था और थोड़ा सा पेट भी निकला हुआ था. लेकिन लंबे क़द की वजह से मम्मे और गांड़ और भी बड़े लगते थे. उनका रंग सांवला और नाक नक़्शा बस वजबी सा ही था. मेरी दोनो फुफियों के मुक़ाबले में वो बिल्कुल भी खूबसूरत नही थीं मगर जिस्मानी तौर पर बड़ी ज़बरदस्त थीं .

चाची फ़हमीदा के जिसम का सब से शानदार हिस्सा उनके चूतड़ थे जो 48 इंच मोटे तो ज़रूर हूँ गे. उनके चूतड़ बिल्कुल गोल और बहुत ज़ियादा बाहर निकले हुए थे. आज से दस साल पहले भी उनकी गांड़ बहुत मोटी हुआ करती थी मगर वक़्त के साथ साथ उनके चूतर और भी बड़े और भारी हो गए थे. पता नही कब से मेरा दिल कर रहा था के में चाची फ़हमीदा के चूतरों में लंड डाल कर घस्से मारूं और उनके छेद में अपनी मनी छोडूं. आज वो दिन आ ही गया था. वो खानदान की सब से पहली औरत थीं जिस की मोटी गांड़ देख कर में इन्सेस्ट की तरफ मा’आइल हुआ था. चाची फ़हमीदा के मम्मे भी उनकी गांड़ की तरह ही इंतिहा मोटे थे. वो ब्रा के बावजूद अपने मम्मे संभाल नही सकती थीं और और हमेशा क़मीज़ के ऊपर से भी ऐसा लगता जैसे अभी उनके मम्मे ब्रा से बाहर आ जायेंगे. ब्रा कभी भी उनके मम्मों को टाइट नही रख सका और जहाँ तक मेरी यादाश्त काम करती थी वो जब भी चलती फिरतीं तो उनके मम्मे हिलते रहते थे.

चाची फ़हमीदा के आने के बाद अब खेल दोबारा शुरू होना था. ज़ाहिद ने उनको बता दिया था के उस ने दोनो फुफियों को चोद लिया है और ये के उन्हे भी मालूम हो चुका है के चाची फ़हमीदा ज़ाहिद से चूत मरवा रही हैं. इस लिये वो होटेल में आने के बाद बिल्कुल नॉर्मल रहीं और फुफियों से बड़े आराम से मिलीं. लेकिन में जानता था के जब ये तीन जनानियाँ कहीं जमा हो जाएं तो कोई ना कोई मसला ज़रूर होता है. पहले तो सूरत-एहाल ठीक रही लेकिन फिर चाची फ़हमीदा बातों बातों में कहा:
“बाजी खादीजा आज तो इन लड़कों की मोज हो गई है दो दो फूपियाँ मिल गईं मज़े लेने के लिये.”
में उनकी बेबाकी पर हैरान नही हुआ क्योंके वो थीं ही बहुत मुँह-फॅट और तेज़ मिज़ाज की.
“फ़हमीदा हम तो देखना चाहते हैं के ज़ाहिद तुम्हे कैसे चोदता है.” फूफी खादीजा ने फॉरन जवाब दिया.
“फ़हमीदा जब बेटा अपनी माँ को चोदता है तो कैसा लगता है? तुन्हे तो पता होना चाहिये क्योंके ज़ाहिद तुम्हे चोद रहा है.” फूफी शहनाज़ ने भी उन पर वार किया. उनके मुँह से ऐसी बातें सुन कर मुझे ज़रूर हैरत हुई. वो फूफी खादीजा और फूफी नीलोफर के मुक़ाबले में ज़रा ठंडे मिज़ाज की थीं .
“बाजी शहनाज़ आप का बेटा अभी छोटा है जब बड़ा हो गा तो आप की चूत ज़रूर मारे गा. तब आप को पता चले गा के बेटा माँ को कैसे चोदता है.” चाची फ़हमीदा ने मुस्कुरा कर जवाब दिया.
“फ़हमीदा मेरा बेटा मेरी चूत मारे या ना मारे लेकिन तुम्हारा बेटा तो शायद रोज़ ही तुम्हारी फुद्दी का क़ीमा बनाता है.” फूफी शहनाज़ कहाँ छोड़ने वाली थीं .

“बाजी इस में किया है ये मेरा बेटा है इस का लौड़ा भी मैंने ही सब से पहले अपनी फुद्दी में ले कर इस की ज़रूरत पूरी की है. आप भी तो दो दो भतीजों से चुदवा रही हैं. ज़ाहिद ने कल ही तो आप की चूत ली है और आप जानती ही हैं के वो कितने अच्छे तरीक़े से चोदता है.” चाची फ़हमीदा ने तुर्की बा तुर्की जवाब दिया.

दोनो फुफियों ने इस दफ़ा उन्हे कोई जवाब नही दिया.

इस से पहले के बात बढ़ जाती और रंग में भंग पड़ जाती मैंने जा कर चाची फ़हमीदा का एक मम्मा हाथ में ले लिया और उससे मसलने लगा. उनके बदन को मैंने इस से पहले कभी हाथ नही लगाया था. उनका मम्मा बहुत भारी लेकिन नरम था और मैंने सोचा के उन्हे चोदने में भी बड़ा मज़ा आए गा. चाची फ़हमीदा फॉरन ही गरम होने लगीं. मैंने कभी किसी औरत को इतनी जल्दी गरम होते नही देखा था.

मुझे अपनी माँ के मम्मे को पकड़ता देख कर ज़ाहिद भी उठा और फूफी खादीजा और फूप शहनाज़ के दरमियाँ बैठ गया जो बेड पे साथ साथ बैठी हुई थीं . उसने फूफी शहनाज़ का मुँह चूमना शुरू कर दिया.

चाची फ़हमीदा ने किसी शरम का इज़हार किये बगैर मेरा लंड पकड़ लिया और उस पर हाथ फेरने लगीं जैसे उस की मोटाई और लंबाई चेक कर रही हूँ. मैंने जल्दी जल्दी अपने कपड़े उतार दिये और उन्हे ले कर ज़मीन पर बिछी हुई मॅट्रेस पे आ गया. ज़ाहिद भी नंगा हो गया और बेड पर पड़ी हुई मॅट्रेस ज़मीन वाली मॅट्रेस के साथ मिला कर डाल दी और दोनो फुफियों को ले कर मेरे और चाची फ़हमीदा के पास ही आ गया. तीन ज़बरदस्त औरतों को एक साथ इस तरह चोदने का मेरा पहला मोक़ा था और ये सोच कर मेरे लंड में खून तेज़ी से दाखिल होने लगा और वो लोहा बन गया.

में चाची फ़हमीदा को नंगा करने लगा और ज़ाहिद फूफी खादीजा और फूफी शहनाज़ के कपड़े उतारने लगा. जल्द ही तीनो के जिसम पर सिर्फ़ ब्रा ही रह गए.

चाची फ़हमीदा का ब्रा मैंने खोल कर उतार दिया और वो बिल्कुल नंगी हो गईं. उनके मोटे मम्मों को मैंने हाथों में ले लिया और उनका लांस महसूस करने लगा. फूफी खादीजा और फूप शहनाज़ के मम्मों के साथ अगर चाची फ़हमीदा के मम्मों का मुआयना किया जाए तो चाची फ़हमीदा के निपल्स और उनके इर्द गिर्द का एरिया ज़रा ज़ियादा डार्क था और इस की वजह शायद उनका सांवला रंग था. निपल्स के क़रीब वाले ब्राउन हिस्से में छोटे छोटे दाने से थे जिन को उंगली लगाओ तो वो उभरे हुए महसूस होते थे. उनके मम्मों के निप्पल मेरी दोनो फुफियों के मुक़ाबले में थोड़े छोटे थे लेकिन मम्मों का साइज़ तक़रीबन उतना ही था. चाची फ़हमीदा के मम्मे बहुत भारी भी थे और मेरे हाथों में पूरे नही आ रहे थे. जब में उनके मम्मों से खेल रहा था तो चाची फ़हमीदा के होठों पर मुस्कुराहट थी.

में चाची फ़हमीदा के चूतड़ों का आशिक़ था इस लिये मैंने उन्हे उल्टा लिटा दिया और उनके चौड़े और चूतड़ अपनी तमाम हशर’समानी के साथ मेरे सामने आ गए. मैंने अपनी ज़िंदगी में किसी औरत के इतने बड़े चूतर नही देखे थे. अगरचे फूफी खादीजा और फूफी शहनाज़ की गांड़ भी दरमियानी उमर की औरतों की तरह बड़ी मोटी और बहुत भारी थी मगर चाची फ़हमीदा तो इस मामले में कमाल ही थीं . मैंने उनके उभरे हुए चूतरों पर अच्छी तरह हाथ फेरने के बाद उनको दोनो हाथों से खोला और उनके छेद के ऊपर ज़बान फेरने लगा. उनके चूतड़ों पर इतना गोश्त था के उनका गांड का सुराख आसानी से नही चाटा जा सकता था इस लिये मैंने उन्हे चारों हाथों पैरों पर कर दिया जिस की वजह से उनकी गांड़ का सुराख मेरे सामने आ गया और मैंने भूकों की तरह उससे चूमना और चाटना शुरू कर दिया.

चाची फ़हमीदा की गांड़ का गांड का सुराख भी अच्छे ख़ासे बड़े साइज़ का था. मैंने उनके छेद को चाट चाट कर गीला कर दिया. जब में अपनी ज़बान उनकी गांड़ के सुराख के बीच में डाल कर उससे सुराख के अंदर करने की कोशिश करता तो वो अपने छेद के मसल्स को कभी टाइट कर लातीं और कभी ढीला छोड़ देतीं. ये हरकत फूपियाँ भी किया करती थीं . चाची फ़हमीदा के छेद का इस तरह खुलना और बंद होना मुझे ज़ियादा अच्छा लग रहा था क्योंके उनका गांड का सुराख साइज़ में काफ़ी बड़ा था और उस की हरकत छोटे मॉरॉन वाली औरतों के मुक़ाबले में वाज़ेह नज़र आ जाती थी.

काफ़ी देर तक में उनकी गांड़ चाट ता रहा और फिर उन्हे सीधा कर के मैंने उनके मम्मे चूसने शुरू कर दिये. चाची फ़हमीदा बहुत गरम औरत थीं और अपनी गांड़ चटवा कर वो अब मेरा लंड लेने के लिये पागल हो रही थीं . जब में उनके निपल्स चूस रहा था तो उन्होने हाथ बढ़ा कर मेरा लंड मुट्ठी में ले लिया और उस पर हाथ फेरने लगीं. मैंने आगे हो कर अपना लंड उनके मुँह में दे दिया और वो उससे चूसने लगीं.

चाची फ़हमीदा लंड चूसना बहुत अच्छी तरह जानती थीं . उन्होने मेरे लंड के टोपे को बड़ी महारत से चाटा और चूसा. मै अपना लंड अपनी फुफियों और मामी शाहिदा से भी चुस्वाता रहा था मगर चाची फ़हमीदा इस काम में बहुत एक्सपर्ट थीं . मुझे बड़ा लुत्फ़ आ रहा था.

उधर ज़ाहिद फूफी शहनाज़ को अपना लंड चुस्वा रहा था और फूफी खादीजा को खड़ा कर के उनके मम्मे मुँह में लिये हुए थे. एक हाथ की बड़ी उंगली उस ने फूफी खादीजा की चूत के अंदर की हुई थी जो खूब गरम हो चुकी थीं . फूफी खादीजा से शायद रहा नही गया और उन्होने फूफी शहनाज़ के हाथ से ज़ाहिद का लंड ले लिया और खुद उससे चूसने लगीं.

अजीब मंज़र था के किसी ब्लू फिल्म की तरह दो औरतें ज़ाहिद का लंड बारी बारी चूस रही थीं मगर जज़्बात को ज़ियादा उभारने वाली बात ये थी के ये दोनो औरतें हमारी फूपियाँ और आपस में सग़ी बहनें थीं . तीसरी औरत उनकी भाभी थी. ये सब इन्सेस्ट के मज़े थे. इस से ज़ियादा सेक्स का मज़ा लिया ही नही जा सकता था.

फिर ज़ाहिद ने मॅट्रेस पर लेट कर फूफी खादीजा को अपने थूक से गीले लंड के ऊपर सवार कर लिया. उन्होने उस का लंड हाथ में पकड़ा और आहिस्ता से उस का मोटा और फूला हुआ टोपा अपनी चूत के अंदर डाल लिया. जैसे ही ज़ाहिद का लंड उनकी चूत के अंदर गया दोनो के मुँह से आवाजें निकलीं. फिर फूफी खादीजा उस के लंड पर अपने सफ़ेद चूतरों को ऊपर नीचे करने लगीं. ज़ाहिद ने फूफी खादीजा को चोदने के साथ साथ फूफी शहनाज़ को अपने मुँह के क़रीब कर लिया और उनके होंठ ज़ोर ज़ोर से चूमने लगा. फूफी शहनाज़ के भारी मम्मे हिलते रहे. वो ज़ाहिद के सीने पर हाथ फेरती रहीं. कल के मुक़ाबले में इस वक़्त वो एक बिल्कुल मुख्तलीफ़ औरत नज़र आ रही थीं . उन्होने फिर अपना सर ज़ाहिद के सीने पर रख दिया और नीचे से उस का लंड फूफी खादीजा की फुद्दी में आता जाता देखती रहीं.

“बाजी शहनाज़ आप क्यों ऐसे बे-कार बैठी हैं. उठाईं और बाजी खादीजा के मम्मे चूसें.” चाची फ़हमीदा ने कहा जो मेरा लंड चूसते हुए अपनी दोनो नंदों को अपने बेटे से चूत मरवाते हुए देख रही थीं .

पहले तो फूफी शहनाज़ ने कोई हरकत नही की लेकिन फिर यकायक वो उठीं और ज़ाहिद के लंड पर बैठी हुई फूफी खादीजा के मम्मों को हाथों में पकड़ पकड़ कर दबाने लगीं. फूफी खादीजा पहले तो हैरान हुईं लेकिन फिर उन्होने फूफी शहनाज़ को खुद से क़रीब कर लिया और उनके होंठ चूमने लगीं. ये पहली दफ़ा थी के दोनो बहनो ने एक साथ चुदवाते हुए एक दूसरे के जिस्मों को अपनी मर्ज़ी से हाथ लगाया किया था. फूफी खादीजा ज़ाहिद के लंड को उछल उछल कर अपनी फुद्दी में ले रही थीं और फूफी शेनाज़ को चूमते हुए बार बार उनका मुँह ऊपर नीचे हो रहा था. ज़ाहिद बहुत हरामी था. उस ने फूफी खादीजा का हाथ पकर कर फूफी शहनाज़ की चूत के ऊपर रख दिया और फूफी खादीजा उनकी चूत पर हाथ फेरने लगीं. पीछे से ज़ाहिद फूफी शहनाज़ के चूतड़ों को मसल रहा था. उनका बुरा हाल था.

कुछ मिनिट बाद फूफी खादीजा ज़ाहिद के लंड से उतर गईं और फूफी शहनाज़ ने उसके लंड को अपनी गीली चूत में ले लिया. ज़ाहिद ने फूफी खादीजा से कहा के वो उस के टट्टे पकड़ें. फूफी खादीजा फूफी शहनाज़ के पीछे आ गईं और ज़ाहिद के मोटे लंड पर जो फूफी शहनाज़ की चूत के अंदर घुसा हुआ था उंगलियाँ फेरने लगीं. उन्होने ज़ाहिद के टट्टे हाथ में ले लिये और उन्हे आहिस्ता आहिस्ता मसलने लगीं. ज़ाहिद की ताक़तवर रानों में जैसे बिजलियाँ भर गईं और वो ऊपर हो हो कर फूफी शहनाज़ की चूत में घस्से मारने लगा.

मुझे यक़ीन हो गया के फूफी खादीजा की ये सारी हरकत गैर-इरादि नही थीं बल्के उन्होने ये सब कुछ ब्लू फिल्म्स में होता ज़रूर देखा था और मोक़ा मिलने पर खुद भी ऐसा ही कर रही थीं . एक ऐसी घरैलू औरत जो बीस साल से शादी शुदा थी किस लिये और क्यों ब्लू फिल्म्स देखती थी एक ऐसा सवाल था जिस का जवाब इस सोसाइटी की गलत जिन्सी रसम-ओ-रिवाज में छुपा हुआ है जिन के मुताबिक़ औरत की जिस्मानी ज़रूरत पूरी करने का कोई सिस्टम है ही नही. इंसानो से किसी भी किसम की तवक़ो की जा सकती है. कोई भी वो नही होता जो नज़र आता है.

चाची फ़हमीदा ने जब मेरा लंड चूस चूस कर अच्छी तरह अपने थूकों से भर दिया तो मैंने उन्हे मॅट्रेस पर लंबा लंबा लिटा दिया और उनकी चूत के अंदर लंड डाल कर घस्से मारने लगा. दो मिनिट में ही मुझे अंदाज़ा हो गया के फूफी खादीजा और फूफी शहनाज़ के मुक़ाबले में चाची फ़हमीदा चूत मरवाने में कहीं ज़ियादा तजर्बा-कार थीं और ज़ियादा जज़्बे के साथ मेरे घस्सों का जवाब दे रही थीं . उनके भारी चूतड़ और मोटी मोटी रानें बहुत तवाना और मज़बूत थे जिन की वजह से वो मेरे नीचे होने के बावजूद बड़े ज़ोरदार घस्से मार रही थीं . मेरी कंधों को उन्हे ने कस कर पकड़ रखा था. जब में उनकी फुद्दी में अपना लंड घुसाता तो फुद्दी के अंदर पानी होने की वजह से अजीब सी आवाज़ निकलती. चाची फ़हमीदा अपने चूतड़ हिला कर मेरा लंड अपनी फुद्दी के अंदर ले रही थीं . जब मेरा लंड उनकी फुद्दी में जाता तो ऐसा लगता जैसे उनकी फुद्दी उससे मज़ीद अंदर की तरफ खैंच रही हो. इस से मेरे लंड पर दबाव पड़ता और मुझे बहुत अच्छा लगता.

मैंने चाची फ़हमीदा के साँवले सलोने गालों और लाल होठों के बोसे लेने शुरू कर दिये और इसी तरह उन्हे चोदता रहा. उन्हे भी मज़ा आ रहा था क्योंके वो तवातूर के साथ ऊऊऊओ अयाया किये जा रही थीं . उनका चेहरा जज़्बात से लाल हो रहा था. मै फिर लेट गया और चाची फ़हमीदा को अपने लंड पर ले आया. उनके चूतर चूँके कुछ ज़ियादा ही मोटे थे इस लिये इतने वज़न के साथ मुझे अपने लंड को उनकी चूत के अंदर ले जाते हुए मुश्किल हो रही थी. चाची फ़हमीदा मेरी मुश्किल को भाँप गईं और उन्होने अपना वज़न टाँगों पर डाल कर अपना बदन ऊपर उठाया और मुझे मोक़ा दिया के में उनकी चूत में खुल कर घस्से मार सकूँ. मैंने उन्हे मज़े ले ले कर चोदना शुरू कर दिया और वो भी चूत देते हुए एंजाय करने लगीं. उनके भारी मम्मे मेरे सामने ज़ोर ज़ोर से हिल रहे थे जिन्हे मैंने हाथों में लिया हुआ था.

इस तरह चुदवाते हुए वो भी जल्द ही थक गईं और मैंने उन्हे चारों हाथों पैरों पर किया और उनकी मोटे चूतरों के बीच में छुपी हुई चूत के अंदर अपना लंड डाल कर घस्से मारने लगा. कुछ देर बाद चाची फ़हमीदा पहली बार खलास हो गईं. इस मामले में भी वो फूफी खादीजा और फूफी शहनाज़ से मुख्तलीफ़ थीं क्योंके वो दोनो इतनी देर चुदवाने के दोरान दो तीन दफ़ा खलास हो जाती थीं . चाची फ़हमीदा जब खलास हुईं तो उनकी चूत में से बहुत पानी खारिज हुआ और मेरे लंड पर लग गया. मैंने उनके अंदर से अपना लंड निकाल लिया और ज़ाहिद और फुफियों की तरफ देखा.

ज़ाहिद ने अब फूफी शहनाज़ को नीचे लिटा कर उनकी चूत में लंड डाला हुआ था और ज़ोरदार घस्से मार रहा था. फूफी शहनाज़ की हालत से लगता था के वो अब तक कई दफ़ा डिसचार्ज हो चुकी थीं . ज़ाहिद ने उनकी चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया. वो करवट ले कर साइड पर हो गईं. ज़ाहिद ने फॉरन ही साथ लेतीं हुई फूफी खादीजा की टाँगें अपने कंधों पर रख कर उनकी चूत में बड़ी बे-रहमी से अपना लंड घुसेड़ दिया. फूफी खादीजा की टांगें ज़ाहिद के भारी जिसम के वज़न से मुड़ कर उनके मम्मों से जा लगीं और वो बड़ी तक़लीफ़ से आँखें बंद कर के उससे अपनी चूत देने लगीं. ज़ाहिद का मोटा लंड नीचे से फूफी खादीजा की चूत के काले बालों के अंदर जाता नज़र आ रहा था और जब वो चूत में दाखिल होता तो चूत जैसे फैल जाती और लंड को अपने अंदर उतार लेतीं. फूफी खादीजा बड़ी लहीन शाहीन औरत थीं मगर ज़ाहिद उन्हे अपने नीचे बे-बस कर के चोद रहा था.

फूफी खादीजा के सर का पिछला हिस्सा मॅट्रेस के अंदर धंसा हुआ था और वो अपनी गर्दन थोड़ी सी उठा कर अपने मम्मों पर ज़ाहिद का हाथ देखते हुए अपनी चूत में उस का लंड ले रही थीं . फिर अचानक उन्होने मुँह से ज़ोर की उूउउफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ हहााआ आआआ जैसी आवाजें निकालनी शुरू कर दीं और बुरी तरह कपकापाते हुए खलास हो गईं. उनके आँखें बंद हो गईं और उन्होने अपने हाथों से ज़ाहिद के घस्से रोकने की कोशिश की. लेकिन ज़ाहिद ने उनके मम्मों को सख्ती से पकडे रखा और इसी तरह उनकी चूत में अपने जिसम के पूरे वज़न के साथ घस्से मारता रहा. आख़िर जब उस ने देखा के फूफी खादीजा से अब बर्दाश्त नही हो रहा तो वो उनके ऊपर से उठ गया.

यहाँ से वो अपनी माँ यानी चाची फ़हमीदा के पास आया और उनकी टाँगों के बीच में बैठ कर उनकी चूत में लंड डाल दिया. अब वो अपनी माँ का मुँह चूमते हुए उस की चूत में ज़ोरदार घस्से लगा रहा था और अपने दोनो हाथ उस के मोटे चूतरों के नीचे रख कर चूतरों को पकड़ रखा था. चाची फ़हमीदा हिल हिल कर अपने बेटे के लंड को अपने अंदर ले रही थीं और उसकी ज़बान चूस रही थीं . मै और दोनो फूपियाँ ये मंज़र देख रहे थे.

ज़ाहिद अपनी माँ को चोदता रहा और में एक दफ़ा फिर फूफी शहनाज़ की तरफ मुतवजा हुआ. मैंने उन्हे अपने लंड पर सवार कराया और उनकी फुद्दी लेने लगा. फूफी खादीजा ज़ाहिद से चुदवा कर काफ़ी थक गई थीं और अब मॅट्रेस पर बे-सुध पड़ी थीं . मैंने फूफी शहनाज़ को चोदते चोदते हाथ बरहा कर फूफी खादीजा के मम्मों को मसलना शुरू कर दिया. पहले तो उन्होने कोई रेस्पॉन्स नही दिया लेकिन फिर मेरे क़रीब आ गईं और मेरा मुँह चूमने लगीं. मेरे लंड के ऊपर बैठे बैठे फूफी शहनाज़ फिर डिसचार्ज हो गईं और मेरे और फूफी खादीजा के ऊपर गिर गईं.

मैंने उन्हे अपने लंड से उतारा और फूफी खादीजा को उल्टा लिटा कर पीछे से उनकी चूत में लंड डालने की कोशिश की. लेकिन इस पोज़िशन में चूत अंदर की तरफ हो जाती है और मुझे उसके अंदर लंड घुसाना मुश्किल हो रहा था. फूफी खादीजा ने अपने मोटे चूतर थोड़े से ऊपर उठाये और इस तरह उनकी चूत मेरे सामने आ गई. मैंने फॉरन लंड उनकी चूत के अंदर डाल दिया और घस्से मारने लगा. मै पीछे से उनकी कमर के गोश्त को चूमता रहा और घस्से भी लगाता रहा. मैंने फूफी शहनाज़ से कहा के नीचे हाथ डाल कर मेरे टट्टों को सहलाती रहें. उन्होने ऐसा ही किया. उनका हाथ जैसे ही मेरे टट्टों पर लगा मेरे लिये मज़ीद घस्से मरने ना-मुमकिन हो गए और में फूफी खादीजा के चूतरों को पकड़ते हुए उनकी मोटी चूत में डिसचार्ज हो गया.

ज़ाहिद और चाची फ़हमीदा अभी तक एक दूसरे से चिमटे हुए थे और ज़ाहिद अपनी माँ की फुद्दी चोद रहा था. मैंने दिल ही दिल में ज़ाहिद को दाद दी क्योंके में तो औरतों को चोदने में काफ़ी तजर्बा रखता था और इतनी जल्दी डिसचार्ज नही होता था मगर वो भी इस मामले में कम साबित नही हुआ था और आज उस ने तीन औरतों को बड़े आराम से चोदा था. लगता था के अपनी माँ के अलावा भी ज़ाहिद ने दूसरी औरतों को चोदा था. बहरहाल थोड़ी ही देर बाद ज़ाहिद के घस्सों में तेज़ी आ गई और वो चाची फ़हमीदा की फुद्दी के अंदर छूट गया.उस ने अपना लंड उनकी फुद्दी से निकाला तो मैंने देखा के उस की मनी चाची फ़हमीदा की फुद्दी से बह कर बाहर निकल रही थी. फिर हम चारों मॅट्रेसस पर ही लेट गए ताके अपनी साँसें दरुस्त कर सकैं.
उस दिन अबोटाबाद से निकलने के बाद सब लोग मेरे घर आ गए. यहाँ पर हम ने एक प्रोग्राम और करना था. चाची फ़हमीदा और फुफियों में छोटी छोटी झड़पें अब भी हो रही थीं . फूफी शहनाज़ ने घर जाना चाहा मगर फूफी खादीजा ने उन्हे रोक लिया. अगले दिन डैड ऑफीस चले गए तो घर खाली हो गया. फूफी खादीजा ने हमारी नौकरानी को जल्दी छुट्टी दे दी और यों हम कुछ और मज़े करने को तय्यार हो गए. हुमरे पास शाम सात बजे तक का वक़्त था क्योंके फिर डैड घर आ जाते थे. में,दोनो फुफियों, चाची फ़हमीदा और ज़ाहिद को अपने कमरे में ले आया.

“अब किया प्रोग्राम है?” ज़ाहिद ने पूछा.
“एक दफ़ा और मज़े करें गे.” मैंने कहा.
“अभी तुम्हारा दिल नही भरा लड़को?” फूफी शहनाज़ ने मुस्कुरा कर कहा. उनकी शरम हया और शराफ़त अब कहीं नज़र नही आ रही थी. एक ही दिन में दो लंड ले कर वो कुछ से कुछ बन गई थीं .
“अब हम चाहते हैं के आप तीनो हम से अपनी गांड़ मरवायें.” मैंने कहा.
“गांड़ कैसे दी जाती है?” फूफी शहनाज़ ने हैरान होते हुए जवाब दिया और फूफी खादीजा की तरफ देखा.
“मैंने भी ये काम कभी नही किया.” फूफी खादीजा ने बड़ी दीदा-दलैरी से मेरे सामने सफ़ेद झूठ बोला. वो बे-शुमार दफ़ा मुझ से अपनी गांड़ मरवा चुकी थीं मगर अब ऐसे मासूम बन रही थीं जैसे उनके छेद ने कभी लंड की शकल ही नही देखी. फूफी शहनाज़ ने तो शायद वाकई कभी अपनी गांड़ नही दी थी.

में शुरू से ही फूफी खादीजा की गांड़ मार रहा था और वो खुशी खुशी मुझ से गांड़ मरवया करती थीं लेकिन शायद चाची फ़हमीदा के सामने इस बात का इक़रार नही करना चाहती थीं के वो गांड़ भी देती हैं.
पहले तो फिर भी उन्हे गांड़ मरवाने पर थोड़ा बहुत ऐतराज़ होता था लेकिन बाद में उन्होने कभी मुझे अपना गांड का सुराख मारने से नही रोका. उन्हे गांड़ मरवाने में अब अच्छी ख़ासी महारत हासिल हो गई थी. लेकिन वो इस बात का इक़रार नही करना चाहती थीं . अजीब मंताक़ थी. चाची फ़हमीदा के सामने चूत देना ठीक था मगर गांड़ देना नही.

“छोड़ें ना बाजी खादीजा किया आप ने कभी गांड़ नही मरवाई? आज कल ब्लू फिल्मों के ज़माने में कौन सी औरत है जो अपनी गांड़ बचा सकती है. पहले तो शायद बहुत कम मर्द ऐसा करते थे मगर अब तो ब्लू फ़िल्मै देख देख कर उन्हे पता चल गया है के औरत की गांड़ भी मारी जा सकती है. किया अमजद ने आप की गांड़ नही मारी?” चाची फ़हमीदा ने मानी-खैीज़ अंदाज़ में मेरी तरफ देख कर कहा.
“में कह रही हूँ ना के मैंने कभी अमजद को गांड़ नही दी और ना ही मुझे इस का तरीक़ा आता है.” फूफी खादीजा ने रूखा सा जवाब दिया.
“ये कैसे हो सकता है बाजी खादीजा के आप ने आज तक किसी से गांड़ ना मरवाई हो. मै ये मान ही नही सकती के आप अमजद से चुदवाती रही हैं लेकिन उस ने अभी तक आप को गाँडू नही बनाया. आप के तो चूतड़ ही ऐसे हैं के कोई मर्द आप को गाँडू बनए बगैर नही माने गा.” चाची फ़हमीदा बोलीं.

“तुम कैसी बातें कर रही हो फ़हमीदा? किस क़िसम के बे-हूदा अल्फ़ाज़ बोल रही हो. किया तुम ने सब को अपनी तरह का समझ रखा है. तुम गाँडू हो तो किया सारी औरतें गाँडू हैं. मै बिल्कुल गाँडू नही हूँ. मुझे मेरे खाविंद और अमजद के अलावा किसी ने नही चोदा और इन दोनो को मैंने अपनी गांड़ नही दी. ये ठीक है के कल मुझे ज़ाहिद ने चोदा था मगर उस ने भी मेरी गांड़ नही मारी. रंग रंग के लौड़े अपनी गांड़ में लेने का शोक़् तुम्हे है मुझे नही.” फूफी खादीजा ने गुस्से से कहा.
में सोच रहा था के ठीक ठाक घरैलू औरतें ये किस क़िसम की बातें कर रही थीं . अपने घरों में उन्हे देख कर कोई सोच सकता था के ये ऐसी गुफ्तगू भी कर सकती हैं.

फूफी खादीजा की बात सुन कर चाची फ़हमीदा ने नफी में सर हिलाया.
“ना-जाने क्यों आप को लफ्ज़ गाँडू पर एतेराज़ है. गाँडू औरत वो होती है जो अपनी गांड़ मरवाती है. ये कोई गाली तो नही है जो आप गुस्से में आ रही हैं.” चाची फ़हमीदा ने हंस कर कहा.
“बहरहाल हम ये हरकतें नही करते.” फूफी खादीजा अपनी बात पर क़ायम रहीं. उन्हे चाची फ़हमीदा को हंसता देख कर और गुस्सा आ रहा था.
“बाजी खादीजा आप जिस तरह ज़ाहिद और अमजद के लंड पर बैठ कर अपनी चूत दे रही थीं और जिस तरह अपने चूतड़ों को हरकत दे रही थीं उस से साफ़ पता चल रहा था के आप को लंड अपनी गांड़ में भी लेना अच्छी तरह आता है. मै तो आप को चुदवाते हुए देख कर ही समझ गई थी के आप भी अपनी गांड़ देती रहती हैं. इस लिये तो में कह रही हूँ के आप भी गाँडू हैं. और अगर ऐसा नही है तो यक़ीन करें आप बेहतरीन गाँडू बन सकती हैं. बाजी शहनाज़ के साथ भी यही है लेकिन मुझे नही लगता के उन्होने कभी गांड़ मरवाई है. रह गई में तो हाँ में तो अपने मरहूम शौहर से भी गांड़ मरवाती थी और अब मेरा बेटा भी मेरी गांड़ लेता है. मुझे इस में कोई शरम नही है.” चाची फ़हमीदा उनकी बात नही मान रही थीं .

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