एक खूबसूरत लड़की के साथ सड़क पर भिखारी की हवस part 4

उसको तो जैसे कोई फ़र्क ही नही पड़ा था नेहा को केवल टावल मे खड़ा देखकर..वो अपनी ही मस्ती मे इधर उधर देखता हुआ प्लेट ढूँढने लगा..

नेहा को पता था की वो प्लेट कहा है, वो अंदर वाले हिस्से मे आई और एक अलमारी खोलकर उसमे से प्लेट निकाल कर दे दी..

प्लेट देते हुए नेहा के हाथ केशव के हाथों से छू गये…और वो सिहर उठी…वो पहले से ही गर्म थी..मर्द का स्पर्श ऐसी अवस्था मे औरत को और उत्तेजित कर देता है..वही हाल नेहा का भी हुआ..उसकी नज़र एकदम से केशव के लंड वाले हिस्से पर चली गयी…वहाँ बिल्कुल शांति थी..वो थोड़ा और आगे आई…और केशव की आँखों मे आँखे डालकर बोली : “अभी थोड़ी देर रुक जा,मैं नाश्ता कर लू..फिर तू ये थाली भी साथ ही लेकर चले जाना, वरना ये भी पिछली बार की तरह यहीं पड़ी रहेगी…”

नेहा को अपने इतने पास देखकर केशव सकपका सा गया..उसने आज तक किसी लड़की को छुआ तक नही था…सारा दिन दुकान पर काम करते रहने की वजह से उसका कोई ऐसा दोस्त भी नही था जो उसे सेक्स के बारे मे सोचने के लिए उकसाता..यानी उसकी कोई बुरी संगत नही थी…

पर औरत का शरीर होता ही ऐसा है..समझ ना होते हुए भी सामने वाला उसके जाल मे फँस जाता है…नेहा ने जो टावल बाँधा हुआ था, वो उसके बड़े-2 मुम्मो को पूरी तरह से ढक नही पा रहा था..उसके उभरे हुए मुम्मे देखकर केशव की हालत भी खराब होने लगी…और उसके लंड मे कड़ापन आने लगा..

वो नेहा की बात मानकर वहीं ज़मीन पर बैठ गया..और नेहा नाश्ता करने लगी..

अब उसका ध्यान आलू पूरी से ज़्यादा केशव के केले पर था..जो धीरे-2 खड़ा होकर उसके पायजामे मे उभर रहा था..

भूख तेज थी, इसलिए नाश्ता जल्दी ही ख़त्म हो गया.

अब थी असली काम करने की बारी…नेहा ने पहले से ही सोच लिया था की आज जो भी हो जाए, वो मज़े लेकर ही रहेगी…गंगू के आने तक का वेट वो नही कर सकती थी..

जैसे ही केशव प्लेट लेने के लिए आगे आया..नेहा ने ज़ोर से साँस ली और उसकी छातियाँ फूल कर और बाहर निकल आई…और उसके साथ ही उसके टावल की गाँठ भी खुल गयी…और एक ही पल मे उसका टावल नीचे पड़ा था…और वो पूरी नंगी होकर केशव के सामने खड़ी थी.

केशव तो अपनी आँखे झपकाना भूल गया…उसने नारी का ये रूप तो आजतक नही देखा था…उसका मुँह खुल गया और होंठ सूख गये…

नेहा बड़ी ही अदा से मटकती हुई उसके पास आई और बोली : “ऐसे क्या देख रहा है रे …कभी लड़की नही देखी क्या..”

उसने ना मे सिर हिला दिया..

नेहा समझ गयी की उसे सेक्स के बारे मे कोई ज्ञान नही है…वैसे पता तो उसको भी नही था ज़्यादा…उसने तो सिर्फ़ एक बार ही गंगू और रज्जो की चुदाई देखी थी…पर जिस तरह भूरे ने उसकी चूत की रगदाई की थी वो उसे बहुत अच्छा लगा था…उसने सोचा की चलो आज यही करवा लेती हू इस केशव से…अगर मौका मिला तो आगे भी करवा लेगी..

वो धीरे-2 चलती हुई उसके पास पहुँची और केशव के काँपते हुए हाथ पकड़ कर अपनी छाती पर रख दिए..

अब इतना तो केशव भी जानता था की मुम्मो को कैसे हेंडल करते हैं…उनके उपर हाथ लगते ही उसकी उंगलियों ने अपनी पकड़ बना ली और उन्हे ज़ोर से दबा दिया…

”अहह ….. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स …..उम्म्म्ममममममममम”

वही दर्दनाशक अहसास मिला नेहा को और वो किसी बेल की भाँति केशव के बदन से लिपट गयी…

बेचारा अबोध सा केशव , अपनी किस्मत पर उसे अभी तक विश्वास नही हो रहा था…ऐसी सुंदर लड़की उसके गले से लिपटी खड़ी है और वो भी पूरी नंगी…उसने उसकी गांड के उपर अपने पंजे जमाए और उसे हवा मे उठा लिया…

बिल्कुल फूल जैसा था उसका बदन…इतनी हल्की थी वो ..

नेहा तो अभी नहा कर आई थी..पर केशव सुबह से तो क्या ,शायद पिछले कई दिनों से नहाया नही था…झुग्गी मे रहने वाले लोग शायद ऐसे ही होते हैं…उसके शरीर की दुर्गंध काफ़ी ज्यादा थी, पर नेहा के सिर पर उत्तेजना का जो नशा चड़ा हुआ था उसके आगे उसे वो दुर्गंध भी खुश्बू के जैसी लग रही थी..

उसने अगले ही पल केशव के होंठों पर हमला बोल दिया…और उसे नोचने कचोटने लगी…ऐसे जैसे कोई जंगली बिल्ली अपने शिकार के साथ करती है..

केशव के लिए तो ये सब नया था…पहली बार जो था उसके साथ…पर किसी लड़की के साथ ऐसे मज़े मिलते है, ये एहसास उसे आज ही हुआ था..

नेहा के हाथ सीधा उसके लंड के उपर जा चिपके…और उसकी लंबाई नापकर वो भी हैरान रह गयी…गंगू के जितना तो नही था..पर काफ़ी लंबा था वो भी..

वो झटके से नीचे बैठी और उसने केशव का पायजामा नीचे खिसका दिया..उसका लंड एकदम से उसके सामने खड़ा होकर फुफ्कारने लगा…और बिना कुछ सोचे उसने उसे अपने मुँह के अंदर ले लिया…

केशव बेचारे ने तो आज तक मूठ भी नही मारी थी…उसके लंड के टोपे की खाल अभी तक चिपकी हुई थी…इसलिए वो पूर तरह से पीछे भी नही हो रही थी…बल्कि उसे वहाँ तकलीफ़ होने लगी..दर्द होने लगा..

नेहा को लगा की शायद वो ही कुछ ग़लत कर रही है…उसके लिए भी तो ये पहला मौका था किसी के लंड को चूसने का..उसने केशव के लंड को मुँह से निकाल दिया..उसके लंड की खाल पीछे तक नही जा पा रही थी..

पर अगर ऐसा ही रहा तो वो अपनी प्यास कैसे बुझाएगी..तभी उसे गंगू का किया हुआ एक और कारनामा याद आ गया, जब उसने रज्जो की चूत को अपने होंठों से चूसा था तो रज्जो किस तरह से मज़े ले-लेकर चीखे मार रही थी..

वो झट से चारपाई पर लेट गयी और केशव को अपनी चूत के उपर झुका लिया..वो बेचारा आँखे फाड़े उसका चेहरा देखने लगा…की करना क्या है..

नेहा : “चल,जल्दी से यहा अपने होंठ रख दे..और यहाँ चाट…”

केशव उस वक़्त ऐसी हालत मे नही था की उसे मना कर सके…उसने वैसा ही किया…और उसके मोटे-2 हलवाई वाले होंठ अपनी चूत पर लगते ही उसकी चूत पर रेंग रही चींटियाँ गायब सी होने लगी…और वो मज़े से दोहरी होकर उसके बाल पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.

”आआयययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई ………………….. सस्स्स्स्स्स्स्सि ईईईईईईईईईईईईईईई ……………… ऊऊहह”

ऐसे मज़े की तो उसने कल्पना भी नही की थी..हाथ लगाने का अलग ही असर था पर किसी के गीले होंठ ऐसा मज़ा दे सकते हैं, ये उसे आज ही पता चला..

नेहा की चूत मे उबाल सा आने लगा..उसे अंदर से महसूस होने लगा की उसे अब जीभ के बदले कुछ और ही चाहिए अपने अंदर…और उसने अपनी पूरी ताक़त लगा कर केशव को अपने उपर खींच लिया…और उसकी कमर पर अपनी टांगे लपेट कर उसके लंड को अपनी चूत के उपर रगड़ने लगी..

केशव बेचारा पहले से ही अपने लंड पर हुए हमले से कराह रहा था..उसकी आग उगलती चूत की तपन और हल्के बालों की चुभन उससे बर्दाश्त नही हुई और वो वापिस खिसक कर नीचे आ गया..

एक अनाड़ी से अपनी पहली चुदाई करवाने मे कितना नुकसान है ये अब नेहा को समझ आ रहा था…उसकी आग तो वो शांत कर ही नही सकता था..क्यो ना उपर के ही मज़े लेकर अभी के लिए शांति पहुँचा ले वो..

और उसने फिर से उसे नीचे खदेड़ दिया..और इस बार केशव को उसने नीचे लिटा दिया..और खुद उछलकर उसके उपर जा चढ़ी …

ये लगभग वही वक़्त था जब दूसरी तरफ गंगू मुम्मैत ख़ान की चुदाई करने मे लगा हुआ था..

नेहा ने केशव के शरीर पर बैठकर उपर खिसकना शुरू किया…वो जहाँ-2 से होकर उपर जाती जा रही थी, उसकी चूत से निकल रही चाशनी अपने निशान पीछे छोड़ती जा रही थी..केशव का पूरा शरीर उसकी मिठास मे नहा कर मीठा हो गया.

और जब अंत मे वो उसके मुँह तक पहुँची तो अपनी आँखो के ठीक सामने केशव को ताजमहल नाचता हुआ महसूस हुआ…इतनी सुंदर चूत और वो भी बिन चुदी , वो उसकी सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध सा हो गया…और अपने आप ही उसकी लपलपाती हुई जीभ निकल कर उसके इस्तकबाल के लिए निकल पड़ी..और जैसे ही उसकी रस बरसाती चूत ने उसके मुँह को छुआ, ऐसी आवाज़ आई जैसे ठन्डे पानी में गर्म लोहा रख दिया हो ….सर्र्र्र्र्र्रररई की आवाज़ के साथ नेहा ने अपनी चूत को उसके मुँह के उपर झोंक दिया..

”अहह ……उम्म्म्ममममममममममममममममममम…… एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स….”

नेहा के मुँह से तेज हुंकार सी निकलने लगी…गर्म साँसे इतनी तेज़ी से वो बाहर फेंक रही थी की केशव के चेहरे तक टकरा रही थी वो…और फिर नेहा ने केशव के बाल पकड़ कर अपनी पकड़ मजबूत करी और उसके मुँह पर किसी कुशल घुड़सवार की तरहा घुड़सवारी करने लगी…आगे-पीछे घिस्से लगाते हुए वो अपनी चूत के होंठों को उसके मोटे और खुरदुरे होंठों पर रगड़ने लगी….

और फिर एक जोरदार तूफान आया नेहा के अंदर….ठीक वैसा ही जैसा अस्तबल मे आया था, उस घोड़े के लंड को पकड़कर…बल्कि उससे भी ज़्यादा भयंकर…और उसने अपने अंदर का सारा मीठा और गाड़ा रस केशव के मुँह मे भर दिया…

हलवाई होने के नाते केशव ने एक से बड़कर एक मिठाइयाँ खाई थी…पर ऐसी मिठास उसने आज तक नही चखी थी…वो लॅप-लॅप करते हुए सारी चाशनी पी गया उसकी..

नेहा भी निढाल सी होकर उसके उपर गिर पड़ी…नेहा का मांसल शरीर केशव को बहुत अच्छा लग रहा था…पर वो मन ही मन अपनी नासमझी को भी कोस रहा था, क्योंकि उसे पता था की असली काम जो होना चाहिए था वो कर नही पाया…उसका लंड क्यो इतना दर्द करने लगा…इसका कोई इलाज जल्द ही ढूँढना पड़ेगा…

नेहा उठी और उसने अपने कपड़े पहन लिए,केशव को भी उसने जाने के लिए कह दिया, वो अपने बर्तन उठा कर चलता बना…

आज के लिए तो नेहा ने अपने आप को शांत कर लिया था…पर ज़्यादा दिनों तक वो अपनी चूत की प्यास को ऐसे ही नही बुझाना चाहती थी…इसके लिए अब उसको किसी ना किसी का लंड चाहिए ही था…फिर वो अब चाहे गंगू का हो या भूरे का…

उसने सोच लिया की पहला मौका मिलते ही वो अपनी प्यास बुझवाकर ही रहेगी.

भूरे को अपनी किस्मत पर विश्वास ही नही हो रहा था…वो जानता था की इस डील मे अगर कोई ग़लती हो जाती, यानी गंगू अगर आज पुलिस के हाथो पकड़ा जाता तो नेहाल भाई ने उसकी गांड मार लेनी थी..वो आज काफ़ी खुश था..

उसने कल्लन को वो पकेट लेकर नेहाल भाई को देने के लिए भेज दिया और खुद गंगू को लेकर एक होटल मे चल दिया…आख़िर उसने आज उसके करोड़ो रूपए के पेकेट की सही सलामत डेलिवरी जो ली थी और अपनी जान बचने की खुशी भी थी भूरे को..इसलिए वो अपनी खुशी को सेलेब्रेट करना चाहता था.

गंगू को लेकर भूरे एक 4 स्टार होटल मे पहुँचा, जहा वो अक्सर मज़े लेने के लिए जाया करता था..गंगू के लिए ये पहला अवसर था किसी बड़े होटेल मे जाने का, वो घबरा भी रहा था..और अंदर ही अंदर उसे नेहा की भी चिंता सता रही थी..पर भूरे ने जब कहा की उसे आज हर तरह की मस्ती करवाएगा तो शराब की बोतलें और नंगी लड़किया उसकी आँखो के सामने नाचने लगी..

गंगू तो था ही एक नंबर का ठरकी और उपर से फ्री की अँग्रेज़ी दारू पीने का अवसर भी वो खोना नही चाहता था, वो चुपचाप उसके साथ अंदर आ गया..

पर गंगू की हालत तो वही थी ना, भिखारी वाली..भूरे उसे सीधा होटेल के अंदर बने स्पा एंड मसाज सेंटर मे लेकर गया..और वहां के मेनेज़र के हाथ मे नोट पकड़ा कर उसे धीरे से सब समझा दिया..वो मॅनेजर भी भूरे को जानता था इसलिए उसने चुपचाप वो पैसे जेब मे रखे और गंगू को अपने साथ अंदर ले गया..वैसे तो उसकी भिखारी वाली हालत देखकर वो भी अपनी नाक भो सिकोड रहा था, पर भूरे के बारे मे वो जानता था की वो अंडरवर्ल्ड का बंदा है, इसलिए उसको वो मना नही कर सकता था.

भूरे उसके लिए कुछ नये कपड़े लेने के लिए पास ही बने एक शोरूम की तरफ चल दिया..और साथ ही उसने होटल मॅनेजर को बोलकर अपने और गंगू के लिए कुछ विदेशी ”माल” का भी इंतज़ाम करने के लिए कह दिया.

गंगू तो स्पा के अंदर आते ही वहां की लड़कियों को देखकर पागल सा हो गया..इतनी सुंदर-2 लड़किया थी वहां ..ज़्यादातर चींकी टाइप की थी और कुछ मोटी छातियों वाली नॉर्थ साइड की भी..

ग्राहक को देखकर मुस्कुराना उनकी ड्यूटी थी…पर ऐसे भिखारी जैसे ग्राहक को देखकर सभी एक दूसरे को ताक रही थी…उनके मॅनेजर ने जब जाकर उन्हे समझाया की वो किसके साथ आया है और उन्हे कितने सारे पैसे मिले है तो उनके सामने मना करने का सवाल ही नही था.

उनमे से दो सुंदर सी दिखने वाली लड़किया गंगू के पास आई और उसे अपने साथ लेकर एक कमरे मे चली गयी.

गंगू के पेट मे गुदगुदी सी हो रही थी, जो भी हो रहा था उसके लिए किसी सपने जैसा ही था..

अंदर पहुँचकर उन लड़कियो ने गंगू को कपड़े उतारने के लिए कहा, उसने कपड़े उतार कर अलमारी मे टाँग दिए..अब उसके शरीर पर सिर्फ़ एक पुराना सा कच्छा था ..जो कई जगह से फटा भी हुआ था..और लड़कियो को देखकर वैसे भी उसका लंड खड़ा हो चुका था पूरा का पूरा..

उसकी शक्ल तो वैसे भी भिखारियो जैसी थी..पर उसके गठीले शरीर और उसके उफनते लंड को देखकर वो दोनो लड़कियो के अंदर कुछ-2 होने लगा..

उनके नाम थे दिया और प्राची..

दिया तो शक्ल से ही बंगालन लग रही थी..उसकी बड़ी-2 आँखे और मोटे होंठ, हल्का सांवला रंग और मोटे-2 चुच्चे और उतनी ही मोटी गांड ..

प्राची शायद आसाम की होगी..उसका गोरा रंग और छोटे-2 मुम्मे बड़े ही गज़ब के लग रहे थे..

गंगू के शरीर पर काफ़ी मैल सी थी..इसलिए उन्होने पहले उसको नहलाने की सोची..उन दोनो लड़कियो ने भी अपने कपड़े उतार दिए और वो सिर्फ़ ब्रा-पेंटी मे खड़ी थी..उनके जिस्म को देखकर उसके लंड का साइज़ पूरे आकार मे आ गया…

वो दोनो गंगू को लेकर एक आलीशान से बाथरूम मे आ गयी और शावर चला दिया..

प्राची ने गंगू के शरीर पर साबुन लगाना शुरू किया और दिया ने अपने हाथ मे एक स्क्रबर लेकर उसके शरीर को रगड़ना शुरू कर दिया…गंगू तो अपने आप को आसमान पर उड़ता हुआ महसूस कर रहा था…उसने तो सोचा भी नही था की उसके जैसे भिखारी को ऐसे दिन भी देखने को मिलेंगे..

प्राची ने उसके सिर पर शेंपू लगाया, और पूरे शरीर को बॉडी वॉश से दोबारा से रगड़ा…

उसको नहलाते -2 वो दोनो भी पूरी तरह से भीग चुकी थी..पर ये तो उनका रोज का काम था..उसी काम के तो उन्हे पैसे मिलते थे..

अचानक प्राची ने गंगू के कच्छे को पकड़कर नीचे खींच दिया..गंगू ने अपने लंड को छुपाने की कोई कोशिश नही की पर उसे आश्चर्य ज़रूर हुआ की कितनी बेशर्मी से उसने वो कर दिया…शायद यही काम होगा इनका रोज का..

वो दोनों उसके लंड के साइज पलकें झपकना भूल गयी

उसे अच्छी तरह से नहलाने के बाद वो उसे बाहर ले आई…गंगू ने शीशे मे अपना पूरा अक्स देखा तो अपनी सफाई देखकर वो भी हैरान रह गया…पर चेहरे पर घनी दाढ़ी और लंड के चारों तरफ घना जंगल उसे अभी भी जंगली लुक दे रहा था..

दिया ने गंगू को एक बड़े से टेबल पर लिटाया और अगले ही पल दोनो ने अपने-2 बचे हुए कपड़े भी निकाल फेंके..

अपने सामने दोनो को एकदम से नंगा देखकर गंगू के सब्र का बाँध टूट गया और वो एकदम से उठा और प्राची के रसीले बदन से लिपट गया..

वो एकदम से चिल्लाई : “स्टॉप सर ….आप ये क्या कर रहे हैं…”

गंगू बेचारा एकदम से रुक गया…वो तो समझ रहा था की पहले उसको नंगा करके और फिर खुद नंगा होकर वो उसे चुदाई का निमंत्रण दे रही हैं..पर फिर उन्होने समझाया की वो दोनो मिलकर उसे स्पेशल मसाज देने वाली हैं..और उसके लिए वो बिना कपड़ो के ही अपने कस्टमर के सामने आती हैं..

वो समझ गया, उसे अपनी ग़लती का एहसास हुआ..वैसे तो वो इस तरह से मानने वालो मे से नही था, पर उँचे लोगो की उँची बातें , ये सोचकर वो कुछ ना बोला और चुपचाप टेबल पर लेट गया.

प्राची ने अपने हाथ मे एक तेल की बोतल ली, उसमे से अलग ही तरह की खुश्बू आ रही थी..और उसके गठीले शरीर पर मलने लगी..उसकी छातियो और कंधो को वो अपने नाज़ुक हाथों से सहलाने लगी..वो उसके सिर के उपर खड़ी हुई थी, जिसकी वजह से उसके लटके हुए मुम्मे उसके चेहरे पर टच कर रहे थे..वो आगे झुकती तो उसके दोनों मुम्मे उसके चेहरे पर दब जाते..पर गंगू अपनी तरफ से कोई भी पहल करके फिर से लज्जित नही होना चाहता था.

दिया ने उसके पैरों की मालिश करनी शुरू कर दी..और धीरे-2 उसकी जाँघो से होती हुई ,लंड को छोड़कर, पेट पर भी वही तेल मलने लगी..वो भी जब आगे झुकती तो उसके मुम्मे गंगू के पैरों के पंजों के उपर दब जाते..और धीरे-2 दिया ने अपनी लंबी उंगलियाँ उसके लंड के चारों तरफ भी घुमानी शुरू कर दी…उसकी बड़ी-२ गोटियों को जैसे ही दिया ने अपने हाथों मे पकड़ा ,गंगू के पंजों के उपर लटक रहे मुम्मों पर गंगू के पैरों की उंगलियों ने अपनी पकड़ बना ली और उसके निप्पल को गंगू ने अपने अंगूठे और साथ वाली उंगली के बीच फँसा कर ज़ोर से दबा दिया…

”आआययययययययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईई …. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ….”

दिया ने भी एक जोरदार सिसकारी मारते हुए उसके लंड को एकदम से पकड़ा और ज़ोर से दबा लिया…गंगू को एकबार तो ऐसा लगा की वो उसे उखाड़ कर अपने घर ही ले जाएगी..उसकी गांड अपनी जगह से उपर उठ गयी..और उसका लाभ उठाते हुए दिया ने अपने तेल से सने हाथ उसकी गांड के नीचे लगा कर वहाँ भी तेल मल दिया.

उपर की तरफ मालिश कर रही प्राची भी अब अपने असली रंग मे आने लगी थी..वो जान बूझकर अपने मोटे मुम्मे उसके होंठों के उपर लटका रही थी, जैसे कोई दासी अपने राजा को अंगूर खिलाती है, गंगू ने भी बड़े ही राजसी अंदाज मे अपना मुँह खोला और उसकी छाती पर लगे अंगूर को अपने मुँह के अंदर लेकर ज़ोर से चुभला दिया..

उसके मुँह से भी एक जोरदार सिसकारी निकल आई..

”आआआाागगगगगगगगगगगगघह …… उम्म्म्ममममममममम ”

अब गंगू का कब्जा दोनो के निप्पल्स पर था..नीचे उसने अपने दोनो पैरों की उंगलियों के बीच दिया के निप्पल फँसा रखे थे और उपर अपने मुँह के अंदर प्राची का और अपने हाथ से उसके दूसरे निप्पल को..

कुल मिलाकर माहौल अब काफ़ी गर्म हो चुका था..

गंगू ने फिर से पहल करने की सोची और दिया को अपने उपर खींचकर अपने लंड पर बिठाने की कोशिश करने लगा…

वो एक बार फिर से चीखी : “नही सर …आप ऐसा नही कर सकते…ये एलाउ नही है…”

गंगू को बहुत गुस्सा आया…साली ये कैसी लड़कियाँ है…उसके सामने पूरी नंगी खड़ी है, उसके शरीर से खेल रही है, अपने शरीर से खेलने दे रही है, पर चुदाई का टाइम आते ही कहती है की ये एलाउ नही है…

पर उसका तो ये पहला टाइम था, शायद इन लड़कियो की लिमिट यहीं तक ही है..

वो अपने मन पर काबू करते हुए फिर से लेट गया.

प्राची बोली : “सॉरी सर …पर फ़किंग एलाउ नही है…बाकी जो भी करना चाहे आप कर सकते हैं…”

भागते भूत की लंगोटी ही सही…ये सोचकर उसने चबर-2 बोल रही प्राची के मुँह के अंदर अपना लंड ठूस कर उसे चुप करा दिया…और दिया को अपने पास बुलाकर उसकी छोटी सी चूत के अंदर अपनी मोटी उंगली घुसेड दी..

दोनो सी-सी करती हुई मचलने लगी…

प्राची ने आजतक इतने बड़े लंड के दर्शन नही किए थे…उसे हेंडल करना उसके लिए काफ़ी मुश्किल हो रहा था..वो सही तरह से उसे अपने मुँह मे भी नही ले पा रही थी..

और दूसरी तरफ अपनी चूत के अंदर गंगू की उंगलियों की थिरकन से दिया किसी नर्तकी की तरह नाचने लगी…और गंगू के हल्के से झटके ने उसके चेहरे को उसके एकदम पास कर दिया…और अगले ही पल गंगू के खूंखार होंठों ने उस हिरनी के होंठों को अपने मुँह मे दबोचकर उसे चूसना शुरू कर दिया…

गंगू के दुर्गंध भरे मुँह से वो पीछा छुड़वाना चाहती थी, पर उसकी मजबूत पकड़ और अपनी चूत पर मिल रही मसाज की वजह से वो ऐसा नही कर पाई..और वहीं खड़ी होकर उसका साथ देने लगी.

गंगू ने आज तक एक साथ दो-2 लड़कियो से मज़े नही लिए थे…पर आज उसे ये एहसास हो गया था की ऐसी अय्याशी का भी अपना ही मज़ा है..

दिया भी अब गंगू से अलग हुई और वो भी उसके सामने बैठ कर प्राची की हेल्प करने लगी…दोनो बारी -2 से गंगू का लंड चूसने लगी…गंगू के लिए ये एहसास ऐसा था जैसे वो पूरी दुनिया का राजा है..और अपनी दासियों से वो अपने लंड को चुस्वा रहा है..

वो आराम से बैठकर अपने लंड को चुसवाने का मज़ा लेने लगा..

और उसे जल्द ही ये एहसास हो गया की उसके अंदर एक तूफान बनने लगा है, उसकी खिंच रही मांसपेशियो को देखकर वो दोनो भी समझ गयी की सावन की बारिश कभी भी हो सकती है..

प्राची ने अपने हाथ मे गंगू के लंड को पकड़कर जोरों से हिलाना शुरू कर दिया, और दोनो ने अपने-2 मुँह उसके सामने भूखी कुतिया की तरह खोल लिए..

और एक तेज गड़गड़ाहट के साथ गंगू लंड का बादल फट गया और उसके बीच से तेज बारिश की बूंदे निकलकर उनके चेहरे पर गिरने लगी और वो उसके मीठे रस को अपने -2 मुँह मे कैच करने की कोशिश करने लगी..

गंगू तब रुका जब उन दोनो के चेहरे पर अपने सफेद रस की पूरी परत बिछा चुका था वो…बारिश के साथ-2 स्नो फाल का एहसास हो रहा था उन दोनो को अब..

वो दोनो गंगू को लेकर फिर से बाथरूम मे चली गयी और उसे दोबारा रगड़ -2 कर नहलाया..वैसे तो कुछ ही देर मे गंगू का लंड दोबारा खड़ा हो गया, पर उसके बाद भी वो चुदवाने के लिए तैयार नही हुई..

उसको अच्छी तरह से नहलाने के बाद वो तीनो बाहर आ गये, और गंगू को वहीं छोड़कर दोनो ने अपने-2 कपड़े पहने और बाहर निकल गयी…

गंगू ने अपने निचले हिस्से पर टावल लपेटा और वहीं बैठा रहा ..

कुछ ही देर मे भूरे अंदर आया…

उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी , वो बोला : “क्यो गंगू..कैसा लगा…”

गंगू भी मुस्कुरा दिया : “सही था भाई…ऐसा मज़ा तो आज तक नही मिला..”

भूरे भी मन ही मन सोचने लगा की साले छक्के से घर पर अपनी बीबी की गर्मी तो शांत नही की जाती और यहा पर डींगे हांक रहा है…इसने तो कुछ भी नही किया होगा..

पर बेचारा असलियत नही जानता था..जो जल्द ही उसके सामने आने वाली थी..

क्योंकि भूरे ने एक विदेशी लड़की का इंतज़ाम करवा लिया था..और दोनो एक ही कमरे मे मिलकर उसे चोदने वाले थे..

भूरे के हिसाब से तो गंगू के बस का कुछ नही था…इसलिए वो मन ही मन खुश हो रहा था की वो अकेला ही उस रशियन लड़की की चूत मारेगा…पर वो ग़लतफहमी भी जल्द ही दूर होने वाली थी उसकी.

भूरे अपने साथ गंगू के लिए नये कपड़े लेकर आया था…वो उसे देकर बाहर उसका इंतजार करने लगा.

जब नये कपड़े पहन कर गंगू बाहर निकला तो भूरे भी उसको पहचान नही सका..वो काफ़ी अच्छा लग रहा था..

कमी थी तो उसकी घनी दाढ़ी र उसकी लंगड़ाती चाल की…वरना वो किसी फिल्मी हीरो जैसा ही लगता..

वो उसे लेकर होटेल के कमरे की तरफ चल दिया…और साथ ही साथ ये भी बता दिया की अब असली मज़ा लेने की बारी है…और वो भी एक विदेशी चूत की..

गंगू सोच रहा था की कितना अच्छा दिन है उसकी जिंदगी का आज..पहली बार उसकी जेब मे बीस हज़ार रुपय थे, उसके बाद उसने मुम्मेथ ख़ान की भी अच्छी तरह से बजाई और फिर स्पा सेंटर मे उन दोनो लड़कियो ने उसे जन्नत का एहसास दिलाया और अब एक विदेशी लड़की की चूत भी मिलेगी..और उससे पहले महंगी शराब भी पीने को मिलेगी

वो भी जानता था की अभी-2 झड़ने के बाद जब वो चोदने पर आएगा तो उसका लंड कितनी दूर तक उसका साथ देगा..

एक तरफ गंगू मज़े ले रहा था और दूसरी तरफ बेचारी नेहा अपने जिस्म की आग मे सुलगकर गंगू का इंतजार कर रही थी..

पर उसे क्या पता था की गंगू आज किस दुनिया मे मगन है.

गंगू और भूरे एक आलीशान कमरे मे पहुँचे, दो कमरे थे वहाँ, एक मे तो सोफा ,टेबल और बार बनी हुई थी, दूसरे कमरे मे आलीशान बेड और बाल्कनी थी..जिसमे खड़े होकर पूरा शहर दिख रहा था.

गंगू और भूरे सोफे पर बैठ गये..तभी अंदर के कमरे से निकल कर एक रशियन लड़की बाहर आई..उसको देखकर एक पल के लिए गंगू तो अपनी पलकें झपकना भी भूल गया, इतनी गोरी लड़की, इतने मोटे मुम्मे , सुनहरे बाल, लाल सुर्ख होंठ..टी शर्ट और मिनी स्कर्ट , टी शर्ट मे से उसके मुम्मे बाहर निकलने के लिए जैसे मरे जा रहे थे, उसने अंदर ब्रा भी नही पहनी थी..जिसकी वजह से उसके दूधिया स्तनों के उपर लगे लाल निप्पल साफ़ दिख रहे थे..गंगू तो पागल हुए जा रहा था उसको देखकर..

भूरे : “कैसी लगी…”

गंगू बेचारा क्या बोलता, आज तो उसकी जिंदगी का ऐसा दिन था,जिसमे उसको ये पता चला था की खूबसूरत औरतें कैसी होती है…और अब ये विदेशी लड़की को देखकर और ये सोचकर की थोड़ी ही देर मे उसकी मारने को मिलेगी, उसका लंड फटा जा रहा था..और भूरे के प्रश्न का वो कोई जवाब भी नही दे पाया..

भूरे को उसकी हालत देखकर हँसी आ गयी..वो बोला : “हा हा … देख ले गंगू, ये होती है असली जिंदगी…तुझे पता है, मैने इस लड़की की पहले भी दो बार बजाई है…साली को अँग्रेज़ी के सिवा कुछ समझ नही आता और हमे अँग्रेज़ी आती नही…पर चुदाई के मामले मे ये सब बातें समझती है…अब देखता जा तू, कैसे मज़े दिलवाता हू मैं तुझे..”

उस रशियन लड़की का नाम था मालविना, उम्र होगी सिर्फ़ 19 के आस पास …कयामत थी सच मे..

इतना कहकर वो मालविना की तरफ मुड़ा और बोला : “मालविना….ड्रिंक …ड्रिंक ….”

वो दारू की बोतलों की तरफ इशारा करते हुए उस लड़की से बोला…वो प्रोफेशनल थी..मुस्कुराते हुए वो मूडी और बार मे से एक 100 पाइपर की बोतल निकाल कर ले आई..

भूरे ने उसे पेग बनाने का इशारा किया…अब उसको अँग्रेज़ी तो आती नही थी..इसलिए टूटी फूटी अँग्रेज़ी और इशारों से काम चला रहा था..और कमाल की बात ये थी की वो सब समझ भी रही थी..

मालविना ने दो लार्ज ड्रिंक बना कर दिए..

भूरे ने उसको फिर से कहा : “नो ..नो …ऐसे मत दो ….डिप ..डिप ..”

गंगू की समझ मे नही आया की ये क्या डिप करने के लिए कह रहा है..पर वो शायद पहले भी भूरे के साथ आई थी और वो सब कर चुकी थी, इसलिए उसका अर्थ वो फ़ौरन समझ गयी…और उसने एक झटके मे अपनी टी शर्ट उतार फेंकी..और उपर से नंगी हो गयी..उसके मोटे-2 सफेद खरबूजे दोनो की वहशी आँखों के सामने झूल गये..

गंगू तो उसका बेबाकपन देखकर हैरान था…और फिर जो उसने किया, उसे देखकर तो गंगू ने अपने लंड पर हाथ रखकर सहलाना शुरू कर दिया..

मालविना ने दोनो पेग उठाए…और थोड़ा झुक कर अपनी चुचियों को दोनो ग्लास मे डिप करा दिया…और फिर उन दोनो के सामने पहुँच कर उनके हाथ मे वो ग्लास थमा दिए..

दोनो ने चियर्स किया और एक ही घूँट मे दोनो ने पूरे ग्लास खाली कर दिए..

उनके सिर जैसे ही नीचे आए, मालविना ने दोनो के सिर पकड़े और अपने शराब से भीगे हुए निप्पल्स उन दोनो के मुँह मे घुसेड कर उन्हे अपनी छाती से चिपका लिया..

दोनो भूखे बच्चों की तरह उसका दूध पीने लगे..उसके स्तनों पर लगी मदिरा को चखने लगे….मालविना के सेक्सी निप्पल्स से लगकर वो शराब और भी नशीली हो गयी थी..

गंगू ने उसकी गांड पर हाथ रखकर ज़ोर से दबा दिया…इतनी मुलायम डबलरोटी उसने आज तक नही मसली थी…विदेशी जो थी.

भूरे ने उसकी स्कर्ट खोल दी और वो नीचे लहरा गयी…और अब उसकी रसीली , मखमली और गोरी चिट्टी चूत उन दोनो की भूखी आँखों के सामने थी..

मालविना ने अपना एक पैर उपर उठाया और गंगू के सिर को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ झुकाने लगी…गंगू ने भी पूरी उत्तेजना के साथ अपनी जीभ निकाली और उसकी बरफी जैसी मीठी चूत पर दे मारी..

उसके चेहरे पर उगी दाढ़ी और मूँछे उसकी चिकनी चूत पर चुभी और वो एक रोमांच भरे स्वर मे सिसक उठी….

”अहह…..येसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…….”

उसने शायद ऐसे जंगली लुक वाले जानवर के साथ पहले कभी चुदाई नही करवाई थी…

भूरे भी पहले गंगू को मौका देकर उसकी मर्दानगी का टेस्ट लेना चाहता था…उसके हिसाब से तो गंगू के बस का कुछ भी नही था..जो भी करना था उसको खुद ही करना था बाद मे…इसलिए वो साइड मे हो गया..

गंगू ने उसके मांसल जिस्म को पकड़ा और उसे हर जगह से नींबू की तरह निचोड़ने लगा..वो जैसे पागल हो गया था इतना कोरा माल देखकर..

वो भी सेक्सी आवाज़ें निकाल रही थी, जैसे पॉर्न मूवीस मे लड़कियाँ निकालती है..पूरा कमरा गंगू की गर्म साँसों की आवाज़ और मालविना की सेक्सी सिसकारियों से गूँज रहा था..

मालविना गंगू के सामने घुटनों के बल बैठ गयी..और उसकी नई पेंट की जीप खोल दी…फिर जैसे ही उसका अजगर बाहर आया, उसके मुँह से एक सिसकारी निकल गयी..शायद ये सोचकर की जब वो रेंगता हुआ उसके बिल मे जाएगा तो कितना मज़ा आएगा..

वहीं दूसरी तरफ भूरे ने जब उसके खड़े हुए लंड को देखा तो वो भी हैरान रह गया…उसने तो आशा भी नहीं की थी की गंगू के पास इतना बड़ा लंड होगा…और वो भी खड़ा हुआ..ये कैसे हो सकता है.

वो हैरानी से उसे देखने लगा.

मालविना ने अपना मुँह खोला और उसके लंड को मुँह मे भरकर उसे प्यार करने लगी.

गंगू भी उसके सुनहेरे बालों को पकड़कर अपने लंड के उपर ज़ोर-2 से मारने लगा.

कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद वो खड़ी हुई और गंगू का हाथ पकड़कर दूसरे कमरे मे ले गयी..भूरे वहीं बैठा रहा..क्योंकि वहाँ से भी अंदर का नज़ारा साफ़ दिख रहा था..उसने अपने लिए एक लार्ज पेग बनाया और उन्हे देखते हुए उसे पीने लगा..

अंदर जाकर गंगू ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए..और अब वो जंगली भालू की तरह नंगा उसके सामने खड़ा था..

मालविना हाइ क्लास की रंडी थी..इसलिए शायद उसने इतना भद्दा सा दिखने वाला इंसान अपनी लाइफ मे अभी तक नही देखा था..पर जो पैसे उसको मिल रहे थे और जो लंड उसको सामने दिख रहा था, वो बहुत था उसकी सोच को रोकने के लिए.

गंगू ने मालविना को अपनी बाहों मे भरा और उसके स्ट्रॉबेरी जैसे होंठों पर टूट पड़ा…उसके गुलाबी होंठों को उसने चूस-2 कर लाल कर दिया…और फिर यही हाल उसने उसकी दोनो ब्रेस्ट का भी किया..

मालविना भी उसके जंगलीपन को देखकर अपनी उत्तेजना के शिखर पर पहुँच चुकी थी…वो अँग्रेज़ी मे बड़बडाए जा रही थी .. “बाइट मी…….सक मी…..क़िस्स्स मी. ..अहह ….एससस्स …..उम्म्म्मममम ”

और फिर उसके शरीर के हर हिस्से को अपनी लार से भिगोता हुआ गंगू दक्षिण दिशा की तरफ बड़ा..और जैसे ही उसके सपाट पेट के बाद उसकी उभरी हुई चूत की दरारें उसके मुँह के सामने आई, वो उनपर टूट पड़ा…और फिर से अपनी दाढ़ी -मूँछ से भरा मुँह उसकी चूत पर फिराने लगा..

वो बिस्तर पर किसी जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी…गंगू अपनी लंबी जीभ से सड़प -2 करता हुआ उसकी चूत से निकल रहा विदेशी शहद सॉफ कर रहा था..

अब मालविना की हालत खराब होने लगी थी…उसने उसके बालों को पकड़कर उपर खींचा और ज़ोर से चिल्लाई : “अहह…..फकककक मीsssssssssssssssss …..फककक मी ….यू बास्टर्ड ……..”

गंगू उसको अच्छी तरह से तडपा चुका था…इसलिए अब मालविना से बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था..

और बाहर बैठा हुआ भूरे अपनी साँस रोककर बैठ गया, वो अभी भी ये आस लगा कर बैठा था की गंगू उसकी चूत नही मार पाएगा..

गंगू उसके उपर आया और अपने स्टील रोड जैसे लंड को अपने हाथ मे पकड़कर उसकी चूत पर रगड़ने लगा…पर अंदर नही डाला..उसकी ये हरकत से मालविना पागल सी होकर हुंकारने लगी..

”फकककक मीssssssssssssssssssss ….यू बास्टर्ड……फक्क मीीssssss ….कुत्ते….”

उसने हिन्दी वर्ड कुत्ते बोला, शायद इतना तो वो सीख ही चुकी थी इंडिया आकर..

अपने लिए कुत्ता शब्द एक विदेशी के मुँह से सुनते ही जैसे गंगू के अंदर एक देशभक्ति की भावना आ गयी …वो ज़ोर से चिल्लाया : “साली …..मुझे कुत्ता बोलती है….तेरी माँ की चूत …..अभी तेरी चूत के परखच्चे उड़ाता हू, गली की कुतिया की तरह चुदाई ना करी तो मेरा भी नाम गंगू नही…”

और उसने अपने लौड़े को बिना किसी वॉर्निंग के उसकी चूत के अंदर धकेल दिया…इतना मोटा लंड उसकी छोटी सी चूत के अंदर जाते हुए फँस गया ..पर गंगू उसके उपर अपने पूरे भार के साथ लेट गया..और उसका पहलवान उसकी चूत को ककड़ी की तरह चीरता हुआ अंदर तक घुस गया और उसके अखाड़े मे जाकर ही दम लिया उसने..

मालविना की आँखों से आँसू निकल आए, इतना मोटा लंड अपने अंदर लेकर..ये उसका पहला मौका था जब उसके अंदर इतना मोटा गया था…उसको दर्द तो हो रहा था, पर वो उसके लंड की कायल हो उठी..उसने अपनी टांगे थोड़ी देर के लिए गंगू की कमर मे लपेटी और उसे अपने उपर खींचकर उसे फ्रेंच किस करने लगी..

पर गंगू अब पागल हो चुका था..वो उपर उठा और उसने मालविना की टाँगो को दोनो दिशाओं मे फैलाकर चोडा किया और अपने लंड को किसी पिस्टन की तरह अंदर-बाहर करने लगा..

कुछ ही देर मे मालविना का दर्द भी गायब हो गया…और वो मस्ती मे भरकर चीखे मारने लगी..

”आहह आअहह उम्म्म्ममम…येसस्स्सस्स….फककक मी…लाइक दिस …याsssssssssssssssss अ…ऑश याअ…. आई एम लविंग इट …..ह …एसस्स…… ओफफफफ्फ़ …… उम्म्म्मममम …….आई एम कमिंग….”

और वो झड़ गयी..

पर अपना हीरो हिन्दुस्तानी कहाँ हारने वाला था…वैसे भी वो अभी-2 झड़ा था, इसलिए वो देर तक चलने वाला था इस बार…वो लगा रहा..

फिर वो आसान बदल-2 कर उसको चोदने लगा…कभी उसको अपने उपर खींच कर उसके मुम्मे चूसता हुआ धक्के मारता, कभी उसको पेट के बल लिटा कर उसकी चूत मे पीछे से लंड डालता..और आख़िर मे जब वो झड़ने के करीब आया तो उसने उसको कुतिया वाले पोज़ मे लाकर उसकी भरी हुई गांड को मसल-2 कर चोदा ..और अंत मे उसने अपना सारा माल उसके विदेशी बॅंक मे जमा करा दिया और उसके उपर गिरकर सांड की तरह हाँफने लगा..

ये पूरा कार्यकरम लगभग 40 मिनट तक चला था..

और बाहर बैठा हुआ भूरे सिंग उसकी चुदाई की कला को देखकर हैरान और परेशान हुए जा रहा था…

मालविना में और चुदवाने की हिम्मत नही बची थी, गंगू ने उसकी हालत इतनी बुरी जो कर दी थी.

कुछ देर बाद वो भूरे को किसी तरह से समझा बुझा कर चली गयी…भूरे का मन भी अब चुदाई करने का नही कर रहा था…दोनो ने मिलकर बची हुई शराब की बोतल ख़त्म की और फिर दोनो वापिस अपनी झुग्गी की तरफ चल दिए.

गंगू अपने आप को दुनिया का सबसे भाग्यशाली इंसान समझ रहा था…पर आज पूरे दिन की मेहनत और चुदाई के बाद उसके शरीर मे कुछ भी करने की हालत नही बची थी..उपर से वो नशे मे धुत्त था…वो बस जाकर सोना चाहता था..

पर उसको नही पता था की उसका इंतजार कर रही नेहा के मन मे आज क्या प्रोग्राम चल रहा है.

भूरे ने अपनी जीप कॉलोनी के बाहर ही रोक दी, क्योंकि अंदर तक गाड़ी के जाने का रास्ता नही था..काफ़ी रात हो चुकी थी..भूरे ने किसी तरह से गंगू को अपने कंधे का सहारा दिया और उसको लेकर झुग्गी की तरफ चल दिया.

उसके घर पहुँच कर भूरे ने दरवाजा खड़काया, और कुछ ही देर मे नेहा ने दरवाजा खोल दिया, भूरे ने जैसे ही नेहा को देखा तो वो उसको देखता ही रह गया..

उसने सिर्फ़ एक ब्लाउस और पेटीकोट पहना हुआ था..जिसमे से उसके मोटे-2 उरोज किसी फूटबाल की तरह फँसे हुए थे..गंगू को नशे की हालत मे देखते ही वो जल्दी से दूसरी तरफ आई और उसे अपने कंधे का सहारा देते हुए दोनो अंदर ले आए..

नेहा : “ये क्या हुआ इन्हे….शराब पे है क्या..?”

भूरे : “हाँ भाभी…आप तो ऐसे बोल रही है, जैसे जानती ही नही की ये शराब पीता है..”

अब वो क्या बोलती, वो अपने कमजोर दिमाग़ को दोष देने लगी की क्यो उसको कुछ याद नही है..

वो सोच मे डूबी हुई थी और भूरे उसके गुदाज जिस्म को घूर रहा था..पेटीकोट मे उसकी थाई की शेप साफ़ दिख रही थी..और साथ ही साथ उसके उठते बैठते सीने पर भी उसकी गंदी नज़र थी

और उसकी कुत्ते जैसी नज़र को अपने जिस्म पर चुभता हुआ नेहा भी महसूस कर रही थी..वो तो आज पहले से ही मूड मे थी की कब गंगू आए और कब वो उसके साथ मज़े ले..पर वो नशे की हालत मे क्या कर पाएगा और क्या नही ये तो तभी पता चलेगा जब भूरे सिंह वहाँ से वापिस जाएगा…वो तो गंगू की चारपाई पर ऐसे बैठ गया जैसे वहीं रहने का प्लान हो उसका..

भूरे मन मे सोच रहा था की आख़िर क्या करे की नेहा की जवानी चखने के लिए मिल जाए…पर उसको अपनी बात शुरू करने का कोई उपाय नही सूझ रहा था..और तभी जैसे उपर वाले ने उसकी सुन ली, बिजली चली गयी पूरी कॉलोनी की..और झुग्गी के अंदर घुपप अंधेरा हो गया..

नेहा एकदम से परेशान सी हो गयी…वो अपने हाथों को आगे करती हुई किचन वाले हिस्से मे गयी और माचिस ढूढ़ने लगी..भूरे अपनी जगह से उठा और अपनी उल्लू जैसी आँखों से अंधेरे मे जाकर नेहा से जा टकराया..

नेहा : “ओह्ह्ह्ह …..आप क्यो तकलीफ़ कर रहे हैं….आप बैठिए..मैं माचिस ढूँढती हू…”

भूरे : “कोई बात नही भाभी जी…मैं भी आपकी मदद करता हू..”

इतना कहते हुए भूरे उसके जिस्म से रग़ड़ लगाता हुआ आगे की तरफ आ गया…और फिर अचानक नेहा की तरफ पलट कर खड़ा हो गया..अंधेरा इतना था की नेहा उसकी चाल समझ नही पाई और ना ही देख पाई और सीधा उससे जा टकराई…भूरे ने एकदम से उसको अपनी बाहों मे भर लिया और उसके सेक्सी शरीर को निचोड़ कर रख दिया..

भूरे : “ओफफफफ्फ़ …..सॉरी भाभी ….ये अंधेरा इतना है….ओह्ह्ह्ह्ह …सम्भालो …आप गिर ना जाओ…”

उसने जान बूझकर उसका बेलेंस बिगाड़ दिया और नीचे गिरती हुई नेहा को अपनी बाहों मे जकड़कर उपर उठा लिया..उसके मोटे-2 खरबूजे उसकी छाती से बुरी तरह से पिस गये..और हड़बड़ाहट मे उसका हाथ एक बार के लिए भूरे के खड़े हुए लंड से भी छू गया..

एक पल के लिए जैसे वक़्त रुक सा गया…दोनो की गर्म साँसे कमरे मे सुनाई दे रही थी…और साथ ही गंगू के खर्राटे..

नेहा का हाथ उसके लंड से लगकर वहीं जाम सा हो गया..उसका फायेदा उठाकर भूरे ने अपने लंड को एक-दो ठुमके देकर और बड़ा कर लिया..नेहा की हथेली से जैसे आग निकल रही थी..जो उसके लंड को झुलसा देना चाहती हो..

पर अपनी तरफ से पहल करके वो कोई परेशानी खड़ी नही करना चाहता था…एक तो वो जानता नही था की अगर वो अपनी तरफ से पहल करेगा तो नेहा भी उसका साथ देगी या नही और अगर गंगू को बोल दिया तो वो उसको छोड़ेगा नही..गंगू काफ़ी काम का बंदा था अब उसके लिए..जिस तरह से उसने आज करोड़ो रूपए डूबने से बचा लिए वो उसका फायदा आगे भी लेना चाहता था..

वो बिना हीले डुले वहीँ खड़ा रहा..

पर नेहा की हालत खराब थी…उसके लिए तो सारे लंड एक ही समान थे…थोड़ी बहुत बातें उसकी समझ मे आने लगी थी..पर सेक्स अपने पति के साथ ही करना है, ऐसी कोई पाबंदी वो नही जानती थी..

एक तो पहले से ही वो सुलग रही थी..और अब भूरे के खड़े लंड का सहारा मिलने से उसकी भावनाए उमड़ने लगी थी…और उन्ही भावनाओ मे बहते हुए उसने भूरे के लंड को उमेठ दिया..

अब वो भी समझ गया की चिड़िया जाल मे फँस गयी है..वो अपने हाथ उसके मुम्मे पर रखना ही चाहता था की एकदम से लाइट आ गयी..

और गंगू जहाँ सो रहा था, उसके सिर के बिल्कुल उपर बल्ब लगा हुआ था,और एकदम से अपनी आँखों मे रोशनी पड़ते ही वो जाग गया और हड़बड़ा कर उठ बैठा..

पर वो कुछ देख पाता, उससे पहले ही भूरे और नेहा अलग हो गये..

भूरे की तो के एल पी डी हो गयी…उसका लंड मुरझा कर बैठ गया.

गंगू ने अपनी आँखे खोली और उन्हे मलते हुए दोनो की तरफ देखा..

भूरे : “गंगू, तू तो पीने के बाद लूड़क गया था, मैं बस अभी-2 तुझे लेकर आया हू..”

उसने अपने लिए जैसे सफाई दी

गंगू कुछ ना बोला, वो नशे की हालत मे अपने आप को संभालने की कोशिश करने लगा..

पर अब भूरे ने वहाँ से निकलने मे ही भलाई समझी..उसने दोनो से विदा ली और बाहर निकल आया.

पर जाते हुए उसके मन मे एक बात तो पक्की हो चुकी थी की अगर नेहा को ढंग से हेंडल किया जाए तो उसको चोदना काफ़ी आसान काम है.

उसके जाते ही नेहा ने दरवाजा बंद कर दिया और लपककर गंगू के पास आई..पर तब तक वो फिर से सो चुका था..

नेहा को गुस्सा तो काफ़ी आया पर वो कुछ बोल नही पाई..पर आज उसने भी ठान लिया था की मज़े लेकर ही रहेगी…उसने जल्दी-2 अपने कपड़े उतार फेंके और पूरी नंगी हो गयी..

अगर गंगू होश मे होता तो उसे पता चलता की जिसे इतने दीनो से नंगा देखने की चाहत थी वो उसके कमरे मे नंगी खड़ी है और चुदने के लिए पूरी तरह से तय्यार है, पर उसकी किस्मत जैसी आज सुबह से थी शायद रात होते-2 पलट चुकी थी, इसलिए उसके हाथ से इतना सुनहरा मौका निकल गया था.

नेहा का तराशा हुआ बदन बल्ब की रोशनी मे चमक रहा था..वो चलती हुई गंगू के पास आई और उसकी पेंट खोल कर नीचे कर दी..फिर उसने धड़कते दिल से उसके अंडरवीयर को भी नीचे खिसका दिया..

एक पल के लिए तो वो भी डर गयी, उसके सोए हुए नाग को देखकर..सोया हुआ काला लंड इतना ख़तरनाक लग रहा था की अगर कोई पहली बार उसको देख ले तो मर ही जाए..पर नेहा के दिमाग़ मे तो उत्तेजना का बुखार चड़ा हुआ था..उसने काँपते हुए हाथों से उसे अपने हाथ मे लिया..

एक पल के लिए तो उसका शरीर काँप सा उठा, इतना मुलायम लंड था उसका, जैसे कोई जेली से बना हुआ खिलोना हो..वो आगे की तरफ झुकी और अपनी जीभ निकाल कर उसके लंड पर घुमा दी..

उसके लंड से इतनी बुरी बदबू आ रही थी की एक पल के लिए तो उसने अपना मुँह पीछे कर लिया…पर हाथ मे पकड़े हुए लंड मे अचानक जान सी आने लगी तो अपनी चूत के कहने पर वो फिर से गंगू के लंड के करीब गयी और अपनी साँस रोककर एक ही बार मे उसके अकड़ रहे लंड को अपने मुँह मे लेकर ज़ोर-2 से चूसने लगी..

जितना पानी उसकी चूत से निकल रहा था उससे ज़्यादा उसकी लार निकल कर गंगू के लंड को नहला रही थी..

अब नेहा को भी मज़ा आने लगा था उसे चूसते हुए…लंड जितना काला होता है उसका स्वाद उतना ही उत्तेजना से भरा होता है,ये बात आज उसने जान ली थी.

वो गंगू के काले भूसंड लंड को अपने मुँह मे लेकर ज़ोर -2 से चूस रही थी.. जैसे कोई लोलीपोप हो

उसके दिमाग़ मे उस दिन का सीन चल रहा था जब गंगू और रज्जो ने अस्तबल मे चुदाई की थी…काश वो होश मे होता तो वो सारे आसन कर लेती उसके साथ..

पर गंगू होश मे भले ही नही था, पर अपने सपनों मे वो पूरे मज़े ले रहा था..

उसको तो लग रहा था की उसका लंड अभी भी वो रशियन लड़की मालविना ही चूस रही है..उसने अपना हाथ नेहा के सिर पर रख दिया और नशे की हालत मे बड़बड़ाने लगा : “अहहssssssssssssssss ….मालविना …..मेरी जान ….चूस इसको…..खा जा साली, मेरे लौड़े को …”

गंगू के मुँह से मालविना का नाम सुनकर नेहा की समझ मे कुछ नही आया…अगर कोई समझदार पत्नी होती तो ऐसी हालत मे अपने पति के मुँह से किसी दूसरी लड़की का नाम सुनकर उसकी माँ ही चोद देती, पर नेहा का मामला थोड़ा अलग था…वो बेचारी अपने अधिकारों के बारे मे कुछ भी नही जानती थी…उसकी बला से वो मालविना का नाम ले या रज्जो की चुदाई करे, उसे कोई फ़र्क नही पड़ता था..

वो चारपाई पर चढ़ गयी..वो 69 पोसिशन के बारे मे नही जानती थी, वरना उस वक़्त वो घूमकर गंगू को अपनी चूत खिला देती और खुद उसके लंड की पार्टी उड़ाती..उस बेचारी की चूत मे काफ़ी खुजली हो रही थी…जिसे बुझाना ज़रूरी था…वो गंगू के लंड को जल्द से जल्द अपनी चूत मे लेना चाहती थी…पर गंगू उसके सिर को अपने लंड पर दबाए हुए उसे उपर उठने ही नही दे रहा था..बेचारी अकड़ू सी होकर उसकी टाँगो के बीच बैठी हुई उसके लंड को चूसती रही..

अचानक उसने गंगू की टाँग को अपनी दोनों टांगो के बीच ले लिया , जिसकी वजह से उसके पैर का अंगूठा उसकी चूत से जा टकराया, और अपनी चूत पर उसके पैर का घिस्सा लगते ही वो तड़प सी उठी और दुगने जोश के साथ उसके लंड को चूसने लगी..

पर गंगू ने अपनी तरफ से कुछ नही किया, जिसकी वजह से वो तड़प सी उठी और उसने अपनी चूत को थोड़ा एडजस्ट करते हुए सीधा उसके पैर के अंगूठे पर रखा और उसे अपने अंदर लेकर सिसक उठी..

”उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म। …। अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ”

भले ही वो पैर का अंगूठा था, पर काफ़ी मोटा और लंबा था…देखा जाए तो वो एक छोटे-मोटे लंड के जैसा ही था..जिसे अपनी चूत मे लेकर नेहा मज़े ले रही थी..अभी के लिए तो उसे जितना मिल रहा था वो उसमे ही खुश हो रही थी…क्योंकि उसे अपनी चूत की आग को बुझाने का इससे अच्छा कोई और उपाय नही सूझ रहा था…

गंगू का अंगूठा अंदर जाकर उसकी क्लिट की मसाज कर रहा था और उसकी बाकी की उंगलियाँ उसकी चूत के होंठों की रगडाई करते हुए उसे दोहरा मज़ा दे रही थी..

और दूसरी तरफ अपनी सुनहरी परी मालविना के सपने लेते हुए गंगू के लंड ने अचानक ज़ोर-2 से पिचकारियाँ निकालनी शुरू कर दी…

नेहा ने इसके बारे मे तो कुछ भी सोचा नही था…उसने अपने मुँह को पीछे करने की काफ़ी कोशिश की पर गंगू ने उसे अपने लंड पर बुरी तरह से दबा रखा था..वो उसके रस नो निगलने के सिवा और कुछ कर ही नही पाई…

और जैसे ही उसके रस का स्वाद उसे अच्छा लगने लगा, बाकी की मलाई वो खुद ही चूस चूसकर उसके लंड की नसों से निकालने लगी…

और साथ ही साथ उसके अंगूठे से घिसाई करते हुए उसकी चूत ने भी गरमा गरम चाशनी उसके पैरों के उपर निकालनी शुरू कर दी..

और बुरी तरह से पस्त होकर वो उपर की तरफ आई और गंगू के गले से लिपट कर लेट गयी…और लेटने के कुछ देर बाद ही उसे गहरी नींद भी आ गयी..

अब वो पूरी नंगी होकर उसके जिस्म से चिपक कर सो रही थी..गंगू भी आधा नंगा था..अब एक बात तो पक्की थी, सुबह उठकर गंगू को अपनी जिंदगी का सबसे हसीन दृश्य देखने को मिलने वाला था …और उसके बाद क्या होगा ये तो आप सोच भी नही सकते..

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