कपडे धोने का काम, मम्मी के साथ part 8

मां की बाकी बाते तो मेरा उत्साह बढा रही थी, पर उसके मुंह से अपने लिये गाली सुनने की आदत तो मुझे थी नही। पहली बार मां के मुंह से इस तरह से गाली सुन रहा था। थोडा अजीब-सा लग रहा था, पर बदन में एक तरह की सिहरन भी हो रही थी। मैने अपने मुंह को मां की बुर पर से हटा दिया, और मां की ओर देखने लगा। मां के मजे में बाधा होने पर, उसने अपनी अधखुली आंखे पुरी खोल दी और मेरी ओर देखते हुए बोली,
“रुक क्यों गया चुतीये ? जल्दी-जल्दी चाट ना, अपने मालपुए को।”

मैने मुस्कुराते हुए मां की ओर देखा और बोला,
“क्या मां, तुम भी ना ? तुम्हे ध्यान है, तुमने अभी-अभी मुझे कितनी गालियां दी है ? मैं जब याद दिलाता हुं तो तुम कहती हो, दी ही नही। अभी पता नही कितनी गालियां दे दी।”

इस पर मेरी मां हसने लगी और मुझे अपनी तरफ खींचा तो, मैं उठ कर फिर से उसके बगल में जा के लेट गया। मां ने मेरे गाल पर अपने हाथों से एक प्यार भरी थपकी दे कर पुछा,
“चल मान लिया मैने गाली दी, तुझे बुरा लगा क्या ?”

मैने मुंह बना लिया था। मां मुझे बाहों में भरते हुए बोली,
“अरे मेरे चोदु बेटे, मां की गालियां क्या तुझे इतनी बुरी लगती है कि, तु बुरा मान के रुठ गया ?”

“नही मां, बुरी लगने की बात तो नही है, लेकिन तुम्हारे मुंह से गालियां सुन के बडा अजीब-सा लगा।”

“क्यों अजीब लग रहा है, क्या मैं गालियां नही दे सकती ?”

“दे सकती हो, उसका उदाहरण तो तुमने मुझे दिखा ही दिया है। मगर अजीब इसलिये लग रहा है, क्योंकि आज से पहले तुमको कभी गाली देते हुए नही सुना है।”

“आज से पहले तुमने कभी मुझे नंगा भी तो नही देखा था ना। ना ही आज से पहले कभी मेरी बुर और चुंची चुस के मेरा पानी निकाला था। सबकुछ तो आज पहली बार हो रहा है। इसलिये गालियां भी आज पहली बार सुन रहा है।”,
कह कर मां हसने लगी, और मेरे लंड को अपने हाथों से मरोडने लगी।

“ओह मां, क्या कर रही हो दुखता है ना ?,,,,,,,,,, फिर भी तुम मुझे एक बात बताओ कि, तुमने गालियां क्यों दी ?”

“अरे उल्लु, जोश में ऐसा हो जाता है। जब औरत और मर्द ज्यादा उत्तेजीत हो जाते है ना, तो अनाप-शनाप बोलने लगते है। उसी दौरान मुंह से गालियां भी निकल जाती है। इसमे कोई नई बात नही है, फिर तु इतना गभरा क्यों रहा है ? तु भी गाली निकाल के देख, तुझे कितना मजा आयेगा ?”

“नही मां, मेरे मुंह से तो गालियां नही निकलती।”

“क्यों, अपने दोस्तो के बीच गालियां नही बकता क्या, जो नखरे कर रहा है ?”

“अरे मां दोस्तो के बीच और बात है, पर तुम्हारे सामने मेरे मुंह से गालियां नही निकलती है।”

“वाह रे मेरे शरिफ बेटे, मां को घुर-घुर के देखेगा, मां को नंगा कर देगा और उसकी चुदाई और चुसाई करेगा, मगर उसके सामने गाली नही देगा। बडी कमाल की शराफत है, तेरी तो।”

“क्या मां, इस बात को गालीयों से क्यों जोड के देखती हो ?”

“अरे क्यों ना देखुं, जब हमारे बीच शरम की सारी दिवारें टूट गई है और हम एक दुसरे के नंगे अंगो से खेल रहे है, तब ये शराफत का धोंग करने का क्या फायदा,,,,,,। देख गालियां जब हम होश में हो, तब देना या बोलना गुनाह है। मगर, जब हम उत्तेजीत होते है और बहुत जोश में होते है तो अपने आप ये सब मुंह से निकल जाता है, तु भी कर के देख।”

मैने बात टालने की गरज से कहा,
“ठीक है मैं कोशिश करुन्गा, पर अभी मैं इतने जोश में नही हुं कि, गालियां निकाल सकुं।”

“हां, बीच में रोक कर तो तुने सारा मजा खराब कर दिया, देख मैं तुझे बतलाती हुं, गालियां और गंदी गंदी बातें भी अपने आप में उत्तेजना बढाने वाली चीज है, चुदाई के वक्त इसका एक अलग ही आनंद है।”

“क्या सब लोग ऐसा करते है ?”

“इसका मुझे नही पता कि सब लोग ऐसा करते है या नही, मगर इतना मुझे जुरूर पता है कि ऐसा करने में मुझे बहुत मजा आता है, और शायद मैं इस से भी ज्यादा गंदी बातें करुं और गालियां दुं तो तु उदास मत होना, और अपना काम जारी रखना समझना मुझे मजा आ रहा है, और एक बात ये भी कि अगर तु चाहे तो तु भी ऐसा कर सकता हैह।”

“छोडो मां, मेरे से ये सब नही होगा।”

“तो मत कर चुतिये, मगर मैं तो करुन्गी मादरचोद।”
कह कर मां ने मेरे लंड को जोर से मरोडा। मां के मुंह से इतनी मोटी गाली सुन के मैं थोडा हडबडा गया था, मगर मां ने मुझे इसका भी मौका नही दिया और मेरे होंठो को अपने होंठो में भर कर खूब जोर जोर से चुसने लगी। मैं भी मां से पुरी तरह से लिपट गया और खूब जोर जोर से उसकी चुचियों को मसलने लगा और निप्पल खींचने लगा, मां ने सिसकारियां लेते हुए मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा,
“चुचियां मसलने से भी ज्यादा जल्दी, मैं गंदी बातों से गरम हो जाउन्गी, मेरे साथ गंदी गंदी बातें कर ना बेटा।”

मैं उसकी चुचियों से खेलता हुआ बोला,
“तुम्ही करो मां, मेरे से नही हो रहा है।”

“साले मां की चोदेगा जुरूर, मगर उसके साथ इसकी बात नही करेगा, चुदाई के काम के वक्त चुदाई कि बातें करने में क्या बुराई है, बे चुतिये ?”

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