क्लास मेट

Collage के वो दिन , बचपन की वो यादें , स्कूल केवो खेल , हर इंसान अपने बच्चपन को जिन्दगी भर नही भूल सकता , इन्सान जैसे जैसे बड़ा होता हैं वैसे वैसे उस की चाहते, चालाकी, जरूरते बढती रहती हैं , उन सब को पूरा करने के लिए इंसान किस हद तक जा सकता हैं ये कोई नहीं कहा सकता , कूछ ऐसा ही मेरी जन्दगी में भी हुआ था , मैं अपने घर में सब छोटी थीं घर में मम्मी पापा के अलावा एक बड़ा भाई और एक बड़ी बहन थी | सब से छोटी होने के कारण सब की आखो का तारा थी मैं | मैं जो भी मागती, मिल जाया करता था , जैसे जैसे मैं बड़ी होती गई, मेरी मांगे बढती गई | इस से पहले की मेरी बात आगे बड़े, मैं आपको  अपने परिवार के बारे में  बता दो , मैं एक गरीब परिवार से हूँ , पापा एककरखाने में  हेल्पर की नौकरी करते थे ,माँ  सिलाई करके घर को आर्थिक मदद देती थी| भैया और बड़ी दीदी एक सरकारी स्कूल में पड़ते थे पर शायद घर में सबसे छोटी होने के कारण मुझे पास के एक english medium  स्कूलमें डाल दिया गया | 5 या 6 class तक मेरी जरूरते सिर्फ कापी , किताब , कपडों ही थे ,  मगर जैसे जैसे में बड़ी होती गयी , मेराध्यान फैशन में चीजों पर भी जाना शोरू हो गया | मेरी साथ की सभी सहेली बढिया बढिया कपडे , अच्छे अच्छे जूते ,हेयर बंद लगा कर आती थी | मैं घर में जब भी कपड़े या जूते की लिए कहती तो पैसे का रोना सामने आ जाता | मैं मन मार कर पूराने कपडों से ही काम चलाती, मेरी  उम्र 16 पार कर चुकीं थी , मेरीछूटे होते कपडे लड़कों की नजार से बच नही पाते थे | कुल मिला कर कहू तो मेरे घर की आर्थिक स्थिति मेरी इक्छा को मार रही थी , मगर मेरा उम्र , मेरा मन मेरे काबू नही था

धीरे धीरे मैं 10 क्लास में आ चुकी थी | उम्र के हिसाब सेमेरी कद भी अच्छा निकल गया था 5”4 | मेरी क्लास में लड़के और लड़किया दोनों पड़ते थे आपस में खूब मजाक चलता था | मगर ये मजाक हद तक ही सिमित था | क्लास में कूछलड़के अलग टाईप के भी थे , जो लड्कियों को गलत निगाह से देखतें थे | इसी टाईप का एक लड़का था “सहीद खान” ,कद 5”7, सावला , गठीला बदन |  वो अक्सर मुझे अकेले पा कर मेरे कपडों परटिप्पणी करता था “नेहा, तुम्हारी स्किर्ट छोटी होरही है , कमीज टाइड हो गई है , या तुम छोटे कपडे क्यों पहनती हो , वगैरह वगैरह”मैं उस का मतलब कूछ कूछ समझती थी  , मगरशर्म के मारे कुछ जबाब नही देती थी , मैं अब आप को सहीद खान के बारे मे बता दू | वो एक पुलिस वाले का लड़का था , बाप के पास पैसे की झलक उस की आदतों मैं झलकती थीं , कभी बस से  आना , कभी कार से आना , अच्छेकपडे , बढियां से बढियां मोबाइल , पैसे के कारण उस की बहुत सारे दोस्त थे , सूना था की उस का बाप एक नंबर का बईमान आदमी था ,इसी कारण उस के पास खूब दौलत थी , खैर मुझे इस से क्या , मगर उस का बार बार छेडना मुझे परेशान करता था |

एक दिन क्लास चल रही थी , मैं  टीचर से पानी पीने की इज्जात ले कर नल पर पानीपीने गई , जब मैं पानी पी रही थी तो देखा की सहीद भी पीछे पीछे पानी पीने आ रहा हैं , जब वो मेरे पास आ गया तों बोला

“नेहा तुम्हारीस्किर्ट बहुत छोटी हो गई है , दूसरी क्यों नही सिलसिलवा लेती , देखो घटनो से कितना ऊपर हैं ये” , ये सच था की मेरीस्कर्ट की पुरी सिलाई खोलने के वावजूद , बहुत छोटी थी , वो मेरे घर के हालत जनता था , मैंने जवाव दिया “अभी पैसे नहीं है बाद मैं….”कह कर मैं वापीस क्लास मैं आ गयी |अगले दिन छुट्टी के बाद साहीद ने मुझे एक पैकिट पकड़ायाऔर बोला चुप चाप रख लो , मैंने पूछा “क्या हैं”तों वो बिना कूछ वहा से चला गया | घर जा कर देखा ,स्कूल की यूनिफार्म थी | मैं मन ही मन नई यूनिफार्म पा कर बहुत खुश थी ,घर वालो के पुछने पर मैंने झूठ बोल दिया की एक सहेली की यूनिफार्म मार्केट से  छोटी आगई थी  तों  उस ने मुझे दे दिया | अगले दिन मैं जब वोयूनिफार्म पहन कर स्कूल गई तों मन ही मन बहुत खुश थी  | मुका मिलते ही चुपचाप साहिद से बोली  “ धन्यवाद, मगर येउपकार किस लिए….. ?”  |सहिद बोला की “बसतुम मुझे अच्छी लगती हो इसलिए“ मैं शर्मा गई | मैंने साहिद से कहा “ये गलत बात हैं हम गरीब हैं मगर इस तरह से कूछ देना ……” साहिद बोला की अगर तुम्हें ये गलत लगा है तों तुमभी मुझे कुछ दे दो , मैं भला उस को क्या दे सकती थी , पुछने पर बोला की अपनी पुरानी सकर्ट ओर कमीज तूह्फे में दे सकती हूँ , मेरी समझ मैं कुछ नहीं आया , खैर मैने अगले दिन उसे अपनी पुरानी सकर्ट ओर कमीज ला कर दे दी , उस के बाद साहिद ने मुझे चुपचाप कूछ न कूछ गिफ्ट देने शुरू कर दिए , मैं समझ चुकी थी की शाहिद मेरे चक्कर मैं आ चुका हैं  मेरे तों जैसे दिन ही फिर गये थे|मैं कभी कभी स्कूल में एक्स्ट्रा क्लास का बहाना बना कर साहिद के साथ किसी रेस्टोरेन्ट, या कभी पिचर देखने चली जाती थी | मुझे उस की ऐ सी वाली कार में बैठना अच्छा लगता था | वो अक्सर मेरे लिए जब गिफ्ट खरीदता था तों बिल मेरे से साईन करा कर अपने क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करता था | अब मैने शाहिद को मैंने अपने  जरूरतों के लिए इस्तेमाल करना शोरु कर दिया था ,मैं जब चाहती उस से कुछ न कूछ मांग लेती , जैसे बालों के क्लिप , नैलपोलिस और कभी कभी पैसे भी | अगर बात यहाँ तक ही रहती तों कोई बात नहीं थी ,

एक दिन साहिद छुट्टी के बाद मुझ से बोला “नेहा तुम मेरी एक बात मानूगी ?” कल मेरा जन्मदिन हैं औरमैं कल की शाम तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूँ” | अब मैं दुविधा में आगयी , मना करो तों ये बुरा मान जायेगा और अगर हां करू तों घर वालो को क्या कहोगी, मैने सहिद को अपनी मजबूरी समझाने की कोशिश करी “साहिद , मेरेमाता पिता जी मुझे शाम के बाद घर से बाहर  रहनेकी परमिशन नहीं देगे “ तों वो बोला “कोईबहाना बना लेना,  कह देना की किसी सहेली कीजन्मदिन हैं , तुम इस की चिन्ता मत करो, सहेली को में ले आऊगा” कह करवो चल गया  , मेरी समझ मै कुछ नही आया कीवो क्या बोल गया है , बस इतना समझ में आया की वो कल वो मेरे साथ अपना जन्मदीन बना चाहता हैं ,

अगले दिन स्कूल में एक लड़की मेरे पास आ कर् बोली “ हाय, नेहा , ई ऍम शिखा , कैसी हो , क्या बात हैं आज कल नजरही नहीं आती” थी तों स्कूल की ही लड़की , मगर मेरी उस से बात नहीं होतीथी , मैने भी उस का “हाय” का जबाब “हाय” से दिया “वो बोली “आज शाम की मेरा जन्मदिन हैं , मै तुम्हे लेने आउगी घर पर ,तैयार रहना”  कह कर उस नेमुस्कार कर मुझे आँख मारी और वहा से चली गयी , उस दिन साहिद स्कूल ही नहीं आया था इसलिए मेरी मुलाकात उस से नहीं हो पाई, न दोबारा शिखा से | इतना तों  समझ गयी थी की शाहिद ने ही शिखा को भेजा हैं |घर जाने की बाद मै बड़ी दुविधा में थी की क्या करू , इसलिए घरवालो को कूछ नहीं बताया | श्याम करीब 6 बजे शिखा ने मेरे घर की घंटी बजाई , दरवाजामेरी दीदी ने खोला , “हाय ,नेहा यही रहती हैं न….” उस ने दीदी से पूछा दीदी ने कहा “हां “ तों उस नेअपना परिचय दीदी को देती होई अंदर आ गई , फिर दीदी ने मुझे आवाज दी , जैसे ही मै कमरे में आई तों शिखा बोली “अरे नेहा,  तु अभी तक तैयार नहीं होई , चलना नहीं है क्या?”  फिर उस ने खुद ही दीदी और मम्मी कोबताया की मेरा जन्मदीन हैं और मै इसे लेने आई हूँ , दीदी मम्मी की परर्मिशन मिलते ही वो बोली “तैयार तों मेरे घर पर ही हो जाना , अभी देर मत कर” मम्मी ने मुझ डांटे होये कहा “अगर जाना था तों पहले बता देती , अबतक आराम से बठी होई थी“ खैर मै जल्दी से लाइट भोरे रग की लोंग स्किर्ट और डिजाइनर सफ़ेद शर्ट पहन कर तैयार हो कर आयी | मम्मी ने शिखा से पुछा “बेटा , कितनी देर तक चलेगी तुम्हारी पार्टी “|शिखा बोली “आंटी आप परेशान मत  होइए , मै खुद इसे छोडकर  जाओगी “ , हम दोनो घर से निकलने के बाद सड़क परऑटोरिक्शा पकड़ने आ गए , मैंने शिखा से पुछा “ शिखा,हम कहा चल रहे हैं , देखो में कभी भी रात को देर तक घर से बहार नहीं रही”, हम पास ही किसी होटाल में पार्टी बना लेते है “ मैने घबरा कर उस से कहा , “ क्यों परेशान हो रही हैं , पार्टी ज्यादा देर नहीं चलेगी ,और जहाँ पार्टी हैं वो भी दूर नहीं हैं” , उस ने एक ऑटो को रोकते होएजबाब दिया “ रस्तेभर न वो मुझ से कूछ बोली और ना ही मेरी हिम्मत होई की उस से साहिद के बारे में पूछो “

कूछ देर बाद ऑटो एक गेस्टहाउस पर रोक गया  , उतरने पर शिखा ने बताया की पार्टी यहीँ है |  शिखा ने रिसेप्शन पर रूम नंबर 301 की चाभी ली औरहम दोनों रूम में पहुचे , रूम अच्छा खासा बड़ा था , और पहले से ही पार्टी की लिए सजाया हुआ था , रूम में एक डबलबेड , सोफासेट , सेण्टर टेबल , अलमीरा, फ्रीज़ , टीवी सब  रखा होआ था | शिखा ने रूम का ऐसी ऑन किया और अपना मोबाइल फोन निकल कर बात करने लगी

“कहा हो तुम शाहिद? , हम कब से तुम्हारा इन्तजार कर रहे हैं” फिर पता नहीं वह से क्याबात होई फिर शिखा बोली

“ओके , मै आर्डर करदेती हूँ मगर तुम जल्दी आओ , मुझे देर हो रही हैं”  फोन कटते ही मैंने पुछा

“आप कहा जा रही हैं, पार्टी तों आप के………” उस ने मेरी बात काटतेहोए कहा

“अरे पागल ,जन्मदिन तों शाहिद का है , तों पार्टी भी उसी की होगी ना , और रही बात मेरी , वो दीवाना है तुम्हारा , मै बीच में हड्डी क्यों बनूँ” मुस्करा कर बोलीफिर उस ने मुझे सोफासेट पर बैठने के लिए कहा और खुद पास पड़े दूसरे सोफे पर बैठ कर इंटरकॉम पर आर्डर देने लगी , फिर उस ने अपने पर्स से दो सी डी निकली और एक को सी डी प्लयेर में लगा कर प्ले कर दिया , उस में न्यू फिल्म के गाने थे ,

“अगर तुम लेट होगयी तों ………?  एक काम करते हैं  मै तुम्हारी मम्मी को फोन कर देती हूँ और अगरजल्दी फ्री हो गए तों कोई बात नहीं , कम से कम उन्हे चिंता तों नहीं होगी ?”

मै उस सेपहले कूछ बोलो , उस ने मेरी मम्मी को फोन लगा दिया  “आंटी, मै शिखाबोल रही हूँ आंटी , पार्टी में थोडा लेट हो सकते हों 11-11.30 बज सकते हैं , आप परेशान मत होना , मै नेहा को घर छूडदूँगी ,

लीजिए,नेहा से बात करिये, “ कह कर उस ने मुझे फोन पकड़ा दिया

“मम्मी , आप परशानमत होना में शिखा के साथ आ जाओगी”  कह कर मैने बात खतम कर दी | फिर उस ने मुझ सेमजाक करते होए कहा

“अब अराम से पार्टीबनाओ , कोई जल्दी नहीं हैं , अभी 7 भी नहीं बजे हैं , कोई चिंता नहीं हैं …….” बातों बातों मे उस ने मुझे बताया की साहिद उस कादोस्त हैं और उस ने ही मुझे तुम्हे यहाँ लाने के लिए कहा था , फिर वो शाहिद की बारे में बताने लगी की वो शाहिद , वैसे तों एक अच्छा दोस्त हैं और वो पिछले एक साल से उसे जानती हैं , उस के बहुत सारे दोस्तों में से एक थी वो | अभी हम दोनों बात ही कर रहे थे की , दरवाजा खोला और शाहिद अंदर आ गया | “हैप्पी बर्थडे  शाहिद” शिखा ने उसे बर्थडे विष किया और फिरमैंने भी  , फिर शाहिद ने फिर्ज से एककोल्ड ड्रिंक की बोल्तल निकली और हम तीनों कोल्ड ड्रिंक पीने लगे |  कोल्ड ड्रिंक खतम होते ही शिखा बोली

“भई मै तों जा रहीहूँ , तुम अपना बर्थडे मनाओ“ मैंने उसे कहा “अरे, तुम कहा जा रही हो तुम भी रोको”

वो मुस्करा कर बोली

“अरे नहीं भई , जबफ्री हो जाना तों मुझे फोन कर देना बस “

फिर उस नेशाहिद को बेस्ट ऑफ लक कहा और कूछ इशारा किया और रूम से बाहर चली गयी | अब मै और शाहिद रूममें अकेले थे , मै मन ही मन घबरा रही थी की पता नही अब क्या होगा , इस ने मुझे यहाँ क्यों बुलाया हैं | पता नहीं क्या करेगा….|

मेरे साथ वाले सोफे पर शाहिदखड़ा बैठा होये था “नेहा …मैनी मैनी थैंक्स, तुमने मेरे दिल की बात रख ली , मै जिंदगीभर अपना ये जन्मदिन नहीं भूलोगा”  वो मेरे पास आ कर बैठ गया , प्यार से मेरी तरफदेखने लग गया , “ अब तुम ने पहली बार तों मुझ सेकूछ माँगा था तों भला में क्यूं नहीं आती” मैंने भी अपनी घबराहट पर काबुरखते होये प्यार से जबाब दिया , फिर वो बोला “चलोअब केक काटते हैं“ उस ने फ्रीज में से केक निकला और टेबल पर रख दिया ,फिर अपने मोबाइल का कैमरा ऑन कर के टेबल के ऊपर रख दिया “मैं अपने सभी सुन्दर लम्हे इस कैमरे मैं बन्द करना चाहता हो, अगर तुम बुरा ना मनो तों ” फिर उस ने मेरा हाथ पकड़ कर नीचे जमीन पर घुटनों की बल बिठा दिया और खुद साथबैठ गया फिर उस ने एक हाथ से चाकू  पकड़ा औरजैसे ही केक काटा “हैप्पी बर्थडे तों शाहिद“कहा कर मैने क्लापिंग करी  फिर उस ने केककाट कर मेरे मूह में डाला , मैने भी केक का एक पीस उठा कार उस के मूह में डाला , उस के बाद तों उस ने थोड़ा केक उठाया और मेरे चेहरे पर लगाने लगा , मैंने भी थोडा सा केक उठा कर उस के चेहरे पर लगा दिया , बस इसी तरीके से मजाक करते करते कब 7.30 हो गये पता हीनहीं चला , फिर अचनाक बैल बजी , वह  परवेटर था जो  खाना ले कर आया था , शाहिद नेखाना लिया और वेटर को टिप दे कर दरवाजा बन्द कार दिया | खाने में बढियां  बढियां चीजे थी , हम दोनों ने प्यार से एक दूसरेको खाना खिलाया, पुरी पार्टी में मुझे कही भी कुछ गलत नहीं लगा , मैं फालतू में ही घबरा रही थी, और ऊपर से शिखा के दो मतलबी बाते…… खैर हम दोनों खाना खा कर 8.15 तक फ्री हो गयेथे , टाइम ज्यादा नहीं होआ था , मैने शाहिद से कहा “शाहीदअब मुझे घर चलना चाहियें, बहुत देर हो रही हैं “

“इतनी जल्दी, अरे अभी तों टाइम ही क्या होआ हैं, फिर तुम ने मुझे मेराबर्थडे गिफ्ट भी नहीं दिया”

मुझे एकदम से अपनी गलती का एहसास होआ ,की गिफ्टतों लाना ही चाहिए था

“शाहिद सॉरी , असल में मुझे टाइम ही नहीं मिला “ मैंने अपनीसफाई में कहा

“मुझे मालूम था…..चलो कोई बात नहीं ,” कहा कर उस ने अलमीरासे एक पाकेट निकला “ ये रहा मेरा गिफ्ट , जो तुमपहले ही दे चुकी हो” उस ने मुझे पाकेट पकड दिया , मैं सोच ही रही थी कीइस में क्या होगा “मुझे मेरा गिफ्ट नहीं दोगी क्या?” उस ने अपना हाथ आगे बड़ा कर कहा “ मैंने वो पाकेट उस को पकड़ाया” हैप्पी बर्थडे शाहिद” उस ने मुझे थंक्स कहा “ देखोगी नहीं क्या दिया हैं तुमने ? लो खुद ही खोल कर दिखाओ”, जब मैने पाकेट खोला तों हैरान रहा गई….. उस में मेरे पुराने कपडे थे” “पिल्ज, मुझे मेरे बर्थडे में यही पहन कर दिखाओ ना”मेरी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या चहाता हैं , ये ड्रेस तों कितने बार पहन कर स्कूल गयी थी | “ ये क्या बात होई साहिद,  देखो ये ड्रेस अब कितनी छोटी हो चुकी होगी येनहीं प्लीज” मैंने मना करते होये कहा |  “मैंने आज तकतुम्हारी हर बात मानी है , फिर यही उनिफ़ोर्म स्कूल में कितने दिन पहनी हैं , आज मै उसी नेहा को देखना चाहता हूँ यही हैं मेरा बर्थडे गिफ्ट , क्या तुम मेरे लिये इतना सा नहीं करोगी  ?” उस ने मुझ सेविनती करते होये पुछा | मैने कूछ सोच कर कहा “चलोठीक है , तुम्हारी मर्जी” कहा कर उस से पाकेट ले कर बाथरुम की तरफ जानेलगी | “अरे ऐसे नहीं “ उस ने मुझे टोका, तुम बाथरूम में जाओ , और जो ड्रेस तुम उतार कर मुझे दोगी , उस के बदले में मै तुम्हें दूसरी ड्रेस दोगा | मेरी समझ में नहीं आ रहा था की वो मुझ से क्या चाहता हैं|  मै चुपचाप बाथरूम में चली गई | वहाजा कर सबसे फहले मैने अपनी शर्ट उतारी और दरवाजे के पीछे खड़े हो कर कमीज को हाथ में लिए , हाथ बहार निकाला , वो दरवाज़े के पास की खड़ा था , उस ने मेरे हाथ से शार्ट ले ली , “शाहिद , मुझे कमीज तों दो“ “नहीं…. पहले शमीज भी उतारो” उस कीआवाज में जिद थी | मैं अभी भी कमीज की नीचे शमीज और फिर ब्रा पहनती हूँ | “नहीं शाहिद प्लीज शमीज नहीं“ ‘तों फिर ऐसे ही आ जाओ“ अब की बार उस ने मजाक मेंकहा “मैं तुम्हे शमीज के बिना देखना चाहाता हूँ”मैं अंदर ऐसे कब तक खड़ी रहती | मैने शमीज उतार  कर उस को देदी | फिर उस ने शराफत से मेरी पुरानीकमीज मुझे लूटा दी | जब मैने कमीज पहनी तों देखा की नीचे से थोड़ी छोटी कर दी गयी थी | उस के बाद मैंने अपनी भोरे रग की लोंग स्किर्ट और दरवाजे की पीछे से ही हाथ बड़ा कर शाहीद को दे दी | उस ने भी मुझे पुरानी स्किर्ट पकड दी | जब मैंने स्किर्ट पहनी तों देखा की उसे भी कट कर छुटा कर दिया था और साथ में स्किर्ट की जीप गयाब थी  | हालात ये थे की में एक छोटी कमीज जो कीसिर्फ कमर तक थी और स्किर्ट जो की सिर्फ जांघो तक ही थी | जीप ना होंने के कारण स्किर्ट साइड से खोली होई थी उस को एक हाथ से सम्भाले होये बाथरूम में खड़ी थी , अब घबराहट के मारे बुरा हाल था , की क्यों मैने शाहिद की बात मान ली | “क्या हूँआ नेहा , बहार आओ ना प्लीज , मेरी इतनी सी बात नहींमानोगी ?” | अब मेरे पास बहार आने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, मैं चुपचाप अपने उलटे हाथ से स्कर्ट को संभाले होये धीरे धीरे बाहर आ गयी | बहार आ कर देखा शाहीद  सोफा सेट पर बैठा था |मैं चुपचाप उस से थोडा दूर , टेबल के पास आ कर खड़ी हो गई “बस साहिद  , अब तों मैने तुम्हारी बात मान ली हैं प्लीज अबतों मुझे घर जाने दो , मैने अब तों तुम्हारा गिफ्ट भी दे दिया हैं | “नहीं अभी नहीं , अभी तों टाइम ही क्या होआ हैं 8.40…, 11बजे चलेगे” “नहीं नहीं… शाहिद “मैंने घबराहटे होऐ कहा “प्लीज मेरे कपडे दो , 11 बहुत लेट हो जाऊगी मैं ” | उस ने हंस कर कहा “ठीक हैं तों जाओ ऐसे ही, मैने कब मनाकिया हैं” | अब मेरा ध्यान मेरे कपड़ो पर गया , वो कमरे में, कही भी नजरनहीं आ रहे थे , अब मेरी हालत ऐसी हो गयी की काटो तों खून नहीं |  मैने शाहिद से अपने कपड़ो के बारे में पुछा तोंवो बोला “कपडे तों तुम्हे तब ही मिलेगें, जब तुममेरी बात मानोगी” मैने हैरानी से उस की तरफ देखा “तुम्हारी बात मान तों ली , अब क्या चाहते हूँ मुझ से”“ यही की अब से 11 बजे तक तु मेरी साथ रंडी की तरहरहेगी , तु सिर्फ वो करेगी जो मैं कहूँगा जैसे कहूँगा वैसे करेगी” क्या , मेरा मूह एकदम से खोला रहा गया” वो एकदम से गिरगिट की तरह रंग बदलता होआ बुला “मंजूर होतों अपने मुह से बोल , नहीं तों ऐसे ही घर जा अपने” अब मेरी आखों सेआँसू आने शोरू हो गये , मैने रोते होये कहा “ नहींसाहिद ,प्लीज मुझे जाने दो , मै एक शरीफ लड़की हूँ , मेरे साथ ऐसा मत करो”  “शरीफ? जब तु मेरेसाथ गूमफिर सकती हैं , होटल जा सकती हैं , यहाँ की मुझ से अपनी जररूत के लिये पैसे भी लेती है, तेरी सारी खरीदारी , मेरे क्रेडिट कार्ड से होती हैं” वोलगातार बोलते जा रहा था “तु मेरे साथ सब वो करतीहैं जो तुझे अच्छा लगता हैं , वो सारे बिल आज भी मेरे पास हैं जिस की तुने मेरे क्रेडिट कार्ड से खरीदा था तों क्या मैं तेरे साथ वो नहीं कर सकता जो मुझे अच्छा लगता हैं, ”  अब मैं उस केचंगूल मैं फंस चुकी थी | वो मुझे ब्लैकमेल कर रहा था और मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था | मैंने रोते होये  चुपचाप वही खड़ीरही | “ अब जल्दी बोल , बनेगी मेरी रंडी या ऐसे होघर जायेगी अपने ” मेरे पास अपना सर हिलाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था| “इशारे से नहीं , मुह से बोल की क्या मंजूर हैं”“यही की जो तुम कहोगे , जैसे कहोगे वैसे करोगी”मैंने धीरे से उस की बात का जबाब दिया | “चल फिरशोरू हो जा , पहले मै तुझे रंडी की तरह तैयार करता हूँ , चल इधर आ मेरे पास“ मैं धीरे धीरे चल कर सोफासेट के पास आकर खड़ी हो गयी  | उस ने अपने पीछे से कंची निकली और मेरी कमीजके निचले हिस्से से थोड़ी काट थी “चल कुतिया , फाडदे अपनी कमीज” “प्लीज शाहिद ….. मुझेजाने दो ……” मैंने एक बार फिर उस से विनती करी , “साली , जितनें नखरे देखायेगी उतना ही लेट होगी , बाकी तेरीमर्जी” वो अराम से सोफासेट की बैक पर टेक लगते हुये बोला | मेरे पास उसकी बात मान ने के आलावा कोई भी चारा नहीं था | मैंने रोते होये अपने कपकपाते हाथो से दोनों कमीज के कोने से पकड़ा और जैसे ही थोडा जोर लगाया , मेरी कमीज का एक हिस्सा चीSSSररर…………र्रर्र आवाज के साथ छाती के निचले हिस्से तक फट गई | बल्किसिर्फ छाती के पास लटका होया था |अब मेरे गोरे पेट का कुछ हिस्सा खोल चोका था | वो अराम से बैठा मेरे शारीर का मुयाना कार रहा था और मैं आखे झूकाये उस के सामने खड़ी थी | ”अपनी कमीज के सारे बटन तोड़ के कमीज को आगेसे खोल दे” | मेरे कापते हाथ कमीज के पहले बटन पर गये  और कमीज के दोनों साइड को खीचना शोरू कर दिया |कमीज के सारे बटन एक एक कर के कमीज का साथ छोड़ रहे थे | एक मिनट के अंदर मेरी कमीज पर एक भी बटन नहीं था  | मेरे  दोनों हाथो के छातियों को  क्रोस करते होये कंधो पर आ गये थे | मेरासुबकना लगातार जारी था | अचानक शाहिद खड़ा हूया और मेरे सामने आ गया | और फटी कमीज को एकदम से खीचकर मेरे तन से अलग कर दिया | “नहीं….” मेरे मुह से निकला |मगर उस ने जैसे मन की मन कूछ सोच कर रखा था | उस ने बारी बारी से मेरे दोनों आस्तीनों को काट कर अलग कर दिया | फिर उस ने कंची से मेरे दोनों कंधो से कोल्लर तक चला कट दिया  | अब मेरे शरीर पर कमीज काटोकडा सिर्फ अगले हिस्से को ही डाक रहा था | शाहिद वापस सोफासेट पर बैठ कर बोला  “ चल हरामजादीअपने हाथ ऊपर कर” | “प्लीज शाहिद मेरीइतनी बेज्जती मत करू , मै तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ “ मेरे मन के अंदर अबघभराहाट होनी शोरू हो गयी थी “अच्छा…, चल अब तुजितनी बार मेरी बात नहीं मानेगी , उतना टाइम भी बढेगा और मेरा तरीका भी …….मुझे कोई जल्दी नहीं है ”वो आराम से अपनी सिगरेट जलाता होआबोला  | अब मैंने अपने हाथ ऊपर करने शोरूकार दिए | जैसे ही मेरा हाथ हिला कमीज का एकमात्र टोकडा भी नीचे गिर गया | मेरे शारीर के उपर के हिस्से में ब्रा ही  बच्चीथी | उमै अपने दोनों हाथ ऊपर किये होये उस के सामने खड़ी थी | मेरे गोरी गोरी छाती  के उर्बज उस में से साफ़ दिख रहे थे |उसने अपना एक हाथ मेरे गोरे पेट पर फेरता होये कहा “ सचमें, अंदर से कितनी गोरी हैं कुतियाँ तु “ उस ने एकदम से मेरी कमर कोपकड कर अपनी ओर खीचा और पेट पर अपने होठ से मेरे नाभि पर किस कर दिया “अब क्या देगी मुझे रंडी ,बता ?“ मै समझ गई थी कीजितना मना करोगी ये मझे उतना देर तक मुझे यहाँ रोकना पड़ेगा | मैंने धीरे धीरे अपने हाथ नीचे किये स्कार्ड का हुक खोलने के लिये , जैसे ही मेरा हाथ हुक पर पहूचा | उस ने मुझे रोका “ हरामजादी , मैंने तुझे से पुछा हैं, कूछ उतारने के लिये नहीं कहा , लगता है तुझे जल्दी नही है जाने की , तभी मेरी बात धयान से नहीं सून रही , अब की बार कोई गलती करी तों बोलोग नहीं सीधा मारुगा“वो बोला “ मैंने ये पुछा था की अब क्या देगी मुझेरंडी ,ये बता अपने मुह से“ मैंने सुबकते होये कहा “स्किर्ट….” अब की बार उस ने मेरे पीछे एक खीचकर थपड मारा “हरामजादी, ढंग से बोल , सर कर के ,और पूरा जबाब दे , जो भी पूछो” “जी …… सर “ मेरी मूह से बड़ी मुश्किल से सर निकला “ सर…,  मेरीस्किर्ट आप की बर्थडे पर” मैंने डरते होये जबाब दिया | मै अब और पीटनाया लेट नहीं होना चाहती थी  | “शाबाश , ये होई अच्छी रंडियो वाली बात, अब ये बता की उतर करदेगी या फाड कर ?” मेरे लिए स्किर्ट को फाड़ना मुश्किल था , एक तों कपडाथोडा मोटा होने के कारण , दूसरा मै खुद…….. | “जी, सिक्र्ट उतार कर दुगी सर आप को “ अब के बार मैंने पूरा जबाब देने कीकोशिश करी | पssटाक अब की बार थपड मेरे मुझ पर पड़ा | मै सक्कते में आ गई | “हरामजादी अब तु मुझे बताएगी की , मुझे कब , क्या और कैसेचाहिए, लगता है तु ऐसे नहीं समझेगी, तूझे अलग तरीके से समझाना पड़ेगा”वो गुस्से से बोला और स्किर्ट के जीप वाली जगह पर हाथ डाल कर एक ही झडके में फाड दिया |  अब वो की बार वो उठा और  अलमीरा से एक मार्क पैन निकल लाया | और मेरे पीछेआ कर खड़ा हो गया | “अब मुझ से विनती कर की , सरमेरे बारे में मेरी पीठ पर लिखिये” | “साहिदतुम जो भी कहा रहे हो मै कर रही हूं , मगर प्लीज , मेरे शारीर पर कुछ मत लिखो “ मैंने उस के तरफ मुड कर रोते होये हाथ जोड़े “ रंडियों की कोई मर्जी नही होती, और अगर मंजूर नहीं है तोंजा अपने घर , मैं तेरे बिल तेरे माँ बाप से वसूल कर लूगा “| अब की वो बारवो बाहर जाने के लिये मोड़ा | “नहीं नहीं , साहिद ,प्लीज ……….” “ तों बोल , रोक करक्या करो” वो मार्क पेन को मेरी तरफ दिखता होआ बोला | मेरे पास उस कीबात मानने के अलावा कोई भी रास्ता नहीं था “ सरमेरे बारे में कूछ लिखिये मेरी पीठ पर” मैंने सुबकते होये उस से हाथजोड़ कर कहा “शाबाश…..“ बो बोलता होआमेरे पीछे आया और बोला “सुन कूतीया अपने बारे में, जो में तेरी पीठ पर लिख रहा हूँ“ | पेन की नोक मुझे कंधे पर महसूस होरही थी | “मैं साहिद की व्यक्तिगत रंडी हूँ , वोजब चाहे , जैसे चाहे , मेरा इस्तेमाल कर सकता है , मुझे उस की किसी भी हरकत पर कोई इतराज नहीं है “ वो लगातार पीढ पर लिखता होया पड़ रहा था , “ वो कभी भी मुझे किसी भी” लिखते लिखते मेरी ब्राका स्टेप बीच में आ गया | उस ने बिना कुछ कहे ब्रा के स्टेप काट दिए | अब में एक हाथ से ब्रा संभले उसे सुन रही थी “वो मुझे कभी भीकिसी भी समय बोला सकता हूँ , मेरे शारीर का , मेरे मन का वो पुरी तरीके से मालिक है “ अब वो मेरे आगे आ कर बोला “ सुनलिया ना कोत्तिया अपने बारे में , समझ गई ना क्या है तु ? “ “जी….” मेरे मुह से सिर्फ इतना निकला “ठीक लिखा है ना मैंने ये बता “ “ जी हां “ मेरे पास हां बोलने के अलावा कोई चारानहीं था | चल तों इसे उतार दे , अब की बार उस ने मेरी ब्रा को खीचते होये कहा | मैंने अपने दोनों कंधो पर से स्टेप को नीचे करते होये , ब्रा को नीचे गिरा दिया | अब मै इतना तों समझ चुकी थी ये मेरी पैंटी को भी फाडेगा और मै अपने आप को इस के लिये तैयार कर चुकी थी | घड़ी में 9.15 ही होये थे , मै जल्दी से जल्दी , अपनी पूरी इजाज़त उतरवा कर (क्योंकी बचने के कोई आसार नही थे) घर जाना चाहती थी | मै सिर्फ पैंटी में ही उस के सामने खड़ी थी | और वो अराम से सोफासेट पर बैठ कर मेरे शारीर का मुयाना कर रहा था  | मै उस के अगले आदेश काइन्तजार कर रही थी | वो चुपचाप सोफेपर बैठा था , कूछ भी नहीं बोल रहा था , और मै भी चुपचाप , एक हाथ से  छातियाँ को ढके उस केसामने खड़ी थी |” सर ….. मै …. मेरे कपडे ?” मैंने थोडा हिम्मत कर के पुछा |

“ क्यों कुतिया , मैंने तुझे जाने के लिये कहा क्या ? “ वो मेरी तरफ देखकर बोला | “ मेरे लिये क्या कर सकती है तु?उस ने एकदम से पूछा , मै इस के लिये बिल्कुल भी तैयार नहीं था “मै… मै… मै” मेरे मुह से कूछ भी नहीं निकलरहा था | “ये मै में क्या लगा राखी हैं ,साफ़ साफ बोल” मैं भला और क्या कर सकती हूँ , आप जो भी बोलो बो करूगी“मै किसी अनजाने आदेश से घबराती होई सी बोली “अच्छाये बता , तु आपनी चूत के बाल साफ़ करती है या नहीं” , “ जी नहीं “ मैंने आजतक अपने नीचे के बाल साफ़नहीं किये थे |  “चल देखा फिर“ “मैंने पैंटी को दोनों हाथो से पकडकर नीचे कर दिया “बस और नीचे नहीं , जब अगली बारमिलेगी तों ये बाल साफ़ होने चाहिए, समझ गई ना “  मुझे लगा की मुझे जाने की इज्जाजत मिलने वाली है“ जी सर “ मैंने अपना सिर हिलाते होयेकहा | “ठीक हैं आज छोड़ रहा हों , मगर ये धयान रहेकी अगली बार जब बोलूगा तों पूरे दिन या रात के लिये समझ गई ना , तब कोई नखरा नहीं , तेरेबिल अभी भी मेरे पास है“ मैंने फटाफट उस की बात की हामी भर दी |उस के बाद वो उठा और पैन्ट की जेब से चाभी निकाल कर अलमीरा खोली और मेरे कपडे मुझे दे दिए , उस में एक नई ब्रा भी थी | मैंने फटाफट कपडे पहने | तब तक उस ने शिखा को फोन किया | मुझे उस के एक दम से बदले अंदाज पर हैरानी हो रही थी , मगर मै जल्दी से जल्दी वहाँ से जाना चाहती थी | 10 मिनट में शिखा आ गई | मै उस के साथ बाहर आई और हम दोनों ऑटो पकड़ कर अपने घर आ गई | सारे रास्ते शिखा ने मुझ से नोर्मल बात करी मै ये नहीं समझ पा रही थी की उसे कूछ पता है या नहीं , ना ही कूछ पूछने की हिम्मत थी

मै अगले दिन से बिलकुल नार्मल हो कर स्कूल जाने लगी , मेरे मुलाकात साहिद से होतीं थी मगर मै उस से कूछ नहीं बोलती थी , कूछ दिन तक मै भी उस से कूछ नहीं बोली मगर शिखा ने मेरे से मुझ से दोस्ती बड़ानी शोरू कर दी | यहाँ तक की अब वो अक्सर मेरे घर पर आती रहती थी | करीब 10-12 तक तों सब ठीक तक रहा मगर एक दिन लंच टाइम में साहिद ने मुझे एक स्लिप दी , मैंने जब उसे खोल कर देखा तों उस में लिखा था की “शाम को मिल” | मै उस की बात का कोई जबाब दिये बिना वहा से चली आयी | और शाम को मिलने भी नहीं गई | उस के बाद वो मुझ से कूछ बोला ना ही कोई मुलाकात की | एक दिन शिखा मेरे घर आयी और बोली “नेहा मुझे विज्ञान के कूछ पाठ समझ में नहीं आ रहे , आज तों मुझे समझा दे , रात को मेरे घर ही रुक जाना “ मैंने मना कर दिया तों वो माम्मी और दीदी से बोली “आंटी प्लीज उस से बोलिये ना , मेरे घर में मेरा रूम अलग हैं और वहा अराम से पड़ भी लेगे” उस के एक दो बार जिद कर ने के बाद , मम्मी और दीदी ने मुझे जाने की परमिशन दे दी | मेरा मन तों था नहीं , वे मन से अपना सलवार कुरता पहना और अपने कपडे एक बैग में रख कर उस के साथ चल दी | मैं उस के घर पहली बार जा रही थी | हम दोनों ने ऑटो पकड़ी “भैया , शाश्त्री नगर चलो” उस ने ऑटो वाले को कहा | शाश्त्री नगर वहाँ से करीब 15 किलोमीटर दूर था | पहुचने में करीब आधा घंटा लगा | रास्ते में मैंने पुछा “विज्ञान में क्या प्रॉब्लम हैं , सही नंबर तों आते है तुम्हारे“ सुन कर वो हँसी “अरे वो वाला विज्ञान नहीं , दूसरा वाला” मै उस की ताजतरफ हैरानी से देखने लगी “मतलब” “तु परेशान बहुत जल्दी हो जाती है, घर पहुच सब समझ में आ जायेगा” करीब 10 मिनट बाद उस का घर आ गया | ऑटो एक बहुत शानदार घर के आगे आ कर रोका , घर क्या बड़ा सा बंगला था | बगलें पर चोकीदार ने सलाम थोक कर दरवाजा खोला
अंदर घुसने पर देखा एक बहुत बड़ा हाल था “तेरा घर तों बहुत बड़ा है शिखा, कितने कमरे है इस में ” मैने हैरानी से घर को देखते होये “परेशान मत हो, में रात हो तुझे एक एक कमरा देखा दोगी” उस ने हस कर जबाब दिया | तभी उस ने आवाज दी “राजू” | एक मिनट में एक नोकर हाजिर होया “ | “जी…” “हम दोनों ऊपर बैठे हैं अपने कमरे में, चाय बही ले कर आ जाना, सब जाने क्या हैं ” “जी…अभी थोड़ी देर में आते होगे” कह कर वो वहाँ से चला गया “चल ऊपर चलते है , मेरे रूम में” वो मेरा हाथ पकड कर मुझे ऊपर अपने कमरे में ले आई | मैं उस का कमरा देख कर हैरान रहा गई | बड़ा सा बैड, बड़ा सा टीवी , बडिया सा सोफासेट, नीचे कालीन, ए सि , क्या नहीं था वहा | “अरे शिखा तेरा रूम तों बड़ा शानदार हैं , रूम में अकेली रहती हैं ?” “नहीं राजू रहता हैं मेरे साथ” उसने मजाक बनाते होये जबाब दिया | “आज तों भी रूकेगी ना तों मजा आ जायेगा” उस ने टीवी ऑन करते होये कहा | “बाप रे इतना बड़ा टीवी , इस में तों पीचर कितनी बड़ी नजर आ रही हैं” मै ने हैरानी सि पुछा “हा इस में मूवी देखने में मजा आता है” इतने में राज् चाय ले कर आ गया | राज् को देखने से लगता नहीं था की वो नोकर होगा | वो चाय रख कर चला गया और हम दोनों चाय पीने लगे | मैंने शिखा से पुछा “तेरे मम्मी , डैड कहा है” तों वो बोली वो कही गये होये हैं बस थोड़ी देर में आने वाले होगे | फिर हम दोनों चाय के साथ टीवी का मजा लेने लगे” | थोड़ी देर बाद किसी कार की आवाज सुनाई दी | वो एकदम से खड़ी हो गई “लगता है की ये आ गये , तु यही बैंठ , मै अभी आती हूँ” , वो एकदम से बहार भाग गई | करीब 10 मिनट तक वो वापिस नहीं आई और मैं टीवी देखने में मस्त रही | फिर करीब 10 मिनट बाद दरवाजा खोला | मैंने दरवाजे की तरफ देखा तों साहिद खड़ा था | “तुम …….?तुम यहाँ कैसे , शिखा कहा है ” मै उस को यहाँ देख कर घबरा गई | “मै … यहाँ कैसे ? ये मेरा ही घर है कुतिया , और मेरे ही कहाने पर शिखा तुझे यहाँ लाई है” वो अन्दर से दरवाजा लोक करता होया बोला “साली हरामजादी के नखरे खतम ही नहीं होते , जब शाम को मिलने के लिये कहा था तों आई क्यों नहीं” “न ना वो मै मै घर से निकल नही पाई थी” मैंने डरते होये जबाब दिया “शिखा कहा हैं” | “वो… गई अपने घर तुझे मेरे हवाले कर के सोचा था की तों आराम से मान जायेगी, मगर अब देख मै तेरी क्या हालात करता हूँ” मै उस की बात सुन कर डर गई
“प्लीज साहिद मेरे साथ ऐसा कूछ मत करो , मुझे जाने दो , मुझ पर रहम करो” “
“अरे अभी कहा , कूछ देर रुक, फिर रोना मेरे और मेरे दोस्तों के सामने” वो अपना फोन उठा कर बोला
“नहीं नहीं साहिद , तुम ऐसा नहीं कर सकते आखिर हम दोस्त है ‘ मैंने उस को रोकते होये कहा
“अच्छा चल मै तुझे अपनी दोस्ती की फिल्म देखता हूँ“ कहा कर उस ने एक सी डी वीडियो प्लयेर में डाल कर ऑन कर डी , उस को देख कर में मेरी साँस एक दम से रोक गई
“देख , मेरी दोस्त कितनी अच्छी लग रही है , फडे कपड़ो में” इतना कहा कर उस ने किसी को फोन किया
“हेलो, शकील , क्या कर रहा है , आजा मेरे घर…… , शिखा को भी ले आया हूँ , हा , रफ़ी और उस्मान को भी ले आना, घर में कोई नहीं है , पापा मम्मी बाहर गये होए है ” कह कर उस ने फोन काट दिया
अब मै एक दमदम से सुन हो गई , आख से आँसू लगातार बह रहे थे . मुह से कूछ भी नहीं निकल रहा था , सोच रही थी की आज कहा फस गई , कैसे निकलो
“साहिद देखो , प्लीज अपने दोस्तों को मत बोलाओ , मै एक शरीफ घर की लड़की हो , कूछ तों रहम करो मुझ पर “ मै लगातार उस के आगे हाथ जोड़ कर अपनी इज्जत की भीख माँग रही थी
“शरीफ घर की थी , मगर अब शरीफ नहीं रहेगी , अगर उस दिन आ जाती तों कोई बात नहीं थी , मगर अब देख तु अपनी हालात “ कहा कर उस ने अपना टीवी ऑफ कर दिया , तभी बाहर से किसी गाड़ी की रोकने की आवाज आई, साहिद ने फोन मिलाया “शकील सीधे ऊपर आ जा मेरे कमरे में , मै यही पर हूँ” दो मिनट बाद ही तीन हठे कठे लड़के रूम में आ गये |
“वहाँ क्या लड़की है , कहा से पकड लाया इसे साहिद ?” उन में से एक मेरे जिस्म को आँखे फाड़ फाड़ कर देखा और बोला
“पकड़ कर नहीं लाया हो , अभी फसी है मेरे जाल में “ साहिद ने उस की बात का जबाब दिया “ अभी नई नई है , थोड़ी महेनत करनी पड़ेगी इस के साथ”
“इस का नाम है नेहा” साहिद ने मेरा नाम सब को बताया “और ये हम सब के लिये रंडी बनेगी“
“नेहा ये है मेरा दोस्त शकील” उस ने एक लड़के की तरह इशारा किया , जिस का कद करीब 5”8 था
“ये है रफ़ी और ये है उस्मान” उस ने बाकी दोनों की तरफ भी इशारा किया
मै डर के मारे एक तरफ खड़ी थी | मेरी आखो से आँसू रोकने का नाम ही नहीं ले रही थे “प्लीज मै आप लोगो के आगे हाथ जोड़ती हूँ , मुझे जाने दो”
शाहिद :-“जाने दूगा , मगर पहले अपने जिस्म से सब कुछ उतार कर नंगी हो जा जितनी नंगी तू पैदा हुई थी“
“क्या ! क्या तुम – क्या कहा तुमने ” मैं बोली
उस्मान :- “अभी तों कूछ किया ही नहीं , सिर्फ तुझे नंगी होने की के लिये ही तों बोला है” वो हंस कर बोला
“भगवान के वास्ते रहम करो मुझ पर”
शकील :- (मेरे पास आते होये ) “लगता है ये ऐसे नहीं मानेगी , कपडे फाड दू इसके “
शहीद :- “नहीं यार, खुद ही उतारेगी अपने कपडे , नई है , प्यार से नहीं तों थोडा मार से” उस की होठो पर मुस्कराहट थी
“हां तों नेहा , पहले मेरी बात सुन ले , तु हम सब को मालीक कहेगी , सब का कहना मानेगी , अगर तुने अपने मालिकों की बात नहीं मानी तों मार की अलावा हम क्या क्या कर सकते है , वो बाद में बतायेगे “

“हा तों हरामजादी, अपना कुरता उतार कर दे अपने मालिक को“ शहीद ने मुझे हुकुम दिया
मगर चार लड़कों के सामने अपनी जवानी और जवाँ जिस्म की सरेआम नंगी नुमाइश करों, खुद को एक बाजरू रंडी की तरह नीलाम करके इन लोगों की आँखे गरम करों नहीं! ये सब क्यों हो रहा है मेरे साथ,…..? , मेरे हिम्मत नहीं थी | मै चुपचाप खड़ी रही
“और कितना इन्जार करवाएगी, कुतिया, खुद नंगी होगी या अपने कपड़े फाड़वा कर नंगी होना चाहती है” उस्मान बोला
“ये ऐसे नहीं मानेगी, शाहिद “शकील बोला
शाहिद खड़ा होआ और मेरे पास आ कर मेरे मुहं पर जोरदार थप्पड़ मारा दिया, थप्पड़ की मार से मैं ज़मीन पर जा गिरी, मैं दर्द के मारे साँस भी नहीं ले पा रही थी
“आ आ हां हां “ मै दर्द से करह उठी , डर के मारे मेरी हलात बुरी थी
“अब अपना कुरता उतार, मगर एक दम धीरे धीरे , अगर जल्दी करी तों एक और दूगा” शहीद अपनी जगह पर बैठता होआ बोला मैं दर्द से मरी जा रही थी मुझे कुछ भी नहीं सूझ रहा था, जैसे तैसे मैंने अपनी हिम्मत जुटाई और लड़खड़ाते हुए खड़े होने की कोशिश करे लगी।
मैंने धीरे से अपने कुर्ते के दोनों पालू पकडे , और धीरे से उठा कर कमर तक ले आई , अब कुरता सलवार के नाडे पर था , उस के बाद मैंने जैसे ही उसे थोडा और ऊपर किया , मेरी गोरे पेट के नाभि साफ साफ़ नजर आने लगी , धीरे धीरे मेरे हाथ मेरे मुह के आगे थे ,ब्रा का निचला हिस्सा नजर आना शोरू हो गया था
“बस ऐसे ही खड़ी रहा हरामजादी , देखो तों साहिद भई , कितना गोरा बदन है इस रंडी का , मन कर रहा है , अभी इस के चूत फाड दो” अब की रफी की आवाज थी
“नहीं रफ़ी , इतनी जल्दी क्या है अभी तों पुरी रात बाकी है , कर लेना जो मन में आये” शाहिद ने उस की बात का जबाब दिया
“बहन की लोडी, बाकी कुर्ता क्या तेरा बाप उतारेगा” शाहिद ने मुझे धमकाते होये कहा
मैंने कुर्ते को थोडा और ऊपर किया अब मेरा ब्रा (सफ़ेद) साफ़ साफ उन की आखो के सामने थी
“क्या गोरे गोरे मोटे मोटे मोमे है इस के “ उस्मान में अपनी पेंट पर हाथ फेरा “ला अपना कुरता मुझे दे”
मैने अपना कुर्ता उतरा और उस्मान को ला कर दे दिया | अब मै उन चारों के आगे अपने हाथो को कंधे पर रख कर खड़ी थी |
उस्मान :- “ब्रा उतरगी या फड़वाऐगी”
शकील :- “नहीं उस्मान …| अब ये रफ़ी के पास जा कर ,अपने मालिक से अपनी ब्रा का हुक खोलने के लिये कहेगी , देखते है कैसे फ़रियाद करती है “ शकील ने मुझे रफी के पास जाने का इशारा करते हुये कहा , उस ने जैसे मेरी बेज्जती करने की कसम खा रखी थी मगर मेरे पास उन की बात माने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था , मै धीरे धीरे रफ़ी के पास गई
“मालिक ,मेरी ब्रा के हुक खोल दीजिए” मैंने उस की तरफ पीठ कर के अपने बाल (जो की कमर तक थे) को आगे करते होये कहा | रफ़ी ने एक दम से मेरे बाल पकडे और अपने घुटनों के पास बिठा दिया
“मदरचोद, फरियाद कर रही है या हुकुम चला रही है“ उस ने मेरे मूह पर एक थपड रसीद करता होये कहा “ठंग से फरियाद कर नही तों अभी के अभी तेरी गांड में डंडा डाला कर पूरे शहर में घूमा दूगा “
उस की बात सुन , मेरी आखो के आगे अँधेरा छा गया , मेरी समझ में नहीं आ रहा था की कैसे फ़रियाद करो , मगर अब और मार खाने की हिम्मत नहीं थी | मैंने अपना मन मजबूत किया और रफ़ी के आगे हाथ जोड़ कर बोली
“मालिक ,मेरे शारीर पर ये ब्रा बहुत टाइड हो रही है , प्लीज इसे खोल कर मुझे आजाद कर दीजिये” “ये होई ना बात हरामजादी , मार खाये बिना कोई बात समझ में नई आती“ उस ने अपने हाथों को चोली के हुक पर लगाया और धीरे से चुली का हुक खोल दिया फिर दोनों हाथों को मेरे दोनों कन्धों पर लाकर उसने धीरे से मेरी चोली नीचे की तरफ उतारते हुए मेरे जवान कसी हुई चुच्चियाँ उन लोगो के सामने नंगी कर दी, जैसे ही मेरी नंगी चूचियां उन्हें दिखने लगी उन्होंने सीटियाँ बजाना शुरू कर दिया और मेरी ज़लील होती नंगी जवानी का मजा लेने लगे।
“चल अब अपने हाथ ऊपर कर” उस ने मेरे दोनों हाथो को खड़ा करता होया बोला | “ले भाई साहिद , इस की पहली कमाई “ उस ने ब्रा को शाहिद की तरफ फेंक दिया | उस की बात सुन कर तीनों हँसने लगे | अब उसने मेरी चुच्ची को मसलना शुरू कर दिया मेरे मुह से दर्द के मारे चीख निकली “नहीssss……”
“साली चीख तों ऐसे रही है जैसे अंदर डाल दिया हो … चल मेरा लंड निकाल बाहर ” उस ने मेरी चुच्ची को अपनी तरफ खीचते होये बोला
“भाई हम भी है यहाँ , जरा थोडा मौका हमें भी तों दो “ उस्मान ने रफ़ी से कहा
“अरे माफ़ करना भई, साली है ही इतनी चिकनी की …..” रफी ने मुझे उस्मान की तरफ धकेलतेहुये कहा |
मै उस्मान के पैर के पास जा कर गिरी | उस्मान ने मेरी बाल खींचकर मेरा मुहं अपनी तरफ मोड़कर मेरी आँखों में देखा और फिर हल्का सा हंसा,फिर उसने मुझे मेरे बालो से पकड़ कर मुझे खींचकर उठाना शुरू किया, उसने मुझे बालों को इतना कसकर खींच रखा था की दर्द के कारण मैं चीखने लगी, मैं खुद को छुडवाने की कोशिश करने लगी | मै दर्द से करहा उठी “आह आ न नहीं” मगर जैसे वो तों मुझे सुन ही नही रहा था | वो मुझे घुटनों के बल बिठा कर मेरे पास आ कर खड़ा हो गया |
“बोल हरामजादी , क्या फरियाद है तेरी , एक ही बार में ढंग से बोल दे नहीं तों”
उस ने मेरे छाती को अपने हाथो के दोनों ऊँगली से पकड़ा और बुरी तरीके से घूमा दिया “नहीsss“ “लटका दूगा इस से ही” “मालिक, वो , वो , मेरा ……” मेरे मुह से दर्द के मारे कूछ निकल ही नहीं पा रहा था |
एक थपडा पडा गाल पर “हराम की पिल्ली , ये सलवार तेरे बाप से उतरवाऊ क्या” वो मुझे मारते होये बोला , मेरे पास अपने आप को बचाने का कोई रास्ता नहीं था सिवाये से की बात मानने के , मैंने बड़ी मुश्किल से अपने दिल पर पत्थर रख कर उसके आगे दोनों हाथ जोड़ें “मालिक , “मेहरबानी कर के मेरी सलवार को उतरने में मेरी मदद करिये” मैंने रोते होये उस से विनती करी
“चल,मदद करता हूँ , पहले अपने हाथ उठा कर सर की पीछे बाँध“ मैंने अपने दोनों हाथ पीछे कर के , सर पर रख दिये और जैसे ही मेरे हाथ पीछे होये उसने एक ही हाथ से मेरी सलवार का नाडा खीच कर सलवार से बिलकुल अलग निकल दिया | सलवार एक दम से नीचे गिर गई | अब मैं वहां पर उन चारो लड़कों के सामने केवल छोटी छोटी सी पारदर्शी चड्डी पहने खड़ी थी | अपना सर झुकाए उन लोगों के हवस भरी आँखों के सामने अपनी जवानी को नंगी करके खुद को ज़लील कर रही थी मैं, मेरा आत्मविश्वास तो जैसे मर ही चूका था। “चल अब खड़ी हो जा मेज पर और अपनी चड्डी भी उतार कर नंगी हो जा जल्दी से”
मैंने जैसे तैसे अपने आप को संभाला और धीरे से बीच में पड़ी मेज पर खड़ी हो गई | मैंने अपने हाथों को अपनी पतली कमर के पास अपनी छोटी सी चड्डी में डाला और धीरे से खींचते हुए चड्डी को जांघो से घुटनों तक और फिर झुकते हुए मैंने अपने पैरों से पंजों तक लेजाकर अपनी चड्डी को उतार दिया और अपनी चिकिनी गुलाबी उभरी हुई जवानी उनकी हवस भरी आँखों के सामने नंगी कर दी साथ ही खुद को इस तरह से सरेआम पूरी नंगी होकर ज़लील करते हुए मैंने उनकी हवस की आग और भी ज्यादा भड़का दी।

फिर साहिद बोला, “पीछे मुड़ कुतिया!” और मैं पीछे मुड़ गई, जिससे मेरी नंगी गोरी पीठ और गोल कसे हुए कूल्हों की नंगी नुमाइश भी हो गई फिर शाहिद ने मुझे नीचे उतर कर चलने का हुक्म दिया, मेरी शर्म अबतक हर हद पर कर चुकी थी, शायद ही मैं कभी इतना ज़लील हुई होंगी जितना मैं अब महेसूस कर रही थी। मैं नंगी होकर उन सभी के सामने कमरे में एक कोने से दुसरे कोने तक घुमने लगी । हवा के झोके मेरे सारे बदन को चूम रहे थे हर अंग को छु रहे थे और मुझे नंगी होने का एसास कराने लगे थे लेकिन मैं बेबस थी, कुछ नहीं कर सकती थी। इतने में चारो के चारों अपने कपडे उतार कर नंगे हो चुके थे | सभी अपने अपने लंड को हाथ में ले कर मझे देख कर हिलाना शोरू कर दिया| साहिद “सबसे पहले तो मैं तेरे मुहँ में अपना लंड डाल कर तुझे अपना लंड का स्वाद चखाऊँगा, चल अब जल्दी से अपने घुटनों पर बैठ कर मेरा लंड अपने मुहँ में डालकर चुसना शुरू कर” मुझे ये तों मालूम था की मेरे साथ क्या होगा मगर पर मैं उन लोगों के लंड मुहँ मैं लेना…., नहीं मैं ये नहीं कर पाऊँगी |मैं कुछ सोच पाती या खुद को मजबूर कर पाती, उससे पहले ही साहिद जो गुस्से में आ गया था, एक दम से बोल पड़ा, “साली कुतिया !, बाजारू रंडी !, मुझे लगा था कि अब तक तू अपनी औकात से वाकिफ़ हो गई होगी, लेकिन नहीं तुझे अभी और सबक सिखाना पड़ेगा”
फिर शहीद अपने दोस्तों से बोला, “इस कुतिया को पलग पर हथकड़ी डाल कर बांधो, बेल्ट की मार नंगे जिस्म पर पड़ते ही रंडी की सारी अकड़ मूत के साथ चूत से ही निकल जाएगी, बांध दो कुतिया को”
अब तो बस मेरे डर के मारे पसीने ही छुट गए, मैंने कहा,”रुको!, रुक जाओ! खुदा के लिए रुक जाओ………”
लेकिन उस ने मेरी एक न सुनी और मुझे बालों से घसीटते हुए पलग पर ले गए, जहां उन्होंने मेरे हाथों में हथकड़ी डाल कर मेरे दोनों हाथ ऊपर की तरफ खींचकर उल्टा बाँध दिए फिर एक रस्सी से मेरी दोनों टांगें चोड़ी कर बाँध दी। मेरा सारा जिस्म किसी कसी हुई तार की खिंच गया था, अब मेरी नंगी पीठ और नंगी चूतड़ सब के सामने थीं
साहिद ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया, सारे कमरे मैं बिलकुल सन्नाटा छा गया, शाहिद ने एक लम्बी सांस ली और फिर बेल्ट को जोर से घुमाते हुए मेरी नंगी पीठ पर एक जोरदार वार किया
पहले तो मुझे कुछ एसास नहीं हुआ लेकिन दुसरे ही पल मेरी नंगी पीठ बेल्ट की मार से जलने लगी, मैंने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, मैं रोने लगी, बांधे होने के कारण मैं ठीक से हिल भी नहीं सकती थी और बेल्ट की मार पड़ते ही मैंने हिलने की कोशिश करते हुए खुद को और खिचाव के कारण और ज्यादा दर्द पहुचाने लगी, इतना दर्द जो की मेरी सोच से भी परे था
“क्यों कैसे लगा रहा है कुतिया, तेरी नंगी गोरी पीठ पर ये मार की लाल लकीर बहुत ही सुन्दर लग रही” और सभी लोग मज़े लेकर हंसने लगे |मैं दर्द से तड़प रही थी, शाहिद ने कहा, “अब क्या बोलती है कुतिया हमारा लंड अपने मुहं में लेगी या नहीं”
मैंने दर्द से बिलक रही थी, मुझ में और दर्द सहन करने की ताकत नहीं थी, हार तो मैं पहले चुकी थी इस लिए मैं उन लोगों के लिंग अपने मुहं में लेने को राज़ी हो गई, मैंने कहा, “हाँ साहिद मैं जो भी तुम कहोगे करुँगी, मुझे और मत मारो………….”
साहिद हंसने लगा और मुझे अपने नंगी चूतड़ों पर दर्दनाक चीस महसूस हो रही थी, मैं रो रो कर जोर से चिल्ला रही थी और वो लोग मुझ पर हंस रहे थे, मैं और मार खाना नहीं चाहती थी। मैंने फिर से रोते हुए कहा, “साहिद मुझे मत मरो! मैं वो सब करूंगी जो भी आप कहोगे, मैं सब के लन्ड अपने मुहं में ले लुंगी! , साहिद मैं भीख मांगती हूँ!’ “आप सभी मुझे एक बाजारू रंडी की तरह चोदो, ”
साहिद बोला, “बहुत खूब, कुतिया!” अब उन्होंने मेरे हाथ पैर खोल दिये और खूद पलग पर बैठ गया और मुझे अपने टांगो के बीच में बिठा दिया |उसने अपना लिंग मेरे होंटों के पास लगाया, मैंने अपना मुहं खोल कर उसका लंड अपने मुहं में ले लिया और उसके लंड को चूसने लगी, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी उसे पुरे मज़े देने की, खुद को एक असली बाजारू रंडी साबित करते हुए।
मैं साहिद का लंड चूसती रही जब तक की उसने वीर्य नहीं छोड़ा
फिर कुछ देर बाद उसना मेरे मुहं में ही अपना वीर्य छोड़ना शुरू कर दिया, उसने मुझे सारा वीर्य पीने को कहा और मैं वही किया मैंने उसका सारा वीर्य घोंट लिया हालाँकि मुझे थोड़ी परेशानी जरुर हुई लेकिन मैंने ज़ाहिर नहीं होने दी
साहिद के बाद बाकी तीनों भी अपना अपना लंड चुस्वाने के लिए बारी बारी से अपने टांगो के बीच में मुझे लिया , मैंने उन सबके लंड भी अपने मुहं में लेकर काफी अच्छे से चुसे जब तक की उन लोगों का वीर्य नहीं निकला, मैं उनके लंड भी चूसती रही और वीर्य निकलने पर मैंने उन सबका वीर्य भी पीया बिना कोई नखरा दिखाए
उसके बाद साहिद फिर से एक बार अपना लंड मेरे मुहं में डालने को तैयार खड़ा था, बोला, “आज तो मैं और मेरे दोस्त तुझे पूरी रंडी बना देंगे”
मैंने फिर से उसका लिंग अपने मुहं में ले लिया और चूसने लगी, सारा वीर्य भी पीया.
फिर उसने मुझे पीठ के बल ज़मीन पर लिटा दिया, मेरी दोनों टाँगे खोब चोड़ी कर के खोल दी गई, जिससे की मेरी कमसिन गुलाबी चिकनी चूत भी पूरी तरह से खोल गई थी और साहिद के मोटे लिंग को दावत देने लगी, साहिद मेरे ऊपर लेट गया और उस ने अपना लम्बा व मोटा लिंग मेरी कसी हुई जवां चूत में घुसा दिया, दर्द के मरे मेरी चीख निकल गई, वो बड़ी ही बेदर्दी से मुझे चोदने लगा उसका हैवानो जैसा लिंग मेरी चूत को बहुत ही बुरी तरह से फाड़ता हुआ जटके दे कर मुझे चोद रहा था.
कुछ देर बाद उसने मुझे अपनी गोद में बिठा कर, मुझे चोदने लगा, और मैं किसी गिरी हुई रंडी की तरह चिल्लाते हुए खुद को चुदवा रही थी.
काफी देर तक मुझे हार तर से चोदने के बाद साहिद ने मेरे सारे बदन पर अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया,
उसके बाद मुझे बाकी दोस्तों ने भी हार तरह से चोद डाला, और मेरे जिस्म को अपने अपने गर्म चिपचिपे वीर्य से गीला कर दिया.
फिर पांच सात मिनट रुक वो सभी लोग मुझे फिर से चोदने लगे, मेरे जिस्म के साथ खेलने लगे जैसे की मैं कोई बेजान गुडिया हूँ, वो मुझे थप्पड़ मारते कभी मेरी चूचियां दबाते, कभी मेरी निपल खींचते तो कभी मेरी चूत में अंगुलियाँ डालते या मेरी चूत को नोचने लगते. मुझे खुद को गन्दी गालियाँ देने को कहते और जब मैं खुद को गालियाँ देकर ज़लील करती तो हंस हंस कर अपना मनोरंजन करते
फिर कुछ देर बाद वो सभी लोग मुझे दुबारा से चोदने को तैयार थे, सबसे पहले साहिद , मुझे कुतिया बना के मेरी चूत में साहिद ने अपना लिंग डाल कर मुझे चोदते हुए मेरी चूत फिर से फाड़ डाली. वो मेरी चूचियां मसलता, मेरी निपल खींचता, मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मारता और मुझे गालियाँ देते हुए चोदने लगा जब तक की उसके लिंग से वीर्य नहीं निकल जाता. साहिद के बाद उस्मान ने मुझे कुतिया बना कर दुबारा से चोदना शुरू कर दिया, तभी रफ़ी ने मुझे बालों से खिंच कर पकड़ा और मेरे मुहं में अपना लिंग डाल दिया, अब मैं उसका लिंग भी चूस रही थी साथ ही अपनी चूत भी चुदवा रही थी.
फिर उन्होंने मेरी गांड में भी अपना लिंग डाल कर मेरी गांड भी फाड़ डाली, मेरा अंग अंग दर्द में डोब गया लेकिन किसी को भी मुझ पर जरा भी रहम नहीं आया, वो लोग मुझे चोदते रहे बिना रुके और मैं भी सब कुछ करती रही, खुद को हर तरह चुदवा थी रही, ताकि मुझे हर तरह से चोदने के बाद, मेरी जिस्म से खेलने के बाद मुझे जाने देंगे.
करीब रात 11.30
साहिद ने सब को बोला “बहुत हो गई कुतिया की घर में चुदाई, अब पक्की रंडी की तरह चोदेगे….. बाहर ले जा कर” मैं तो ये सुनते ही दंग रहे गयी, जैसे मेरे पैरों तले से ज़मीन ही खिसक गई हो , मै इस के लिये बिलकुल भी तैयार नहीं थी “नहीं नहीं , ये नहीं , मैं नहीं जाऊँगी घर से बाहर , मै सब कुछ कर रही, जो

तुम कहा रहे हो ,तुम्हे जो कुछ भी करना हैं इधर ही कर लो“ मैंने पूरे विश्वाश के साथ शहीद को बोला “चुप कुतियाँ , तु रंडी है , और रंडी को कैसे चोदा जाता है वो भी अभी तुझे सिखाना हैं” , “नहीं साहिद , प्लीज घर से बाहर नहीं … मै यह नहीं कर पाऊगी” मैंने साहिद के पाव में गिर कर बोली “ले जल्दी से ये शर्ट कमीज पहन ले” उस ने अपनी एक शर्ट निकली और मेरी तरफ उछाल दी “नहीं नहीं घर में मुझे जितना चाहे चुद लो , मगर बहार नहीं जाऊंगी “ मै पुरे आत्मविश्वास से बोली “अच्छा…..” साहिद बोला | “लगता है अभी इस के अकड ढग से गई नहीं है , अक्ल ठिकाने लगाने पड़ेगी इस की” फिर सब ने मिल कर मेरे हाथ पीछे कर दिये और एक ही रस्सी से मेरे हाथ पैर मेरे कमर के पीछे बांध दिये | मेरे पेट कमान की तरह तन गुआ था | छाती बाहर की तरफ फ़ैल गई थी |साहिद ने अपनी बेल्ट निकली और मेरे मुह में डाल कर पीछे की तरफ बांध दी | मैं ना तों कूछ बोल पा रही थी ना ही इशारे से कुछ कहा पा रही थी | उस्मान ने कहा “साहिद इसे ऐसे ही उठा कर ले चलते है कार में , रंडी को कपड़ो की तों जरूरत है नहीं, बाकी पार्क में मजे लेगे” मेरी दर्द से जान ही निकल जा रही थी मैं अब और ज्यादा दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकती थी | साहिद बोला “नहीं जाएगी तों ये खुद , देखना ये है की कितनी देर में” वो मेरे बाल खीचते होये बोला | “बोल चले बाहर या अभी और अकड देखनी है” उस ने मेरी मुह पर लगी बेल्ट खोलते होये कहा | मुह खोलते ही जैसे मेरी जान मे जान आई | मेरी आखो मे से आसू आने शोरू हो गये दर्द के मारे मेरी जान निकली जा रही थी | मेरे मुह से सिर्फ निकला “हाँ” उस के बाद उन उस्मान ने मेरे हाथ पैर खोले और मुझे कमीज और निकर दी | जब मैंने निकर को उठा कर दिखा तों वो छोटी सी ,फ्लेक्सिबल कपडे ही बनी थी और कमीज बहुत बड़ी थी | मैंने उन सब के सामने खड़े हो कर पहने पर मजबूर थी |जब मैंने वो निकर पहनी तों वो इतनी छोटी थी की , सिर्फ चूत से थोडा नीचे तक ही आ रही थी और कमीज इतनी बड़ी की , जांघो तक आ रही थी और गले के पहले बटन लगाने के बाद भी उर्वज साफ़ साफ़ नजर आ रही थे |मैंने सब के सामने ये कपडे पहने , कमीज पहने की बाद तों लगता ही नहीं था की नीचे कूछ पहना है | मैं अभी भी अपने आप को नंगी महसूस कर रही थी | मगर अब मार खाने की ताकत नहीं थी | शाहिद “क्या लग रही है , देख तों अपने आप को शीशे मे“ कहा कर उस मुझे पकड कर रूम मे लगे शीशे के आगे खड़ा कर दिया | “एक दम पक्की रंडी” उस्मान मेरे पीछे आ कर कमीज के अन्दर हाथ डाल कर कहा | सही मे जब मैंने अपने आप को शीशे के आगे दिखा तों मैं एकबाजारू लड़की लग रही थी | मुझे खुद पर घिन आने लगी मगर……………| उन सब ने भी कपडे पहन लिये कपडे पहने के बाद वो मुझे शहीद के घर के बाहर, कार गैरज मे ले गये | सफ़ेद अल्टो कार की ड्राविंग सीट पर उस्मान बैठ और उस के साथ मे रफ़ी | शाहिद और शकील मेरे अगल बगल बैठ गये | डर और शर्म के मारे मेरी दिल की घबराहट तेज हो गई थी | मैं पहले से आप ने आप को नंगी महसूस कर रही थी और अब …..? पता नहीं ये क्या करेगे मेरे साथ , मगर मेरे पास कोई चारा नहीं था | शाहिद “ रास्ते मे अगर तूने कोई खेल खेलने कोशिश करी तों समझ लेना , तेरी पुरी फिल्म नेट पर डाल दूगा” वो मुझे धमकी देता होआ बोला

उस मे बाद जो होआ ना तों मुझ मे बता पाने की हिम्मत ना यहाँ उस का लिखने की

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