कुंवारे लड़के

हालाँकि मैंने बहुत सारे लड़कों के साथ चुदाई की है परन्तु मैं हमेशा ही किसी कुंवारे लड़के से चुदने के सपने देखा करती थी, एक ऐसा लड़का जिसने कभी किसी लड़की को छुआ भी ना हो !
और एक दिन मुझे अपने सपनों का राजकुमार मिल ही गया, मनीष नाम था उसका ! कोई उन्नीस साल की उम्र होगी।
मेरी बुआजी के घर में उत्सव था और वहीं पर मुझे यह जवान मिला। उत्सव चार दिन तक चलने वाला था और इन चार दिनों में ही मुझे उस लड़के को जैसे तैसे पटाना था। हालाँकि वो सिर्फ उन्नीस साल का था परंतु उसका भरा हुआ शरीर जैसे किसी भी लड़की को रात भर चोदने के लिए बना था। बहुत सारे लड़के इस उम्र में दुबले पतले होते हैं पर जैसे वह शायद जिम में जाता होगा, इसीलिए उसकी चौड़ी एवं फूली हुई छाती थी और चौड़े कंधे थे। जो पैंटें वो पहनता था उनमें से उसकी भरी हुई गांड और आगे से उसका तगड़ा सा लंड मुझे हमेशा दिखता था। उसका रंग साफ़ था, छोटे बाल और गहरी काली आँखें। कुल मिला कर बिलकुल वैसा ही, जैसा मैं चाहती थी।
उसको पहली बार देख कर मुझे कुछ होने लगा था और मैंने सोचा कि काश मैं उसकी उम्र की होती तो मेरा चुदाई का काम कितना आसान हो जाता। कभी कभी मैं सोचती थी कि मुझे शायद ही कभी उसकी पैंट उतारने का मौका मिले। परंतु मैं गलत थी। हालाँकि हम दोनों के बीच सिर्फ साधारण बातें ही हुईं थी, पर मैंने उसे कई बार मुझको घूरते हुए देखा था। और अब उसको रिझाने के लिए मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश करने लगी। मैं हमेशा उसके आस पास ही मंडराती रहती थी, अपने 34 इंच के मोम्मे और अपनी बड़ी गांड को तंग टी-शर्ट और जींस में दिखाते हुए।
पारिवारिक बातों के दौरान ही मुझे पता लगा कि वो दिल्ली में ही पढ़ता है और मैंने सब लोगों के सामने ही उसको अपना टेलिफोन नंबर दे दिया और उसको कहा कि जब भी उसको कोई परेशानी हो तो वह मुझे संपर्क कर ले। साथ ही साथ उसके माता-पिता का नंबर भी ले लिया। (सिर्फ सब को दिखाने के लिए)।
कोई दो महीने के बाद मनीष ने मुझे टेलिफोन किया तो मैंने उसको आने वाले इतवार को खाने पर बुला लिया और उसको अपना पता और पहुँचने के रास्ते बताये।
तब उस दिन मनीष सुबह कोई 11 बजे आ गया। मैं घर पर साफ़-सफाई कर रही थी। पूजा अपने कॉल-सेंटर गई थी और रात को आठ बजे के बाद आने वाली थी। मैंने सिर्फ एक झीना गाउन पहना हुआ था और अंदर से बिलकुल नंगी थी। मेरे मोम्मे साफ़ साफ़ दिख रहे थे जबकि कोई पारखी आँखें हीं मेरी बिना झांटों की चिकनी चूत को देख सकती थी।
मैंने उसको अंदर बिठाया और उसके लिए पानी लेकर आई। थोड़ी देर के बाद मैंने उसके और अपने लिए ठंडा पेय डाला और उसके सामने वाले सोफे पर आ कर बैठ गई। बातों बातों में मैंने देखा कि वो मेरे मोम्मों को घूर रहा था, मैं समझ गई कि आज तो मैं इससे चुद ही जाऊँगी।
मैंने उससे पूछा कि वह खाने में कुछ विशेष खाना चाहता है तो बता दे ताकि मैं बना दूँ !
मनीष ने कहा- जो भी कुछ आप बना रही हैं, मैं खा लूँगा।
फिर मैंने उससे पूछा कि उसको कोई समस्या तो नहीं होगी कि हम लोग खाना बनाते हुए बात करतें रहें तो?
उसने कहा- मुझे क्या परेशानी हो सकती है?
बातें करते हुए मैंने उससे पूछा- तुम्हारी कोई सहेली है?
तो उसने कहा- नहीं, मेरी कोई सहेली नहीं है।
तब मैंने उसको कहा- तुम इतने आकर्षक हो, सेक्सी हो, ऐसा नहीं हो सकता कि तुम पर लड़कियाँ मर ना मिटती हों ! तुम्हारी तो कई सहेलियाँ होंगी?
मनीष ने कहा- मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ, मैंने आज तक किसी भी लड़की में दिलचस्पी नहीं ली है।
मैंने उसको कहा- समय के साथ साथ तुम्हें बहुत सारी लड़कियाँ भी मिलेंगी और मज़ा भी मिलेगा।
मनीष ने पूछा- क्या आप अकेली रहती हो?
तो मैंने कहा- मैं अपनी एक दूर की रिश्तेदार पूजा के साथ रहती हूँ, वो अपने कॉल सेंटर गई है रात को ही आएगी।
बातें करते हुए मैंने कई बार उसकी तरफ देखा परंतु उसकी पैंट में कोई हरकत नहीं थी। क्योंकि मेरी पीठ उसकी तरफ थी इसलिए मैंने अपनी गांड को कई बार दायें बाएं हिलाया कि शायद वह एक बार मेरी बड़ी सी गरम गांड को देखे।
मैंने उसको पूछा- खाने से पहले कुछ पीने के लिए दूँ क्या?
और एक बार फिर अभी नहीं एवं धन्यवाद उसके मुंह से निकला।
तब मैंने उसको कहा- जब तक मैं खाना बनाती हूँ, तुम सोने के कमरे में जा कर टेलिविज़न देख लो, आराम कर लो।
जब मैंने खाना बना लिया तो मैं भी सोने के कमरे में गई तो देखा तो वह हमारी एक अश्लील पुस्तक देख रहा था। जैसे ही उसने मुझे देखा उसने वह पुस्तक एक ओर रख दी पर मैं उसकी पैंट में एक तम्बू देख सकती थी।
मैंने मनीष को कहा- तुम चाहो तो इस पुस्तक को ले जा सकते हो।
मनीष ने कहा- मैंने पहले भी वैसी कई पुस्तकें देखी हैं, मेरे छात्रावास में बहुत लड़कों के पास हैं।
मैंने उसको पूछा- तुमने कभी चुदाई की है?
उसने जवाब दिया- नहीं।
मैंने फिर उसको पूछा- कभी ऐसी पुस्तकें पढ़ते हुए किसी को चोदने की इच्छा नहीं हुई? तो वह बिल्कुल चुप रहा।
तब मैंने उसको छेड़ते हुए कहा- मैं शर्त लगा सकती हूँ कि जब भी तू बिस्तर में लड़की को लेकर जायेगा तो बहुत ही मस्त चुदाई करेगा !
मेरी इस बात पर वह शरमा गया और उसका चेहरा पके हुए टमाटर ही तरह लाल हो गया।
अंत में मैंने उसको पूछ ही लिया- क्या तू एक असली नंगी लड़की को देखना चाहेगा?
और तभी मैंने अपना गाउन उतार दिया और देखा कि मनीष मेरे चुचूकों को घूर रहा था जो कि अब तक बहुत कड़े हो चुके थे।
अपने मोम्मों की तरफ इशारा करते हुए …
पढ़ते रहिए !

मैंने उसको पूछा- तुमने कभी चुदाई की है?
उसने जवाब दिया नहीं।
मैंने फिर उसको पूछा- कभी ऐसी पुस्तकें पढ़ते हुए किसी को चोदने की इच्छा नहीं हुई? तो वह बिल्कुल चुप रहा।
तब मैंने उसको छेड़ते हुए कहा- मैं शर्त लगा सकती हूँ कि जब भी तू बिस्तर में लड़की को लेकर जायेगा तो बहुत ही मस्त चुदाई करेगा !
मेरी इस बात पर वह शरमा गया और उसका चेहरा पके हुए टमाटर ही तरह लाल हो गया।
अंत में मैंने उसको पूछ ही लिया- क्या तू एक असली नंगी लड़की को देखना चाहेगा?
और तभी मैंने अपना गाउन उतार दिया और देखा कि मनीष मेरे चुचूकों को घूर रहा था जो कि अब तक बहुत कड़े हो चुके थे।
अपने मोम्मों की तरफ इशारा करते हुए मैंने पूछा- क्या तुझे ये अच्छे लगे?
मनीष थोड़ा सा झिझका और शरमा गया।
इससे पहले कि वह कुछ बोलता, मैंने अपने मोम्मों को उसके मुंह के बिल्कुल पास कर दिया ताकि वह मेरी घाटियों को बिलकुल आराम से देख सके। मैं अपने आपको बहुत ही गर्म महसूस कर रही थी और सोच रही थी कि कैसे मनीष के कपड़े उतारूँ और उसको किसी अनुभवी लड़की को चोदने का मौका दूँ।
मैंने उसका एक हाथ अपने मोम्मे पर रखा और जोर से दबा दिया। यह उसके लिए जैसे बिजली के झटके जैसा था, उसने फ़ौरन अपना हाथ हटा लिया।
“क्या हुआ, क्या तुम्हें अच्छा नहीं लगा?” मैंने पूछा।
“ये तो बहुत बड़े हैं !” उसने कहा।
“छुओ इनको, दबाओ इनको, मनीष,” मैंने अपनी लरजती आवाज़ में कहा।
“चूसो इनको, मनीष !” मैं उसके साथ बैठते हुए बोली।
फिर मैंने उसको अपनी ओर खींचते हुए उसके मुंह को जोर से अपने मोम्मों पर दबा दिया। तब उसने बहुत ही प्यार से मेरे एक मोम्मे को चूसना शुरू किया और उसका कांपता हुआ दूसरा हाथ मेरे दूसरे मोम्मे को दबा रहा था।
शायद धीरे धीरे उसको मज़ा आने लगा और अब वो मेरे दोनों मोम्मों को बारी बारी चूसने लगा। अब उसके हाथ भी धीरे धीरे मेरे शरीर से खेलने लगे थे।
“बस ऐसे ही चूसते रहो, मेरे मोम्मों को प्यार करो, मनीष !” मैंने धीरे से उसको कहा।
अब मुझे लग रहा था कि एक कुंवारे लड़के से चुदने की मेरी इच्छा पूरी होने जा रही है, मैं बहुत ही उत्साहित थी और अपनी चूत में गीलापन महसूस कर रही थी। अब यह तो निश्चित था कि मनीष भी मुझे चोदना चाहता है।
“मैं तुमसे चुदना चाहती हूँ मनीष ! आओ चोदो मुझे और एक लड़की को अपने नीचे लिटाने का मज़ा लो !” मैंने कहा।
“आप बहुत सुन्दर हैं, शालिनी जी।” मनीष ने कहा।
“मनीष तुम मेरे मोम्मों से खेल चुके हो और अब हम दोनों चुदाई करने वाले हैं, इसलिए तुम मुझको शालू नाम से ही बुलाओ, मुझे बहुत ही अच्छा लगता है।”
“मैं नहीं जानता था कि एक बड़ी उम्र की लड़की भी इतनी गर्म और सेक्सी हो सकती है !” मनीष ने कहा।
अब मैं भी देख रही थी कि उसका लंड तम्बू की तरह उसकी पेंट में खड़ा हो चुका है और बाहर आने के लिए बेताब है,”मनीष ऐसा लगता है कि तुम्हारा यह बड़ा सा तम्बू सच बोल रहा है। चलो, अब इसको भी बाहर की हवा खाने दो। मैं जानती हूँ कि तुम भी मुझे चोदना चाहते हो,” मैंने उसको चूमते हुए कहा।
इससे पहले कि मनीष कुछ सोचता या समझता, मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और मेरे सामने ऊपर की ओर मुड़ा हुआ एक आठ इंच से भी लंबा और कोई तीन इंच मोटे गुलाबी सुपारे वाला हल्के भूरे रंग का कुँवारा लंड था और आज मैंने उस लंड के नीचे लटके हुए वीर्य से भरे टट्टों को खाली करना था।
मैंने धीरे धीरे उसकी छाती पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और उसको चूमना और चाटना शुरू कर दिया। फिर मैंने उसकी छाती पर अपनी जीभ फेरनी शुरू कर दी और नीचे जाती हुई ठीक उसके लंड के ऊपर आकर रुक गई।
मैंने उसके लंड के सुपारे को एक बार अच्छी तरह से चाटा और फिर अपनी जीभ को उसके मुँह में डाल कर उसके होठों को चूसने लगी। मनीष के हाथ अब मेरे शरीर से खेल रहे थे। मेरा एक हाथ उसकी गर्दन पर था और दूसरा उसकी गांड सहला रहा था।
कोई बीस मिनट तक उसके होठों को चूसने के बाद मैंने अपनी कांपती हुई आवाज़ में कहा,”मैं तुमको चूसना चाहती हूँ ! मैं तुम्हारे लंड को चूसना चाहती हूँ मनु। तुमको कैसा लगेगा जब मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लूंगी?”
“मैं नहीं जानता, परंतु शायद बहुत ही अच्छा लगता होगा, मेरा लंड चूसो !” मनीष से मुंह से निकला।
और मैंने उसके टट्टों को सहलाते हुए उसके लंड के सिरे पर अपनी जीभ फेरनी शुरू कर दी और उसके लंड को चाटना शुरू कर दिया।
“ओह ओह!!!!!!!!!!!!!!!” उसके मुंह से आवाज़ निकली।
तब मैंने उसके लंड को जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया। मनीष की जोर जोर से हुंकारने की आवाजें आ रही थी। हो सकता है मनीष पहली बार मुझे चोदने के बारे में संकोचित था परंतु इसमें कोई शक नहीं था कि वह अपने लंड को चुसवाने का पूरा मज़ा ले रहा था।
“ओह, शालिनी!!!!!!!!!! ओह प्लीज़ शालू !!!!!!!!” उसके मुंह से एक कराह निकली।
थोड़ी देर तक उसके लंड को चाटने के बाद मैंने उसका पूरा का पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया और उसे मुख चोदन का मज़ा देने लगी।
अब मनीष भी मेरे सिर को अपने दोनों हाथ से पकड़ कर अपने पूरे जोर से मेरा मुख-चोदन कर रहा था। जैसे ही उसे लगा कि वो झड़ने वाला है उसने अपना लंड मेरे मुंह से बाहर निकाल लिया और भाग कर बाहर जाने लगा। मैंने उसको झट से पकड़ के रोका और उसके लंड की मुठ मारने लगी।
और तभी मनीष के लंड से वीर्य कि पिचकारियाँ छुटने लगीं और पहली पिचकारी सीधी मेरे चेहरे पर गिरी, तब मैंने उसके लंड को नीचे की ओर कर दिया ओर सारा का सारा वीर्य मैंने अपने मोम्मों ओर पूरे शरीर पर गिरने दिया।
“इतनी जल्दी झड़ने के लिए मैं माफ़ी चाहता हूँ पर तुमने मुझे इतना उत्तेजित कर दिया कि मैं अपने आप को रोक नहीं सका।” मनीष के कहा।
उसका ढीला होता हुआ लंड अभी भी मेरे हाथ में था और मैं अभी भी उसको आगे पीछे कर के उसकी मुठ मार रही थी।
जब उसका लंड पूरी तरह से बैठ गया तो मैंने मनीष को अपने ऊपर लिटा लिया और उसकी गर्म सांसों का स्पर्श महसूस करने लगी। हम दोनों उसके वीर्य से गीले थे। मेरे हाथ उसकी पीठ को सहला रहे थे। मैंने सोचा कि कितने लड़के मेरे लंड चूसने से इतने खुश नहीं हुए और आज एक कुंवारे लड़के के लंड ने इतना वीर्य छोड़ा कि वो मेरे लंड चूसने से बहुत ही उत्साहित हो गया। थोड़ी देर के बाद मैंने
हम दोनों को गीले तौलिये से साफ़ किया। उसकी मौखिक कक्षा अभी खत्म नहीं हुई थी और उसके बाद तो अभी उसकी व्यावहारिक कक्षा शुरू होनी थी।
तभी मैंने उसको चूत चाटने के बारे में पूछा।
पढ़ते रहिए !

(05-16-2013 08:57 AM)  Sex-Stories 3
जब उसका लण्ड पूरी तरह से बैठ गया तो मैंने मनीष को अपने ऊपर लिटा लिया और उसकी गर्म सांसों का स्पर्श महसूस करने लगी। हम दोनों उसके वीर्य से गीले थे। मेरे हाथ उसकी पीठ को सहला रहे थे। मैंने सोचा कि कितने लड़के मेरे लण्ड चूसने से इतने खुश नहीं हुए और आज एक कुंवारे लड़के के लण्ड ने इतना वीर्य छोड़ा कि वो मेरे लण्ड चूसने से बहुत ही उत्साहित हो गया। थोड़ी देर के बाद मैंने हम दोनों को गीले तौलिये से साफ़ किया। उसकी मौखिक कक्षा अभी खत्म नहीं हुई थी और उसके बाद तो अभी उसकी व्यावहारिक कक्षा शुरू होनी थी।
तभी मैंने उसको चूत चाटने के बारे में पूछा।
मनीष ने पूछा- क्या कभी किसी ने आपकी चूत चाटी है?
यहाँ मैं कहना चाहूंगी कि चुदवाने के साथ मुझे अपनी चूत चटवाने का भी शौक है और पूजा चूत चाटने में बहुत ही बढ़िया है।
मैं अपनी पीठ के बल अपनी टाँगें खोल कर लेट गई- मेरी चूत चाटो, मनीष ! मैंने उसको जोर देते हुए कहा और उसके सिर को अपनी चूत की ओर दबाने लगी।
मनीष ने अपनी जीभ मेरी टांगों के ऊपर फेरनी शुरू कर दी और मैं सिहर उठी।
तुम ठीक तो हो ना शालिनी? मनीष ने मेरी सिहरन को समझते हुए पूछा।
ओह हहह मनीष, बहुत अच्छा लग रहा है, रुकना नहीं ! बस ऐसे ही चाटते रहो ! मैंने कहा।
वह मेरी चूत के आसपास चाटता रहा और बीच बीच में मेरी जांघें भी चाट लेता था। धीरे धीरे उसकी जीभ मेरी चूत के होठों पर पहुँच गई।
और जैसे ही उसने मेरी चूत को चाटना शुरू किया मैं अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई, जोर से उसका सिर अपनी जांघों के बीच में दबा लिया और जैसे ज्वालामुखी फटता है वैसे ही अपना पानी छोड़ने लगी।
थोड़ी देर के बाद जब मेरी साँसें सामान्य हो गई तो मैंने उसको अपनी तरफ खींचते हुए कहा- तू बहुत ही बढ़िया चूत चाटता है ! और अब कोई लड़की चूत चुसवाने से खुश ना हो तो इसमें उस लड़की का ही कसूर होगा !
वह सिर्फ मेरी ओर देख कर मुस्कुराया और मेरे होठों को चूसने लगा।
मैंने देखा कि उसका लण्ड एक बार फिर खड़ा हो चुका था। उसका लण्ड मुझे इतना अच्छा लग रहा था कि मैं उसको अपनी गीली चूत में लेने के लिए बेताब थी।
“चलो चुदाई करते हैं !” मैंने कहा।
मनीष को शायद मौखिक सेक्स का मज़ा आया हो परंतु व्यावहारिक सेक्स के बारे में वह कुछ घबराया हुआ सा लग रहा था।
मैंने उसको चूमते हुए कहा- घबराओ नहीं ! सब बहुत ही मज़ेदार होगा।
मैं एकदम गर्म थी और जोर जोर से चुदना चाहती थी। एक बार तो मुझे लगा कि शायद मुझे इस लड़के का बलात्कार ही करना पड़ेगा। जबकि उसका खड़ा हुआ लण्ड मुझे कुछ और ही कहानी बता रहा था। उसके चेहरे को देखकर मैं समझ गई कि यह बिल्कुल ही अनाड़ी है और मैंने उसी समय सोच लिया कि मैं ही उसके ऊपर चढ़ कर उसको चोद दूँगी।
“अब तुम्हें बहुत ही मज़ा आएगा, मनीष !” मैंने उसे मुस्कुराते हुए कहा।
और फिर उसको नीचे लिटा कर मैं उसके लण्ड पर सवार हो गई, अपनी दोनों टांगें उसके दोनों ओर करके बिना उसके चेहरे से अपनी नज़र हटाये हुए मैंने उसके बहुत ही कड़क लण्ड को अपनी चूत के मुंह पर रखा और धीरे धीरे उस पर बैठ गई।
जब उसका लण्ड पूरी तरह से मेरी चूत में घुस गया तो मैंने धीरे धीरे ऊपर नीचे होना शुरू कर दिया और फिर अपने उछलने की गति बढ़ाने लगी। मैं उसके होंठों को चूमने के लिए उसके ऊपर अधलेटी हो गई और मनीष ने मेरी कमर पर अपनी बाहें लपटे दीं ताकि हम एक दूसरे के होठों को चूसते रहें।
“ओह !!! शालू, तुम बहुत ही सेक्सी हो ! इतना अच्छा लग रहा है कि मैं बयान ही नहीं कर सकता !” मनीष ने कहा।
मुझे नहीं मालूम कि कभी मनीष ने मुझे चोदने का सपना देखा हो ! या ना देखा हो ! परंतु मैंने हमेशा से उससे चुदने का सपना देखा था। और आज उस उन्नीस साल के लड़के का कुँवारा लण्ड मेरी सताईस साल की अनुभवी चूत के अंदर था।
और अब जब उसका लण्ड मेरी चूत में था तो लग रहा था कि वह हर एक पल का मज़ा ले रहा था।
जहाँ तक मेरी बात है, मैं तो उसके लण्ड का मज़ा ले ही रही थी।
“ओह !!! शालू…..! मनीष की कराह निकली।
जब मैंने अपनी प्यासी चूत के अंदर उसके लण्ड पर जोर जोर से धक्के देना शुरू कर दिया तो “और जोर से चोदो !” उसके मुंह से निकला।
“तुम्हें अच्छा लगा, मनीष?” मैंने और जोर से उसके लण्ड की सवारी करते हुए कहा।
“तुम्हें इस तरह तुम्हारे लण्ड का चुदना अच्छा लगा? ओह!!!!!! मनीष ! मुझे भी एक जोरदार चुदाई की बहुत ही ज्यादा जरूरत थी। तुम्हारा लण्ड से मेरी चूत में बहुत ही मज़ा आ रहा है। बस ऐसे ही अपना लण्ड मेरी चूत में हमेशा डाले रहो!” मैं कराह कर कह रही थी।
मैं अपने पूरे जोर से उसके लण्ड की सवारी कर रही थी और एक बार फिर मुझे अपने चरम सीमा पर पहुँचने का अंदाजा हो गया था।
“ओह मनीष, मैं झड़ने वाली हूँ !” मैं जोर से चिल्लाई और अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई।
उस समय मेरे जोर जोर से उछलने से एक बार तो ऐसा लग रहा था कि बेड ही टूट कर गिर जायेगा। मैं देख रही थी कि मनीष भी मेरे झड़ने का मज़ा ले रहा है। अब वह एक लड़की को चुदाई के दौरान झड़ने का अनुभव ले रहा था। अब यह तो वही जानता था कि उसको सबसे ज्यादा मज़ा कब आया जब मैंने उसका लण्ड चूसा या जब उससे अपनी चूत चुसवाई या जब मैं उसको चोदते हुए झड़ी, तब।
अब जब मनीष चुद चुका था मैं उसको आदमी मानने लगी।
पढ़ते रहिए !

मैं अपने पूरे जोर से उसके लण्ड की सवारी कर रही थी और एक बार फिर मुझे अपने चरम सीमा पर पहुँचने का अंदाजा हो गया था।
“ओह मनीष, मैं झड़ने वाली हूँ !” मैं जोर से चिल्लाई और अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई।
उस समय मेरे जोर जोर से उछलने से एक बार तो ऐसा लग रहा था कि बेड ही टूट कर गिर जायेगा। मैं देख रही थी कि मनीष भी मेरे झड़ने का मज़ा ले रहा है। अब वह एक लड़की को चुदाई के दौरान झड़ने का अनुभव ले रहा था। अब यह तो वही जानता था कि उसको सबसे ज्यादा मज़ा कब आया जब मैंने उसका लण्ड चूसा या जब उससे अपनी चूत चुसवाई या जब मैं उसको चोदते हुए झड़ी, तब।
अब जब मनीष चुद चुका था मैं उसको आदमी मानने लगी।
एक बार जब मेरी साँसें सामान्य हो गई तो मैं उसके ऊपर से उतर कर बेड पर अपनी टांगें खोल कर लेट गई।
“अब तुम्हारी बारी है, मेरी जान !” अपनी चूत उसको दिखाते हुए कहा।
“मैं कहाँ और कैसे डालूँ…” वह पूछने लगा।
“तुम सिर्फ मेरे ऊपर आ जाओ और अपना लण्ड मेरी चूत में डाल कर मुझे चोदो, मनीष। बाकी मैं सब कुछ कर लूंगी।” मैंने उसको उत्साहित किया।
जैसे ही वह मेरी टांगों के बीच में आया, मैंने उसके लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रखा और उसको एक धक्का मारने को कहा और उसको अपने ऊपर लिटा लिया। फिर मैंने नीचे से अपनी गाण्ड को धीरे धीरे उछालना शुरू कर दिया और अपने दोनों हाथों से मनीष की उभरी हुई गाण्ड को सहलाना शुरू कर दिया।
मैंने उसके होठों को चाटते और चूसते हुए कहा- चोदो मुझे ! जोर से चोदो मुझे ! मनीष, मैं जानती हूँ कि तुम मुझको चोद सकते हो। मैं हमेशा से तुमसे चुदने के सपने देखती थी !
क्या? तुम मेरे साथ चुदाई के बारे में सोचती थी? हैरानी से अपना लण्ड मेरी चूत के अंदर बाहर करते हुए उसने कहा।
“हाँ !! मनीष हाँ !! चलो अब मुझे चोदो, जोर जोर से चोदो, अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में अंदर तक डाल दो !”
और अब मनीष की चोदने की गति बढ़ने लगी।
“तुम्हें ऐसे अच्छा लगता है? तुम्हें ऐसे चुदने में मज़ा आता है, शालू?” मनीष ने पूछा।
“हाँ ! बस बोलो मत, सिर्फ प्यार करो मुझे, चोदो मुझे, और अंदर तक चोदो ! और जोर से और तेज़!” मैं उसको और भी उत्साहित करने लगी।
वह अपना लण्ड अपनी जड़ तक मेरी चूत में पेल रहा था, उसके टट्टे मेरी गाण्ड को छू रहे थे। मैं फिर से अपनी चरम सीमा पर पहुँचने वाली थी।
“ओह!!! मनीष ! हाँ !!!! चोदो मैं झड़ने वाली हूँ, ऐसे ही जोर जोर से चोदते रहो!!!!!!” मैं जोर से चिल्लाई।
उसने अपनी गति बढ़ा दी और अपनी पूरी ताकत से मुझे चोदने लगा। मैंने अपनी टांगें उसकी पीठ लपेट दी और झड़ने लगी,”ओह मनीष, और जोर से चोद डालो मुझे, आज मेरी चूत को फाड़ दो!”
अब मैं उसको और भी उत्साहित कर रही थी। अभी तक बहुत बार मैं चरम सीमा पर पहुँची हूँ परंतु आज तक जितने बार भी मैं चुदी हूँ कभी भी इतनी स्खलित नहीं हुई। हम बहुत ही कामुकता और तीव्रता से चुदाई कर रहे थे। अब मनीष भी चुदाई का इतना ही आनंद ले रहा था जितना कि मैं।
तभी मनीष ने चोदने की गति बढ़ा दी और अपने अनुभव से मैं समझ गई कि अब वह झड़ने वाला है।
“मैं झड़ने वाला हूँ !” मनीष के मुंह से निकला।
मैंने उसके होठों को चूसते हुए कहा,”मेरे अंदर ही झर जाओ, मनु। मैं तुम को किसी लड़की की चूत में झड़ने का मज़ा देना चाहती हूँ।”
और तभी उसके लण्ड से वीर्य की पिचकारियाँ छूटने लगी। उसका गरम वीर्य मेरी गरम चूत को बहुत ठंडक पहुंचा रहा था। हम दोनों लगभग एक साथ ही झड़े और वो तब तक मेरी चूत में लण्ड अंदर बाहर करता रहा जब तक कि उसके टट्टे खाली नहीं हो गए और फिर मेरे ऊपर ही गिर गया।
थोड़ी देर के बाद मनीष ने कहा,”मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि किसी लड़की को चोदने में इतना मज़ा आता है।”
“परंतु क्या मैंने ठीक से चोदा?”
“चूंकि तुम्हारी पहली बार थी इसलिए तुम बहुत ही बढ़िया रहे !” मैंने मुस्कराते हुए कहा।
और यह सच भी था क्योंकि बहुत समय के बाद किसी लड़के ने मुझे एक ही दिन में इतनी बार चरमसीमा पर पहुँचाया था।
उसके बालों को सहलाते हुए मैंने कहा,”तुम बहुत ही जल्दी सीखने वालों में से हो पर जब सेक्स का मामला हो तो तुमको और भी बहुत कुछ सीखना पड़ेगा जैसे चोदने के नए नए आसन और लड़की को चरम सुख देने के नए नए तरीके।”
थोड़ी देर के बाद उसके हाथ फिर से मेरे मोम्मों से खेल रहे थे। चूँकि हम दोनों थके हुए थे इसलिए मैंने उसको नहा कर आराम करने को कहा और खुद भी नहा कर रसोई में बाकी का काम खत्म करने लगी।
मैंने उसको खाने के लिए पूछा तो उसने कहा- थोड़ी देर के बाद खा लेंगे।
तब मैंने दोनों के लिए मिल्क-शेक बनाया और हम दोनों फिर से बेडरूम में टेलिविज़न देखने लगे।
“मनीष, क्या तुम गाण्ड मारने के बारे में भी कुछ जानते हो?” मैंने धीरे से उसके गाल को चूमते ही पूछा।
उसने मुझे धक्का दे कर नीचे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया और फिर कहने लगा,”शालिनी, तुम तो जानती हो आज पहली बार मैंने किसी लड़की को छुआ है, तब गाण्ड मारने के बारे मैं कैसे जानूंगा?”
तब उसने पूछा,”क्या तुमने गाण्ड भी मरवाई है?”
“हाँ बहुत बार !” मैंने जवाब दिया।
“तुमको कैसा लगता है जब कोई तुम्हारी गाण्ड मारता है? मेरा मतलब क्या तुम्हें दर्द नहीं होता?” मनीष ने पूछा।
“होता है, परंतु जब लण्ड तथा गाण्ड दोनों अच्छी तरह से चिकने हों और अगर एक बार लड़की लण्ड की मोटाई की अभ्यस्त हो जाए तो मज़ा भी आता है।” मैंने कहा।
“मैं तुम्हारी गाण्ड के बारे में नहीं जानता पर तुम्हारी चूत बहुत ही तंग और मस्त थी। मुझे बहुत ही मज़ा आ गया।” मनीष ने कहा।
उससे गाण्ड के बारे में बातें करते हुए उसकी आँखों की चमक से पता लग रहा था कि मनीष गाण्ड मारने की कोशिश भी करना चाहता था।
“अगर तुम कभी भी गाण्ड मारने का अनुभव करना चाहते हो तो मैं हमेशा तुम्हारी मदद करने के लिए तैयार हूँ।” मैंने कहा।
मैंने “कभी भी” शब्द का प्रयोग इसलिए किया कि शायद वो थक गया होगा। परंतु मैं गलत थी।
“क्या हम अभी कोशिश कर सकते हैं?” मनीष के मुंह से निकला।
हालाँकि मनीष का लण्ड पूरी तरह से खड़ा नहीं था परंतु पूरी तरह से ढीला भी नहीं था।
“क्यों नहीं ! अगर तुम चाहो तो मुझे सब कुछ स्वीकार है।” मैंने उसके लण्ड को अपने हाथों से मसलते हुए कहा।
मैंने उसको बाथरूम से तेल लाने को कहा। जैसे ही वह तेल की शीशी लेकर आया, मैंने उसको चूमना-चाटना शुरू कर दिया ताकि उसका लण्ड एकदम कड़क हो जाए।
मैंने उसके लण्ड को भी चूमना और चाटना शुरू कर दिया और जब उसका लण्ड एकदम से खड़ा और कड़क हो गया तो मैंने बहुत सारा तेल अपनी हथेली में डाल कर उसके लण्ड की मालिश करनी शुरू कर दी।
अब मनीष का लण्ड का सिरा तेल से चमक रहा था, तब मैंने उसको कहा,”चलो, अब मेरी गाण्ड में अपनी अंगुली से तेल लगाओ और इतना चिकना कर दो कि तुम्हारा लण्ड मेरी गाण्ड में आसानी से घुस जाए।”
और तब मनीष ने अपने कांपते हुए हाथ से अपनी एक अंगुली पर तेल लगा कर मेरी गाण्ड में डालनी शुरू की तो मैंने कहा,”कम से कम दो अँगुलियों में तेल लगा कर मेरी गाण्ड में डाल। !”
जब मुझे ऐसा लगा कि मेरी गाण्ड इतनी चिकनी हो चुकी है कि लण्ड ले सकती है तो मैंने उसके तेल से भीगे हुए लण्ड को अपनी गाण्ड के छेद पर रखा और उसको धक्का मारने को कहा।
मनीष एक बार में ही अपना पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में डालना चाहता था परंतु मैंने कहा,” गाण्ड में लण्ड धीरे धीरे ही डाला जाता है ताकि लड़की की गाण्ड भी लण्ड के आकार प्रकार की अभ्यस्त हो जाए और लड़की को ज्यादा दर्द भी ना हो।”
मेरी बात को मानते हुए उसने धीरे से अपने लण्ड मेरी गाण्ड में डालना शुरू किया और जैसे ही उसके लण्ड का सिरा मेरी गाण्ड में घुसा तो मैंने कहा,”अब रुक जाओ ताकि मेरी गाण्ड लण्ड की अभ्यस्त हो जाए।”
थोड़ी देर के बाद मनीष ने धीरे धीरे अपना लण्ड मेरी गाण्ड में डालना शुरू कर दिया और अपना आधे से ज्यादा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। ओह, आह की आवाजें मनीष के मुंह से निकल रही थी। “बहुत दर्द हो रहा है तो अपना लण्ड बाहर निकाल लो मनीष, फिर कभी कर लेंगे, आज रहने दो।” मैंने कहा।
“नहीं, अब तो मैं तुम्हारी इतनी बड़ी गाण्ड मार कर ही रहूँगा।” मेरी कमर को पकड़ कर उसने जोर जोर से झटके मारते हुए कहा,”तुम्हारी गाण्ड बहुत ही मस्त है शालू ! बहुत अच्छा लगा रहा है।” मेरी पीठ पर चूमते हुए उसने कहा।
“और जोर से डालो ! मेरी बड़ी गाण्ड को जोर जोर से चोद दो ! अपना पूरा का पूरा लण्ड मुझे दे दो ! मनीष, चोदो मुझे !”
उसकी जोर जोर से हुंकारने की आवाजें आ रहीं थी और धीरे धीरे उसने अपना पूरा आठ इंच का लण्ड मेरी गाण्ड में डाल दिया और अपने पूरे जोर से मेरी गाण्ड मारने लगा। मैं उसके टट्टों को अपनी चूत को छूते हुए महसूस कर रही थी।
“बस ऐसे ही चोदो, जानू, मेरी बड़ी गाण्ड को ऐसे ही चोदो जैसे तुमने मेरी चूत चोदी थी !” अब मैं भी उससे ऐसी भाषा में बात कर रही थी ताकि वो और भी उत्साहित हो जाये।
“मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी किसी लड़की की गाण्ड भी मारूंगा। तुम्हारी गाण्ड मारते हुए बहुत अच्छा लग रहा है।” मनीष ने कहा।
“ओह मनीष ! मुझे रंडी की तरह चोदो !” मैंने जोर से चिल्लाते हुए कहा।
मनीष ने अब अपनी गति बढ़ानी शुरू कर दी। उधर मनीष मेरी गाण्ड मार रहा था और दूसरी ओर मेरा हाथ मेरी चूत से खेल रहा था।
तभी मुझे लगा कि एक बार फिर से झड़ने वाली हूँ। जिज्ञासुओं के लिए बता दूँ कि गाण्ड मरवाते हुए भी चरम सीमा पर पहुँचने का अपना ही आनंद है। और उस दिन मनीष ने मुझे कितनी बार चरमसीमा पर पहुँचाया में गिनती ही नहीं कर पाई।
“मनीष, चोदो, ओर चोदो !! अपने बड़े लौड़े से मुझे चोदते रहो !” मैंने चिल्ला रही थी। “मैं झड़ने वाली हूँ!!!!!!!!!!” मैं अपनी पूरे जोर से चिल्लाई और अपनी पूरी शक्ति से तकियों में सिर दबा लिया ताकि मेरा सिर दीवार पर ना टकराए।
मैं झड़ने लगी और मनीष को एक नया अनुभव मिलने लगा,”मैं झड़ने वाला हूँ, शालू !” मनीष ने कहा,”मैं भी तुम्हारी मस्त गाण्ड में झड़ने वाला हूँ !”
“झर जाओ ! मेरी गाण्ड में ही झर जाओ! मैं तुम्हारे वीर्य को अपनी गाण्ड में महसूस करना चाहती हूँ !” मैंने कहा।
बस मेरा इतना ही कहना था कि मनीष के लण्ड से गरम गरम वीर्य की पिचकारियाँ छुटने लगी और मेरी गाण्ड को भरने लगी और जब उसका लण्ड पूरी तरह झर गया तो वो मेरे ऊपर ही गिर गया। “इस अनुभव को मैं अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं भूलूँगा !” मनीष ने धीरे से मेरी गर्दन को चूमते हुए कहा।
“मैं भी ! तुम जानते हो जब कोई लड़की चुदाई के दौरान झड़ती है तो इसका मतलब है कि तुम लड़की को पूरा मज़ा दे रहे हो !” मैं मुस्कुराते हुए कहने लगी।
“सच? क्या तुमको मज़ा आया? क्या मैंने अच्छे से चोदा?” मनीष ने पूछा।
“मनु, मैं बहुत ही संतुष्ट हूँ।” मैंने कहा और उसको अपने ऊपर से हटाती हुई उसके साथ ही लेटे लेटे उसको चूमने लगी,”जब भी तुम चाहो, यहाँ आकर मज़ा ले सकते हो।” तभी थोड़ी देर के बाद मेरे मोबाइल पर पूजा का फोन आया और मैंने मनीष को तैयार होने को कहा और हम दोनों ने स्नान किया और अपने अपने कपड़े पहन लिया।
मनीष मुझे उसको सेक्स के बारे में अनुभव देने के लिए बार-बार धन्यवाद दे रहा था और मैं उसको एक कुंवारे लड़के से चुदने के सपने के बारे में धन्यवाद दे रही थी।
उसके बाद मनीष मेरा बहुत ही खास प्यार बन गया जिसको मैंने पूजा के साथ कभी भी नहीं बांटा।
हम दोनों ने कई सप्ताहांत एक साथ बिताए और मैं अलग अलग आसन में चुदवाती थी। इस प्रकार मेरा एक कुंवारे लड़के से चुदने का सपना पूरा हुआ।

पढ़ते रहिए !

एक बार मनीष ने मुझे फोन करके मिलने की इच्छा की। मैंने उसे शाम को मिलने के लिये जगह बता दी।
शाम को कोई 07.00 बजे मनीष आया तो उसके साथ एक लड़का और भी था। मनीष ने परिचय करवाते हुए बताया- यह मेरे मामा का लड़का आशीष है और इसी साल इसने भी दिल्ली में कॉलेज में दाखिला लिया है।
हम तीनों ने ठण्डा पेय लिया और बातें करने लगे, जैसे घर के बारे में, पढ़ाई के बारे में इत्यादि।
मैंने देखा कि आशीष भी मनीष से सेहत के बारे में उन्नीस नहीं था। वैसी ही फूली हुई छाती चौड़े कंधे छोटे छोटे बाल।
मैं सोचने लगी कि क्या उसका लंड भी मनीष के लंड की तरह दमदार होगा या नहीं।
फिर मैंने खाना मंगवा लिया और खाना खाकर वे दोनों चले गए।
अगले दिन मैंने मनीष को फोन किया और पूछा,” मनु, कल शाम को मुझे लगा कि तुम मुझसे कुछ कहना चाहते थे परंतु शायद आशीष के सामने कह नहीं सके। बताओ क्या बात थी?”
मनीष ने कहा,”शालिनी, अब मेरा आप से अकेले में मिलना मुश्किल है। क्योंकि जब पिताजी और मामा जी आशीष के दाखिले के समय आये थे तब उन लोगों ने हम दोनों को एक कमरा किराये पर ले दिया है और अब चूँकि आशीष भी मेरे साथ ही रहता है इसलिए उसके सामने मैं आपके पास नहीं आ सकता !”
मैंने विचार किया कि मनीष की बात ठीक थी क्योंकि किसी को भी हमारे संबंधों के बारे में पता नहीं है और अगर आशीष को पता चला तो हो सकता है कि मनीष के लिए समस्या खड़ी हो जाए। अत: मैंने उसको कहा कि अगले दिन सुबह कॉलेज से जल्दी निकल थोड़ी देर के लिये मेरे पास आ जाए। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
मैंने आधे दिन की छुट्टी ले ली। मनीष अगले दिन सुबह 10.00 बजे आ गया। चाय पीते हुए हम दोनों इस समस्या पर विचार करने लगे। मैंने मनीष से पूछा,”तुम आशीष को कितनी अच्छी तरह जानते हो?”
“हम दोनों में बहुत गहरा प्यार है क्योंकि मैं उससे केवल एक साल ही बड़ा हूँ। हम दोनों बचपन से एक साथ बड़े हुए हैं। हम दोनों आज तक एक दूसरे को अपना हर राज़ भी बताते हैं।” मनीष ने जवाब दिया।
“मतलब तुमने उसे हम दोनों के बारे में सब कुछ बतला दिया है?” मैंने पूछा।
“नहीं उसे हमारे शारीरिक संबंधों के बारे में भनक भी नहीं है। यही तो मेरी परेशानी है कि कभी उसको पता चल गया तो क्या होगा?” मेरा हाथ पकड़ कर मनीष कहने लगा।
मैंने मनीष का हाथ दबाते हुए उसके और पास होते हुए कहा,”घबराओ नहीं ! सोचते हैं कुछ ना कुछ हल जरूर निकल जाएगा। परंतु आज हमारे पास ज़्यादा समय नहीं है क्योंकि मुझे भी दो बजे तक अपने ऑफिस पहुँचना है। मुझे आशीष के बारे में कुछ और बताओ। कभी तुम दोनों की लड़कियों के बारे में कोई बात हुई हो?” मैंने पूछा।
“हम दोनों ने कभी आपस में लड़कियों के बारे में बातें नहीं की हैं परंतु मैंने बहुत बार उसे लड़कियों को घूरते हुए देखा है।” मनीष ने जवाब दिया।
“ठीक है आज से जब भी मौका मिले तुम उससे लड़कियों के बारे में भी बात किया करो। मैं रचना को पटाती हूँ कि एक बार तुम्हें और आशीष को खाने का न्योता दे कर बुलाते हैं और फिर उसे रचना के हवाले कर देंगे। बाकी सब रचना स्वयं ही कर लेगी।”
मैं मनीष को सिखाने लगी।
“इन सब बातों का मतलब सिर्फ यही निकलता है कि मुझे आशीष को अपना राजदार बनाना ही पड़ेगा।” मनीष ने ठंडी आह भरते हुए कहा।
“हाँ, और दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है।” मैंने बात खत्म करके उठते हुए कहा।
फिर मैं भी तैयार हुई और हम दोनों, मैं अपने ऑफिस के लिए और मनीष अपने कॉलेज के लिए निकल पड़े। रात को मैंने रचना से बात की और उसे मनीष और आशीष के बारे में बताया। मैंने उसे मनीष के बारे में सब सच बता दिया कि मैं मनीष से कैसे मिली, कैसे मैंने उसका कुँवारापन तोड़ा और कैसे कैसे मैंने उसके साथ चुदाई की है। साथ ही साथ यह भी बताया कि किस प्रकार आशीष के आने से मनीष चिंतित है और अब मैं चाहती हूँ कि रचना आशीष को पटा ले ताकि मनीष की राह भी आसान हो जाए।
रचना कहने लगी,” शालू तू उन दोनों को शनिवार सुबह बुला ले। शनिवार की मेरी भी छुट्टी है, दो दिन तक जम कर उन दोनों के साथ मज़ा करेंगे !”
मुझे भी यह सुझाव अच्छा लगा और मैंने मनीष को फोन किया,” मनीष क्या तुम दोनों सप्ताहांत हमारे साथ बिता सकते हो?”
“मैं आज शाम को आशीष से बात करके आपको बता दूँगा।” मनीष ने जवाब दिया।
शाम को मनीष ने फोन करके कहा कि आशीष मान गया है और उसने आशीष को केवल इतना ही बताया है कि खाने-पीने का प्रोग्राम है।
“यह तुमने बहुत बढ़िया किया जो सिर्फ खाने-पीने की बात ही की है। उसके कपड़े तो रचना उतार लेगी।” मैंने जवाब दिया।
शनिवार को कोई 11.00 बजे मनीष और आशीष दोनों आ गए। मैंने उन्हें बिठाया और रचना का परिचय करवा कर नाश्ते का पूछ कर चाय बना लाई। दोनों ने कहा कि वे नाश्ता कर के आये हैं।
मैं उन दोनों से बातें करने लगी। मैंने देखा कि आशीष कनखियों से मुझे और रचना को घूर कर देख रहा था क्योंकि हम दोनों सिर्फ नाईटी में हीं थीं। कुछ देर के बाद रचना ने तैयार होकर आशीष से बाज़ार तक चलने को कहा। पहले आशीष थोड़ा झिझका परंतु फिर मनीष के कहने पर चला गया।
जैसे ही वे दोनों बाहर निकले हम दोनों आपस में चिपक गए और चूमा चाटी करने लगे। मैंने मनीष को बताया कि रचना आशीष को चोदना चाहती है।
मनीष कहने लगा कि हो सकता है आशीष इस पर सहमत ना हो।
मैंने कहा,” वो सब कुछ तुम रचना पर छोड़ दो। दरअसल रचना ने जानबूझ कर आशीष को साथ चलने के लिए कहा है। तुम देखना, जब वे दोनों वापिस आयेंगे तो आपस में कैसे बातें कर रहे होंगे।”
मैंने मनीष को कहा,” अब जल्दी से अपने लंड के दर्शन करने दो !” कहते हुए मैंने उसकी पैंट की ज़िप खोलनी शुरू कर दी और उसका लंड बाहर निकाल कर सहलाते हुए चूसने लगी।
थोड़ी देर के बाद रचना और आशीष वापिस आये तो दोनों के हाथ में सामान था।
मैंने पूछा तो रचना बोली,” आशीष और मनीष बियर पी लेते हैं इसलिए खरीद ली। फिर जूस भी खत्म हो गया था और आज हम खाने-पीने वाले भी चार हैं इसलिए हम खाने का सामान भी अभी खरीद लाए हैं।”
रचना ने मुझे आँख मारी तो मैं समझ गई कि उसने आशीष को पटा लिया है।
फिर रचना रसोई से गिलास आदि लेने गई तो मैंने मनीष को फुसफुसाते हुए कहा,” आज से आशीष रचना का पुजारी बन जाएगा।” रचना ने सुझाव दिया कि मेज़ को एक तरफ रख दिया जाए ताकि आने जाने में ठोकर ना लगे। तब उन दोनों ने मेज़ को एक ओर कर दिया और आशीष रचना के हाथ से लेकर सामान मेज़ पर रखने लगा।
रचना ने आशीष को फ्रिज में से बियर लेकर आने को कहा और दो गिलासों में डालने को कहा। आशीष ने प्रश्नसूचक दृष्टि से उस देखा तो रचना हंसकर बोली- हम दोनों बियर नहीं पीती हैं कुछ और पीती हैं।
आशीष ने दो गिलासों में बियर डाली और रचना चिप्स का पैकेट खोलने लगी। जब मनीष और आशीष ने एक एक गिलास खत्म कर लिया तो रचना ने आशीष का गिलास भर दिया और मुझे कहने लगी,” शालू हम दोनों के लिये भी थोड़ी थोड़ी वोदका डाल ले !”
मैंने रचना और अपने लिये वोदका और जूस डाला तो रचना ने अपना गिलास उठाया और साथ ही आशीष का हाथ पकड़ कर उसे बाहर बालकोनी में ले जाने लगी।
मनीष ने मुझे देखा तो मैं कहा,” चिंता मत करो अभी आगे आगे देखो क्या होता है !”
कुछ मिनटों के बाद रचना अंदर आई और मनीष के पीछे खड़ी होकर उसके कंधों को दबाते हुए झुक कर एक ओर से उसके गाल को चाटते हुए बोली,” आशीष का कुँवारा लंड तो आज मैं पूरा निचोड़ दूँगी।”
फिर बाहर जाते हुए हम दोनों को कहने लगी,” मनीष तुम आशीष के सामने ऐसे ही दिखाना जैसे तुम भी आज पहली बार लड़की चोद रहे हो।”कुछ समय बाद जब रचना और आशीष दोनों अंदर आये तो रचना आशीष से सटते हुए बोली,” शालू, आज से आशीष मेरा सबसे अच्छा दोस्त है। हम दोनों की जोड़ी खूब जमेगी।”
फिर रचना आशीष की कमर में हाथ डाल कर उसके साथ चिपक कर बैठ गई। मनीष को उठ कर मेरे साथ बैठना पड़ा और हम चारों बातें करते हुए खाने पीने लगे।
रचना कहने लगी,” यार शालू, कुछ संगीत लगा ना। कुछ मज़ा आयेगा।”
मैंने एक सीडी लगा दी तो रचना उठ कर थिरकने लगी और आशीष को भी खींच कर उठाने लगी। मैं और मनीष भी उन दोनों के साथ थिरकने लगे। मैंने देखा रचना ने आशीष की कमर में दोनों हाथ डाल रखे थे और उसके साथ चिपक चिपक कर थिरक रही थी और उसको बीच बीच में चूम भी लेती।
आशीष का शर्म सी आ रही थी परंतु रचना जानबूझ कर उसे और चूम चाट रही थी। कुछ समय तक ऐसे ही नाचने के बाद हम सब शांत हो कर बैठ गए। थोड़ी देर बाद रचना आशीष को अंदर बेडरूम में ले जाने लगी। दोनों अंदर गए तो रचना ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया। मैंने मनीष को चुप रहने का इशारा किया और हम दोनों दबे पांव दरवाज़े से कान लगा कर रचना और आशीष की बातें सुनने लगे।
“ओह्ह आशीष आई लव यू !! अम्म्म !!! मम्म्म !!! मेरे आशू मेरी जान !!! पुच्च पुच्च !!! मुझे प्यार करो आशू !!!” रचना की आवाजें आ रहीं थी। “दबा दो इनको !! मसल दो इनको !!! खा जाओ इन दोनों को आज !!! और जोर से दबाओ !!! चोद दो इनको भी !!! उम्म्म !!! उम्म्म !!! घुसने दो मुँह में भी !!!” शायद आशीष रचना के मोम्मे चोद रहा था।
उन दोनों की अंदर से चूमा चाटी की आवाजें आ रहीं थीं और बाहर मैं और मनीष बिना कोई आवाज़ किये एक दूसरे को चूम चाट रहे थे।
कुछ देर बाद दरवाज़ा खुलने की आवाज़ हुई तो हम दोनों एकदम वहाँ से हटकर सोफे पर बैठ गए। रचना और आशीष बाहर आये तो हमने देखा कि रचना सिर्फ पैंटी में थी और आशीष भी सिर्फ अंडरवियर में था और उसका लंड तना हुआ था।
रचना उसे साथ लेकर फिर सोफे पर बैठ गई और हम दोनों को कहने लगी,” अगर तुम दोनों चाहो तो अंदर जाकर मस्ती कर लो। हम दोनों तो अब यहीं पर सब कुछ करेंगे ! क्यों आशू?”
और फिर हमारे सामने ही उसकी फूली हुई छाती पर हाथ फेरते हुए उसके छोटे छोटे मर्दाना चुचुक चाटने लगी और आशीष के मुँह से जोर जोर से सिसकारियाँ निकल रही थी।
आशीष के होठों को फिर से चूसते हुए रचना कहने लगी,” तुम्हारे होठों में कितना रस भरा हुआ है आशु ! आज तो मैं इनका पूरा रस पी जाऊँगी !!!”
“और इसके लंड के रस को नहीं पिएगी!?!” मैंने कहा।
“वो भी पियूंगी !! और मेरी चूत भी उस रस का रसपान करेगी !!” रचना उन्माद में बोल रही थी।
फिर मैं और मनीष अंदर बेडरूम में चले गए और हम दोनों जानवरों की तरह एक दूसरे को चूमते चाटते हुए एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। थोड़ी देर के बाद हम दोनों भी बाहर आ गए और सोफे पर बैठ कर चूमा-चाटी करने लगे।
“मनीष यहाँ आओ मुझे तुम्हारे होठों का रस भी पीने दो !” मनीष की ओर हाथ बढ़ाते हुए रचना बोली।
मैंने मनीष को उठ कर जाने का इशारा किया और आशीष को अपने साथ आकर बैठने का इशारा करने लगी। अब मनीष और आशीष दोनों की अदला बदली हो गई थी।रचना मनीष के होठों को चूसने लगी और मैं आशीष के होठों को चूसने लगी।
“हैं ना मेरे आशू के होंठ रसीले?” रचना बोली।
“हाँ बहुत रसीले और मनु के?” मैंने पूछा।
“मम्म्म इसके भी !!” रचना कहने लगी।
“आजा अब ज़रा तेरे होठों का रस भी चख कर देख लूँ!!!” रचना मेरे पास आकर मुझे खींच कर उठाने लगी।
“मम्म्म!!! तेरे होठों में भी आज कितना रस भर गया है!!! और होठों से ज़्यादा रसीले तो तेरे मोम्मे हैं शालू!!!” मेरे होठों को चूस कर मेरे मोम्मों को चूसते हुए रचना बोली।
“मनीष आज छोड़ना मत शालू को ! इसके मोम्मे काट काट कर खा जाना !” मनीष की ओर मुड़ते हुए रचना बोली। फिर रचना ने आशीष को धक्का देकर सोफे पर अधलेटा कर दिया और अंडरवियर के ऊपर से ही उसके लंड को मसलने लगी।
ठीक उसी तरह मैंने भी मनीष के साथ किया। जब रचना ने आशीष का अंडरवियर खींच कर उतारा तो मैंने देखा कि आशीष का लंड तना हुआ था और मनीष के लंड से ज़्यादा मोटा था। मैंने भी मनीष का अंडरवियर उतार फेंका और उसके लंड को मसलने लगी। मनीष खड़ा हुआ और उसने मुझे भी खींच कर खड़ा किया और मेरे पीछे से हाथ डाल कर मेरे मोम्मे दबाते हुए मेरी गर्दन को चूमने चाटते हुए मेरी गांड पर धक्के देने लगा तो आशीष भी रचना के साथ बिल्कुल वैसा ही करने लगा।
तभी रचना कहने लगी,”चलो तुम दोनों अपने अपने हाथ कमर पर रख कर खड़े हो जाओ।”
बिल्कुल आज्ञाकारी लड़कों की तरह वे दोनों खड़े हो गए, उन दोनों के लंड तने हुए थे।
मैं मनीष के सामने और रचना आशीष के सामने अपनी टाँगों के बल घोड़ी बन कर उनके लंड को चूसने लगीं। रचना आशीष के लंड के सिरे को चाटने लगी, उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
कुछ देर के बाद आशीष के टट्टों को चूसने चाटने लगी और फिर अपने घुटनों पर चलते हुए आशीष के पीछे जाकर उसकी गांड को भी चाटने लगी। मैं भी मनीष के लंड को ठीक वैसे ही चूम चाट रही थी। मनीष और आशीष की बहुत जोर जोर से सिसकारियाँ निकल रहीं थीं।फिर मैंने मनीष के लंड की चमड़ी उतार कर उसके लंड के वीर्य से चमकते हुए सिरे को चाटना शुरू कर दिया और उसके लंड पूरा अपने मुँह में लेकर अपने सिर को जोर जोर से आगे पीछे करने लगी। रचना भी वैसे ही करने लगी।
थोड़ी देर के बाद रचना ने आशीष के लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और मुझे कहने लगी,”शालू क्या तूँ आशीष के लंड को चूसना चाहती है?”
“नहीं आज आशीष के लंड पर सिर्फ तेरा अधिकार है ! अगली बार मेरा अधिकार होगा !!” मैंने मनीष के लंड को बाहर निकाल कर अपने मुँह पर मारते हुए कहा और फिर हम दोनों दोबारा लंड चूसने लगीं।
लड़कों की सिसकारियाँ और हमारे लंड चूसने से आने वाली स्लर्प स्लर्प की आवाजें कमरे में गूंज रहीं थीं। कुछ देर लंड चूसने के बाद रचना आशीष की मुठ मारने लगी और बोली,” मेरे मुँह पर ही वीर्य की पिचकारी मार देना।”
मैंने भी मनीष का लंड अपने मुँह से बाहर निकाला और रचना की तरह ही अपने मुँह पर वीर्य गिराने को कहा। तभी जैसे ही मनीष के लंड से वीर्य की पिचकारी निकल कर मेरे चेहरे पर पड़ी मैंने उसके लंड का रुख अपने मोम्मों की ओर कर दिया और सारा वीर्य अपने मोम्मों पर गिरा दिया।
मैंने देखा मनीष हाँफ रहा था।
तभी उधर आशीष के लंड से भी ज्वालामुखी ने अपना लावा उगल दिया और उसके लंड से वीर्य की अनगिनत पिचकारियाँ निकल कर रचना के चेहरे और मोम्मों पर गिर गईं।
आशीष भी जोर जोर से हाँफ रहा था और हम दोनों लड़कियों के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी।

कुछ देर बाद हम दोनों ने अपने अपने चेहरे साफ़ किये और दोनों लड़कों के साथ सोफे पर बैठ गईं। रचना ने सब के गिलास भर दिये और पीते पिलाते हम चारों में फिर से चूमा चाटी शुरू हो गई।

चूँकि मैं और मनीष तो पहले भी बहुत बार चुदाई कर चुके थे इसलिए मैं जानती थी कि मनीष को अगला कदम पता है। मनीष उठा और मेरे सामने नीचे कालीन पर बैठ कर उसने मेरी टांगें खोल कर मेरी जांघों को चूमना चाटना शुरू कर दिया। आशीष ने भी वैसे ही रचना की जांघों को चाटना शुरू कर दिया।

अब हम दोनों की सिसकारियाँ निकल रहीं थी। मैंने मनीष का सिर अपनी चूत पर दबाया हुआ था और वो अपनी जीभ से मेरी चूत के होठों को चाट रहा था।

मैंने देखा कि रचना आशीष को चूत चाटना सिखा रही थी,” हाँ ! आशीष ऐसे ही करो ! बस यहाँ पर चाटो ! अपनी जीभ अंदर तक डाल दो ! अपनी लंबी जीभ से चोद दो मेरी चूत को !”

मैं भी कराह रही थी,”ओह्ह्ह्ह ! आह्हह्ह ! और जोर से चाटो ! हाँ ! मनु चूत के अंदर तक अपनी जीभ डाल दो ! खा जाओ मेरी चूत को !”

मैं झड़ गई और मनीष का चेहरा मेरे पानी से भीग गया। मैंने मनीष को ऊपर की ओर खींचा और चाट चाट कर उसका चेहरा साफ़ करने लगी। हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में चिपक कर बैठे थे और आशीष को रचना की चूत चाटते हुए देख रहे थे।

मैंने मनीष को कहा कि अगर वो चाहे तो रचना की चूत चाटने में आशीष की मदद कर सकता है। तब मनीष भी आशीष के साथ मिल कर रचना की चूत चाटने लगा। थोड़ी देर के बाद रचना भी झड़ गई।

मैंने मनीष को नीचे कालीन पर लिटाया और उसके शरीर को चूमने चाटने लगी। उसके चेहरे से चूम चूम कर नीचे आते हुए उसके लंड तो सहलाते हुए चूसने लगी। कुछ ही देर में उसका लंड खड़ा हो कर फुँफ़कारने लगा और मैं मनीष के ऊपर लेट गई। हम दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे चाट रहे थे। हम दोनों की कराहने की आवाजें आ रहीं थीं।

मैंने देखा कि आशीष का लंड भी खड़ा हो चुका था। मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़ने की कोशिश की तो आशीष मेरे पास आ गया। मैंने उसके लंड को पकड़ कर जोर से आगे पीछे किया और उसके सिरे को चाटने लगी।

मुझे ऐसा करते देख रचना भी आ गई और आशीष के लंड को पकड़ कर चूसने लगी। मैंने अपना ध्यान दोबारा मनीष की ओर कर लिया। हम दोनों से पलटा खाया और अब मनीष मेरे ऊपर था। मनीष मेरे मोम्मों को जोर जोर से दबा रहा था और काट रहा था। “ओह्ह्ह्ह ! मनु और जोर से दबाओ ! मसल दो खा जाओ आज मेरे मोम्मों को !” मैं उसके नीचे दबी हुई कह रही थी।

उधर रचना आशीष के ऊपर चढ़ी हुई थी और उसको चूस चूस कर लाल कर रही थी। मैंने और मनीष ने देखा कि अब आशीष भी अपना सब संकोच छोड़ कर रचना के साथ सैक्स का आनंद ले रहा था।

“आशू आज रचना को नहीं छोड़ना ! आज इसकी चूत फाड़ देना ! इसकी गांड भी मार दे !” मैं जोर जोर से कह कर आशीष का जोश बढाती हुई उसे उकसा रही थी।

“हाँ ! आज तो मैं रचना की चूत पूरी फाड़ दूँगा ! आज तक इसकी चूत में लंड घुसे होंगे आज इसे पता चलेगा कि असली लौड़ा क्या होता है !” आशीष भी अब उन्माद में बोल रहा था।

तभी आशीष ने रचना को नीचे कर लिया और उसके मोम्मे नोच नोच कर दबाते हुए उसे चूमने लगा। रचना की जोर जोर से कराहने की आवाजें कमरे में गूंज रहीं थीं।

“मनीष, जब आशीष अपना लंड रचना की चूत में डालेगा अगर उस समय रचना के मुँह से चीख निकली तो जल्दी से उसके मुँह पर हाथ रख कर उसका मुँह बंद कर देना नहीं तो इसकी चीख की आवाज़ बाहर तक जा सकती है और हम सब के लिये समस्या हो जायेगी” मैं मनीष के कान में फुसफुसाई।

“हाँ ठीक है।” कहते हुए मनीष ने आशीष को कहा,” आशीष, अब तू रचना की चूत में लंड डाल भी दे फिर मैं भी तुझे देख कर शालिनी की चूत में अपना लंड डालूँगा।”

“रचना, मेरे लौड़े को अपनी चूत की गुफा का मुँह दिखा दो, बहुत देर से भटक रहा है।” आशीष उठ कर अपना लंड रचना की चूत पर रगड़ते हुए बोला।

“आ जाओ आशू ! मैं कब से तड़प रही हूँ तुम्हारे लौड़े के लिये !” रचना ने उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुँह पर लगा दिया।आशीष ने धक्का मारा और उसके लंड का सिरा रचना की चिकनी चूत में घुस गया।

“आह्हह्ह ! आशीष धीरे धीरे डालो दर्द हो रहा है।” रचना बोली।

“आशीष, धीरे धीरे रुक रुक कर लंड अंदर घुसा दो।” मैंने आशीष को कहा।

जैसे ही आशीष का लंड थोड़ा और अंदर गया, मैंने फिर आशीष को कहा,” रचना के ऊपर लेट कर उसके होंठ अपने होठों में दबा कर चोदो, इसे भी बहुत मज़ा आयेगा और ज़्यादा दर्द भी नहीं होगा।”

आशीष ने वैसा ही किया। रचना ने अपनी दोनों टांगें आशीष की कमर पर लपेट लीं।

“अब तू चाहे तो जोर जोर से धक्के मार ले” मनीष बोला।

“नहीं, धीरे धीरे ही करना ताकि एक बार रचना की चूत तुम्हारे लंड के आकार की अभ्यस्त हो जाए उसके बाद भले ही इसकी चूत फाड़ देना” मैं आशीष को सिखाती हुई बोली।

‘हाँ हूँ’ की आवाजें करते हुए आशीष धीरे धीरे रचना को चोदने लगा।

“मनीष, बहुत ज्ञान बाँट लिया अब तुम भी मेरी चूत में अपना लंड डाल दो।” मैंने मनीष को चूमते हुए कहा।

मनीष ने अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रख कर एक हल्का सा धक्का मारा और फिर मेरे ऊपर लेट कर मेरे होठों को अपने होठों में दबाते हुए दूसरे धक्के में उसने अपना पूरा लंड जड़ तक मेरी चूत में घुसा दिया और मुझे चोदने लगा। मैंने कुछ देर के बाद मनीष को पलटने को कहा और अब उसके ऊपर आकर जोर जोर से अपनी चूत उसके लंड पर मारने लगी। मैं एक बार झड़ चुकी थी।

थोड़ी देर बाद मनीष ने कहा कि वो झड़ने वाला है और उसके लंड ने वीर्य का फव्वारा मेरी चूत में छोड़ दिया। मनीष का वीर्य मेरी चूत से बाहर बह कर उसकी कमर पर जमा हो रहा था और मैं अभी भी उसके लंड के ऊपर अपनी चूत मार रही थी। उधर आशीष ने रचना की दोनों टांगे अपने कंधों पर रखी हुई थीं और अपने पूरे जोर से रचना को पेल रहा था।

रचना की सीत्कारें निकल रहीं थीं,” और जोर से करो आशू ! और जोर से चोदो मुझे ! अपने मोटे लौड़े से आज मेरी चूत पूरी फाड़ दो !” और आशीष उन अश्लील बातों का मज़ा लेते हुए किसी भूखे शेर की तरह रचना को चोद रहा था। मैं और मनीष उठे और बाथरूम होकर आये और सोफे पर बैठ गए।

रचना आशीष को कहने लगी कि वो ऊपर आना चाहती है इसलिए आशीष अपना लंड बाहर निकाल ले।

आशीष ने अपना लंड रचना की चूत से बाहर निकाला और उसके साथ में लेट गया। फिर रचना आशीष के दोनों ओर एक एक टांग करके उसके लंड पर बैठ गई और उछल उछल कर आशीष को चोदने लगी। मैंने रचना को चूमा और धीरे से उसके कान में पूछा,” तेरी चूत से पानी निकला या नहीं?”

रचना धीरे से बोली,”चार बार !!”

मनीष ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर लगाया तो मैं उसे सहला कर मसलने लगी। मेरे सहलाने से मनीष का लंड एक बार फिर से कड़क होने लगा तो मैंने उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगी। फिर मनीष ने मुझे सोफे के ऊपर घोड़ी की तरह बनाया और पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल कर चोदने लगा।

आशीष ने जब हमें देखा तो रचना को कहने लगा,” रचना, तुम भी घोड़ी बन जाओ, मैं भी तुम्हें ऐसे चोदना चाहता हूँ।”

रचना बोली,” अभी बन जाती हूँ। तुम्हारे लिये तो मैं कुछ भी बन जाने के लिये तैयार हूँ। बस थोड़ी देर और तुम्हारे लंड पर बैठने का मज़ा लेने दो।”

और फिर रचना अपनी पूरी शक्ति से आशीष के लंड पर उछलने लगी। “आह्हह्ह ! आह्हह्ह ! ओह्ह्ह्ह ! हाँ !” कहते हुए रचना आशीष के सीने को नोचते हुए झड़ने लगी। जब उसका झड़ना शांत हुआ तो वो भी मेरे साथ आ कर सोफे पर घोड़ी बन गई और आशीष को कहने लगी,”आ जाओ आशू अपनी घोड़ी को चोद लो।”

फिर उसने आशीष का लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रखा और उसे धक्का मारने को कहा। आशीष ने एक ही धक्के में अपना लंड रचना की चूत में घुसेड़ दिया और दनादन चोदने लगा। मैंने और रचना दोनों ने सोफे के पिछले हिस्से को पकड़ा हुआ था और धक्कों का मज़ा ले रही थीं। तभी मनीष ने अपना लंड बाहर निकाला और अंदर बेडरूम से तकिये लाकर हम दोनों के चेहरे के सामने लगा दिये ताकि हमारा चेहरा सोफे से ना टकराए।

फिर मनीष दोबारा मुझे चोदने में जुट गया। मैंने गर्दन घुमा कर देखा तो आशीष किसी अनुभवी लड़के की तरह रचना की कमर पकड़ कर उसे चोद रहा था। मनीष मेरे दोनों मोम्मे दबाते हुए मुझे चोद रहा था और फिर आशीष को कहने लगा,” आशीष, रचना की कमर को छोड़ और इसके मोम्मे दबा कर देख कितना मज़ा आता है।”

अब आशीष के हाथ भी रचना के मोम्मों पर थे और जैसे ही उसने जोर से रचना के मोम्मे दबाए रचना के मुँह से एक जोरदार सिसकारी निकली। मैंने रचना की ओर अपना चेहरा करके अपने होठों को थोड़ा सा आगे किया तो उसने मेरे होठों को चूम लिया।

“मनीष और जोर से चोदो ! मेरी चूत को फाड़ दो ! आशीष तुम भी रचना को जोर जोर से चोदो ! मैं उन दोनों को उकसाने लगी।

अब उन दोनों और जोर से चोदना शुरू कर दिया। कमरे में थप थप की आवाजें आ रहीं थीं।

मैंने रचना को कहा,” रचना, अगर यह सोफा दीवार के साथ ना लगा होता तो शायद इन दोनों के धक्कों के कारण अभी तक नीचे गिर गया होता।”

तभी मैंने महसूस किया कि मनीष का एक हाथ मेरी चूत के नीचे सहलाने लगा था। “ओह्ह्ह्ह ! मनीष नहीं प्लीज़ नहीं !” मैंने उसका हाथ हटाने की कोशिश की। “क्या हुआ?” रचना और आशीष दोनों ने एक साथ पूछा। “अपने एक हाथ से रचना की चूत को नीचे से सहला, फिर देख क्या होता है” मनीष दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़ते हुए बोला। आशीष भी अपना एक हाथ नीचे ले गया और रचना की चूत को सहलाने लगा। “ओह्ह्ह्ह !” रचना भी चिंहुकी।

“एक हाथ से कमर पकड़ ले और दूसरे हाथ से चूत सहलाते हुए चोद !” मनीष अब आशीष को सिखा रहा था।

अब वे दोनों हमारी चूतें सहलाते हुए चोदने लगे। तभी रचना ने जोरदार हुंकार भरी और झड़ गई।

“आशीष आज तूने मैदान मार लिया ! तूने रचना का पानी निकाल दिया !” मनीष ने कहा।

कुछ समय बाद मैं भी झड़ गई।

रचना आशीष को बोली,” आशू, मुझे नीचे लिटा कर चोद लो मेरी टांगों में दर्द हो रहा है।”

“रचना थोड़ी देर और चोदने दो ! मुझे ऐसे चोदने में बहुत मज़ा आ रहा है।” आशीष बोला।तभी मैंने देखा कि आशीष ने चोदने की गति बढ़ा दी तो मैं समझ गई कि वो झड़ने वाला है। कुछ ही देर में आशीष जोर जोर से कराहने लगा,”आह्हह्ह ! ओह्ह्ह्ह ! रचना मैं झड़ गया हूँ !”

उसके धक्कों की गति धीमी पड़ने लगी और वो रचना के ऊपर निढाल सा हो गया।

“मुबारक हो आशीष आज रचना ने तुम्हारी सील तोड़ दी अब तुम कुँवारे नहीं रहे !” मैंने कहा।

“हाँ और आपने मनीष की सील तोड़ दी !” आशीष ने जवाब दिया।

उधर अभी तक मनीष डटा हुआ था और मुझे चोद रहा था। कुछ समय बाद मनीष ने भी अपना वीर्य मेरी चूत में भर दिया और मेरे ऊपर गिर गया। हम चारों नीचे कालीन पर ही लेट गए और हमारी आँख लग गई। कोई दो घण्टे बाद मेरी आँख खुली और मैं बाथरूम हो कर आई तो मैंने देखा आशीष बिल्कुल तैयार हो कर बैठा हुआ था।

“तुम कहाँ जा रहे हो आशीष?” मैंने पैंटी पहनते हुए पूछा।

“मनीष उठ जाए तो हम लोग अब अपने कमरे पर वापिस जायेंगे।” आशीष ने कहा।

“तुम कहीं नहीं जाओगे और रात को यहीं रुकोगे समझे? अभी तो तुम्हें रचना की गांड भी मारनी है ! और फिर मेरी चूत का मज़ा नहीं लोगे क्या?” मैंने कहा।”मनीष के कहा था रात को वापिस आ जायेंगे !” आशीष बोला।

“उसे कुछ नहीं पता। चलो अपने कपड़े उतारो और देखो फ्रिज में बियर है या नहीं। अगर है तो अपने लिये डालो और मुझे भी एक गिलास दो।” मैं उसके बालों को सहलाते हुए बोली।

आशीष को ना चाहते हुए भी अपने सारे कपड़े उतारने पड़े और अब वो दोबारा सिर्फ अंडरवियर में था। मैंने रचना और मनीष को उठाया और बताया कि आशीष अपने घर जाने की बात कर रहा है।

रचना एकदम बोली,” आशू, तुम मेरे साथ ही रहो। अभी तो पूरी रात जवान है।”

मैंने फ्रिज में देखा तीन बियर पड़ीं थीं तो मैंने मनीष को कहा कि वो जल्दी से तैयार हो जाए और फिर हम दोनों जाकर बियर और रात का खाना भी लेकर आते हैं।

मनीष और मैं तैयार हो कर बाज़ार के लिये निकल पड़े। करीब एक घण्टे बाद हम वापिस आए तो देखा कि आशीष कालीन पर चित लेटा हुआ हाँफ रहा था और रचना की चूत से वीर्य की एक धार बाहर निकल कर बह रही थी।

हम दोनों को देख कर रचना आँख मार कर मुस्कुराने लगी। आधे घण्टे के बाद जब रचना और आशीष उठ कर नहा कर आये तो मैंने खाना लगा दिया और फिर हम चारों ने खाना खाया और बेडरूम में बैठ कर बातें करते हुए टेलिविज़न देखने लगे।

एक घण्टे बाद आशीष बोला कि वो और मनीष बाहर बैठक में कालीन पर सो जायेंगे और रचना तथा मैं अंदर बेडरूम में सो जाएँ।

रचना आशीष के साथ सोना चाहती थी इसलिए कहने लगी कि वो और आशीष बाहर सो जायेंगे।

मनीष ने कहा कि वे दोनों अंदर सो जाएं और मनीष के साथ मैं बाहर सो जाते हैं। फिर तय हुआ कि हम चारों ही अंदर सोयेंगे।

मैंने लाइट बंद की और सिर्फ रात के लिये छोटी लाइट जला दी। थोड़ी देर में ही रचना और आशीष की चूमा-चाटी की आवाजें आनी शुरू हो गईं तो मैंने और मनीष ने भी अपने होंठ आपस में चिपका लिये। आशीष रचना के ऊपर चढ़ कर उसके मोम्मे दबाता हुआ उसे चूम रहा था।

मैं और मनीष साथ साथ लेटे हुए थे इसलिए मैंने अपनी एक टांग उठाई और मनीष के लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया और उसकी गांड को दबा कर उसे धक्का मारने का इशारा किया। मनीष ने धक्का मारा और अपना लंड मेरी चूत में डाल कर धक्के मारने लगा।

आशीष ने जब हमें देखा तो उसने भी मनीष की तरह रचना के साथ में आकर उसकी की टांग उठाई और उसे चोदने लगा। मनीष और आशीष दोनों की गांड आपस में टकरा रहीं थीं और दोनों हमें चोदने में व्यस्त थे।

फिर मैं और रचना उन दोनों के ऊपर आ गईं और उन्हें चोदने लगीं। हम दोनों एक लय में चुद रहीं थीं और बीच बीच में एक दूसरे को सहला भी रहीं थीं।

इस बार पहले रचना झड़ी और फिर मैं। तब हम दोनों लड़कों के ऊपर से उतर कर फिर साथ में लेट गईं।

मैंने सुना, आशीष मनीष को पूछ रहा था,” मनीष, क्या तू शालिनी की गांड अभी मारेगा या कल?”

“अभी मारूंगा और उसकी गांड में अपना लंड खाली कर दूँगा !” मनीष ने जवाब दिया।

रचना ने कहा,” आशीष, अगर तुम सोना चाहते हो तो कोई बात नहीं दोनों सो जाते हैं।”

“नहीं सोना नहीं है मैं सिर्फ पूछ रहा था।” आशीष बोला।

कुछ देर बाद मैंने मनीष को कहा,” मनीष, बाथरूम से तेल की बोतल ले आओ। फिर अपनी उँगलियों में बहुत सा तेल लगा कर एक उंगली गांड में डालो और धीरे धीरे अंदर बाहर करो। थोड़ी देर के बाद दूसरी उंगली भी अंदर डालो और अंदर बाहर करते रहो। ऐसा करने से गांड का छेद अंदर तक तेल से चिकना हो जाएगा और उँगलियों की मोटाई का अभ्यस्त हो जाएगा। फिर तुम अपने लंड पर तेल लगा कर उसे बहुत ही चिकना करो और गांड के छेद पर अपना लंड लगा कर एक हल्का सा धक्का मारो ताकि लंड का सिरा अंदर घुस जाए। कुछ देर रुक कर दूसरा धक्का मारो और फिर रुक जाओ। अब गांड तुम्हारे लंड की मोटाई की अभ्यस्त हो जायेगी। थोड़ी देर बाद और दो तीन धक्कों में अपना लंड गांड में पूरा डाल दो और फिर गांड मारने का मज़ा लो।”

“शालू बाहर सोफे पर चलें?” मनीष ने पूछा।

“सोफे पर क्यों? यहीं बिस्तर पर आराम से चोदो” रचना बोली। “जैसे पिछली बार चोदा था उसमें ज़्यादा मज़ा आया था” मनीष की जीभ फिसली।

“पिछली बार? क्या तूने पहले भी इनकी गांड मारी है?” आशीष चौंका।

“नहीं अभी पहले जब इन दोनों को सोफे पर घोड़ी बनाया था।” मनीष ने बात संभाली।

“हाँ ! मैं भी मनीष से सहमत हूँ। सोफे पर घोड़ी बना कर चोदने का मज़ा अलग ही है।” आशीष ने मनीष का समर्थन किया।

“ठीक है, हम दोनों को अपनी गोद में उठाओ और बाहर ले जाकर जैसे चाहो चोदो !” रचना ने अंतिम स्वीकृति दी।

अब वे दोनों हम दोनों को अपनी गोद में उठा कर बाहर ले गए और कालीन पर उतार कर खड़ा कर दिया। आशीष तेल की बोतल लेकर आया और अपने हाथ में तेल लगा कर रचना को बोला,” रचना, अब मेरा लंड तुम्हारी चूत की तरह तुम्हारी गांड भी फाड़ने के लिये तैयार है !”

“आशीष अगर लड़की के साथ हमेशा मज़ा करना है तो अपना लंड धीरे धीरे उसकी गांड में डालना क्योंकि हो सकता है तुम्हें पौरुषता लगे कि तुमने लड़की की गांड फाड़ दी परंतु उसके बाद तुम कभी भी उस लड़की के साथ सैक्स का मज़ा नहीं ले पाओगे। यही बात मैंने मनीष को भी समझाई है और अगर मनीष मान लेगा तो जब चाहे यहाँ आकर हमारे साथ सैक्स का मज़ा ले सकता है।” मैंने आशीष को समझाते हुए कहा और रचना तथा मनीष भी मेरे साथ सहमत थे।

“नहीं मैं एक बार में लंड नहीं डालूँगा वो तो मैं बस ऐसे ही जोश में कह रहा था।” आशीष जल्दी से बोला।

“अब दोनों जल्दी से हमारी गांड मारो !” रचना घोड़ी बनते हुए बोली।

फिर उन दोनों ने मेरे कहे अनुसार अपनी उँगलियों में तेल लगा कर हमारी गांड में डालीं और कुछ देर के बाद अपने अपने लंड हमारी गांड में घुसेड़ दिये और दनादन हमारी गांड मारने लगे। रचना और मेरी कामुक सीत्कारें निकल रहीं थीं। एक बार फिर मनीष आशीष को सिखाने लगा,” आशीष, अपनी एक उंगली रचना की चूत में डाल दे। लंड गांड मारेगा और उंगली चूत चोदेगी !” और उन दोनों ने अपनी एक एक उंगली हमारी चूत में डाल कर अंदर बाहर करनी शुरू कर दी। मनीष तो मेरी गांड पर थप थप हाथ मार मार कर उसे लाल कर रहा था,” शालू, मेरी जान आज तो मज़ा आ गया ! तुम्हारी बड़ी गांड कितनी सुन्दर है ! दिल कर रहा है रात भर तुम्हारी गांड मारता रहूँ !”

“मना किसने किया है ! रात भर मेरी गांड मारो मेरी जान ! अब इस पर सिर्फ तुम्हारा ही नाम लिखा है !” मैं भी उसकी भाषा में उसे जवाब दे रही थी।

करीब पंद्रह मिनट के बाद मनीष मेरी गांड में झड़ गया और मेरे ऊपर गिर पड़ा। थोड़ी देर बाद आशीष भी रचना की गांड में झड़ गया और रचना के ऊपर निढाल हो गया। हम चारों जोर जोर से साँसे ले रहे थे।

फिर थोड़ी देर के बाद हम उठे और अपने आप को साफ़ करके अंदर बेडरूम में जाकर सो गए। अगले दिन सुबह हमने लड़कों को बढ़िया नाश्ता करवाया और रचना दोनों को कहने लगी,” जब भी तुम दोनों चाहो यहाँ आ सकते हो और सैक्स का मज़ा ले सकते हो !”

थोड़ी देर के बाद मैं आशीष को बेडरूम में ले कर चली गई और उससे कहने लगी,” ओह्ह आशीष आई लव यू ! मम्म्म ! मम्म्म ! मेरे आशू ! मेरी जान ! पुच्च पुच्च ! मुझे प्यार करो आशू !” और बाहर रचना मनीष पर टूट पड़ी।

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