आप बेरहमी के साथ करते हो

बहुत सी कहानियों को पढ़ने के बाद मेरा भी दिल किया कि मैं भी अपने बहुत सारे रंगीन अनुभवों में से कुछ एक को आपके साथ शेयर करूँ।
वैसे तो मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ, पर अभी मैं मुंबई में एक सरकारी पद पर नौकरी करता हूँ। इससे पहले मैं कुछ दिनों के लिए बैंगलोर में भी रहा हूँ।
मेरी यह कहानी तब की है जब मैंने नया-नया बैंगलोर में ज्वाइन किया था, ज्वाइन करने के कुछ ही दिनों के बाद मेरी ट्रेनिंग शुरू कर दी गई, जो कि 3 महीनों की थी।
ट्रेनिंग समाप्त करने के बाद ज्यों ही मैं दुबारा ऑफिस में लौट कर आया त्यों ही मेरे बॉस ने मुझे उन नए आए हुए लड़कों और लड़कियों की देख-रेख की जिम्मेदारी दे दी।
चूँकि मेरे ऑफिस में कंप्यूटर में डाटा फीड करने का कुछ ज्यादा काम था, तो मेरे ऑफिस ने अनुबंध प्रक्रिया पर काम करने के लिए कुछ लड़कों और लड़कियों को लिया हुआ था।


मेरी यह कहानी उन्हीं में से एक लड़की की है जिसका नाम स्नेहा (नाम बदला हुआ है) था। उनकी देख-रेख करते समय मुझे कभी-कभी उनके कंप्यूटर पर जाकर फीड किए गए डाटा को भी चैक करना पड़ता था। ऐसा करते-करते मेरी उन सबसे बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी।
पहले तो मैंने उन सब में कोई ज्यादा रूचि नहीं ली क्योंकि मैं उस समय पर अपना ज्यादा ध्यान सिर्फ अपने काम में ही दे रहा था।
वो काम बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण था जिसको कि दो चरणों में पूरा करना था।
पहला चरण था उस डाटा को कंप्यूटर में फीड करना और फिर उन सभी फीड किए गए डाटा का सत्यापन करना। काम के प्रथम चरण को पूरा करते-करते हम सभी को लगभग दो महीने निकल गए।
जब काम का पहला चरण पूरा हो गया तो हम सभी लोगों को थोड़ी सी राहत की सांस मिली। पहला चरण पूरा होने के बाद मैं भी थोड़ा सा तनाव मुक्त हो गया था क्योंकि अब सिर्फ कंप्यूटर में फीड किए गए डाटा को ही चैक करना रह गया था।
मेरी सेक्स की असली कहानी की शुरुआत अब होती है।
अब जब डाटा चैक करने की बारी आई तो हर एक लड़के और लड़की के साथ एक कंप्यूटर पर ऑफिस के एक कर्मचारी को लगाया गया, जिससे कि डाटा वेरिफिकेशन में किसी तरह की कोई गलती न रह जाए। इस वेरिफिकेशन करने में मुझे मेरी उस ड्रीम लड़की के साथ काम करने का मौका मिल गया।
शायद हम दोनों की किस्मत में भी यही लिखा था। अब जब मैंने उस लड़की के साथ डाटा वेरिफिकेशन करना शुरू किया तो मैंने पाया कि वो लड़की काम से ज्यादा मुझ में रूचि ले रही थी। हमेशा मेरे बारे में कुछ न कुछ पूछती रहती थी, लेकिन मैं अपने ऑफिस में नया होने की वजह से थोड़ा सा डर रहा था कि यदि किसी को इस बात का पता चल गया तो ऑफिस में मेरी बहुत बदनामी होगी।
इसीलिए मैं पूरी तरह से उस में रूचि नहीं ले पा रहा था। धीरे-धीरे 10-12 दिन ऐसे ही निकल गए।
फिर एक दिन की बात है कि मैं ऑफिस टाइम से थोड़ा पहले पहुँच गया और अपना कंप्यूटर चालू करके काम करना शुरू कर दिया। तभी मुझे पीछे से किसी ने ‘गुड-मॉर्निंग’ बोला। जब मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो स्नेहा मेरे पीछे खड़ी थी और मुझे कंप्यूटर रूम में अकेला देख कर मुस्करा रही थी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो बोली- सर आज आप इतने पहले क्यूँ आ गए?
तो मैंने सोचा कि आज मौका अच्छा है और मैंने उससे मजाक करना शुरू कर दिया और बोला- रूम पर अकेले मन नहीं लग रहा था तो सोचा क्यों न आज ऑफिस ही जल्दी चला जाए, इसलिए आज जल्दी ऑफिस आ गया।
फिर उससे यूँ ही बात करता रहा।
बात करते-करते उस ने मुझसे पूछा- सर क्या आपकी कोई गर्ल-फ्रेंड है?
तो मैंने बोला- हाँ!
तो उसने फिर पूछा- कहाँ है?
तो मैंने बोला- यहीं है और मेरे सामने खड़ी है!
यह सुन कर वो हँसने लगी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उसने कुछ नहीं बोला और काम करने में व्यस्त हो गई।
उसी दिन काम करते-करते उसने मुझसे बोला- सर मुझे अपना नंबर दे दीजिए क्योंकि मुझे आपसे कुछ काम है और मैं शाम को आपसे फ़ोन करके बात करुँगी।
मैं शाम को रूम पर पहुँच कर उसके फ़ोन का इंतजार करने लगा कि उसको ऐसा क्या काम है, जो फ़ोन पर बात करना चाहती है।
तभी उसका फ़ोन आया और मैंने फ़ोन उठा कर पूछा- ऐसा कौन सा काम है..!
तो उसने मुझसे पूछा- सर कल तो सन्डे है और ऑफिस भी बंद है..!
तो मैंने कहा- हाँ तो?
वो बोली- सर क्या आप मेरे साथ मूवी देखने चलना पसंद करेंगे?
तो मैंने तुरंत ‘हाँ’ कर दिया और अगले दिन गरुड़ा मॉल में मिलने का प्लान बनाया।
अगले दिन सुबह 10 बजे मूवी में हम दोनों ने कोने की सीट ली। मूवी एक इंग्लिश मूवी थी और मॉर्निंग का समय था इसीलिए बहुत कम ही लोग थे।
जैसे ही मूवी शुरू हुई उसने मेरा मुँह पकड़ कर मेरे होंठों पर एक चुम्बन कर लिया और बोली- सर, मैं आप से बहुत प्यार करती हूँ, आई लव यू..!
फिर मैंने भी कहा- मुझे भी तुम बहुत अच्छी लगती हो।
और वहीं पर हम एक-दूसरे के गले से लग गए। फिर मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसके सीने पर रखा तो उसने मेरे हाथ को अपने सीने पर कसके दबा दिया।
फिर मैं धीरे-धीरे अपने हाथ को उसके पेट पर से होते हुए उसकी चूत के ऊपर ले गया और कपड़ों के ऊपर से ही चूत को रगड़ना शुरू कर दिया।
स्नेहा अपनी आँखों को बंद करके पूरा मजा ले रही थी।
थोड़ी देर बाद उसका पानी निकल गया और वो बोली- सर.. आज आपने मुझे बहुत मजा दिया है।
तो मैंने बोला- तुमको तो मजा मिल गया लेकिन मेरा क्या होगा..!
तो उसने बिना कुछ बोले सीधे अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया और उसको दबाने लगी तो मैंने कहा- ऐसे मजा नहीं आएगा..!
तो उसने पूछा- फिर कैसे..!
तो मैंने कहा- चलो मेरे कमरे पर चलते हैं। तो उसने तुरंत ‘हाँ’ कर दी और बोली- सर मैं तो कब से इस दिन का इंतजार कर रही थी।
फिर हम लोग मूवी को बीच में ही छोड़ दी और कमरे पर आ गए।
कमरे पर आते ही मैंने उसको कसके पकड़ लिया और धीरे-धीरे करके उसके सारे कपड़े निकाल कर उसको पूरा नंगा कर दिया। क्या बदन था उसका… बहुत ही सेक्सी लग रही थी..!
उसकी तनी हुई चूचियाँ देख कर मैं अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख सका और उनको अपने मुँह में ले कर चूसने लगा। ज्यों ही मैंने उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू किया, उसकी साँसें तेज हो गईं और उसने मुझे अपनी बांहों में कसके भर लिया।
फिर मैंने उसको अपने हाथों में उठाया और ला कर बिस्तर पर लिटा दिया। अब मैंने उसकी पैंटी को निकाल कर अलग कर दिया।
वाह क्या चूत थी उसकी… गुलाबी सी और उसकी चूत का दाना तो कसम से क्या लग रहा था बिलकुल तना हुआ..! फिर मैंने अपने मुँह को ज्यों ही उसकी चूत पर रखा, वो उछल पड़ी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो बोलने लगी- सर… गुदगुदी होती है..!
तो मैंने कहा- थोड़ी सी गुदगुदी बर्दाश्त करो.. फिर मजा ही मजा है!
अब धीरे-धीरे उसको मजा आने लगा फिर 69 की अवस्था में आ गए लेकिन चूंकि यह उसका पहली बार था तो वो मेरे लण्ड को अच्छे से नहीं चूस पा रही थी।
थोड़ी देर के बाद स्नेहा ने कहा- सर प्लीज अब और बर्दाश्त नहीं होता है, अब अपना लण्ड मेरी चूत में डाल कर मेरी चूत को फाड़ दो।
जब मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रख के हल्का सा धक्का दिया तो वो अन्दर नहीं गया, तो मुझे एहसास हुआ कि इसकी चूत की सील अभी नहीं टूटी है।
फिर मैंने थोड़ी सी वैसलीन को अपने लण्ड और उसकी चूत पर लगाया।
अब धीरे-धीरे मैं अपने लण्ड को उसकी चूत में धकेलने लगा। लेकिन मुझे सफलता नहीं मिल पा रही थी, तो मैंने एक जोर का झटका दिया और मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में घुस गया था और वो रोने लगी।
‘सर.. बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज.. अपने लण्ड को बाहर निकाल लो!’
तो मैंने उसके होंठों को चूसते हुए कहा- थोड़ा बर्दाश्त करो.. अभी दर्द कम हो जाएगा..!
मैं उसके होंठों को चूसता रहा और साथ साथ उसके मम्मों को दबाता रहा। कुछ समय के बाद जब उसका दर्द कम हुआ तो उसने नीचे से चूतड़ों को उचकाना शुरू किया और कहने लगी- सर.. और तेज.. और तेज और तेज… आज मेरी चूत को आप फाड़ दो… बुझा दो.. इसकी सारी प्यास.. ये मुझे बहुत परेशान करती है!
मैं उसकी चूत को 20 मिनट तक चोदता रहा, तभी उसका बदन अकड़ने लगा और उसने तेजी की साथ अपना पानी छोड़ दिया। लेकिन मेरा अभी नहीं हुआ था इसलिए उसको डॉगी-स्टाइल में किया और उसकी गांड में अपने लण्ड को पेल दिया।
स्नेहा मुझे मना करती रही- सर नहीं… दर्द हो रहा है..!
लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और उसकी गांड को कसके चोदा और अपना सारा पानी उसकी गांड में ही डाल दिया। फिर कुछ देर तक हम दोनों लेटे रहे और सो गए।
जब हम दोनों उठे तो उस से चला नहीं जा रहा था, तो मैंने उसे एक दर्द-निवारक दवा दी।
उसने दवा खाई और कहने लगी- सर.. आप बहुत ही बेरहमी के साथ चुदाई करते हो.. शुरुआत में तो दर्द हो रहा था.. लेकिन बाद में बहुत मजा आया.. लव यू सर..!
फिर मैं उसको सड़क तक छोड़ने गया और फिर मिलने का वादा किया।
मैं बैंगलोर में 18 महीनों तक रहा और उसके साथ-साथ उसकी सहेलियों के साथ भी चुदाई की

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