अम्मी और खाला को कुत्तों की तरह चोदा part 8

राशिद ने खाला अम्बरीन के कपड़े उतारने शुरू कर दिये. उन्होने अपनी क़मीज़ तो बेड पर बैठे बैठे ही उतार दी लेकिन शलवार उतारने के लिये उन्हे खड़ा होना पड़ा. शलवार उतरी तो खाला अम्बरीन के वज़नी चूतड़ मुझे नज़र आए. राशिद ने मुझे देखा और हाथ पीछे ले जा कर अपनी माँ के मोटे चूतड़ों को कस कस कर दबाने लगा. उस का लंड खाला अम्बरीन के पेट के नीचे टनटना रहा था. उस ने खाला अम्बरीन के दोनो चूतड़ों को अपने दोनो हाथों में ले कर खोला तो मुझे उनकी गांड़ का सुराख नज़र आया. राशिद ने बड़े वबाशाना अंदाज़ में अपनी माँ की गांड़ के सुराख पर उंगली फेरी.

ये देख कर अम्मी के मुँह के अंदर ही मेरे लंड में मज़े की मौजें उठने लगीं. राशिद ने खाला अम्बरीन का ब्रा भी उतारा और उनके मम्मों को दोनो हाथों में ले लिया. खाला अम्बरीन ने अपने होंठ दाँतों में दबा लिये. राशिद ने भी मेरी तरह वहीं खड़े खड़े अपना लंड अपनी माँ के मुँह में डाल दिया. खाला अम्बरीन अपने बेटे का लंड चूसने लगीं मगर उनके चेहरे पर ऐसा ता’असुर था जैसे ये सब कुछ उनके लिये ना-पसंदीदा हो.

मैंने अम्मी की क़मीज़ उनके पेट पर से ऊपर की और उस के अंदर हाथ डाल कर उनके मम्मे पकड़ने चाहे मगर क़मीज़ ब्रा से ऊपर नही गई और उनके मम्मे पूरी तरह मेरे हाथ में नही आ सके. अम्मी ने मेरा लंड मुँह से निकाला और खुद ही अपनी क़मीज़ उतार कर अपने बदन से अलहदा कर दी. फिर उन्होने अपनी शलवार भी उतार दी. मैंने उनका ब्रा खोल कर उनके मम्मों के ऊपर से हटाया और बेड पर लेट गया.

खाला अम्बरीन अब बेड पर दराज़ हो चुकी थीं और राशिद उन पर चढ़ा हुआ था. वो उनके मम्मों को बिल्कुल दीवानों की तरह मुँह में ले ले कर चूस रहा था. खाला अम्बरीन के मुँह से अब आवाजें निकलना शुरू हो गईं थीं और वो आहिस्ता आहिस्ता अपना सीना आगे पीछे कर रही थीं . ये मंज़र भी खून गरमा देने वाला था. राशिद और खाला अम्बरीन मुझ से क़रीब ही थे. जब राशिद खाला अम्बरीन का एक मम्मा चूस रहा था तो मैंने हाथ आगे बढ़ा कर उनके दूसरे मम्मे को दबाना शुरू कर दिया. खाला अम्बरीन के मुँह से निकालने वाली आवाजें एक लम्हे के लिये बंद हुईं और फिर फॉरन ही उन्होने ज़ियादा तेज़ आवाज़ में कराहना शुरू कर दिया. मै भी अपना लंड आहिस्ता आहिस्ता अम्मी के मुँह के अंदर बाहर करने लगा. जब मेरा लंड अम्मी के मुँह में घुसता तो वो अपनी ज़बान नीचे कर लातीं और जब लंड उनके मुँह से बाहर निकलता तो वो उस के टोपे पर ज़बान फेरतीं.

मैंने खाला अम्बरीन की मम्मे पर हाथ फेरा तो वो खिसक कर मज़ीद मेरे क़रीब आ गईं और में उनके उस मम्मे को मसलता रहा जो राशिद के मुँह में नही था. राशिद ने अपनी माँ में मेरी दिलचस्पी देखी तो उठ कर अम्मी के पास आया और अपना लंड उनके मुँह के आगे कर दिया. अम्मी ने मेरा लंड मुँह से निकाला और राशिद के लंड का टोपा चूसने लगीं. मैंने भी अपना लंड खाला अम्बरीन के मुँह में दाखिल कर दिया. मुझे अंदाज़ा हुआ के जब दो मर्द दो औरतों को एक साथ चोदते हैं तो दोनो एक दूसरे को देख कर एक जैसी हरकतें करने लगते हैं.

फिर राशिद ने अम्मी से कहा के खाला ज़रा अपनी गांड़ मेरी तरफ करें. अम्मी अपना थूक से भरा हुआ मुँह साफ़ करते हुए उठीं और अपने नंगे चूतड़ों को राशिद की तरफ कर दिया. राशिद ने उनके चूतड़ों को अपने हाथों की मदद से खोला और उनकी चूत और गांड़ चाटने लगा. अम्मी ने बेड की चादर पकड़ ली और ऊऊं ऊऊऊःन करने लगीं. मै भी खाला अम्बरीन के पीकछे आ गया और बिल्कुल राशिद की तरह उनके चूतड़ों को खोल कर उनकी चूत पर ज़बान फेरने लगा. खाला अम्बरीन भी अपनी चूत चटवाते हुए खुद पर क़ाबू ना रख सकीं और कराहने लगीं. दोनो एक दूसरे से चंद इंच के फ़ासले पर थीं .

मेरे लंड के टोपे से पानी की बूँदें निकल रही थीं . मैंने ज़रा ज़ोर से खाला अम्बरीन की चूत चाटी तो वो बे-खुदी के आलम में आगे हुईं और अम्मी के ऊपर झुक कर उनकी कमर का निचला हिस्सा चाटने लगीं. उन्होने अपने हाथ की उंगलियाँ राशिद के माथे के पास अम्मी की गांड़ के सुराख पर फैरना शुरू कर दीं. अम्मी ने अपनी कमर पर खाला अम्बरीन की ज़बान महसूस की तो और ज़ोर से अपनी गांड़ राशिद के मुँह में घुसा ने लगीं. वो दोनो अब अपने आप को संबाल नही पा रही थीं .

मैंने खाला अम्बरीन का हाथ पकड़ कर अम्मी के हिलते हुए मम्मों के क़रीब कर दिया. उन्होने अम्मी के मम्मों को पकड़ा और उन्हे दूध दोहने वाले अंदाज़ में नीचे की तरफ खैंचने लगीं. मैंने खाला अम्बरीन की चूत को चूमते हुए उनकी गांड़ के सुराख को देखा जो कभी खुल रहा था और कभी बंद हो रहा था. मैंने अपनी एक उंगली उनके गांड़ के सुराख पर रखी और उससे आहिस्ता से अंदर दबाया. खाला अम्बरीन ने एक तेज़ आवाज़ निकाली और अपना एक हाथ नीचे ला कर अपनी चूत को मसलने लगीं.

राशिद ने जब देखा के उस की माँ खलास हो गई है तो वो अम्मी को छोड़ कर खाला अम्बरीन के पास आ गया. चूँके कुछ देर पहले राशिद ने खाला अम्बरीन को मेरे लिये छोड़ा था इस लिये में भी उससे अम्मी की गांड़ के पीछे से उठते हुए देख कर वहाँ से हट गया. राशिद ने खाला अम्बरीन के चूतड़ों को अपने लंड की तरफ मोड़ा और अपना फूँकारता हुआ लंड अपनी माँ की चूत के अंदर डाल कर घस्से मारने लगा.

मैंने भी अम्मी को घुटनो के बल झुकाया और उनकी चूत में अपना लंड अंदर कर दिया. अम्मी की चूत राशिद ने काफ़ी देर चाटी थी और वो पूरी तरह खुल चुकी थी. मेरा लंड अम्मी की चूत में आसानी से रास्ता बनाता हुआ उस के अंदर घुस गया और मैंने उनके चूतड़ पकड़ कर घस्से मारने शुरू कर दिये. अब में और राशिद अपनी अपनी माओं को पीछे से चोद रहे थे.

हमारे लंड एक तावातूर से अम्मी और खाला अम्बरीन की फुद्दियों में अंदर बाहर हो रहे थे. वो दोनो भी अपने चूतड़ों को हिला हिला कर हमारा साथ दे रही थीं . दोनो के मम्मे हमारे झटकों की वजह से बुरी तरह हिल रहे थे. अम्मी और खाला अम्बरीन वक़फे वक़फे से एक दूसरे की तरफ देख लेतीं थीं . वो अब इस सारे खेल का मज़ा ले रही थीं और दोनो के चेहरों पर इतमीनान और सकूँ नज़र आ रहा था.

में सेक्स में इतना तजर्बकार नही था लेकिन फिर भी एक दम मुझे लगा के अम्मी की फुद्दी पानी छोड़ने वाली है. उन्होने तेज़ रफ़्तारी से मेरे लंड पर अपनी फुद्दी को आगे पीछे किया और छूटने लगीं. उनकी फुद्दी पूरी तरह पानी में भीग गई और वो सर झुका कर मुँह से बे-हंगम आवाजें निकालने लगीं. उन्होने खलास होने के बाद अपनी गांड़ नीचे की और पेट बेड के साथ लगा कर मेरे लंड को अपनी फुद्दी के अंदर ही रखते हुए उल्टी लेट गईं. मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाला और इस तरह अम्मी की चूत मारता रहा. लेकिन अब मुझे अपना लंड उनकी फुद्दी के अंदर दूर तक पुहँचाने में मुश्किल हो रही थी. मैंने उनकी चूत से लंड बाहर निकाला और सीधा लेट कर उन्हे अपने लंड पर बिठा लिया. मेरा लंड अम्मी की चूत के अंदर गया और वो उस पर अपने सेहतमंद बदन को आहिस्ता आहिस्ता ऊपर नीचे करने लगीं. मैंने खाला अम्बरीन की तरफ सर घुमाया.
राशिद अब भी खाला अम्बरीन को पीछे से ही चोद रहा था. जब वो अपना लंड उनकी चूत में अंदर करता तो खाला अम्बरीन मुँह से उफफफफ्फ़ की आवाज़ निकलटीं लेकिन जब उस का लंड उनकी चूत से बाहर निकलता तो उनके चेहरे पर तक़लीफ़ के आसार आ जाते. राशिद की पतली रानें खाला अम्बरीन के भारी चूतड़ों से तकररा तकररा कर अजीब क़िसम की आवाजें पैदा कर रही थीं . उस ने खाला अम्बरीन के चूतड़ों पर दोनो हाथ फेरने शुरू कर दिये और अपने घस्सों में थोड़ी तेज़ी ले आया. कुछ देर खाला अम्बरीन को चोदने के बाद वो भी मेरी तरह लेट गया और अपनी माँ को अपने ऊपर ला कर उस की फुद्दी में लंड दे दिया. खाला अम्बरीन भी अब अम्मी की तरह अपने बेटे के लंड पर उछलने लगीं.

अभी तक मैंने अपने ऊपर काफ़ी क़ाबू रखा था और खलास नही हुआ था लेकिन जब अम्मी के मोटे और भारी चूतड़ों ने बार बार मेरे लंड पर वज़न डाला तो मुझे लगा के में खलास हो जाऊं गा. मै राशिद से पहले खलास नही होना चाहता था. मैंने जल्दी से अम्मी को मम्मों से पकड़ कर रोक दिया. वो मेरे चेहरे के ता’असूरात से समझ गईं के में खलास होने वाला हूँ. उन्होने अपने चूतड़ों की हरकत रोक दी और कुछ कहे बगैर मेरे ऊपर से उतर गईं. जैसे ही मेरा अकड़ा हुआ लंड अम्मी की चूत के दबाव से आज़ाद हुआ तो किसी स्प्रिंग की तरह बड़ी तेज़ी से दांयें बांया हरकत करने लगा. अम्मी ने फॉरन उससे अपने हाथ में पकड़ लिया.

वो जान गई थीं के में खलास नही होना चाहता और खामोशी से मेरी मदद कर रही थीं . मैंने अपनी साँसें दरुस्त कीं और एक हाथ से अम्मी का एक मम्मा पकड़ा और दूसरे हाथ में खाला अम्बरीन का उछलता हुआ मम्मा दबोच लिया जो अब भी राशिद के लंड पर बैठी हुई थीं . कुछ मिनिट बाद मेरी हालत ज़रा और बेहतर हुई तो में फिर खाला अम्बरीन की तरफ मुतवजेह हुआ. वो राशिद के लंड पर से उतार कर मेरे साथ लिपट गईं. अम्मी ने मुस्कुराती आँखों से मुझे देखा और चुप चाप राशिद के पास जा कर लेट गईं जो उन से फॉरन लिपट गया.

राशिद ने अम्मी के ऊपर लेट कर उनके होठों को अपने मुँह में लिया और दोनो हाथों से उनके मम्मे मसलने लगा जो अब मेरे और राशिद के चूसने और मसलने से खूब लाल हो चुके थे. अम्मी अपना मुँह खोल खोल कर उस का साथ दे रही थीं . दोनो बुरी तरह एक दूसरे को चूम चाट रहे थे. बेडरूम में चूमा चाटी की आवाजें हर तरफ फैली हुई थीं . मैंने खाला अम्बरीन को अपने नीचे किया और अपना लंड उनकी फुद्दी में डाल कर घस्से लगाने लगा. वो बेड पर अपने बदन को इधर उधर हरकत देती रहीं. वो होश में नही लग रही थीं .मै खाला अम्बरीन की चूत में आहिस्ता आहिस्ता घस्से मारता रहा. तेज़ साँस लेने की वजह से उनका सीना और मम्मे ऊपर नीचे हो रहे थे.

राशिद ने अपनी माँ को एक बार फिर खलास होते देखा तो अम्मी की टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख लीं. अम्मी की चूत का मुँह ऊपर उठ कर उस के सामने आ गया. राशिद ने अपना लंड अम्मी की चूत के अंदर डाला और उस के कंधों पर रखी हुई अम्मी की टांगें उनके सीने की तरफ आ गईं. अम्मी ने ज़ोर से उफफफ्फ़ कहा और सर उठा कर अपने हाथों से राशिद को पीछे ढकैलने की कोशिश की. राशिद ने अपना पूरा वज़न डाल कर अम्मी के घुटने उनके पेट से मिला दिये और उनकी उभरी हुई चूत में घस्से मारने लगा. वो इतना ताक़तवर नज़र नही आता था मगर उस ने अम्मी जैसी सेहतमंद औरत को बड़ी अच्छी तरह क़ाबू किया हुआ था. अम्मी उस के हर घस्से पर बड़ी तेज़ आवाज़ में कराहती थीं . मैंने देखा के उनकी चूत से पानी काफ़ी मिक़दार में निकल रहा था.

फिर राशिद के चेहरे के नाक़ूश बिगड़ घैय. उस ने अपना लंड अम्मी की फुद्दी में से बाहर निकाला और तेज़ तेज़ मूठ मारने लगा. फॉरन ही उस की मनी उस के टोपे के सुराख से पिकचकार्यों की सूरत में बाहर निकल कर अम्मी के चूतड़ों पर गिरने लगी. अपनी सारी मनी अम्मी की गांड़ पर डाल कर राशिद बेड से उठ गया और सामने पड़ी हुई कुर्सी पर जा बैठा. अम्मी भी उठीं लेकिन बेड पर ही एक साइड पर नंगी ही बैठ गईं.

राशिद को खलास होते देख कर मुझे दिल ही दिल में खुशी हुई के में उस से पहले नही कछूटा. मैंने एक दफ़ा फिर खाला अम्बरीन की चूत में अपने घस्से तेज़ कर दिये. यों ही चंद मिनिट तक उनकी चूत लेने के बाद मैंने फिर उन्हे घुटनो और हाथों के बल कुतिया बनाया और पीछे से उनकी चूत मारने लगा. अब में उनकी चूत में खलास होने की नियत से घस्से मार रहा था. जल्द ही मुझे अपने लंड के टोपे पर हल्की हल्की गुदगुदी महसूस होने लगी और मैंने खाला अम्बरीन की चूत में जल्दी जल्दी घस्से लगाने शुरू कर दिये. वो अपने बदन की सारी ताक़त इस्तेमाल कर के पीछे की तरफ ज़ोर लगा रही थीं . फिर में खाला अम्बरीन के अंदर खलास होने लगा और मुझे अपनी मनी उनकी पहले से गीली चूत के अंदर जाती महसूस होने लगी. इस के बाद हम सब बारी बारी नहाए और फिर गप शप करने बैठ गए.

इस वक़िये को 6 साल बीत चुके हैं. उस दिन के बाद मैंने और राशिद ने ये फ़ैसला किया था के हम एक दूसरे की माओं को अलहदा अलहदा नही चोदेंगे और हम आज तक इस फ़ैसले पर कायम हैं. अगर मुझे खाला अम्बरीन को चोदना होता है तो राशिद भी उसी दिन या किसी और दिन अम्मी की चूत मारता है और अगर राशिद की खाहिश होती है के अम्मी को चोदे तो में भी खाला अम्बरीन की फुद्दी लेता हूँ. हम सब अपनी अपनी जगह पर खुश हैं और एक अच्छी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं.

मेरे सर से अपनी अम्मी और खाला को चोदने का भूत आज तक नही उतार सका. लेकिन में अम्मी को उसी वक़्त चोदता हूँ जब मुझे उनकी तरफ से इस बात का कोई इशारा मिलता है के वो चुदवाना चाहती हैं. मुझे खुद इस सिलसिले में उन से बात करने की हिम्मत नही होती. मै उनकी चूत ज़रूर मारता हूँ मगर इस का मतलब ये नही है के वो मेरी माँ नही रहीं. हम अब भी पहले ही की तरह माँ और बेटे ही हैं.

जिन लोगों का ख़याल है के इन्सेस्ट से रिश्तों की नोआयत पूरी तरह बदल जाती है वो गलती पर हैं. ऐसा बिल्कुल नही होता. फ़र्क़ ज़रूर पड़ता है लेकिन अगर बेटा अपनी माँ को चोद ले तो फिर भी माँ माँ ही रहती है बीवी नही बन जाती. मेरे लिये ये आज भी मुमकिन नही है के खाविंद की तरह उन्हे इशारा करूँ और वो अपनी शलवार उतार दें. अगरचे में जानता हूँ के वो मुझे चूत देने से इनकार नही कर सकतीं मगर मुझे ये भी ईलम है के वो ऐसा अपनी रज़ामंदी से ही करती हैं ज़ोर ज़बरदस्ती से नही. अब भी में उनकी कोई बात नही टाल सकता और ना अपनी कोई बात उन से ज़बरदस्ती मनवा सकता हूँ. मै नही जानता के मुस्तक़बिल में किया हो गा मगर मेरी और राशिद की शादियों तक तो शायद सब कुछ ऐसा ही रहे. बाक़ी जो क़िस्मत में लिखा हो वो हो कर रहता है.

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