अम्मी और खाला को कुत्तों की तरह चोदा

मैरा नाम शाकिर अली है. मेरी उमर 22 साल है और में लाहोर में रहता हूँ. जो वाक़िया आज आप को सुनाने जा रहा हूँ बिल्कुल सच्चा है और आज से 6 साल पहले पेश आया था. मेरे घर में माँ बाप के अलावा एक बहन और एक भाई हैं. मै सब से बड़ा हूँ. ये 2006 की बात है जब में दसवीं जमात में पढ़ता था. मै उन दिनों अपनी खाला जिन का नाम अम्बरीन है को बहुत पसंद करता था. खाला अम्बरीन मेरी अम्मी से दो साल छोटी थीं और उनकी उमर उस वक़्त क़रीबन 36 बरस थी. वो शादी शुदा थीं और उनके दो बेटे थे. उनका बड़ा बेटा राशिद तक़रीबन मेरा हम- उम्र ही था और हम दोनो अच्छे दोस्त थे. खाला अम्बरीन के शौहर नॉवज़ हूसेन की लाहोर की एक माशूर मार्केट में जूतों की दुकान थी.

खाला अम्बरीन बड़ी खूबसूरत और दिलकश औरत थीं . तीखे नैन नक़्श और दूध की तरह सफ़ेद रंग. उनके लंबे और घने बाल हल्के ब्राउन रंग के और आँखें भी हल्की ब्राउन थीं . उनका क़द दरमियाना था और बदन बड़ा गुन्दाज़ और सेहतमंद था. कंधे चौड़े और फारबा थे. मम्मे बहुत मोटे और गोल थे जिन का साइज़ 40/42 इंच से तो किसी तरह भी कम नही होगा और गांड़ गोल, चौड़ी, मोटी और गोश्त से भरपूर थी. गर्मियों के मौसम में जब खाला अम्बरीन पतले कपड़े पहनतीं तो उनका गोरा, सेहतमंद और गदराया हुआ बदन कपड़ों से झाँकता रहता था.

में गर्मियों में उनके घर बहुत ज़ियादा जाया करता था ताके उनके मोटे मम्मों और भारी भरकम चूतड़ों का नज़ारा कर सकूँ. खाला होने के नाते वो मेरे सामने दुपट्टा ओढ़ने का तकलूफ नही करती थीं इस लिये मुझे उनके मम्मे और गांड़ देखने का खूब मोक़ा मिलता था. कभी कभी उन्हे ब्रा के बगैर भी देखने का इतिफ़ाक़ हो जाता था. पतली क़मीज़ में उनके भारी मम्मे बड़ी क़यामत ढाते थे. काम काज करते वक़्त उनके मोटे ताज़े मम्मे अपनी तमाम तर गोलाइयों समैट मुझे साफ़ नज़र आते थे. उनके मम्मों के निप्पल भी मोटे और बड़े थे और अगर उन्होने ब्रा ना पहना होता तो क़मीज़ के ऊपर से बाहर निकले हुए साफ़ दिखाई देते थे. ऐसे मोक़ों पर में आगे से और साइड से उनके मोम्मों का अच्छी तरह जाइज़ा लेटा रहता था. साइड से खाला अम्बरीन के मम्मों के निप्पल और भी लंबे नज़र आते थे. यों समझिये के मैंने तक़रीबन उनके मम्मे नंगे देख ही लिये थे. मम्मों की मुनासबत से उनके चूतड़ भी बहुत मोटे और चौड़े थे. अक्सर जब वो नीचे झुक कर कुछ उठातीं तो उनकी क़मीज़ उनके चूतरों के बीच वाली दर्ज़ में फँस जाती और जब चलतीं तो दोनो गोल और जानदार चूतड़ अलहदा अलहदा हिलते नज़र आते. उस वक़्त मेरे जैसे कम-उमर और सेक्स से ना-वाक़िफ़ लड़के के लिये इस क़िसम की सेहतमंद और शानदार गांड़ का नज़ारा पागल कर देने वाला होता था.

खाला अम्बरीन के बदन को इतने क़रीब से देखने के बाद मेरे दिल में उनके बदन को हाथ लगाने का खन्नास समा गया. मेरी उमर भी ऐसी थी के सेक्स ने मुझे पागल किया हुआ था. रफ़्ता रफ़्ता खाला अम्बरीन के बदन को छूने का शोक़् उनकी चूत मारने की खाहिश में बदल गया. जब उन्हे हाथ लगाने में मुझे कोई ख़ास कामयाबी ना मिल सकी तो मेरा पागल-पन और बढ़ गया और में सुबह शाम उन्हे चोदने के सपने देखने लगा. इस सिलसिले में कुछ करने की मुझ में हिम्मत नही थी और में महज़ खाबों में ही उनकी चूत के अंदर घस्से मार मार कर उस का कचूमर निकाला करता था. फिर एक ऐसा वाक़िया पेश आया जिस के बारे में मैंने कभी सोचा भी नही था.

मेरी बड़ी खाला के बेटे इमरान की शादी पिंडी में हमारे रिश्त्यदारों में होना तय हुई. बारात ने लाहोर से पिंडी जाना था. खालू ने जो फौज से रिटाइर हुए थे पिंडी के आर्मी मेस में खानदान के ख़ास ख़ास लोगों को ठहराने का बंदोबस्त किया था. बाक़ी लोगों ने होटेलों में क़याम करना था. हम ने 2 बस और 2 वैन किराए पर ली थीं . बस को शादी की मुनासबत से बहुत अच्छी तरह सजाया गया था. बस के अंदर लड़कियों का सारे रास्ते शादी के गीत गाने का प्रोग्राम था जिस की वजह से खानदान के सभी बचे और नोजवान बसों में ही बैठे थे. मैंने देख लिया था के खाला अम्बरीन एक वैन में बैठ रही थीं . मेरे लिये ये अच्छा मोक़ा था.

में भी अम्मी को बता कर उसी वैन में सवार हो गया ताके खाला अम्बरीन के क़रीब रह सकूँ. उनके शौहर माल खरीदने दुबई गए हुए थे लहाज़ा वो अकेली ही थीं . उनके दोनो बेटे उनके माना करने के बावजूद अपनी माँ को छोड़ कर हल्ला गुल्ला करने बस में ही बैठे थे. वैन भारी हुई थी और खाला अम्बरीन सब से पिछली सीट पर खिड़की के साथ बैठी थीं . जब में हिस्से में दाखिल हुआ तो मेरी कोशिश थी के किसी तरह खाला अम्बरीन के साथ बैठ सकूँ. वैन के अंदर आ कर मैंने उनकी तरफ देखा. मै उन से काफ़ी क़रीब था और मेरा उनके घर भी बहुत आना जाना था इस लिये उन्होने मुझे देख कर अपने साथ बैठने का इशारा किया. मै फॉरन ही जगह बनाता हुआ उनके साथ चिपक कर बैठ गया.
खाला अम्बरीन शादी के लिये खूब बन संवर कर घर से निकली थीं . उन्होने सब्ज़ रंग के रेशमी कपड़े पहन रखे थे जिन में उनका गोरा गदराया हुआ बदन दावत-ए-नज़ारा दे रहा था. बैठे हुए भी उनके मोटे मम्मों के उभार अपनी पूरी आब-ओ-ताब के साथ नज़र आ रहे थे. कुछ देर में हम लाहोर शहर से निकल कर मोटरवे पर चढ़े और अपनी मंज़िल की तरफ रवाना हो गए. मै खाला अम्बरीन के साथ खूब चिपक कर बैठा था. मेरी रान उनकी रान के साथ लगी हुई थी जब के मेरा बाज़ू उनके बाज़ू से चिपका हुआ था. उन्होने आधी आस्तीनो वाली क़मीज़ पहन रखी थी और उनके गोरे सिडोल बाज़ू नंगे नज़र आ रहे थे. खाला अम्बरीन के नरम गरम बदन को महसूस करते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने फॉरन अपने हाथ आगे रख कर अपने तने हुए लंड को छुपा लिया.

खाला अम्बरीन ने कहा के में राशिद को समझाऊं के मेट्रिक के इम्तिहान की तय्यारी दिल लगा कर करे क्योंके दिन थोड़े रह गए हैं. मैंने उनकी तवजो हासिल करने लिये उन्हे बताया के राशिद एक लड़की के इश्क़ में मुब्तला है और इसी वजह से पढने में दिलचस्पी नही लेटा. वो बहुत सीख-पा हुईं और कहा के में उस की हरकतें उनके ईलम में लाऊँ. इस तरह में ना सिरफ़ उनका राज़दार बन गया बल्के उनके साथ मर्द और औरत के ता’अलुक़ात पर भी बात करने लगा. वो बहुत दिलचस्पी से मेरी बातें सुनती रहीं. उन्होने मुँह बना कर कहा के आज कल की लड़कियों को वक़्त से पहले शलवार उतारने का शोक़् होता है. ये ऐसी कुतिया हैं जिन को गर्मी चढ़ी हो. ये बातें मुझे गरम कर रही थीं . मैंने बातों बातों में बिल्कुल क़ुदरती अंदाज़ में उनकी मोटी रान के ऊपर हाथ रख दिया. उन्होने क़िस्सी क़िसम का कोई रद्द-ए-अमल ज़ाहिर नही किया और में उनके बदन का मज़ा लेटा रहा.

बिल-आख़िर साढ़े चार घंटे बाद हम पिंडी पुहँच गए. मै खाला अम्बरीन के साथ ही रहा. अम्मी, नानी जान और और कुछ और लोग मेस में चले गए. खाला अम्बरीन के दोनो बेटे भी मेस में ही रहना चाहते थे. मैंने खाला अम्बरीन से कहा के कियों ना हम होटेल में रहें. कमरे में और लोग भी नही हूँ गे, बाथरूम इस्तेमाल करने का मसला भी नही हो गा और अगले दिन बारात के लिये तय्यारी भी आसानी से हो जायेगी. खाला अम्बरीन को ये बात पसंद आई. उन्होने अपने बेटों को कुछ हिदायात दीं और मेरे साथ मुर्री रोड पर वाक़िया एक होटल में आ गईं जहाँ खानदान के कुछ और लोग भी ठहर रहे थे. मैंने अम्मी को बता दिया था के खाला अम्बरीन अकेली हैं में उनके साथ ही ठहर जाऊं गा. उन्होने बा-खुशी इजाज़त दे दी.

होटल दरमियाना सा था. कमरे छोटे मगर साफ़ सुथरे थे. उस में 2 बेड थे. खाला अम्बरीन काफ़ी तक चुकी थीं . उनके बदन में दर्द भी हो रहा था. फिर हम ने कपडे तब्दील किये. खाला अम्बरीन ने घर वाला पतली सी लॉन का जोड़ा पहन लिया जिस में से हमेशा की तरह उनका गोरा बदन नज़र आ रहा था. कपड़े बदलने के बावजूद उन्होने अपना ब्रा नही उतारा था. मुझे थोड़ी मायूसी हुई क्योंके बगैर ब्रा के में उनके मम्मों को ज़ियादा बेहतर तरीक़े से देख सकता था. खैर खाला अम्बरीन को अपने साथ एक कमरे में बिल्कुल तन्हा पा कर मेरे दिल में उन्हे चोदने की खाहिश ने फिर सर उठाया. लेकिन में ये कैसे करता? वो भला मुझे कहाँ अपनी चूत लेने देतीं. मै दिमाग लड़ाने लगा.

मैंने कुछ अरसे पहले एक फिल्म देखी थी जिस में एक आदमी एक औरत को शराब पीला कर चोद देता है. शराब की वजह से वो औरत नशे में होती है और उस आदमी से चुदवा लेतीं है. मगर में वहाँ शराब कहाँ से लता. फिर मैंने सोचा शायद होटेल का कोई मुलाज़िम मेरी मदद कर सके. मुझे दर भी लग रहा था लेकिन इस मोक़े से फायदा भी उठाना चाहता था.

बहरहाल में किसी बहाने से बाहर निकला तो 40/45 साल का एक काला सा आदमी जो होटेल का मुलाज़िम ही था मिल गया. वो बहुत छोटे क़द का और बदसूरत था. छोटी छोटी आँखें और अजीब सा फैला हुआ चौड़ा नाक. थोड़ी पर दाढ़ी के चन्द बाल थे और मूंछें भी बहुत छिडड़ी और हल्की थीं . वो हर तरह से एक गलीज़ शख्स लगता था.
में उस के साथ सीढियां उतर कर नीचे आया और उससे बताया के मुझे शराब की बोतल कहाँ मिल सके गी. उस ने पहले तो मुझे गौर से देखा और फिर कहने लगा के कौन सी शराब चाहिये. मुझे किसी ख़ास शराब का नाम नही आता था इस लिये मैंने कहा के कोई भी चल जाए गी. हम लोग शादी पर आए हैं ज़रा मोज मस्ती करना चाहते हैं. उससने शायद मुझे और खाला अम्बरीन को कमरे में जाते देखा था. कहने लगा के तुम तो अपनी माँ के साथ हो कमरे में शराब कैसे पियो गे. मै ये सुन कर घबरा गया मगर खुद को संभालते हुए उससे बताया के में अपनी खाला के साथ हूँ और उनके सो जाने के बाद पीना चाहता हूँ. उस ने मुझ से 1600 रुपय लिये और कहा के आधे घंटे तक शराब ले आए गा में उस का इंतिज़ार करूँ. उस ने अपना नाम नज़ीर बताया.

में कमरे में वापस आ गया. मेरा दिल धक धक कर रहा था. मै दर रहा था के नज़ीर कहीं पैसे ले कर भाग ही ना जाए मगर वो आध घंटे से पहले ही शराब की बोतल ले आया. बोतल के ऊपर वोड्का लिखा हुआ था और उस में पानी जैसी रंग की शराब थी. मुझे ईलम नही के वो वाक़ई वोड्का थी या किसी देसी शराब को वोड्का की बोतल में डाला गया था. खैर मैंने बोतल ले कर फॉरन अपने नैयफ़े में छुपा ली. उस ने कहा के बाथरूम के तौलिये चेक करने हैं. मै उससे ले कर कमरे के अंदर आ गया. उस ने बाथरूम जाते हुए खाला अम्बरीन को अजीब सी नज़रों से देखा. मै समझ नही पाया के उस की आखों में किया था. वो कुछ देर बाद चला गया.

मैंने अपने और खाला अम्बरीन के लिये 7-UP की बोतलें मँगवाईं जो नज़ीर ही ले कर आया. इस दफ़ा भी उस ने मुझे और खाला अम्बरीन को बड़े गौर से देखा. उस के जाने के बाद में उठ कर कोने में पड़ी हुई मेज़ तक आया और खाला अम्बरीन की तरफ पीठ कर के उनकी बोतल में से तीन चोथाई सेवेन उप ग्लास में डाली और उस की जगह वोड्का डाल दी. मैंने वो बोतल उनको दे दी. उन्होने बोतल से चन्द घूँट लिये और बुरा सा मुँह बना कर कहा के ये तो बड़ी कड़वी है बिल्कुल दवाई की तरह. ये पीने वाली नही. मेरा दिल बैठ गया के कहीं वो पीने से इनकार ही ना कर दें. मैंने कहा के उन्हे बोतल पी लानी चाहिये क्योंके इस से उनका दिल अच्छा हो जाए गा. वो इनकार करती रहीं मगर मेरे इसरार पर आख़िर पी ली.

रात के कोई साढ़े बरा बजे का वक़्त होगा. खाला अम्बरीन की हालत बदलने लगी थी. उनका चेहरा थोड़ा सा लाल हो गया था और आँखें भारी होने लगी थीं . वो मेरी बातों को ठीक से समझ नही पा रही थीं और बगैर सोचे समझे बोलने लगती थीं . उनकी आवाज़ में हल्की सी लरज़िश भी आ गई थी. वो वाज़ेह तौर पर अपने ऊपर कंट्रोल खोती जा रही थीं . कभी वो खामोश हो जातीं और कभी अचानक बिला वजह बोलने लगतीं. नशा उन पर असर कर रहा था. उन्होने ज़िंदगी में पहली दफ़ा शराब पी थी इस लिये उस का असर भी ज़ियादा हुआ था. उन्होने कहा के अब वो सोना चाहती हैं. वो एक कुर्सी पर बैठी हुई थीं . जब उठने लगीं तो लररखड़ा गईं. मैंने फॉरन आगे बढ़ कर उन्हे बाज़ून से पकड़ लिया. उनके गोरे, मोटे और नरम बाज़ू पहली दफ़ा मेरे हाथों में आये थे.

में उस वक़्त बहुत घबराया हुआ था मगर फिर भी उनके बदन के लांस से मेरा लंड खड़ा हो गया. मै उन्हे ले कर बेड की तरफ चल पारा. मैंने उनका दुपट्टा उनके गले से उतार दिया और उन से चिपक गया. फिर मैंने अपना एक हाथ उनके मोटे चूतड़ों से ज़रा ऊपर रख दिया और उन्हे बेड तक ले आया. मेरी उंगलियों को उनके तवाना चूतड़ों की आगे पीछे हरकत महसूस हो रही थी. मेरे सबर का पैमाना लब्राइज़ हो रहा था. मैंने अचानक अपना हाथ उनके मोटे और उभरे हुए चूतड़ के दरमियाँ में रख कर उससे आहिस्ता से टटोला. उन्होने कुछ नही कहा. इस पर मैंने उनके एक भारी चूतड़ को थोड़ा सा दबाया. बड़ी मज़बूत और ताक़तवर गांड़ थी खाला अम्बरीन की. उन्होने अपने चूतड़ पर मेरे हाथ का दबाव महसूस किया तो मेरे हाथ को जो उनके चूतड़ के ऊपर था पकड़ कर अपनी कमर की तरफ ले आईं लेकिन कहा कुछ नही.

उन्हे बेड पर बिठाने के बाद मैंने उन से कहा के वो बहुत तक गई हैं इसी लिये तबीयत खराब हो रही है में उनके कपड़े बदल देता हूँ ताके वो आराम से सो सकैं. उनके मुँह से अजीब सी भारी आवाज़ निकली. शायद वो समझ ही नही सकी थीं के में किया कह रहा हूँ. मैंने उनकी क़मीज़ पेट और कमर पर से ऊपर उठाई और उनका एक बाज़ू उठा कर उससे बड़ी मुश्किल से क़मीज़ की आस्तीन में से निकाल लिया. अब उनका एक मोटा और सूजा हुआ मम्मा सफ़ेद रंग के ब्रा में बंद मेरी आँखों के सामने था. उनका दूसरा मम्मा अब भी क़मीज़ के नीचे ही छुपा हुआ था. मैंने उनके मम्मे के नीचे हाथ डाल कर ब्रा के ऊपर से ही उससे पकड़ लिया. खाला अम्बरीन का मम्मा भारी भरकम था और उससे हाथ लगा कर मुझे अजीब तरह का मज़ा आ रहा था. फिर मैंने दूसरे बाज़ू से भी क़मीज़ निकाल कर उन्हे ऊपर से बिल्कुल नंगा कर दिया. उनके दोनो मम्मे ब्रा में मेरे सामने आ गए. मैंने जल्दी से पीछे आ कर उनके ब्रा का हुक खोला और उससे उनके बदन से अलग कर के उनके मम्मों को बिल्कुल नंगा कर दिया.
ये मेरी ज़िंदगी का सब से हसीन लम्हा था. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. खाला अम्बरीन के मम्मे बे-पनाह मोटे, गोल और बाहर निकले हुए थे. उनके दोनो मम्मों के ऊपर और साइड में ब्रा की वजह से हल्की लकीरें पड़ी हुई थीं . सुर्खी मा’आइल गुलाबी रंग के खूबसूरत निप्पल बड़े बड़े और बाहर निकले हुए थे. निपल्स के साथ वाला हिस्सा काफ़ी बड़ा और बिल्कुल गोल था जिस पर छोटे छोटे दाने उभरे हुए थे. मैंने उनका एक मम्मा हाथ में ले कर दबाया तो उस का निप्पल मेरी हतैली में धँस कर दब गया. उन्होने मेरा हाथ अपने मम्मे से डोर किया और दोनो मम्मों के दरमियाँ में हाथ रख कर अजीब अंदाज़ से हंस पड़ीं. शायद नशे ने उनकी सोचने समझने की सलाहियत पर असर डाला था.

मैंने अब उनके दूसरे मम्मे को हाथ में लिया और उस के मुख्तलीफ़ हिस्सों को आहिस्ता आहिस्ता दबाता रहा. मैंने ज़िंदगी में कभी किसी औरत के मम्मों को हाथ नही लगाया था. खाला अम्बरीन के मम्मे अब मेरे हाथ में थे और मेरी जेहनी कैफियत बड़ी अजीब थी. मेरे दिल में खौफ भी था और ज़बरदस्त खुशी भी के खाला अम्बरीन मेरे सामने अपने मम्मे नंगे किये बैठी थीं और में उनके मम्मों से खेल रहा था. उन्होने उंगली उठा कर हिलाई के में ऐसा ना करूँ. उनका हाथ ऊपर की तरफ आया तो शलवार में अकड़े हुए मेरे लंड से टकराया लेकिन शायद उन्हे एहसास नही हुआ के में उनकी चूत में अपना लंड डालने को बेताब था. मै उसी तरह खाला अम्बरीन के मम्मों को हाथों में ले कर उनका लुत्फ़ उठाता रहा.
अचानक कमरे का दरवाज़ा जो मैंने लॉक किया था एक हल्की सी आवाज़ के साथ खुला और नज़ीर अंदर आ गया.

नज़ीर ने फॉरन दरवाज़ा लॉक कर दिया. उस के हाथ में मोबाइल फोन था जिस से उस ने मेरी और खाला अम्बरीन की उसी हालत में तस्वीर बना ली. ये सब पलक झपकते हो गया. मै *फॉरन खाला अम्बरीन के पास से हट गया और उनकी क़मीज़ उठा कर उनके कंधों पर डाल दी ताके उनके मम्मे छुप जायें. नज़ीर के बदनुमा चेहरे पर शैतानी मुस्कुराहट थी. उस ने अपनी जेब से 6/7 इंच लंबा चाक़ू निकाल लिया मगर उससे खोला नही. खौफ से मेरी टांगें काँपने लगीं. नज़ीर ने कहा के वो जानता था मुझे शराब क्यों चाहिये थी मगर में फ़िक्र ना करूँ वो किसी से कुछ नही कहे गा. उससे सिर्फ़ अपना हिस्सा चाहिये. हन अगर हम ने उस की बात ना मानी तो वो होटेल मॅनेजर को बताय गा जो पोलीस को खबर करे गा और आगे फिर जो होगा हम सोच सकते हैं. उस ने कहा के शराब पीना भी जुर्म है और अपनी खाला को चोदना तो उस भी बड़ा जुर्म है. मुझ से कोई जवाब ना बन पड़ा. खाला अम्बरीन नशे में *थीं *मगर अब खौफ उनके नशे पर हावी हो रहा था और वो हालात को समझ रही *थीं . मेरा दिल भी सीने में ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.*

मुझे सिर्फ़ पोलीस के आने का खौफ ही नही था. होटेल में खानदान के और लोग भी ठहरे हुए थे और अगर उन्हे पता चलता के में खाला अम्बरीन को शराब पीला कर चोदना चाहता था तो किया होता? खाला अम्बरीन की कितनी बदनामी होती. खालू नॉवज़ किया सोचते? उनका बेटा राशिद मेरा दोस्त था. उस पर किया गुज़रती अगर उससे पता चलता के में उस की माँ की चूत मारना चाहता था? मेरे अब्बू ने सुबह पिंडी पुहँचना था. उन्हे पता चलता तो किया बनता? बड़ी खाला के बेटे की शादी अलग खराब होती. मेरा दिल डूबने लगा. खाला अम्बरीन ने हल्की सी लड़खड़ाई हुई आवाज़ में कुछ कहा. नज़ीर उनकी तरफ मुड़ा और उन्हे मुखातिब कर के बड़ी बे-बाकी से बोला के अगर वो उससे अपनी चूत मारने दें तो कोई मसला नही हो गा लेकिन अगर उन्होने इनकार किया तो पोलीस ज़रूर आए गी. खाला अम्बरीन चुप रहीं मगर उनके चेहरे का रंग ज़र्द पड़ गया. उन्होने अपनी क़मीज़ अपने नंगे ऊपरी बदन पर डाली हुई थी.*

नज़ीर ने मुझ से पूछा के किया मैंने पहले कभी किसी औरत को चोदा है. मैंने कहा नही. वो बोला के औरत नशे में हो तो उससे चोदने का मज़ा नही आता. वो खाला अम्बरीन के लिये तेज़ कॉफी ले कर आता है जिससे पी कर उनका नशा कम हो जाए गा और चूत मरवाते हुए वो मज़ा दें गी भी और लेंगीं भी. उस ने अपना मोबाइल जेब में डाला और तेज़ तेज़ क़दम उठाता हुआ कमरे से निकल गया. खाला अम्बरीन ने उस के जाते ही अपनी क़मीज़ ब्रा के बगैर ही पहन ली.*

जब उन्होने क़मीज़ पहन’ने के लिये अपने हाथों को हरकत दी तो उनके मोटे मोटे मम्मे बुरी तरह हिलने लगे. लेकिन इन हालात में मेरे सर से उन्हे चोदने का भूत उतार चुका था और उनके हिलते हुए नंगे मम्मों को देख कर भी मुझे कुछ महसूस नही हुआ. उनके नशे पर भी खौफ घालिब आ रहा था. उन्होने कहा के शाकिर तुम ने ये किया कर दिया? अब किया हो गा? ये कमीना तो मुझे बे-आबरू करना चाहता है. उनकी परैशानी बजा थी. अगर हम नज़ीर को रोकते तो वो हमें जान से भी मार सकता था या कोई और नुक़सान पुहँचा सकता था. अगर हम होटेल में मोजूद अपने रिश्त्यदारों को खबर करते तो हुमारे लिये ही मुसीबत बनती क्योंके नज़ीर के फोन में हुमारी तस्वीर थी. मैंने खाला अम्बरीन से अपनी हरकत की माफी माँगी. वो कुछ ना बोलीं. **
कुछ देर में नज़ीर एक बरे से मग में कॉफी ले आया जो खाला अम्बरीन ने पी ली. उनका नशा कॉफी से वाक़ई कम हो गया और वो बड़ी हद तक नॉर्मल नज़र आने लगीं. नज़ीर ने मुझे कहा के में आज तुम्हे भी मज़े कराओं गा क्योंके तुम अपनी खाला पर गरम हो. वैसे तुम्हारी खाला है नंबर वन माल. इस कुतिया का नाम किया है? मुझे उस की बकवास सुन कर गुस्सा तो आया मगर किया करता. मैंने कहा – अम्बरीन. उस ने होठों पर ज़बान फेर कर खाला अम्बरीन की तरफ देखा. वो अपना ब्रा उठा कर *बाथरूम चली गईं. जब वापस आईं तो उन्होने अपना ब्रा पहन रखा था. उनके आते ही नज़ीर ने अपने कपड़े उतारे और अलिफ नंगा हो गया.*

उस का क़द बहुत छोटा था मगर जिसम बड़ा घुटा हुआ और मज़बूत था. उस का लंड इन्तहाई मोटा था जो उस वक़्त भी आधा खड़ा हुआ निसफ दायरे की तरह उस के टट्टों पर झुका हुआ था. उस के लंड का सर छ्होटा था मगर पीछे की तरफ इन्तहाई मोटा हो जाता था. उस की झांतों के बाल घने थे और उन के अलावा उस के जिसम पर कहीं बाल नही थे. टटटे बहुत मोटे मोटे थे जिन की वजह से उस का लंड और भी बड़ा लगता था. खाला अम्बरीन नज़ीर के लंड को देख कर हैरान रह गईं. वो एक घरैलू औरत *थीं *और उन्होने इतनो मोटा लंड पहले कभी नही देखा था. मुझे यक़ीन था के अपने शौहर के अलावा उन्हे कभी किसी ने नही चोदा था.*

नज़ीर ने जान लिया के खाला अम्बरीन उस के लंड को हैरत से देख रही हैं. उस ने अपना लंड हाथ में ले कर उससे ऊपर नीचे हरकत दी और मुस्कुरा कर खाला अम्बरीन से पूछा के किया उन्हे उस का लंड पसंद आया? वो खामोश रहीं. वो फिर बोला के अब ये लंड तेरी फुद्दी मारे गा और तुझे बहुत मज़ा दे गा. खाला अम्बरीन ने जल्दी से अपनी नज़रें झुका लीं. नज़ीर ने अपना फोन और चाक़ू बेड के साथ पड़ी हुई छोटी सी मेज़ पर रखे और मुझे भी कपड़े उतारने को कहा. मै *खौफ के आलम में सेक्स का कैसे सोच सकता था. मैंने इनकार कर दिया.*

वो खाला अम्बरीन के पास गया और उनका हाथ पकड़ कर उन्हे बेड से उठाने लगा. उन्होने अपना हाथ छुड़ाना चाहा तो नज़ीर उन्हे गलीज़ गालियाँ देने लगा. कहने लगा तेरी चूत मारूं कुतिया अब शरीफ बनती है. तारे फुडे में लंड दूँ हरामजादी, कंजड़ी, बहनचोद. तेरी बहन को चोदुं अभी कुछ देर पहले तू अपने भानजे से चुदवा रही थी और अब नायक बन रही है. इस बे-इज़्ज़ती पर खाला अम्बरीन का चेहरा लाल हो गया और आँखों में बे-साख्ता आँसू आ गए. मै *भी अंदर से हिल कर रह गया. उस वक़्त मुझे एहसास हुआ के में नादानी में किया गज़ब कर बैठा था. *

नज़ीर ने खाला अम्बरीन को खड़ा किया और उन से लिपट गया. उस का क़द खाला अम्बरीन से 2 इंच छोटा तो ज़रूर होगा. वो उनके दिलकश चेहरे को चपड़ *चपड़ *चूमने लगा. उस का लंड अब पूरी तरह खड़ा हुआ था और खाला अम्बरीन की चूत से नीचे उनकी रानों में घुस रहा था. मै *जो थोड़ी देर पहले तक खाला अम्बरीन को चोदने के लिये बे-ताब था अब खौफ और पशहाईमानी की वजह से सूब कुछ भूल चुका * था. मुझे अपना दिल पसलियों में धक धक करता महसूस हो रहा था.*

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