उषा part 2

उषा अपनी गाण्ड से गौतम का लण्ड को निकालने कि कोशिश कर रही थी और गौतम अपने लण्ड को उषा कि गाण्ड में घुसेड़ने कि कोशिश कर रहा था। इसी दौरान गौतम ने एक बार उषा कि कमर को कस कर पकड़ लिया और अपनी कमर हिला करके एक धक्का मारा तो उसके लौड़े का सुपारा उषा कि गाण्ड कि छेद में घुस गया। फिर गौतम ने जलदी से एक और जोरदार धक्का मारा तो उसका पूरा का पूरा लण्ड उषा की गाण्ड में घुस गया और गौतम की झांटे उषा कि चूतड़ को छूने लगी। अपनी गाण्ड ने गौतम का लण्ड के घुसते ही उषा जोर से चीखी और चिल्ला कर बोली, “साले बहनचोद, दूसरे कि बीवी कि गाण्ड मुफ़्त में मिल गया तो क्या उसको चोदना जरूरी है? भोसड़ी के निकाल अपना मूसल जैसा लण्ड मेरी गाण्ड से और जा अपना लण्ड अपनी मा कि गाण्ड में या उसकी बुर में घुसा दे। अरे रमेश तुमहे दिख नही रहा है, तुम्हारा दोस्त मेरी गाण्ड फाड़ रहा है? अरे कुछ करो भी, रोको गौतम को, नही तो गौतम मेरी गाण्ड मार मार कर मुझे गाण्डु बना देगा फिर तुम भी मेरी चूत छोड़ कर के मेरी गाण्ड ही मारना।” रमेश अपना लण्ड सुमन की गाण्ड के अन्दर बाहर कराते उषा से बोला, “अरे रानी, क्यों चिल्ला रही हो। गौतम तुम्हे अभी छोड़ देगा और एक-दो गाण्ड मारवने से कोइ गाण्डु नही बन जाता है। देखो ना मैं भी कैसे गौतम कि बीवी कि गाण्ड ने अपना लण्ड अन्दर बहर कर रहा हूं। तुमको अभी थोड़ी देर के बाद गाण्ड मारवने में भी बहुत मज़ा मिलेगा। बस चुपचाप अपनी गाण्ड में गौतम का लण्ड पिलवाती जाओ और मज़ा लूटो। इतना सुनते ही गौतम ने अपना हाथ आगे बढा कर उषा कि एक चूंची पकड़ कर मसलने लगा और अपना कमर हिला हिला कर अपना लण्ड उषा कि गाण्ड के अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी देर के उषा को भी मज़ा आने लगा और वो अपनी कमर चला चला कर गौतम का लण्ड अपनी गाण्ड से खाने लगी। थोड़ी देर के बाद रमेश और गौतम दोनो ही सुमन और उषा कि गाण्ड में अपना लण्ड के पिचकारी से भर दिया और सुस्त हो कर सोफ़ा में लेट गये।

इस तरह से रमेश और उषा जब तक गौतम और सुमन के घर पर रुके रहे तब तक दोनो दोस्त एक दूसरे कि बीवीयों की चूत चोद चोद कर मज़ा मारते रहे। कभी कभी तो दोनो दोस्त उषा या सुमन को एक साथ चोदते थे। एक बिस्तर पर लेट कर नीचे से अपना लण्ड चूत में डालता था और दूसरा अपना लण्ड ऊपर से गाण्ड में डालता था। उषा और सुमन भी हर समय अपनी चूत या गाण्ड मरवाने के लिये तैयार रहती थी। जब सब लोग घर के अन्दर रहते थे तो सभी नंगे ही रहते थे। उषा और सुमन भी नंगी हो कर ही चाय या खाना बनाती थी और जब भी रमेश या गौतम उनके पास अता था तो वो झुक कर उनका लण्ड अपने मुंह में भर कर चूसती थी और जैसे ही लण्ड खड़े हो जाता था तो खुद अपने हाथों से खड़े लण्ड को अपनी चूत से भिड़ा कर खुद धक्का मार कर अपनी चूत में भर लेती थे। एक हफ़्ता तक उषा और रमेश अपने दोस्त के घर बने रहे और फिर वापस अपने घर के लिये चल पड़े।

जब प्लेन में रमेश और उषा अपने घर के लिये जा रहे थे तो रमेश ने उषा से पूछा, क्यों उषा रानी, एक बात सही सही बातओ, कौन ज्यादा अच्छा चोदता है, मैं, गौतम या पिताजी?” रमेश का बात सुन कर उषा बिलकुल अचम्भित हो गई, फिर उसने धीरे से पूछा, “पिताजी से चुदाई कि बात तुमको कैसे मालूम? तुम तो अपनी सुहागरात पर ड्यूटी पर थे?” तब रमेश धीरे से उषा को चूमते हुए बोला, “हां, तुम ठीक कह रही हो, मुझे उस दिन ड्यूटी पर जाना पड़ा। जब हम अपनी ड्यूटी से करीब एक घण्टे के बाद लौटा तो देखा तुम पिताजी का लण्ड पकड़ चूस रही हो और पिताजी तुम्हारी चूत में अपनी अंगुली पेल रहे है। यह देख मैं चुपचाप कमरे के बहर खड़े हो कर तुम्हे और पिताजी का चुदाई खत्म होते वक्त तक देखा और फिर लौट गया और सुबह ही घर पर आया।”

“क्या तुम मुझसे नाराज़ हो” उषा धीरे से रमेश से पूछा।

“नही, मैं तुम से बिलकुल भी नाराज नही हूं। तुमने पिताजी को अपनी चूत दे कर एक बहुत बड़ा उपकार किया है” रमेश बोला। उषा यह सुन कर बोली, “वो कैसे”। तब रमेश बोला, “अरे हमारी माताजी अब बुड्ढी हो गई है और उनको टांगे उठाने में तकलीफ़ होते है, लेकिन पिताजी अभी भी जवान हैन। उनको अगर घर पर चूत नही मिलती तो वो जरूर से बाहर जाकर अपना मुंह मारते। उसमे हम लोगो कि बदनामी होती। हो सकता कि पिताजी को कोई बिमारी ही हो जाती। लेकिन अब यह सब नही होगा क्योंकि उनको घर पर ही तुम्हारी चूत चोदने को मिल जाया करेगा।”

“तो क्या मुझको पिताजी से घर में बार बार चुदवाना पड़ेगा?” उषा ने पलट कर रमेश से पूछा।

“नही बार बार नही, लेकिन जब उनकी मरज़ी हो तुम उनको अपनी चूत देने से मना मत करना।”

“लेकिन अगर तुम्हारी माताजी ने देख लिया तो?” उषा ने पूछा।

“तब की बात तब देखी जायेगी” रमेश ने कहा।

फिर उषा और रमेश अपने घर आ गये और वे अपने अपने कम पर लग गये। रमेश अब पूरी तरह से ड्यूटी करता और रात को उषा को नंगी करके खूब चोदता था। गोविन्द जी भी कभी कभी उषा को मौका देख चोद लेते थे। फिर कुछ दिनो के बाद उषा और रमेश साथ साथ उषा के मैके गये। ससुराल में रमेश का बहुत आव-भगत हुअ। उषा के जितने रिशतेदार थे उन सभी ने रमेश और उषा को खाने पर बुलया। रमेश और उषा को मज़े ही मज़े थे। अपने ससुराल पर भी रमेश उषा को रात को दो-तीन दफ़ा जरूर चोदता था और कभी मौका मिल गया तो दिन को उषा को बिसतर पर लेटा कर चुदाई चालू कर देता था। एक दिन रमेश पास की किसी दुकन पर गया हुआ था। उषा कमरे में बैठ कर पेपर पढ रही थी। एकाएक उषा को अपनी मा, रजनी जी के रोने कि अवाज़ सुनाई दिया। उषा भाग कर अन्दर गई तो देखा कि रजनी जी भगवानजी के फोटो सामने खड़ी खड़ी रो रही है और भगवानजी से बोल रही है,

“भगवन तुमने ये क्या किया। तुम मेरे पति इतनी जल्दी क्यों उठा लिया और अगर उनको उठा लिया तो मेरी बदन में इतना गरमी क्यों भर दिया। अब मैं जब जब अपनी लड़की और दामाद कि चुदाई देखती हूं तो मेरी शरीर में आग लग जती है। अब क्या करूं? कोइ रास्ता तुम्ही दिखला दो, मैं अपनी गरम शरीर से बहुत परेशान हो गई हूं।” उषा समझ गई कि क्या बात है। वो झट अपनी मा के पास जकर मा को अपने बाहों में भर लिया और पीछे से चूमते हुए बोली,“मा तुमको इतना दुख है तो मुझसे क्यों नही बोली?” रजनी जी अपने आपको उषा से चुराते हुए बोली,

“मैं अगर तुझे बता भी दूं तो तू क्या कर लेती? तुम भी तो मेरी ही तरह से एक औरत हो?”

“अरे मुझसे कुछ नही होता तो क्या तुम्हारा दामाद तो है? तुम्हारा दामाद ही तुमको शान्त कर देगा” उषा अपनी मा को फिर से पकड़ कर चूमते हुए बोली।

“क्या बोली तू, अपने दामाद से मैं अपनी जिस्म कि भूख शान्त करवाऊंगी? तेरा दिमाग तो ठीक है?” रजनी जी अपनी बेटी उषा से बोली। तब उषा अपने हाथों से अपनी मा कि चूंचियों को पकड़ कर दबाते हुए बोली, “इसमे क्या हुआ? तुम जिस्म कि भूख से मरी जा रही हो, और तुम्हारा दामाद तुम्हारी जिस्म कि भूख को नहीं मिटा सकता है क्या ?, अगर तुम्हारी जगह मैं होती तो मैं अपने दामाद के समने खुद लेट जाती और उससे कहती आओ मेरे प्यारे दामादजी मेरे पास आओ और मेरी जिस्म की आग बुझाओ।”

“चल हट बड़ी चुद्दकड़ बन रही है, मुझे तो यह सोच कर ही शरम आ रही है, कि मैं अपनी दामाद के सामने नंगी लेट कर अपनी टांगे उठाऊंगी और वो मेरी चूत में अपना लण्ड पेलेगा” रजनी जी मुड़ कर अपनी बेटी कि चूंचियों को मसलते हुये बोली।

तभी रमेश, जो कि बाहर गया हुआ था, कमरे में घुसा और घुसते हुए उसने अपनी बीवी और सास की बातों को सुन लिया। रमेश ने आगे बढ कर अपनी सास के सामने घुटने के बल बैठ गया और अपनी सास के चूतड़ों को अपने हाथों से घेर कर पकड़ते हुए सास से बोला, “मा आप क्यों चिन्ता कर रही हैं, मैं हूं ना? मेरे रहते हुए आपको अपनी जिस्म कि भूख कि चिन्ता नही करनी चाहिये। अरे वो दामाद ही बेकार का है जिसके होते हुए उसकि सास अपनी जिस्म की भूख से पागल हो जाये।”

“नही, नही, छोड़ो मुझे। मुझे बहुत शरम लग रही है” रजनी जी ने अपने आप को रमेश से छुड़ाते हुए बोली। तभी उषा ने आगे बढ कर अपनी मा कि चूंची को पकड़ कर मसलते हुए उषा अपनी मा से बोली, “क्यों बेकार की शरम कर रही हो मा। मन भी जाओ अपने दामाद की बात और चुपचाप जो हो रहा उसे होने दो।” तब थोड़ी देर चुप रहने के बाद रजनी जी अपनी बेटी की तरफ़ देख कर बोली, “ठीक है, जैसे तुम लोगो कि मरज़ी। लेकिन एक बात तुम दोनो कान खोल कर सुन लो। मैं अपने दामाद के समने बिलकुल नंगी नही हो पाऊंगी। आगे जैसा तुम लोग चाहो।” इतना सुन कर रमेश मुसकुरा कर अपने सास से कह, “अरे सासुमा आप को कुछ नही करना है। जो कुछ करमा मैं ही करुंगा, बस आप हमारा साथ देती जाये।”

फिर रमेश उठ कर खड़े हो गया और अपनी सास को अपनी दोनो बाहों में जकड़ कर चूमने लगा। रजनी जी चुपचाप अपने आप को अपने दामाद के बाहों में छोड़ कर खड़ी रही। थोड़ी देर तक अपने सास को चूमने के बाद रमेश ने अपने हाथों से अपने सास कि चूंची पकड़ कर दबाने लगा। अपने चूंचियों पर दामाद का हाथ पड़ते ही रजनी जी मारे सुख के बिलबिला उठी और बोलने लगी, “और जोर से दबाओ मेरी चूंचियो को बहुत दिन हो गये किसी ने इस पर हाथ नही लगाया है। मुझे अपने दामाद से चूंची मसलवाने में बहुत मज़ा मिल रहा है। और दबाओ। आ बेटी तू ही आ मेरे पास आजा और मेरे इन चूंचियों से खेल।” अब रमेश फिर से अपने सास के पैरों के पास बैठ गया और उनकी साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत को चूमने लगा। रजनी जी अपने चूत के ऊपर अपने दामाद के मुंह लगते ही बिलबिला उठी और जोर जोर से सांस लेने लगी।

रमेश भी उनकी साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत को चूमता रहा। थोड़ी देर के बाद रजनी जी से सहा नही गया और खुद ही अपने दामाद से बोली, “अरे अब कितना तड़पाओगे। तुम्हे चूत में अंगुली या जीभ घुसानी है तो ठीक तरीके से घुसाओ। साड़ी के ऊपर से क्या कर रहे हो?” अपनी सास कि बात सुन कर रमेश बोला, “मैं क्या करता, आपने ही कहा था आप साड़ी नही उतारेंगे। इसिलिये मैं आपकी साड़ी के ऊपर से ही आपकी चूत चूम रहा हूं।”

“वो तो ठीक है, लेकिन तुम मेरी साड़ी उठा कर भी तो मेरी चूत का चुम्मा ले सकते हो?” रजनी जी ने अपने दामाद से बोली। अपनी सास कि बात सुनते ही रमेश ने जल्दी से अपनी सास की साड़ी को पैरों के पास से पकड़ कर ऊपर उठाना शुरु कर दिया और जैसे ही साड़ी रजनी जी की जांघो तक उठ गई तो रजनी जी मारे शरम के अपना चेहेरा अपने हाथों से ढक लिया और अपने दामाद से बोली, “अब बस भी करो, और कितना साड़ी उठाओगे। अब मुझे शरम आ रही है। अब तुम अपना सर अन्दर डाल कर मेरी चूत को चूम लो।” लेकिन रमेश अपनी सास कि बात को अनसुनी करते हुए रजनी जी की साड़ी को उनकी कमर तक उठा दिया और उनकी नंगी चूत पर अपना मुंह लगा कर चूत को चूम लिया। थोड़ी देर तक रजनी जी की नंगी चूत को चूम कर रमेश अपनी सास कि चूत को गौर से देखने लगा और अपनी अंगुलियों से उनकी चूत की पत्तियों और दाने से खेलने लगा। रमेश कि हरकतों से रजनी जी गरमा गई और उनकी सांस जोर जोर से चलने लगी।

अपनी मा की हालत देख कर उषा आगे बढ कर अपनी मा की चूंचियो से खेलने लगी और धीरे धीरे उनकी ब्लाऊज के बटन खोलने लगी। रजनी ने अपने हाथों से अपने ब्लाऊज को पकड़ते हुए अपने बेटी से पूछने लगी, “क्या कर रही हो? मुझे बहुत शरम लग रही है। छोड़ दे बेटी मुझको।“ उषा अपनी काम जारी रखते हुए अपनी मा से बोली, “अरे मा, जब तुम अपने दामाद का मूसल अपने चूत में पिलवाने जा रही हो तो फिर अब शरम कैसी? खोल दे अपने इन कपड़ों को और पूरी तरफ़ से नंगी हो कर मेरे पति के लण्ड का सुख अपने चूत से लो। छोड़ो अब, मुझको तुम्हारे कपड़े खोलने दो।” इतना कह कर उषा ने अपनी मां का ब्लाऊज, ब्रा, साड़ी और फिर उनकी पेटीकोट भी उतार दिया। अब रजनी जी अपने दामाद के समने बिलकुल नंगी खड़ी थी। रमेश अपने नंगी सास को देखते ही उन पर टूट पड़ा और एक हाथ से उनकी चूंचियो को मलता रहा और दूसरे हाथ से उनकी चूत को मसलता रहा। रजनी जी भी गरम हो कर अपने दामाद का कुरता और पैजामा उतर दिया। फिर झुक कर अपने दामाद का अन्डरवियर भी उतार दिया। अब सास और दामाद दोनो एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।

जैसे ही रजनी जी ने रमेश का मोटा मस्त लण्ड को देखा, रजनी जी अपने आप को रोक नही पाई और झुक कर उस मस्त लण्ड अपने मुंह में भर कर चूसने लगी। उषा भी चुपचाप खड़ी नही थी। वो अपनी मा के चूतड़ के तरफ़ बैठ कर उसकी चूत से अपना मुंह लगा दिया और अपनी मा कि चूत को चूसने लगी। रजनी जी अपने दामाद का मोटा लण्ड अपने मुंह में भर कर चूसने लगी और कभी कभी उसको अपने जीभ से चाटने लगी। लण्ड को चाटते हुए रजनी जी ने अपने दामाद से बोली, “हाय! रमेश, तुमहरा लण्ड तो बहुत मोटा और लम्बा है। पता नही उषा पहली बार कैसे इसको अपनी चूत में लिया होगा। चूत तो बिलकुल फट गई होगी? मेरे तो मुंह दर्द होने लगा इतना मोटा लण्ड चूसते चूसते। वैसे मुझे पता था कि तुमहरा लण्ड इतना शानदार है”

“कैसे?” रमेश ने अपने सास कि चूंचियों को दबाते हुए पूछा। तब रजनी जी बोली, “कैसे क्या? तुम जब मेरे घर में अपने शादी के बाद आये थे और रोज दोपहर और रात को उषा को नंगी करके चोदते थे तो मैं खिड़की से झांका करती थी और तुम्हारी चुदाई देखा करती थी। उन दिनो से मैं जानती थी कि तुम्हारा लण्ड की साईज़ क्या है और तुम कैसे चूत चाटते हो और चोदते हो।” तब रमेश ने अपने सास कि चूंचियों को मसलते हुए पूछा, “क्या मांजी, आपके पति यानि मेरे ससुरजी का लण्ड इतना मोटा और लम्बा नही था?” “नही, उषा के पापा का लण्ड इतना मोटा और लम्बा नही था, और उनमे सेक्स कि भावना बहुत ही कम थी। इसिलिये वो मुझको हफ़्ते में केवल एक-दो बार ही चोदते थे” रजनी जी ने बोली।

थोड़ी देर के रमेश अपनी सास को बिस्तर पर लेटा कर उसकि चूत से अपना मुंह लगा दिया और अपने जीभ से उसकि चूत को ्चाटना शुरु कर दिया। चूत में जैसे ही रमेश की जीभ घुसी तो रजनी जी अपनी कमर उचकते हुए बोली, “उम्मम्म, अह्हह, ऊइ मा, राजा अभी छोड़ो ना क्यूं तड़पाते हो, मैं जल रही हूं, तुम्हारा लण्ड मुझे चूसना है। तुम्हारा लण्ड तो घोड़े जैसे है, मुझे डर लग रहा है जब तुम अन्दर मेरे चूत मैं डालोगे तो मेरी चूत तो फ़ट जायेगी। मेरी चूत का छेद बहुत छोटा है और ज्यादा चुदि भी नही है। आज तुम पहली बार मेरी चूत में अपन लण्ड डालने जा रहे हो। आराम से डालना और बड़े प्यार से मेरी चूत को चोदना”

तब रमेश ने अपना लण्ड अपनी सास कि चूत पर लगाते हुए बोला, “कोई बात नही मांजी, आपकी चूत को जो भी कमी पहले थी अब उसको मैं पूरा करुंगा। मैं अब रोज़ आपकी और आपकी बेटी को एक ही बिस्तर पर लेटा कर अपन लोगों कि चूत चोदुंगा।”

यह सुनते ही उषा अपने मम्मी से बोली, “मां अब तो तुम खुश हो? अब से रोज़ तुम्हारा दामाद तुमको और मुझको नंगी करके हमारी चूत चोदेगा। हां, अगर तुम चाहो तो तुम अपनी गाण्ड में भी अपने दामाद का लण्ड पिलवा सकती हो।” इतना कह कर उषा ने रमेश से बोली, “मेरे प्यारे पति, अब क्यों देर कर रहे हो। जल्दी से अपना यह खड़ा लण्ड मेरी मां कि चूत में पेल दो और उनको तबियत के साथ खूब चोदो। देख नही रहे हो कि मेरी मा तुम्हारा लण्ड अपनी चूत में पिलवाने के कितनी बेकरार है। लाओ मैं ही तुम्हारा लण्ड पकड़ कर पानी मा कि चूत में घुसेड़ देती हूं,” और उषा ने अपने हाथों से पकड़ कर रमेश का लण्ड उसके सास कि चूत पर लगा दिया। रमेश का लण्ड के चूत से लगते ही रजनी जी ने अपनी कमर हिलाना शुरु कर दिया और रमेश ने भी अपनी कमर हिला कर अपना लण्ड अपने सास कि चूत में डाल दिया। रजनी जी कि चूत अपने पति के देहान्त के बाद से चुदी नही थी और इसालिये बहुत टाईट थी और उसमे अपना लण्ड डालने में रमेश को बहुत मज़ा मिल रहा था। रजनी जी भी अपने दामाद का लण्ड अपनी चूत में पेलवा कर सातवें आसमान पर पहुंच गई थी और वो बड़बड़ा रही थी, “आआअह ऊऊऊह आराम से डालो यार, मेरी चूत ज्यादा खुली हुई नहीं है। प्लीज, पूरा लण्ड मत डालो नही तो मेरी चूत फ़ट जायेगी, उई मा।म मर गई, ओह, आह, हन, मेरी चूत फ़ाड़ दो, हां, ज़ोर से, और ज़ोर से, राजा है मादरचोद रमेश आज मेरी चूत फाड़ दो आआअह आआआह ऊऊऊह ज़ोर से डालो, और ज़ोर से डालो, आज जितना ज्यादा मेरी चूत के साथ खेल सकते हो खेलो, राजा यह लण्ड पूरा मुझे दे दो, मै इस के बिना नहीं रह सकती हूं, पूरा लण्ड डालो, उम्मम्मम आआह आआआह” “उम्मम्मम आआआआह चूत में गुड, उम्मम्मम्म अह अह अह ओह्ह ओह नो। मैं चूत खाज से मरी जा रही हूं, मुझे जोर जोर से धक्के मार मार कर चोदो।” थोड़ी देर के बाद रजनी जी ने अपने दामाद को अपने चारों हाथ और पैर से बांध कर बोली, “आआअह आआआआआह उम्मम्मम्म, चोदो मुझे ज़ोर से उम्मम्मम्मम्म, उफ़ मादरचोद बहुत मज़ा आ रहा है, प्लीज रुकना नही, ओह मुझे रगड़ कर चोदो, ज़ोर से चोदो, अपना लण्ड पूरा मुझ को दे दो, तुम जैसा कहोगे मै वैसा ही करूंगी लेकिन मुझे और चोदो, तुम बहुत अच्छा चोदते हो, मुझे ही आज बहुत ज्यादा, चोदो भेनचोद तुम्हारा लण्ड तो तुम्हारे ससुर से भी बड़ा है, चोदो मुझे नहीं तो मै मर जाऊंगी, अभी तो तुम ने मेरी गाण्ड भी मारनी है।”

थोड़ी देर तक रजनी जी कि चूत चोदने के बाद रमेश ने अपनी सास से पूछा, “मा जी मेरी चुदाई आप को कैसी लग रही है?” रजनी अपने दामाद कि लण्ड के धक्के अपने चूत से खाती हुई बोली, “मेरे प्यारे दामाद जी बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे तुम्हारी चुदाई बहुत अच्छी लग रही है। तुम चूत चोदने में बहुत ही माहिर हो। बड़ा मजा आ रहा है मुझे तुमसे चुदवाने में डियर ऊओह्हह्ह डियर तुम बहुत अच्छा चोदते हो आआह्हह्हह्ह ऊऊऊह्हह्हह्हह्हह्ह ऊऊओफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ फ़ुद्दी मारी यू आर एन एक्सपर्ट। तुम्हे मालूम है कि कैसे किसी औरत कि चूत की चुदाई की जाती है और तुम्हे यह भी मालूम है कि एक औरत को कैसे कैसे सुख दिया जा सकता है। यूं ही हां डियर यूं ही चोदो मुझे…बस चोदते जाओ मुझे अब कुछ नहीं पूछो आज जी भर के चोदो मुझे डियर हां डियर जम कर चुदाई करो मेरी तुम बहुत अच्छे हो बस यूं ही चुदाई करो मेरी…ऊऊह्हह्हह्हह…।। खूब चोदो मुझे…” और रमेश अपनी सास को अपनी पूरी ताकत के साथ चोदता रहा।

रमेश अपनी सास कि बात सुन सुन कर बहुत उत्तेजित हो गया और जोर जोर से अपने सास कि चूत में अपना लण्ड पेलने लगा। थोड़ी देर के बाद रमेश को लगा कि अब वो झड़ने वाला है तो उसने अपनी सास से बोली, “सासुमा मैं झड़ने जा रहा हूं।” तो रजनी जी बोली, “राजा, प्लीज मेरी चूत के अन्दर ही झड़ो” और रमेश अपना लण्ड पूरा का पूरा अपनी सास की चूत में लण्ड ठांस कर लण्ड कि पिचकरी छोड़ दिया। थोड़ी देर के बाद रजनी जी भी बिसतर पर से उठ खड़ी हुई और सीधे बाथरूम में जा कर घुस गई। थोड़ी देर के बाद अपनी चूत धो धा कर रजनी जी फिर से कमरे घुसी और मुसकुरा कर अपने दामाद से बोली, “हाय! मेरे राजा आज तो तुमने कमाल ही कर दिया। तुम तो सिरफ़ एक झड़े लेकिन मैं तुम्हारी चुदाई से तीन बार झड़ी हूं। इतनी जोरदार चुदाई मैने कभी नही की। मेरी चूत तो अब दुख रही है।”

तभी उषा, जो कि अपने पति और अपने मा की चुदाई देख रही थी, बोली, “मा अपने दामाद का लण्ड अपनी चूत में पिलवा कर मज़ा आया? मेरी शादी की पहली रात तो मैं बिलकुल मर सी गई थी और अब इस लण्ड से बिना चुदवा कर मेरी तो रात को नीद ही नही आती। मैं रोज़ कम से कम एक बार इस मोटा तगड़ा लण्ड से अपनी चूत जरूर चुदवती हूं या अपनी गाण्ड मरवाती हूं।” तभी रमेश ने अपने सास को अपने बाहों में भर कर बोला, “मां जी, एक बार और हो जाये आपकी चूत की चुदाई। मैं जब कम से कम दो या तीन बार नही चोद लेता हूं मेरा मन ही नही भरता है।” रजनी जी बोली, “अरे थोड़ा रुको, मेरी चूत तुम्हारी चुदाई से तो अब तक कुलबुला रही है। अब तुम एक बार उषा कि चूत चोद डालो।”

“नही मां जी, मैं तो इस वक्त आपकी चूत या गाण्ड में अपना पेलना चाहता हूं। आपकी लड़की कि चूत तो मैं रोज़ रात को चोदता हूं, मुझे तो इस समय आपकी चूत या गाण्ड चोदने की इच्छा है।” तब उषा अपने मा से बोली, “मा चुदवा ना लो और एक बार। अगर चूत बहुत ही कुलबुला रही है तो अपने गाण्ड में ले लो अपने दामाद का लण्ड। कसम से बहुत मज़ा मिलेगा।”

तब रजनी जी बोली, “ठीक है, जब तुम दोनो कि यही इच्छा है, तो यह लो मैं एक बार फिर से चुदवा लेती हूं। लेकिन इस बार मैं गाण्ड में रमेश का लण्ड लेना चाहती हूं। और दो मिनट रुक जओ, मुझे बहुत प्यास लगी है मैं अभी पानी पी कर आती हूं।” तब उषा अपने मा से बोली, “अरे मां, रमेश का लण्ड बहुत देर से खड़े है और आप पानी पीने जा रही हो? इन बिस्तर पर लेटो मैं तुमहरी प्यास अपनी मूत से बुझा देती हूं।”

इतना सुनते ही रजनी जी बोली, “ठीक है ला अपना मूत ही मुझे पिला मैं प्यास से मरी जा रही हूं” और वो बिसतर पर लेट गई। मा को बिस्तर पर लेटा देख कर उषा भी बिस्तर पर चढ गई और अपने दोनो पैर मां के सर के दोनो तरह करके बैठ गई और अपनी चूत रजनी जी के मुंह से भिड़ा दिया। रजनी जी भी अपनी मुंह खोल दिया। मुंह खुलते ही उषा ने पिशाब कि धार अपने मा कि मुंह पर छोड़ दिया और रजनी जी अपनी बेटी की मूत बड़े चाव से पीने लगी। पिशाब पूरा होने पर उषा अपने मा के ऊपर से उठ खड़ी हो गई और रजनी जी के बगल में जा कर बैठ गई। तब रमेश ने अपने सास के बाहों को पकड़ कर उनको बिस्तर पर उल्टा लेटा दिया और उनकी कमर को पकड़ कर उनके चूतड़ को उपर कर दिया। जैसे रजनी जी घोड़ी सी बन कर बिस्तर पर आसन लिया तो रमेश अपने मुंह से थोड़ा सा थूक निकल कर अपने सास कि गाण्ड में लगा दिया और अपना लण्ड को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी सास कि गाण्ड कि छेद में लगा दिया। रजनी जी तब अपने हाथों से अपनी बेटी कि चूंचियों को मसलते हुए बोली, “रमेश मेरे राजा, मैने आज तक कभी गाण्ड नही चुदवाई है और मुझको पता है कि गाण्ड मरवाने में पहले बहुत दर्द होता है। इसलिये तुम आराम से मेरी गाण्ड में अपन लण्ड डालना। जैसे ही रमेश ने जोर लगा कर अपना लण्ड का सुपारा अपनी सास की गाण्ड में घुसेड़ा तो रजनी जी चिल्ला उठी, “आआआह ऊऊऊऊह आआआआह क्या कर रहा हो, मै मार जाऊंगी, राजा तुम तो मेरी गान्ड फ़ाड़ कर रख दोगे, मैने पेहले कभी गाण्ड नहीं मरवाई है प्लीज़ मेरे लल्ला आहिस्ता से करो।” अपनी मा को चिल्लाते देख उषा ने रमेश से बोली, “क्या कर रहे हो, धीरे धीरे आराम से पेलो ना अपना लण्ड। देख नही रहे हो मेरी मां मरी जा रही है। मां कोई भागी थोड़ी ना जा रही है।”

रमेश इतना सुन कर अपनी बीवी से बोली, “क्यों चिन्ता कर रही हो। तुमको अपनी बात याद नही। जब मैने पहली बार अपना लण्ड तुम्हारी गाण्ड में पेला था तो तुम कितना चिल्लाई थी और बाद तुम्ही मुझसे बोल रही थी, और जोर से पेलो, पेलो जितना ताकत है फ़ाड़ दो मेरी गाण्ड, मुझको बहुत मज़ा मिल रहा है और मैं तो अब से रोज तुमसे अपनी गाण्ड में लण्ड पिलवाऊंगी।” उषा अपने पति कि बात सुन कर अपनी मा से बोली, “मा थोड़ा सा सबर करो। अभी तुम्हारी गाण्ड का दर्द खतम हो जयेगा और तुमको बहुत मज़ा मिलेगा। रमेश जैसा लण्ड पेल रहा है उसको पेलने दो।”

तब रजनी जी बोली, “वो तो ठीक है, लेकिन अभी तो लग रहा था कि मेरी गाण्ड फटी जा रही है, और मुझको अब पिशाब भी करना है।” रमेश अपनी सास कि बात सुन कर उषा से बोला, “उषा तुम जलदी से किचन में से एक जग लेकर आओ और उसको अपनी मां की चूत के नीचे पकड़ो।” उषा जल्दी से किचन में से एक जग उठा कर लाई और उसको अपनी मां की चूत के नीचे रख कर मां से बोली, “लो अब मूतो, मेरी प्यारी मां। तुम भी मां एक अजीब ही हो। उधर तुमहरा दामाद अपना लण्ड तुम्हारे गाण्ड में घुसेड़ रखा है और तुमको पिशाब करनी है।” रजनी जी कुछ नही बोली और अपने एक हाथ से जग को अपनी चूत के ठीक नीचे लकर चर चर करके मूतने लगी। राजनी को वाकई ही बहुत पिशाब लगी थी क्योंकि जग करीब करीब पूरा का पूरा भर गया था।

जब रजनी जी का पिशाब रुक गया तो उषा ने जग हटा लिया और जग को उठा कर अपने मुंह से लगा कर अपनी मां की पिशाब पीने लगी। यह देख कर रमेश रजनी जी से बोला, “अरे क्या कर रही हो, थोड़ा मेरे लिये भी छोड़ देना। मुझको भी अपने सेक्सी सास कि चूत से निकला हुअ मूत पीना है।” उषा तब बोली, “चिंता मत करो, मैं तुम्हारे लिये आधा जग छोड़ देती हूं।”

थोड़ी देर के बाद रजनी जी अपने दामाद से बोली, “बेटा मैं फिर से तैयार हूं, तुम मुझे आज एक रण्डी की तरह चोदो। मेरी गाण्ड फ़ाड़ दो। मैं बहुत ही गरम हो गई हूं। मेरी गाण्ड भी मेरी चूत कि तरह बिलकुल प्यासी है।” “अभी लो मेरी सेक्सी सासुमा, मैं अभी तुम्हारी गाण्ड अपने लण्ड के चोटों से फ़ाड़ता हूं” और यह कह कर रमेश ने अपना लण्ड फिर से अपने सास कि गाण्ड में पेल दिया। गाण्ड में लण्ड घुसते ही रजनी जी फिर जोर से चिल्लने लगी, “हाय! फ़ाड़ डाला रे मेरी गाण्ड, फ़ाड़ डाला रे। अरे कोई मुझे बचाओ रे, मेरी दामाद और मेरी बेटी दोनो मिल कर मेरी गाण्ड फड़वा डाला।” तब उषा अपने मा से बोली, “अरे मा क्यों एक छिनाल रण्डी की तरह चिल्ला रही हो, चुप हो जाओ और चुपचाप अपने दामाद से अपनी गाण्ड में लण्ड पिलवाती रहो। थोड़ी देर के बाद तुमको बहुत मज़ा मिलेगा।” अपनी बेटी कि बात सुन कर रजनी जी चुप हो गई लेकिन फिर भी उसकी मुंह से तरह तरह की आवाजे निकल रही थी।

“…।आआह्हह्ह……यययौऊ…।ऊऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़…।।ईईईइस्सास्सास्सह्हह्हह…।ऊऊओह्हह्हह्ह…।यययौउ…।।ऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़……यह…।।लण्ड बहुत मोटा और लम्बा है। ऊऊऊओमम्म्माआआआहह्हह्हह…है! मैं मरी जा रही हूं। ऊऊउह्हहह्हह……प्लीऽऽऽस्सासे…।आआआआअ…।ऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़…।धीरे…जरा धीरे पेलो मैं मरी जा रही हूं। अरे बेटी, अपने पति से बोल ना कि वो जरा मेरी गाण्ड में अपना लण्ड धीरे धीरे पेले। मुझे तो लग रहा कि मेरी चूत और गाण्ड दोनो एक हो जायेंगी।” थोड़ी देर के बाद रमेश अपना हाथ अपने सास के सामने ले जकर उनकी चूत को सहलाने लगा और फिर अपनी अंगुलियों से उनकी चूत की घुण्डी को पकड़ कर मसलने लगा। अपनी चूत पर रमेश का हाथ पड़ते ही रजनी जी बिलबिला उठी और अपनी कमर हिला हिला कर रमेश के लण्ड पर ठोकर मारने लगी।

यह देख कर रमेश ने उषा से कह, “देख तेरी रण्डी मां कैसे अपनी कमर चला कर मेरे लण्ड को अपने गाण्ड में पिलवा रही है। क्या तुम्हारी यही मां अभी थोड़ी देर पहले अपनी गाण्ड मरवाने पर नहीं चिल्ला रही थी?” यह सुन कर उषा बोली, “ओह्ह रमेश! क्या बात है! देखो मेरी मां क्या मज़े से अपनी गाण्ड से तुम्हारा लण्ड खा रही है। देखो मेरी मां कैसे गाण्ड मरवा रही है। मारो, मारो रमेश, मेरी मा कि गाण्ड में अपना लण्ड खूब जोर जोर से पेलो। इसके पूरे बदन में लण्ड के लिये खुजली भरी पड़ी है। चोदो रमेश साली कि गाण्ड मारो बड़ी खुजली हो रही थी!”

रजनी जी अपनी गाण्ड में दामाद का लण्ड पिलवा कर सातवे आसमन पर थी और बड़बड़ा रही थी, “ओह्हह्ह! देखो उषा मेरी बेटी! तुम्हारी मा गाण्ड में लण्ड लेकर चुदवा रही है! तुम आखिर अपने मरद से मेरी चूत, गाण्ड चोदवा ही दी! देखो साला रमेश कैसे चोद रहा है! साला सच्चा मरद है! डाल और डाल रे! चोद ! मेरी गाण्ड मार! मेरे बेटी को दिखा! आह्हह ऊह्हह्हह्हह चोद चोद चोद ऐईइ!” रमेश अपनी बीवी और अपनी सास की बात सुनता जा रहा था और अपनी कमर चला चला कर अपनी सास की गाण्ड में अपना लण्ड पेलता रहा। थोड़ी देर तक रजनी जी कि गाण्ड मारने के बाद रमेश एक बार जोर से अपना पूरा का पूरा लण्ड रजनी जी कि गाण्ड घुसेड़ दिया और रजनी जी को जोर से अपने हाथों से जकड़ कर अपना लण्ड का पानी अपने सास कि गाण्ड ने छोड़ दिया। झड़ने के बाद रमेश ने अपना लण्ड अपने सास की गाण्ड से बाहर निकाल लिया।
उषा ने अपनी मां को प्यार से गले लगा लिया। रमेश ने भी अपनी सासू मां के चरण स्पर्श किया और फिर तीनो साथ ही एक ही बिस्तर पर ये वादा करके लेट गये कि अब पूरे घर में ऐसा ही प्यार भरा माहौल बना रहे।

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