किशनपुरा आश्रम में रास part 3

अब मुझे लेकर मोनी एक हॉल में आ गई। हॉल के बीचों बीच एक बिस्तर सजा हुआ था। उस पर सुर्ख लाल रंग की रेशमी चादर बिछी हुई थी। बिस्तर के चारों ओर बारह कुर्सियों में आश्रम के सारे शिष्य बैठे हुए थे। बिस्तर के पास एक सिंहासन पर गुरूजी बैठे हुए थे। मोनी मुझे लेकर चलते हुए बिस्तर के पास आकर रुकी, उसने मेरे किमोनो की डोरी को खोल दिया, किमोनो सामने से खुल गया, अन्दर कुछ नहीं पहना होने के करण टांगों के बीच का उभार सामने दिख रहा था।
मोनी थोड़ी दूर हट गई, गुरूजी उठे और मेरे पीछे आकर मेरे खुले हुए गाऊन को मेरे कंधे से उतार दिया। मेरा गाऊन बदन पर से फिसलता हुआ नीचे गिर गया। मैं उन चौदह जोड़ी प्यासी अँखिओं के सामने बिल्कुल नग्न अवस्था में खडी थी।
गुरूजी ने मुझे कंधे से पकड़ कर उसी जगह पर चारों ओर घुमाया, फ़िर क़मर से मुझे थामे हुये धीरे धीरे चलते हुए एक एक शिष्य के पास से घुमाया। सब भूखी नजरों से मेरे बदन को निहार रहे थे।
गुरूजी ने कहा,”ये है रुचिका ! आज से ये हमारे आश्रम को ज्वाइन कर रही हैं !”
सबने ख़ुशी से तालियाँ बजाई।

“संस्था में शामिल करने के लिए जो जो रस्म होती हैं उन्हें आरम्भ किया जाए !”
कहकर गुरूजी जाकर अपनी स्थान पर बैठ गए। तभी एक लड़की एक चाँदी का कटोरा लेकर आई। मोनी ने उसे मेरे हाथ में देते हुये कहा,”इसे पी लो !”
उस पात्र में गाढ़ा मक्खन की तरह कुछ रखा था। मैंने अपने होंठों से उसे लगा कर एक घूँट भरा तब पता चला कि वो वीर्य था।
“यह हमारे आश्रम के सारे शिष्यों का वीर्य है, इसे पूरा पी लो !” मोनी ने कहा।
मैंने घूँट भर भर कर सारा वीर्य पी लिया।
“आज से तुम संस्था के किसी भी मर्द के साथ सम्भोग करने के लिए स्वतंत्र हो और कोई भी जब चाहे तुम्हें भोग सकता है। तुम इन्कार नहीं करोगी।” गुरूजी ने कहा।
अब मोनी ने मुझे बिस्तर पर बिठा दिया। दो लड़कियाँ दो खाली कटोरे लेकर आई। उन्हें मेरे स्तनों के नीचे रख कर मेरे चूचुकों को पकड़ कर उनमे से दूध निकालने लगी। ऐसा लग रहा था मानो मैं कोई औरत नहीं गाय हूँ जिसका दूध निकाला जा रहा है। मेरी छातियों को वो तब तक दुहती रही जब तक आखिरी बूँद तक नहीं निकल गया। मेरी दोनो छातियाँ उनके मसलने की वजह से लाल हो गई थी और दुःख रही थी।

दूध की कटोरियाँ लेकर वो युवतियाँ वहाँ मौजूद एक-एक आदमी के पास जाती और वो आदमी उस से कुछ दूध पीता। ऐसे करके सारे आदमियों ने मेरा दूध चखा।
अब सारे शिष्य खडे हो गए और अपने अपने कपड़े उतार दिए। सिर्फ़ गुरूजी ही कपड़े पहने हुए थे। अपने चारों ओर इतने सारे खड़े लंड देख कर मेरा बदन सनसनाने लगा। सारे मर्द अपने अपने स्थान पर बैठ गए।
अब मोनी ने मुझे बिस्तर पर हाथों और घुटनों के बल झुका दिया। मैं एक ऐसी कुतिया लग रही थी जो गरमाई हुई हो। मेरी योनि में रस से छूटने लगा। तभी कुछ हुआ कि मेरा बिस्तर धीरे धीरे घूमने लगा। रफ्तार बहुत धीमी थी लेकिन इससे मैं बारी बारी हर आदमी के सामने से गुजर रही थी। तभी दो आदमी उठे और मेरे दोनों तरफ आकर खड़े हो गए।
एक ने मेरे पीछे से बिना मुझे किसी तरह उत्तेजित किए अपना लंड एक झटके से मेरे अन्दर कर दिया। अगले झटके में तो उसका लिंग पूरी तरह मेरी योनि में समा गया और उसके अन्डकोष मेरी जांघों से टकरा गए।
“आऽऽआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्. …….ऊऊऊऊह् ह्ह्ह्छ !!” बस यही निकला मेरे मुँह से।
फ़िर वो जोर जोर से धक्के मारने लगा। दूसरा मेरे सामने आया और मेरी थोढी को पकड़ कर मेरे चेहरे को ऊपर उठाया। मेरे चेहरे पर फैले हुए मेरे बालों को हटा कर नीचे झुक कर मेरे होंठों को एक बार चूमा, फ़िर वो खड़ा हो गया। मेरी नजरें अगले कदम के इन्तजार में उसके चहरे पर जमी हुई थी।

“इसे मुँह में लो ! उसने अपने लिंग की तरफ इशारा किया।
मैंने देखा उसका तगड़ा लिंग मेरे होंठों से बस कुछ ही इंच दूरी पर है, मेरे होंठ अपने आप खुलते चले गए। उसने धीरे से मेरे सिर को थामते हुए अपने लिंग को मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने देखा लिंग से भीनी भीनी सुगंध आ रही थी।
अब दोनो तरफ से मेरी ठुकाई चालू हो गई। दोनों जोर जोर से मुझे ठोक रहे थे और सारे आदमी अपनी अपनी जगह पर नग्न बैठे हुए मेरी चुदाई देख रहे थे। सबके हाथ अपने अपने लिंग को सहला रहे थे। जो मेरी योनि में ठोक रहा था उसने कोई १५ मिनट तक मुझे चोद कर अपना लिंग एकदम से अन्दर तक डाल दिया और उसके लिंग से निकली वीर्य की धारा मेरी योनि को भरने लगी। उसके इस तरह जोर से धक्का मारने के कारण सामने वाले का लिंग मेरे मुँह में अन्दर तक घुस गया, साथ ही उसका लिंग भी झटके मारने लगा। वो भी अपने वीर्य से मेरे मुँह को भरने लगा। मैं भी उनके साथ ही झड़ गई।

दोनों ने अपना वीर्य मेरे अन्दर खाली करने के बाद अपने अपने लिंग बाहर निकाले, फ़िर मुझे उन दोनों के लिंग को चाट चाट कर बिल्कुल साफ करना पड़ा।
दोनों अपनी अपनी जगह पर जा कर बैठ गए। मैं जोर जोर से हांफ रही थी।
फ़िर दो और आदमी आकर पहले की तरह ही मेरी चुदाई करने लगे। दोनों काफ़ी देर तक ठोक कर मेरे अन्दर खाली हो गए। उनके बैठने पर दो और उठ कर उनकी जगह आ गए।
तीसरा दौर ख़त्म होते होते मेरे हाथों में और अपना बोझ सम्हाले रखने की ताकत नहीं बची और मैं मुँह के बल बिस्तर पर गिर पडी। अभी भी छः आदमी बचे थे।
अब तीन आदमी उठ कर आए।
एक मेरी बगल में आकर लेट गया। उसका खड़ा लिंग ऊपर की तरफ खड़ा हुआ था. बाकी दोनों ने मुझे बाँहों से पकड़ कर उठाया और मेरी टांगों को चौड़ा कर के उसके लिंग पर मेरी योनि को टिकाया, मेरी योनि से रस टपक कर बिस्तर पर गिर रहा था। एक धार उसके लिंग को भिगोती हुई नीचे जा रही थी। कुछ देर तक मैं उस अवस्था में रही फ़िर मैंने अपना बोझ उसके लिंग पर डाल दिया और उसका मोटा लिंग मेरी योनि में घुसता चला गया।
मैं अपने हाथ उसके सीने पर रख कर अपनी क़मर को धीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगी मगर उसका तो इरादा ही कुछ और था। उसने मेरे चूचुकों को पकड़ कर अपनी ओर खींचा, मैं उसके सीने से सट गई। उसने मेरे बदन को अपनी बाँहों में समां कर सख्ती से अपने से लिपटा लिया। मेरी मोटी मोटी छातियाँ उसके सीने में पिसी जा रही थी।
एक लडकी एक कटोरे में कोई तेल लेकर आई। मोनी ने मेरे दोनो चूतड़ों को अलग करते हुए मेरी गाण्ड के छिद्र पर कुछ तेल गिराया और अपनी उँगलियों से अन्दर तक उसे अच्छी तरह लगाने लगी।

“नहींऽऽईई.. ..प्लीज़ऽऽ ..यह..मुझ से …नहींईइ. ..होगाऽऽ॥ ” मैं कसमसा उठी।
“मेरी फट जाएगीऽऽऽऽईई. प्लीज़ !!!… मैं सबको खुश कर दूँगी ऽऽऽई मगर वहाँ नहींऽ।…”
मगर वहाँ मेरी विनती सुनने वाला कोई नहीं था।
एक जोर के धक्के से उस आदमी ने अपने लिंग का सुपाड़ा मेरी गाण्ड में डाल दिया।
“आऽ…अऽऽऽआआआ आआआअह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्. ……म्माऽ॥अआआआ ” मैं चीख उठी।
दो और जोर जोर के झटके लगे और पूरा लिंग मेरी गाण्ड के अन्दर था।
मैं दर्द से दोहरी हुई जा रही थी। मोनी पास आकर मेरे चेहरे को सहला रही थी और धैर्य रखने को कह रही थी।
अपना पूरा लिंग अन्दर डाल कर वो कुछ देर रुका, फ़िर दोनों आगे और पीछे से मुझे चोदने लगे। अब तीसरे ने मेरे पास आकर मेरे चेहरे को एक ओर घुमा कर अपना लिंग मेरे मुँह में डाल दिया। इस तरह की यौन क्रीड़ा मैंने सिर्फ़ विदेशी नग्न फ़िल्मों में देखी थी या सुनी थी मगर आज यही मेरे साथ हो रहा था।
तीनों ने जोर जोर से मुझे ठोकने के बाद मेरे तीनों छेदों में अपने अपने गर्म-गर्म वीर्य भर दिया। उनके बाद बाकी बचे तीनों ने भी मुझे उसी तरह चोदा।
कोई दो-ढाई घण्टे की चुदाई के बाद मुझमें तो उठकर खड़े होने की भी ताकत नहीं बची थी, पूरा बदन बुरी तरह दुःख रहा था। मोनी और एक युवती ने आकर मुझे उठाकर गुरूजी के क़दमों में बिठा दिया, गुरूजी ने अपना लिंग निकाल कर मेरे सिर पर रखा, फ़िर उसे नीचे सरकाते हुए मेरे मुँह में डाल दिया। उनके लिंग को मैंने चूस चूस कर खल्लास किया।

फ़िर सब उठ कर उस कमरे से निकल गए, सिर्फ़ मैं मोनी और एक लड़की बची थी।
मोनी ने मुझे उठाकर मेरे बदन को पोंछा और मुझे मेरे कपड़े पहनाए, मुझे मेरी कार की पिछली सीट पर बैठा कर एक शिष्य मुझे मेरे घर तक छोड़ आया। मेरे पति जीवन लाल काम पर जा चुके थे, इसलिए मैं बच गई।
मैं घर आकर ख़ूब नहाई और खाना खाकर जम कर नींद ली। अपने बच्चे को बोतल से दूध पिलाया क्योंकि कुछ बचा ही नहीं था उसके लिए।
शाम तक एकदम तरोताज़ा हो गई थी और बन-संवर कर माथे पर सिन्दूर और मंगलसूत्र को ठीक कर अपने पति के आने का इंतज़ार करने लगी

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