अम्मी और खाला को कुत्तों की तरह चोदा part 4

एक दिन मेरे दोनो बहन भाई नाना जान के घर गए हुए थे और घर में सिरफ़ अम्मी और में ही थे. उस दिन हफ़्ता था और हर हफ्ते को हमारे घर कपड़े ढोने वाली मासी आती थी और अम्मी उस के साथ कपड़े धुलवाया करती थीं . दोपहर साढ़े तीन बजे के क़रीब अम्मी ने घर का सारा काम ख़तम किया और नहाने ढोने के लिये बेडरूम में चली गईं. मासी पहले ही जा चुकी थी. मै भी कुछ देर बाद उनके पीछे बेडरूम में आ गया. वो नहाने के बाद बड़ी निखरी निखरी लग रही थीं लेकिन उनके चेहरे पर थकान के आसार अब भी मोजूद थे. मैंने उन्हे कहा के वो बहुत ज़ियादा काम करती हैं और आराम बिल्कुल नही करतीं. मैंने उनकी तारीफ भी की के घर को संभालने में उनका कोई सांई नही. वो अपनी तारीफ सुन कर मुस्कुराईं और बोलीं के घर के काम काज में थकान तो हो ही जाती है लेकिन किया किया जाए घर तो संभालना तो पड़ता ही है.

उनके लंबे बाल अब भी हल्के गीले थे और उनका गोरा सेहतमंद बदन बड़ा शानदार लग रहा था. वो बिस्तर पर बैठ गईं. मैंने कहा के आज तो वो बहुत थकी होई लग रही हैं में उन्हे दबा देता हूँ. वो फॉरन मान गईं और कहा के उनकी कमर में बहुत दर्द है. इस में कोई नई बात नही थी क्योंके में बचपन से ही अम्मी को दबाया करता था. उन्होने अपना दुपट्टा उतारा और बेड पर उल्टी हो कर लेट गईं. लेट कर उन्होने अपने भारी चूतड़ों के ऊपर अपनी क़मीज़ को ठीक किया. क़मीज़ अपने तंदूरस्त बदन के नीचे से निकालने के लिये उन्होने अपने मोटे चूतड़ों को ऊपर उठाया और फिर हाथ पीछे ले जा कर उन्हे क़मीज़ के दामन से धक लिया. अम्मी के भारी चूतड़ों की हरकत ने मेरा खून गरमा दिया. यही वो वक़्त था जब मैंने सोचा के आज अम्मी को चोदने की कोशिश कर ही लानी चाहिये.

अम्मी के लेट जाने के बाद मैंने आहिस्ता आहिस्ता उनकी मज़बूत कमर को दबाना शुरू कर दिया. मेरे हाथों के नीचे अम्मी की कमर का गोश्त बड़ा गुन्दाज़ महसूस हो रहा था. मेरी हथेलियों ने अम्मी के सफ़ेद ब्रा के स्ट्रॅप्स को महसूस किया जो उनकी क़मीज़ में से झाँक रहा था. मेरा लंड खड़ा होने लगा. मैंने अम्मी के गोल कंधों को दोनो हाथों में पकड़ लिया और उन्हे होले होले दबाने लगा. कंधों के थोड़ा ही नीचे उनके मोटे मोटे मम्मे उनके बदन के वज़न तले दबे हुए थे. मै अपनी उंगलियों को अम्मी के कंधों से कुछ नीचे ले गया और उनके मम्मों का ऊपरी नरम नरम हिस्सा मेरी उंगलियों से टकराया. उनको अब सरूर आने लगा था और वो आँखें बंद किये अपना बदन दबवा रही थीं . कमर से नीचे आते हुए मैंने बिल्कुल गैर महसूस अंदाज़ में अम्मी के चौड़े और मोटे चूतड़ों पर हाथ रख कर उन्हे दबाया और जल्दी से उनकी गोरी पिंदलियों की तरफ आ गया. मैंने पहली दफ़ा अम्मी की गांड़ को हाथ लगाया था. उनके चूतड़ों का लांस बड़ा अजीब और मदहोश कर देने वाला था. मेरे जिसम में सनसनाहट सी होने लगी. मुझे अपने लंड पर क़ाबू रखना मुश्किल हो गया.

मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को अम्मी की मोटी गांड़ के सुराख में उंगली देने से रोका. मैंने इस से पहले कभी अम्मी को दबाते हुए उनके चूतड़ों को हाथ नही लगाया था इस लिये मुझे डर था के कहीं वो बुरा ना मान जाएं मगर वो चुप चाप लेतीं रहीं और में इसी तरह उन्हे दबाता रहा. मेरा लंड अकड़ कर पठार बन चुका था. तीन चार दफ़ा अम्मी की गांड़ का इसी तरह लुत्फ़ लेने के बाद मैंने एक क़दम और आगे बढ़ने का इरादा किया. मै अपना हाथ उनकी बगल की तरफ ले गया और साइड से उनके एक मोटे ताज़े मम्मे को आहिस्ता से दबाया. पहले तो उन्होने किसी क़िसम का रिऐक्शन ज़ाहिर नही किया लेकिन जब मैंने दोबारा ज़रा बे-बाकी से उनके मम्मे को हाथ में लेने की कोशिश की तो वो एक दम सीधी हो कर बैठ गईं और बड़े गुस्से से बोलीं के ये तुम किया कर रहे हो शाकिर. तुम्हे शरम आनी चाहिये में तुम्हारी माँ हूँ. पहले तुम ने मेरी पीठ को टटोला और अब सीने को हाथ लगा रहे हो. उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया था.

अगरचे मुझे पहले ही तवक़ो थी के वो इस तरह का रद-ए-अमल ज़ाहिर करें गी और में जानता था के मुझे इस के बाद किया करना था लेकिन फिर भी उन्हे गुस्से में देख कर मेरा दिल लरज़ कर रह गया. मैंने कहा के मैंने कुछ गलत नही किया में तो आप को दबा रहा था. उन्होने जवाब दिया के में उनके सीने को टटोल रहा था जो बड़ी बे-शर्मी की बात है. ये कह कर वो गुस्से में बिस्तर से नीचे उतरने लगीं. अब मेरे पास इस के एलावा कोई चारा नही था के में उन्हे बता देता के में उनकी शरम-ओ-हया से बड़ी अच्छी तरह वाक़िफ़ हूँ. मैंने कहा के अम्मी जुब आप राशिद को अपनी चूत देती हैं उस वक़्त तो आप को कोई शरम महसूस नही होती मगर मैंने आप के मम्मे को ज़रा सा हाथ लगा लिया तो आप इतना शोर कर रही हैं. मेरे मुँह से इस क़िसम के जुमले सुन कर अम्मी जैसे सन्नाटे में आ गईं. उनका चेहरे के ता’औरात फॉरन बदल गए और मुँह खुला का खुला रह गया. बिस्तर से नीचे लटकी हुई उनकी टांगें लटकती ही रहीं और वो वहीं बैठी रह गईं.

मेरे इस ज़बरदस्त हमले ने उन्हे संभलने का मोक़ा नही दिया था. उनकी हालत देख कर मेरा खौफ अचानक बिल्कुल ख़तम हो गया. इस से पहले के वो कोई जवाब देतीं मैंने कहा के अम्मी मेहरबानी कर के अब झूठ ना बोलिये गा के आप का और राशिद का कोई ता’अलूक़ नही है क्योंके में अपनी आँखों से उसे आप को चोदते हुए देख चुका हूँ और मेरे पास इस का सबूत भी है. मैंने जल्दी से अपना मोबाइल निकाल कर उन्हे उनकी और राशिद की तस्वीरें दिखाईं.

तस्वीरें अगरचे दूर से ली गई थीं और थोड़ी धुंधली थीं मगर अम्मी और राशिद को साफ़ पहचाना जा सकता था. राशिद ने पीछे से अम्मी की चूत में अपना लंड डाला हुआ था और अम्मी बेड पर हाथ रखे नीचे झुकी हुई उस से अपनी चूत मरवा रही थीं . तस्वीरें देख कर अम्मी का चेहरा हल्दी की तरह ज़र्द हो गया और एक लम्हे में उनके चेहरे से सारा गुस्सा यक्सर गायब हो गया. अब उनकी आँखों में खौफ और खजालत के आसार थे. ऐसा महसूस होता था जैसे उन्होने कोई बड़ी खौफनाक बाला देख ली हो. उनकी आँखों से खौफ झलक रहा था.

उन्होने कुछ देर सर नीचे झुकाय रखा और फिर बोलीं के राशिद ने उन्हे बरगला कर उनके साथ ये सब किया है और वो अपनी हरकत पर बहुत शर्मिंदा हैं. वाक़ई उन से बहुत बड़ी गलती होई है. फिर अचानक ही उन्होने रोना शुरू कर दिया. मै जानता था के वो सफ़ेद झूठ बोल रही हैं. किसी औरत को उस की मर्ज़ी के बगैर नही चोदा जा सकता और अम्मी को तो मैंने अपनी आँखों से राशिद से चुदवाते हुए देखा था. वो जो कुछ कर रही थीं अपनी मर्ज़ी से और बड़ी खुशी से कर रही थीं . ये रोना धोना इस लिये था के उनका राज़ फ़ाश हो गया था.

में अम्मी के पास बेड पर बैठ गया और उनके बदन के गिर्द अपने बाज़ू डाल कर उन्हे अपनी तरफ खैंचा. उन्होने कोई मुज़ाहीमत तो नही की लेकिन और ज़ियादा शिद्दत से रोने लगीं. मै थोड़ा सा परेशां हुआ के अब किया करूँ. मैंने अम्मी से कहा के वो फिकर ना करें में उनके और राशिद के बारे में किसी से कुछ नही कहूँ गा. ये राज़ हमेशा हमेशा के लिये मेरे सीने में ही दफ़न रहे गा. ये सुनना था के अम्मी ने रोना बंद कर दिया और बड़ी हैरत से मेरी तरफ देखा. मैंने फिर कहा के अम्मी जो होना था वो हो चुका है. मै अपना मुँह बंद रखूं गा मगर आप ये वादा करें के आ’इन्दा कभी राशिद को अपने क़रीब नही आने दें गी. उन्होने जल्दी से जवाब दिया के बिल्कुल ऐसा ही होगा.

अगरचे अब अम्मी इस पोज़िशन में नही थीं के मेरी किसी बात को टाल सकतीं और में उन से हर क़िसम का मुतालबा कर सकता था मगर ना जाने क्यों मतलब की बात ज़बान पर लाते हुए अब भी में घबरा रहा था. बहरहाल मैंने दिल मज़बूत कर के अम्मी के गाल को चूम लिया. उन्होने मेरी गिरफ्त से निकालने की कोशिश नही की मगर बिल्कुल ना-महसूस तरीक़े से अपने बदन को सिमटा लिया. मैंने कहा के अम्मी में आप के साथ वोही कुछ करना चाहता हूँ जो राशिद कर रहा था मगर मे आप को आप की मर्ज़ी से चोदना चाहता हूँ. अगर आप को मुझ से चुदवाना क़बूल नही तो में आप को मजबूर नही करूँ गा बस मेरी यही दरखास्त होगी के राशिद कभी आप के क़रीब नज़र ना आए. मेरी बात सुन कर अम्मी कुछ सोचने लगीं. उन्होने किसी क़िसम का रद-ए-अमल ज़ाहिर नही किया जो मेरे लिये हैरानगी का मंज़र था.

कुछ देर सोच में डूबे रहने के बाद अम्मी ने कहा के तुम कब इतने बड़े हो गए मुझे अंदाज़ा ही नही हो सका. वैसे में कई हफ्तों से तुम्हारे अंदर एक अजीब सी तब्दीली महसूस कर रही थी और मुझे शक था के तुम्हारी नज़रें बदली हुई हैं. ये बात भी मेरे लिये हैरान-कन थी के अम्मी को अंदाज़ा हो गया था के में उन्हे चोदने का खाहिसमंद था. मैंने पूछा के उन्हे कैसे इस बात का पता चला. उन्होने जवाब दिया के औरत को मर्द की आँख का फॉरन पता चल जाता है चाहे वो मर्द उस का बेटा ही क्यों ना हो. मैंने उन्हे अपनी गिरफ्त से आज़ाद किया और कहा के अब इन बातों को छोड़ें और मुझे ये बताईं के किया आप मुझे चूत दें गी. अम्मी अब काफ़ी हद तक संभाल चुकी थीं . उन्होने कहा के शाकिर तुम जो करना चाहते हो उस के बाद मेरा और तुम्हारा रिश्ता हमेशा के लिये बदल जाए गा. इस लिये अच्छी तरह सोच लो.

मैंने जवाब दिया के अम्मी आप राशिद से भी चुदवा रही थीं आप का और उस का रिश्ता तो नही बदला. वो जब भी यहाँ आता था तो आप दोनो को देख कर कोई ये नही कह सकता था के आप का भांजा आप को चोद रहा है फिर भला हुमारा रिश्ता कैसे बदल जाए गा. मै आप की चूत ले कर भी हमेशा आप का बेटा रहूं गा. मेरे और आप के जिस्मानी रिश्ते के बारे में किसी को कभी कुछ पता नही चले गा. सब कुछ वैसा ही रहे गा जैसा था. उनके पास इस दलील का जवाब नही था.
वो कुछ देर और सोचती रहीं फिर ठंडी साँस ले कर बोलीं के शाकिर हम बहुत बड़ा गुनाह करने जा रहे हैं मगर लगता है मेरे पास तुम्हारी खाहिश को पूरा करने के एलवा कोई चारा नही. मेरे दिल में फुलझर्रियाँ छूटनें लगीं. मैंने अपना एक हाथ आगे कर के अम्मी का एक मोटा मम्मा पकड़ लिया. उन्होने सर मोड़ कर मेरी तरफ देखा और कहा के अभी तो मेरी जेहनी हालत बहुत खराब है किया तुम कल तक सबर नही कर सकते. मैंने कहा के कल छोटे भाई बहन यहाँ हूँगे क्योंके स्कूल बंद हैं. अम्मी ने जवाब दिया के उन्हे दोबारा नाना के घर भेज दें गी वैसे भी वो वहाँ जाने की हमेशा ज़िद करते हैं.

मैंने कहा ठीक है मगर अम्मी ये तो बताएं के आख़िर आप राशिद से चुदवाने पर क्यों राज़ी हुईं? किया अब्बू आप की जिस्मानी ज़रूरियात पूरी नही करते? अम्मी मेरे सावालात सुन कर थोड़ी परेशां हो गईं. फिर कहने लगीं के शाकिर ये बातें कोई माँ अपने बेटे से नही करती मगर में तुम्हे बता ही देती हूँ के सेक्स मर्दों की तरह औरतों की ज़रूरत भी होती है. पिछले कई सालों से तुम्हारे अब्बू ने मुझ में दिलचस्पी लेना बहुत कम कर दी है. इस लिये मैंने राशिद के साथ इतना बुरा काम कर लिया जो मुझे नही करना चाहिये था. पहल उस की तरफ से हुई थी और मुझे उसी वक़्त उससे रोक देना चाहिये था. वो वाज़ेह तौर पर शर्मिंदा नज़र आ रही थीं और इस गुफ्तगू से दामन बचाना चाहती थीं . मैंने भी उन्हे मज़ीद परेशां करना मुनासिब नही समझा और चुप हो रहा. अम्मी कुछ देर बाद उठ कर बेडरूम से बाहर चली गईं. मै बे-सबरी से अगले दिन का इंतिज़ार करने लगा.

में अम्मी के कहने पर उस वक़्त तो खामोश हो गया लेकिन अगले दिन तक सबर करना मुझे बड़ा मुश्किल लग रहा था. मै वक़्त ज़ाया किये बगैर फॉरी तौर पर अम्मी की चूत मारना चाहता था. हर गुज़रते मिनिट के साथ मेरी ये खाहिश बढ़ती ही जा रही थी. शाम को मेरे भाई बहन घर वापस आ गए. मोक़ा मिला तो मैंने अलहड़गी में अम्मी से कहा के अगर वो रात को मेरे कमरे में आ जाएं तो में वहाँ उन्हे चोद लूं गा. मेरे कमरे मे किसी तो किसी के भी आने का कोई इंकान नही है.

अम्मी और मेरे दोनो छोटे बहन भाई एक कमरे में सोते थे जबके उन के बिल्कुल साथ वाला कमरा मेरा था. अबू घर की ऊपर वाली मंज़िल में एक अलहदा बेडरूम में सोया करते थे. रात के पिछले पहर सब के सो जाने के बाद अम्मी खामोशी से मेरे कमरे में आ सकती थीं और में उन्हे आराम से चोद सकता था. किसी को कानो कान खबर ना होती.

मेरी बात सुन कर अम्मी कुछ सोचने लगीं और फिर बोलीं के ठीक है में तुम से बाद में बात करती हूँ. अबू क़रीबन 10 या 10 ½ बजे सो जाया करते थे क्योंके उन्हे अगली सुबह 8 बजे दफ़्तर पुहँचना होता था. उस रात भी वो 10 बजे के क़रीब अपने कमरे में चले गए. उनके जाने के बाद अम्मी ने आहिस्ता से मेरे कान में कहा के वो रात 12 बजे के बाद मेरे कमरे में आएँगी. दोनो बहन भाई भी कोई आध घंटे तक सो गए और में अपने कमरे में चला आया.
नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी. आज की रात मेरी ज़िंदगी की बड़ी ख़ास रात थी. मुझे आज रात अपनी अम्मी को चोदना था जो अगरचे मेरी सग़ी माँ थीं मगर एक बड़ी खूबसूरत और भरपूर औरत भी थीं . दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग हूँ गे जिन्हो ने ज़िंदगी में सब से पहले जिस औरत को चोदा वो उनकी अपनी माँ थी. अपनी अम्मी की चूत लेने का ख़याल मेरे जज़्बात को बड़ी बुरी तरह भड़का रहा था और में मुसलसल सोच रहा था के जब मेरा लंड अम्मी की चूत के अंदर जाए गा और में उनकी चूत में घस्से मारूं गा तो कैसा महसूस होगा. मुझे अपने जिसम में खून की गर्दिश तेज़ होती महसूस हो रही थी.

पता नही कितनी ही फिल्मों के मंज़र बड़ी तेज़ी से मेरे दिमाग में घूम रहे थे. यही सब कुछ सोचते हुए मेरा लंड अकड़ चुका था और मुझे अब ये खौफ लाहक़ हो गया था के कहीं अम्मी के आने और उनकी चूत लेने से पहले ही में खलास ना हो जाऊं. फिर तो सारा मज़ा किरकिरा हो जाता. मै बड़ी बे-सबरी से 12 बजने का इंतिज़ार करने लगा. ना-जाने मैंने वो वक़्त किस तरह गुज़ारा. फिर मालूम नही कब मेरी आँख लग गई.

कोई 12 ½ बजे अम्मी कमरे में दाखिल हुईं और दरवाज़े की चटखनी बंद करने लगीं तो उस की आवाज़ से में जाग गया. उन्होने दुपट्टा नही ओढ़ा हुआ था और उनके भारी मम्मे अपनी पूरी उठान के साथ तने हुए नज़र आ रहे थे. वो सीधी आ कर मेरे बेड पर बैठ गईं. उनके चेहरे पर किसी क़िसम का कोई ता’असुर नही था. ना खुशी ना गम, ना गुस्सा ना प्यार. उस वक़्त वो बिल्कुल बदली हुई लग रही थीं . ऐसा लगता था जैसे वो अम्मी ना हूँ बल्के कोई और औरत हों . पता नही ये उनका कौन सा रूप था. शायद चूत मरवाने से पहले वो हमेशा ही ऐसी हो जाती हूँ या शायद मुझे चूत देने की वजह से उके अंदाज़ बदले हुए थे. मै कुछ कह नही सकता था. हम दोनो ही थोड़ी देर खामोश रहे. मुझे तो समझ ही नही आ रही थी के उन से किया बात करूँ.

बिल-आख़िर मैंने हिम्मत कर के अम्मी का एक बाज़ू पकड़ कर उन्हे अपनी तरफ खैंचा. उन्होने मुझे रोका नही और उनका बदन मेरे ऊपर झुक गया. मैंने एक हाथ उनके गले में डाला और उनके होठों को चूमते हुए दूसरे हाथ से उनके मम्मों को मसलने लगा. अम्मी के मम्मे बड़े मोटे मोटे और वज़नी थे और ब्रा के अंदर होने के बावजूद मुझे उन्हे मसलते हुए ऐसा लग रहा था जैसे मैंने उनके नंगे मम्मों को हाथों में पकड़ रखा हो. उनका ब्रा शायद ज़ियादा मोटे कपड़े से नही बना था. मैंने उनके मम्मों को ज़रा ज़ोर से दबाया तो उनके मुँह से हल्की सी सिसकी निकल गई. उन्होने अपने मम्मों पर से मेरे हाथ हटाया और मेरे कान के पास मुँह ला कर पूछा के किया मैंने पहले कभी सेक्स किया है?

यही सवाल मुझ से नज़ीर ने भी किया था जब वो पिंडी में खाला अम्बरीन की चूत मार रहा था. मुझे अपनी ना-तजर्बकारी पर बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई मगर मैंने बहरहाल नफी में सर हिला दिया. अम्मी ने कहा के में उनके मम्मे आहिस्ता दबाऊं क्योंके ज़ोर से दबाने से तक़लीफ़ होती है मज़ा नही आता. ये सुन कर मैंने दोबारा अम्मी के तने हुए भरपूर मम्मों की तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन उन्होने फिर मुझे रोक दिया और कहा के हमें कमरे की लाईट बुझा देनी चाहिये. फिर वो खुद ही उठीं और लाईट ऑफ कर दी. कमरे में अब भी अम्मी के बेडरूम की तरफ खुलने वाले रोशनदान में से काफ़ी रोशनी आ रही थी और में अम्मी को बिल्कुल साफ़ तौर से देख सकता था.

अम्मी वापस बेड के क़रीब आईं ओर खड़े खड़े ही अपनी क़मीज़ उतारने लगीं. क़मीज़ उनके मम्मों के ऊपर से होती हुई सर पर आई जिससे उतार कर उन्होने पहले सीधा किया और फिर एहतियात से बेड पर एक तरफ रख दिया. उनका गोरा बदन हल्की ज़र्द रोशनी में इंताहै खूबसूरत लग रहा था. मोटे और उभरे हुए मम्मे सफ़ेद रंग के ब्रा में से काफ़ी हद तक नंगे नज़र आ रहे थे और यों लग रहा था जैसे दो सफ़ेद तोपों ने अपने दहाने मेरी तरफ कर रखे हूँ. अम्मी के मम्मे बड़े और भारी होने के साथ साथ काफ़ी चौड़े भी थे और ऐसा लगता था जैसे उनके दोनो मम्मों के दरमियाँ बिल्कुल कोई फासला नही था. अम्मी का बे-दाग पेट और बिकुल गोल नाफ़ भी दिखाई दे रहे थे. उनके मज़बूत कंधे जिन पर ब्रा के स्ट्रॅप चढ़े हुए थे चौड़े और सेहतमंद थे. मैंने सोचा के किया अबू का दिमाग खराब है जो अम्मी जैसी खूबसूरत और सेक्सी औरत को चोदना नही चाहते? ऐसा कौन सा मर्द हो गा जो अम्मी की चूत नही लेना चाहे गा?

अम्मी चलती हुई मेरे बेड के पास आ गईं. अब उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी. उन्होने देख लिया था के में उनके बदन को ललचाई हुई नज़रों से देख रहा था. वो ब्रा और शलवार उतारे बगैर ही बेड पर चढ़ कर मेरे साथ लेट गईं. मै हज़ारों दफ़ा अपनी अम्मी के साथ एक ही बेड पर लेटा था मगर आज की रात मामला ज़रा मुख्तलीफ़ था.
मैंने भी फॉरन अपने कपड़े उतार दिये और बिल्कुल नंगा हो कर अम्मी की तरफ करवट ली और उन से लिपट गया. जैसे ही मेरा नंगा बदन उन के आधे नंगे बदन से टकराया मुझे लगा जैसे मेरे लंड में आग सी लग गई हो. अम्मी का बदन नर्म-ओ-मुलायम और हल्का सा गरम था. मेरा लंड फॉरन ही खड़ा होने लगा. अम्मी ने अपनी रानों के पास मेरे लंड का दबाव महसूस किया और मेरी तरफ देखा. उनकी आँखों में किसी क़िसम की ताश्वीश या शर्मिंदगी नही थी.

उसी वक़्त मेरे ज़हन में एक बहुत ही परेशां-कन ख़याल आया. मैंने फिल्मों में सेक्स का बहुत मुशाहिदा किया था और या फिर नज़ीर को खाला अम्बरीन की फुद्दी लेते हुए देखा था. लेकिन आज तक मुझे किसी औरत को चोदने का इत्तेफ़ाक़ नही हुआ था. मेरे दिल में अचानक ये खौफ पैदा हुआ के कहीं ऐसा ना हो में अम्मी को अपनी ना-तजर्बकारी की वजह से ठीक तरह चोद ना सकूँ. फिर किया हो गा? में इस एहसास-ए-कमतरी का भी शिकार था के राशिद सेक्स में मुझ से ज़ियादा बेहतर था. मैंने खुद अपनी आँखों से उससे अम्मी को चोद कर उनकी फुद्दी में अपनी मनी छोड़ते हुए देखा था. उस ने यक़ीनन और भी कई दफ़ा अम्मी की फुद्दी मारी थी और मुझे ये भी एहसास था के राशिद उन्हे चोद कर ठंडा करता था क्योंके अगर ऐसा ना होता तो अम्मी उससे क्यों अपनी फुद्दी मारने देतीं. आज अगर में अम्मी को चोदते हुए राशिद जैसा मज़ा ना दे सका तो किया हो गा? अम्मी ने मुझे बताया था के अब्बू उन्हे अब कभी कभार ही चोदा करते थे और मुझ से भी मज़ा ना मिलने पर वो अपना वादा तोड़ कर दोबारा राशिद से चुदवाना भी शुरू कर सकती थीं . ये बात मुझे हर गिज़ क़बूल नही थी. मुझे हर सूरत में एक तजर्बकार मर्द की तरह अम्मी की चूत मार कर उनकी तमाम जिस्मानी ज़रोरियात पूरी करनी थीं .

अम्मी मेरे चेहरे से भाँप गईं के मुझे कोई परेशानी लहक़ है. उन्होने पूछा के शाकिर किया बात है किया सोच रहे हो? में कुछ सटपटा सा गया मगर फिर उन्हे बता ही दिया के अम्मी आज मेरी सेक्स करने की पहली दफ़ा है और में डर रहा हूँ के कहीं आप को मुझे अपनी चूत दे कर मायूसी ना हो. मै जल्दी खलास होने से डरता हूँ और इसी वजह से कुछ परेशां हूँ.

अम्मी हंस पड़ीं और कहा के पहली दफ़ा सब को ही परैशानी होती है. तुम फिकर ना करो सेक्स इंसान की फ़ितरत है रफ़्ता रफ़्ता खुद-बखुद ही सब कुछ समझ आ जाता है. मै उनकी बात गौर से सुन रहा था. फिर उन्होने कहा के तुम तो कम-उमर लड़के हो तुम से चुदवा कर तो हर औरत खुश हो गी. कुछ ही दिनों में तुम इस काम में माहिर हो जाओ गे. और हाँ तुम राशिद को भूल जाओ तुम मेरे बेटे हो में उस पर लानत भेजती हूँ. तुम्हारा और उस का कोई मुक़ाबला नही. आज के बाद में जो भी करूँ गी सिर्फ़ तुम्हारे साथ करूँ गी. हमारे दरमियाँ जो होना है शायद वो क़िस्मत का लिखा है इस लिये उस पर अफ़सोस करने की ज़रूरत नही.

मुझे उनकी बातों में सचाई नज़र आई. मै ये भी महसूस कर रहा था के मेरे साथ अब अम्मी का रवय्या और बात चीत का अंदाज़ रिवायती माओं जैसा नही था. अब वो मेरे साथ वैसे ही पेश आ रही थीं जैसे मैंने उन्हे राशिद के साथ पेश आते देखा था. मै पूर-सकूँ हो गया और मेरी जेहनी उलझन बड़ी हद तक कम हो गई.

मैंने अपने ज़हन में सर उठाते हुए खौफ से तवजो हटाने की कोशिश की और अम्मी का चेहरा अपनी तरफ फेर कर उनके गालों को ज़ोर ज़ोर से चूमने लगा. उन्होने भी मेरा पूरा साथ दिया और अपने मज़बूत बाज़ू मेरी कमर के गिर्द लपेट कर मुझे अपने ऊपर आने दिया. मैंने अपने दोनो बाज़ू उनकी गर्दन में डाले और उन से पूरी तरह चिपक कर उन्हे चूमने लगा. मैंने अम्मी के होठों, गालों, थोड़ी, आँखों, गर्दन और माथे को चूम चूम कर और चाट चाट कर उनका पूरा चेहरा अपने थूकों से गीला कर दिया. वो इस चूमा चाटी से मज़ा ले रही थीं .

फिर मैंने उनके मुँह के अंदर अपनी ज़बान डाली तो उन्होने मुझे अपनी ज़बान चूसने दी. मैंने उनकी ज़बान होठों में पकड़ी और उससे चूसने लगा. अम्मी के मुँह के अंदर मेरी और उनकी ज़बानें आपस में टकरतीं तो अजीब तरह का मज़ा महसूस होता. तजर्बा ना होने की वजह से अगर उनकी ज़बान चूसते चूसते मेरे होठों से निकल जाती तो वो फॉरन ही उससे दोबारा मेरे होठों में दे देतीं. हम दोनो के मुँह थूक से भर चुके थे मगर मुझे अम्मी की ज़बान चूसने में गज़ब का लुत्फ़ आ रहा था. मेरा लंड अम्मी के नरम पेट से नीचे उनकी शलवार में घुसा हुआ था.

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