अनोखा रिश्ता… अनोखी चाहत…

जमाल खान एक बहोत बड़ा और कामयाब बिज़नेस मैन था। उसकी उम्र चालीस साल थी। उसकी बीवी समीना उससे करीब बारह साल छोटी थी। अठाइस साल की समीना बेहद जवान और खूबसूरत थी। मक्खन की तरह नरम, दूध की तरह सफ़ेद गोरी चिट्टी और गुलबदन और नाज़नीन हुस्न की मालिक थी। वो अपनी जवानी और हुस्न का खूब खयाल रखती थी। अपने जिस्म पर एक भी ग़ैर ज़रूरी बाल नही रहने देती। रोज़ाना इंपोर्टेड बेबी लोशन के साथ अपने जिस्म का मसाज करती। बक़ायदगी के साथ ब्यूटी पर्लर जाती और अपने हुस्न को चार चाँद लगवाती। हर वक्त अच्छे मॉडर्न कपड़े और काफी ऊँची-ऊँची ऐड़ी वाले सैंडल पहने रहती थी। उसका कद पाँच फुट तीन इंच था… समीना को इस बात का काम्प्लेक्स था और इसी वजह से वो हर वक़्त हाई हील के सैंडल पहनना पसंद करती थी। वो जानती थी कि अगर वो अपनी जवानी और खूबसूरती का खयाल नहीं रखेगी तो जमाल खान जैसा मालदार आदमी उसे छोड़ कर किसी और के पास भी जा सकता है। अपनी अदाओं के जलवे जमाल खान को दिखाती रहती और वो भी एक भरपूर और वाजीह मर्द था और हर तरह से समीना का खयाल रखता और उसकी माली और जिस्मानी ज़रूरतों को निहायत ही अच्छे अंदाज़ में पूरा करता… समीना की मुकम्मल तसल्ली तक। पार्टियों में हमेशा ही उनकी जोड़ी की तारीफ़ होती थी। दोनों ही एक दूसरे का बहोत खयाल रखते थे और एक दूसरे से बहोत मोहब्बत करते थे।

जमाल खान अपने बिज़नेस में काफी मसरूफ रहता था और समीना ज्यादातर घर पे ही रहती थी। घर…. घर क्या था एक बहोत बड़ा बंगला था। नौकर चाकर, कारें, ड्राइवर, सब कुछ था। घर पे काम काज कोई करने को था नहीं। नौकर ही सारा काम करते थे। खाना पकाने के लिये भी खानसामा था जो खाना बनाने के बाद अपने क्वार्टर में चला जाता था जहाँ वो अपनी बीवी के साथ रहता था। इस तरह वो घर के अंदर ज्यादातर अकेली ही होती थी। समीना का जहाँ दिल करता वो ड्राइवर के साथ जा सकती थी और जाती भी थी। खूब शॉपिंग वगैरह करती थी… रुपये- पैसों की तो कोई कमी थी नहीं। समीना जमाल खान के साथ बाहर के मुल्कों के बिज़नेस टूर पे भी जाती और तमाम किस्म की बिज़नेस और सोशल पार्टियों में भी शामिल रहती और शराब वगैरह भी पीती थी। हमारे मुल्क में शराबनोशी पर पाबंदी जरूर है लेकिन अमीर – गरीब हर तबके के लोग खुल्लेआम शराब पीते हैं। फर्क सिर्फ़ इतना है कि गरीब लोग देसी शराब से काम चलाते हैं जबकि अमीरों को हर किस्म की कीमती शराब मुयस्सर होती है। आजकल तो मॉडर्न लड़कियाँ और औरतें भी सर-ए-आम शराब नोशी का मज़ा लेती हैं और समीना भी लिहाज़ा इसी तरह की खातूनों में शामिल थी और पार्टियों और घर पे भी बाक़ायदा शराब पीने की शौकीन थी।

एक बार जब जमाल खान और समीना अमेरिका के टूर पर गये तो वहाँ इनका मेज़बान रेहान शरीफ़ था। उसने उनको होटल में ठहराने की बजाय अपने घर में ठहराया। रेहान शरीफ़ और उसकी खूबसूरत बीवी ज़हरा बहोत ही अच्छे और मिलनसार लोग थे। उन्होंने उनकी खूब खातिरदारी की। उनके घर में दो कुत्ते भी थे जोकि उनके घर में ही पल के जवान हुए थे। सफ़ेद रंग के जिस्म पर काले रंग के बहोत खूबसूरत धब्बे-धब्बे बने हुए थे। करीब चार फुट लंबा और ढाई फुट ऊँचा कद था। भारी मगर बहोत मज़बूत और बेहद चुस्त और फुर्तीला जिस्म था इनका। दिलचस्प बात ये थी कि दोनों कुत्ते बिल्कुल एक जैसे थे। यानी वो दो जुड़वाँ कुत्ते थे – जिम्मी और टॉमी। समीना को भी वो कुत्ते बहोत अच्छे लगे थे।

दोनों ही बहोत अच्छे सधे हुए थे। अपने मालिकों से बहोत प्यार करते थे। समीना ने देखा कि दोनों कुत्ते रेहान और ज़हरा के आगे पीछे फिरते रहते अपनी दुम्म हिलाते हुए उनके हुक्म का इंतज़ार करते हुए। दोनों कुत्ते घर के अंदर फिरते थे मगर समीना को कहीं भी कोई उनकी फैलायी हुई गंदगी नज़र नहीं आयी। रेहान शरीफ़ ने जब अपने मेहमानों की पसंदीदगी और दिलचस्पी अपने कुत्तों में देखी तो उसे और भी अच्छा लगा और उसने उनको अपना एक कुत्ता तोहफ़े में देने की ऑफर कर दी। जमाल खान और समीना इस ऑफर पे बहोत हैरान और खुश हुए और समीना ने जमाल खान से वो कुत्ता अपने साथ ले जाने की फ़रमाइश की। कुत्ता तो जमाल को भी पसंद आया था इसलिये उन्होंने रेहान शरीफ़ की ऑफर को शुक्रिया के साथ कबूल कर लिया। समीना को खुश होते हुए देख कर रेहान शरीफ़ ने माइनी खेज़ नज़रों से अपनी बीवी ज़हरा की तरफ़ देखा और दोनों मुस्कुरा दिये।

समीना बोली, “ज़हरा… आप लोगों का बहोत-बहोत शुक्रिया! ये तो सारा-सारा दिन घर से बाहर रहते हैं और मैं घर में बोर होती रहती हूँ… अब आपने एक डॉगी हमें दिया है तो चलो उसके साथ मेरी कुछ मसरुफ़ियत बनी रहेगी और वक़्त भी पास हो जायेगा!”

ज़हरा मुस्कुरा के बोली, “येस… टॉमी के साथ आप का वक़्त सच में बहोत अच्छा गुज़रेगा और आप हमेशा हमें याद करोगी। टॉमी मेरा पसंदीदा कुत्ता है। उसकी बहोत अच्छी तरबियत की हुई है हमने। आप लोगों को कभी भी इससे किसी किस्म की कोई शिकायत नहीं होगी!”

समीना खुश और पुरजोश होती हुई बोली, “मुझे बहोत अच्छा लगेगा जब ये मेरे इशारों पे चलेगा।”

रेहान शरीफ़ हंसते हुए बोला, “ये इशारों पे चलता भी है और अपने इशारों पे चलाता भी है!”

उसकी बात पे ज़हरा हंसने लगी और समीना भी बिना कुछ समझे उनके साथ हंसने लगी। जब अमेरिका से दोनों वापस आये तो टॉमी भी उनके साथ था और दोनों बहोत खुश थे।

टॉमी ने जमाल खान के घर में रहना शुरू कर दिया। वो सच में ही बहोत शानदार जानवर था… बहोत ही मोहज़्ज़ब और तरबियत-याफ़्ता… बिल्कुल अमेरिकी आवाम की तरह। शुरू- शुरू में वो नये माहौल में आके घबराया हुआ था। थोड़ा तंग किया। वो भी डरा हुआ था और जमाल खान और समीना भी उससे थोड़ा दूर-दूर रहते। मगर आहिस्ता-आहिस्ता उनका खौफ़ जाता रहा और वो उसके करीब आने लगे और वो भी बहोत जल्द जमाल खान और समीना के साथ मानूस हो गया। घर के अंदर ही रहता और समीना के आगे-पीछे फिरता रहता। समीना खुद उसे अपने हाथों से खिलाती… उसे सैर करवाती। शुरू में तो उसके गले में पट्टा डाला गया था मगर आहिस्ता-आहिस्ता वो समीना ने उतार फेंका और अब टॉमी घर के अंदर बिना रोकटोक और बिना किसी रुकावट के फिरता था। उसकी देख भाल के लिये एक खास नौकर रखा था मगर टॉमी तो ज्यादा वक़्त समीना के साथ ही गुज़ारता और समीना के साथ ही खुश रहता। समीना को भी अपना फ़ारिग़ वक़्त गुज़ारने का एक शुगल मिल गया था। टॉमी समीना के साथ खेलता… उसके सैंडलों और पैरों को चाटता… अपना मुँह और सिर उसके सैंडलों और पैरों से रगड़ता और समीना भी उसके सिर पे और जिस्म पे हाथ फ़ेर के उसके जिस्म को सहलाती और उसकी मोहब्बत का जवाब मोहब्बत से देती।

शुरू में जब टॉमी ने समीना के पैरों को चाटने के लिये अपना मुँह उसके पैरों पर रखना चाहा तो वो डर के मारे उछल ही पड़ी थी और उसके करीब बैठा हुआ जमाल खान भी हंसने लगा था। मगर धीरे-धीरे वो उसकी आदि हो गयी थी और अब उसे अच्छा लगता था जब टॉमी की ज़ुबान उसके सैंडलों को चाटते हुए सैंडल की बारीक पट्टियों के बीच में सरकते हुए उसके पैरों को चाटती थी। अब तो उसका अपना भी दिल चाहता था कि वो उसके सैंडलों को चाटते हुए उसके पैरों पे अपनी ज़ुबान फेरते रहे। शाम में टॉमी समीना के साथ लॉन में खेलता। समीना गेंद फेंकती और वो उस गेंद के पीछे-पीछे भाग कर उसे पकड़ने की कोशिश करता। कभी-कभी समीना नीचे घास पर बैठ जाती तो वो उस पर चढ़ जाता और उसे नीचे गिराने की कोशिश करता और समीना भी हंसती हुई नीचे उसके सामने लेट जाती। टॉनी फ़िर उसके सैंडल और पैरों को चाटने लगता और कभी अपना सिर उसके मुँह के साथ रगड़ने लगता। ये सब समीना खूब इंजॉय करती।

समीना मॉडर्न और आज़ाद खयाल औरत थी। वो हर तरह के मॉडर्न लिबास पहनना पसंद करती थी। मगर घर के अंदर वो और भी आज़ादी के साथ रहती थी। अक्सर घर के अंदर उसका लिबास बहोत बोल्ड होता था… घुटनों से ऊपर छोटी स्कर्ट और स्लीवलेस टॉप पहनना तो उसका मामूल था। ऐसे ही एक रोज़ वो टीवी लाऊँज में सोफ़े पे आधी लेटी हुई फ्रेंच वाईन पीती हुई एक इंडियन मूवी देख रही थी और टॉमी भी वहीं बैठा हुआ था। समीना ने छोटी सी स्कर्ट और बिना बाजू वाली टॉप पहनी हुई थी और पैरों में हमेशा की तरह ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने हुए थे। स्कर्ट उसके घुटनों से ऊपर तक थी और उसकी गोरी-गोरी और चिकनी टाँगें नंगी हो रही थीं। टॉप भी उसके जिस्म के साथ चिपकी हुई थी जिस में उसके सीने के उभा क़यामत लग रहे थे। टॉमी ने समीना के क़रीब आकर उसके सैंडल पहने हुए पैरों में अपना सिर रगड़ना शुरू कर दिया। अपने सिर के साथ वो समीना के पैर को सहलाने लगा। समीना ने भी अपने दूसरे पैर के साथ कुत्ते के सिर को सहलाना शुरू कर दिया। बड़े ही प्यार से उसके सिर पे अपने सैंडल का तलवा फिराने लगी। टॉमी ने उसके प्यार भरे अंदाज़ को देखा तो खुश हो कर वो समीना के पैर को अपनी लंबी गुलाबी ज़ुबान निकाल कर चाटने लगा। टॉमी ने पहले समीना के सैंडल के तलवे को अपनी ज़ुबान से चाटना शुरू किया और फिर जब वो समीना के पैर के तलवे और सैंडल के बीच के गैप में अपनी ज़ुबान घुसा कर चाटने लगा तो समीना को हल्की-हल्की गुदगुदी होने लगी और उसके साथ ही मज़ा भी आने लगा। टॉमी की नरम-नरम ज़ुबान कभी समीना के सैंडल के तलवे को चाटती तो कभी पैर के तलवे और सैंडल के दर्मियान घुस कर चाटती और कभी पैर के ऊपर के हिस्से को सैंडल की पट्टियों के बीच में से चाटने लगती। बड़े ही प्यार और जोश के साथ टॉमी समीना के सैंडल और पैरों को चाट रहा था जैसे के उसके सैंडल और पैरों पे कोई शहद लगा हो जिसे चाटने में उसे मज़ा आ रहा हो। लज़्ज़त के मारे समीना की तवज्जो भी अब टीवी पर से हट चुकी थी और वो भी अपनी वाइन पीती हुई टॉमी को ही देख रही थी और उसके सिर के सहला रही थी अपने दूसरे पैर के सैंडल के तलवे के साथ। टॉमी भी कभी समीना के एक पैर को चाटता और कभी दूसरे पैर के चाटने लगता। धीरे-धीरे उसकी ज़ुबान समीना के पैर से ऊपर को जाती हुई उसकी गोरी-गोरी टाँग के निचले हिस्से को चाटने लगी और वहाँ उसने अपनी ज़ुबान फेरनी शुरू कर दी ।

 

टॉमी की लंबी खुरदरी गुलाबी ज़ुबान जैसे-जैसे समीना के पैरों और टाँग के निचले हिस्से को चाटती जाती तो वैसे-वैसे ही उसे मज़ा आने लगा। पहले पहल तो वो उसे टॉमी का रोज़ का काम ही समझ रही थी और उसकी तरफ़ कोई तवज्जो नहीं दे रही थी मगर धीरे-धीरे समीना को भी मज़ा आने लगा….. अच्छा लगने लगा…. उसकी तवज्जो टीवी की तरफ़ से हट के अब सिर्फ़ अपने कुत्ते की ज़ुबान से मिलने वाली लज़्ज़त की तरफ़ ही थी। उसका दिल चाह रहा था कि टॉमी की ज़ुबान और ऊपर को आती जाये उसके जिस्म को चाटती हुई। टॉमी भी आहिस्ता-आहिस्ता समीना के जिस्म के नंगे हिस्सों को चाटते हुए आगे बढ़ रहा था। उसकी लंबी गीली ज़ुबान अपने थूक के साथ समीना की टाँगों को गीला कर रही थी। जहाँ-जहाँ से वो चाटता जाता था वहाँ वो उसके जिस्म को गीला करता जा रहा था। समीना को भी बुरा नहीं लग रहा था। बल्कि इस तरफ़ तो उसका ध्यान ही नहीं था कि कुत्ते के मुँह का थूक उसके जिस्म को गीला या गंदा कर रहा है। उसे तो बस अपने मज़े का ही एहसास था बस … जो इस कुत्ते की ज़ुबान से मिल रहा था। उसने वाइन के बड़े-बड़े घूँट पीते हुए गिलास खाली करके नीचे कार्पेट पे ही रख दिया था।

टॉमी का मुँह अब समीना की नंगी रानों तक पहुँच रहा था। उसने अपनी लंबी ज़ुबान के साथ समीना की गोरी-गोरी चिकनी नंगी रान को चाटना शुरू कर दिया। समीना ने खुद ही अपनी स्कर्ट को अपनी रान पे थोड़ा ऊपर को सरका लिया… अपनी गोरी-गोरी रानों को और भी नंगा करते हुए… अपने इस कुत्ते के लिये। जैसे-जैसे टॉमी ने समीना की नंगी रानों को चाटना शुरू क्या वैसे-वैसे समीना लज़्ज़त के मारे तड़पने लगी। वाइन की हल्की सी खुमारी समीना की लज़्ज़त और ज्यादा बढ़ा रही थी। लज़्ज़त के मारे उसकी आँखें बंद होने लगीं। कुत्ते का जिस्म अब समीना के करीब था… उसके हाथ के करीब। समीना ने अपना हाथ बढ़ाया और उसके जिस्म पे रखा और उसके जिस्म को सहलाने लगी। उसका हाथ तेज़ी के साथ टॉमी के जिस्म पे हरकत कर रहा था और वो उसे सहलाती हुई अपनी तरफ़ खींच रही थी। जमाल खान ने भी कईं बार उसके जिस्म को चूमा और अपनी ज़ुबान से चाटा था मगर जो मज़ा समीना को टॉमी की ज़ुबान से मिल रहा था वो लज़्ज़त उसे आज पहली बार मिल रही थी। समीना का एक हाथ अब टॉमी के सिर को सहला रहा था और दूसरा हाथ अपनी रान पे था। टॉमी की ज़ुबान समीना की रानों को चाटती हुई कभी उसके हाथ को भी चाटने लगती। समीना को अजीब सा एहसास हो रहा था… उसे अपनी चूत के अंदर सरसराहट सी महसूस होने लगी थी… हल्का-हल्का गीलापन अपनी चूत के अंदर भी महसूस कर रही थी वो। उसे यक़ीन नहीं हो रहा था कि एक कुत्ते की ज़ुबान इस क़दर लज़्ज़त दे सकती है। उसे थोड़ा खौफ़ और डर भी लग रहा था इस कुत्ते से कि कहीं वो उसे काट ना ले मगर उसके साथ-साथ… उसकी ज़ुबान से मिलने वाली लज़्ज़त उसे सब कुछ भूल भाल कर इसी मज़े में खो जाने को कह रही थी। आज से पहले भी टॉमी ने कईं बार समीना के सैंडलों और पैरों को चाटा था मगर वो कभी भी उसके पैरों से आगे नहीं बढ़ा था पर आज उसकी ज़ुबान उसके पैरों से आगे उसकी नंगी टाँगों से होती हुई उसकी नंगी गोरी चिकनी रानों तक पहुँच चुकी थी… और उसके साथ ही समीना लज़्ज़त की बुलंदियों की तरफ़ जा रही थी।

कुत्ते की ज़ुबान समीना की रानों के ऊपरी हिस्से को चाट रही थी… उसकी चूत के इर्द-गिर्द… जैसे अभी के अभी उसकी स्कर्ट के अंदर चूत तक पहुँच जायेगी जिसे उसकी पैंटी ने ढक रखा था। समीना की आँखें बंद थीं… टाँगें पूरी खुली हुई थीं… मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं… पूरे का पूरा जिस्म झटके खा रहा था। कुत्ते टॉमी की ज़ुबान उसके पूरे जिस्म में आग लगा रही थी। उसका दिल चाह रहा था कि वो अपने जिस्म पर मौजूद सारे के सारे कपड़े उतार फ़ेंके… और टॉमी की ज़ुबान के लम्स को अपने पूरे जिस्म पर महसूस करे.. पूरे जिस्म पर उसकी ज़ुबान को फिरवा कर मज़े ले। अभी वो अपने दिमाग में पैदा होने वाली इस ख्वाहिश को पूरा करने या लंट्रोल करने के बारे में फ़ैसला नहीं कर पा रही थी कि घर के अंदर के दरवाज़े की बेल बज उठी। समीना जैसे होश में आ गयी… अपनी आँखें खोलीं… टॉमी को अपने जिस्म पर से पीछे हटाया। वो भी बेल की आवाज़ से चौंक कर चौकन्ना हो चुका हुआ था। समीना ने शर्मिंदा नज़रों से टॉमी की तरफ़ देखा और फ़िर सोफ़े पर से उठ कर अपनी पेंसिल हील की सैंडल खटखटाती हुई दरवाज़ा खोलने के लिये बढ़ गयी। उसका जिस्म हौले-हौले काँप रहा था और चेहरा सुर्ख हो रहा था… मुँह खुश्क हो रहा था। दरवाज़ा खोला तो सामने खानसामा था जोकि खाना पकाने के लिये आया था। समीना ने टीवी लाऊँज में वापस आते हुए उसे ठंडा पानी ला के पिलाने को कहा और वापस जा कर सोफ़े पर बैठ गयी और अपने से कुछ दूर बैठे हुए टॉमी को देखने लगी। खानसामा पानी दे गया तो पानी पीने के बाद उसने फिर कालीन पर पड़े पहले वाले वाइन-गिलास में वाइन भरी और आहिस्ता-आहिस्ता वाइन पीती हुई टॉमी के बारे में ही सोचती रही कि किस क़दर अजीब बात है… किस क़दर अजीब लज़्ज़त और मज़ा था उसकी ज़ुबान में। वो सोच रही थी कि अगर… अगर… अगर टॉमी की ज़ुबान उसकी नंगी चूत को चाटती तो उसे कितना मज़ा आता। ये बात ज़हन में आते ही उसके पूरे जिस्म में एक झुरझुरी सी फैल गयी और चेहरा एक हल्की सी मुस्कुराहट के साथ सुर्ख हो गया। टॉमी भी अपनी जगह पे नीचे क़लीन पर बैठा अपनी बड़ी-बड़ी आँखों के साथ अपनी मालकिन को देख रहा था… जैसे अपने काम की तारीफ़ चाहता हो… जैसे कुछ इनाम चाहता हो। अपने सामने बैठे हुए कुत्ते और अपने बारे में ऐसा सोचते हुए समीना को थोड़ी शरम सी आ रही थी मगर कोई गलती होने की शर्मिंदगी नहीं थी। वाइन की हल्का सा नशा उसे बहोत अच्छा लग रहा था। वो मुस्कुरायी और वाइन खतम करके टॉमी की तरफ़ देखती हुई अपने बेडरूम की तरफ़ बढ़ गयी। ।

जैसे ही टॉमी ने अपनी खूबसूरत मालकिन को उठ कर अपने बेडरूम की तरफ़ जाते हुए देखा तो वो भी फ़ौरन अपनी जगह से उठा और उसके पीछे-पीछे चल पड़ा। समीना ने जैसे ही अपने पीछे मुड़ कर दरवाज़ा बंद करने का इरादा किया तो टॉमी दरवाज़े के बिल्कुल सामने खड़ा था और बड़ी ही अजीब नज़रों से वो समीना को देख रहा था। उसकी लंबी गुलाबी ज़ुबान बाहर लटक रही थी और बड़ी-बड़ी आँखें समीना की खूबसूरत आँखों से मिली हुई थीं। टॉमी समीना की तरफ़ ऐसे देख रहा था जैसे कि वो अपनी मालकिन से उसके कमरे के अंदर आने की इजाज़त तलब कर रहा हो। आज तक समीना ने या जमाल खान ने टॉमी को अपने बेडरूम में आने से मना नहीं किया था… वो जैसे चाहता था अंदर आ जाता था मगर आज समीना उसे अंदर आने देने के लिये सोच रही थी कि आने दे या नहीं। मगर फ़िर जैसे उसे इस बे-ज़ुबान पर तरस आ गया हो… वो उसे रास्ता देती हुई बोली, “ठीक है आ जाओ अंदर… लेकिन याद रखना कोई शरारत नहीं चलेगी… समझे!” टॉमी ये सुन कर जल्दी से अंदर को बढ़ा जैसे उसे अपनी मालकिन की शर्त मंज़ूर हो।

कमरे के अंदर आकर अब समीना सोचने लगी कि वो जिस काम के लिये अपने कमरे में आयी है वो अब टॉमी के सामने करे या नहीं करे… यानी अब वो टॉमी के सामने ही अपने कपड़े उतार कर अपनी चूत में वॉयब्रेटर से खुद-लज़्ज़ती हासिल करे या फ़िर बाथरूम में जा कर ये काम करे। समीना ने कुत्ते की तरफ़ देखा जोकि एक तरफ़ नीचे कालीन पे बैठा हुआ था बड़े ही आराम से और अपनी बड़ी-बड़ी आँखों के साथ अपनी मालकिन समीना की तरफ़ ही देख रहा था। समीना ने बाथरूम के अंदर जा कर ही मुठ मारने का फ़ैसला किया और अपनी अलमारी की तरफ़ जा कर लंड की शक्ल का वॉयब्रेटर निकालने लगी जो वो जमाल खान के साथ फ्रांस के टूर के दौरान पेरिस से लायी थी। जब कभी उसकी चूत में मस्ती उबाल मारती थी तो अकेले में समीना इस वॉयब्रेटर की मदद से खुद-लज़्ज़ती हासिल कर लेती थी।

तभी समीना को खयाल आया… एक सोच उसके अंदर पैदा हुई कि वो आखिर टॉमी के साथ ऐसा क्यों कर रही है… क्या वो उससे डर रही है… टॉमी एक जानवर ही तो है… कोई इंसान तो नहीं है ना कि वो उसके सामने अपने कपड़े भी उतार नहीं सकती… उसके सामने नंगी नहीं हो सकती… अपनी चूत में डिल्डो डाल कर मुठ नहीं मार सकती। वो खुद को समझा रही थी कि इस बेचारे बेज़ुबान जानवर के सामने नंगी होकर मुठ मारने में कोई हर्ज़ तो नहीं है… क्योंकि वो उसे कोई नुकसान तो नहीं पहुँचा सकता… क्योंकि वो एक अच्छा तरबियत-याफ़्ता जानवर है… अपने मालिकों का बहोत ज्यादा खयाल रखने वाला… और उन से बहोत ज्यादा प्यार करने वाला… और अभी कुछ देर पहले ही तो टॉमी ने अपनी मोहब्बत और वफ़ादारी का सबूत दिया था… उसके पैरों और पैरों से ऊपर उसके नंगी टाँगों और रानों को चाट-चाट कर। समीना को याद आया कि जब टॉमी उसकी टाँगों और रानों को चाट रहा था तो उसे कितना मज़ा आ रहा था। कुछ देर पहले टॉमी के साथ गुज़रे हुए वक़्त को याद कर के समीना के जिस्म में एक बार फ़िर से सनसनी की लहर दौड़ गयी… एक लज़्ज़त-अमेज़ लहर… और होंठों पे हल्की सी मुस्कुराहट फैल गयी। समीना ने टॉमी के सामने ही नंगी होकर मुठ मारने का इरादा कर लिया।

समीना ने बेड के करीब खड़ी होते हुए एक नज़र दोबारा से टॉमी पे डाली… और फ़िर उसकी तरफ़ ही देखते हुए अपनी टॉप को नीचे से पकड़ कर ऊपर को उठाना शुरू कर दिया। दोनों की नज़रें एक दूसरे से मिली हुई थीं… और अगले ही लम्हे समीना की टॉप उसके जिस्म से उतर चुकी थी। अब समीना अपने कमरे में अपने पालतू कुत्ते के सामने सिर्फ़ एक काले रंग की ब्रा और छोटी सी स्कर्ट और काले रंग की ऊँची पेंसिल हील के सैंडल पहने खड़ी थी। टॉमी भी बजाय इधर-उधर देखने के बड़े ही शौक से अपनी मालकिन को देख रहा था। समीना ने जब कुत्ते को अपनी ही तरफ़ देखते हुए देखा तो मुस्कुरायी और अपने हाथ में पकड़ी हुई टॉप को गोलमोल करके ज़ोर से कुत्ते के मुँह पे फेंका और फ़िर खुद ही ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगी।

समीना की टॉप कुत्ते के मुँह पर टकरा कर उसके सामने गिर गयी। टॉमी ने फौरन उसे सूँघना शुरू कर दिया। समीना भी उसकी हरकतों को देख रही थी। टॉमी ने समीना की टॉप को अपने मुँह में उठाया और उठ कर चलता हुआ सोफ़े पर चढ़ कर बैठ गया। समीना के जिस्म से उतरी हुई टॉप अपने अगले पैरों के बीच में रखी और उसे सूँघते हुए समीना की तरफ़ देखने लगा। समीना भी उसकी हरकतों को बड़ी ही दिलचस्पी से देख रही थी और मुस्कुरा रही थी। फ़िर समीना ने अपनी नाज़ुक-नाज़ुक उंगलियाँ अपनी स्कर्ट के इलास्टिक में फंसायीं और अपनी नज़रें टॉमी की नज़रों से मिलाते हुए अपनी शॉर्ट-स्कर्ट भी उतारने लगी… और फ़िर उसे अपनी रानों से नीचे खिसकाते हुए अपने पैरों को बारी-बारी उठा कर अपने पैरों से निकाल दिया। मगर इस बार अपनी स्कर्ट को टॉमी की तरफ़ फ़ेंकने की बजाय उसे वहीं नीचे क़लीन पर पड़ा रहने दिया। अब समीना अपने बेडरूम में सिर्फ़ छोटी सी जी-स्ट्रिंग पैंटी और ब्रा और ऊँची पेंसिल हील के सैंडल में खड़ी थी। पता नहीं क्यों अब उसे खुद भी अपने जिस्म की अपने पालतू कुत्ते के सामने इस तरह नुमाइश करने में मज़ा आ रहा था… अजीब सा भी लग रहा था और अच्छा भी। सामने सोफ़े पर अपनी टाँगें फैलाये हुए टॉमी ऐसे बैठा हुआ समीना को देख रहा था कि जैसे उसके सामने कोई स्टेज डाँसर स्ट्रिप-टीज़ डाँस कर रही हो और वो उसके मज़े ले रहा हो।

समीना को भी इस तरह की बेशर्मी करते हुए अच्छा लग रहा था। उसने थोड़ी देर के लिये टॉमी के सामने इसी हालत में रहने का सोचा। वो आगे बढ़ी और जा कर अपने बेडरूम का दरवाज़ा लॉक कर दिया और वापस आकर बेड की बैक से टेक लगा कर तिरछी लेट गयी। समीना सिर्फ़ ब्रा, पैंटी और उँची पेंसिल हील के सैंडल पहने बेड पे लेटी हुई थी। टॉमी की तरफ़ देखते हुए उसका अपना हाथ खुद-ब-खुद ही अपने गोरे-गोरे चिकने जिस्म को सहलाने लगा… अपने नंगे पेट पर फिसलने लगा। उसकी काले रंग की ब्रा में से उसके खूबसूरत और गोरे-गोरे मम्मे आधे बाहर को निकल रहे थे। पेट पर से उसका हाथ फिसलता हुआ आहिस्ता-आहिस्ता अपने मम्मों की तरफ़ बढ़ने लगा और पहले अपने मम्मों को अपनी ब्रा के ऊपर से सहलाने लगा और फ़िर उस पर से सरकता हुआ अपने मम्मों के नंगे हिस्सों को सहलाने लगा। समीना तकरीबन रोज़ाना अपने हाथ और वॉयब्रेटर से खुद-लज़्ज़ती हासिल करती थी मगर इस वक़्त पता नहीं क्यों अपने कुत्ते के सामने ये करते हुए उसे कुछ ज्यादा ही अच्छा लग रहा था। ऐसे अपने जिस्म को सहलाते हुए भी उसकी नज़रें टॉमी को ही देख रही थीं। दोनों की आँखें पता नहीं एक दूसरे को क्या-क्या पैगाम दे रही थीं लेकिन ये बात ज़रूर थी कि दोनों में से कोई भी दूसरे को नापसंद नहीं कर रहा था… बल्कि एक दूसरे की मौजूदगी को वो इंजॉय कर रहे थे। कुत्ते की समीना में दिलचस्पी और पसंदीदगी उसके मुँह से बाहर लटक रही गुलाबी ज़ुबान से हो रही थी जो समीना के जिस्म की हरकत के साथ-साथ हिल रही थी… जिसे वो थोड़ी-थोड़ी देर के बाद अपने मुँह के अंदर करता और उस पर बह निकलने वाले थूक को अपने मुँह के अंदर कर लेता।

दूसरी तरफ़ समीना को अपनी कैफ़ियत का अंदाज़ा अपने जिस्म के हौले-हौले गरम होने और उसकी चूत के अंदर पैदा होने वाले गीलेपन से हो रहा था। उसे इस तरह नंगी हालत में अपने किसी दूसरे के सामने अपने खूबसूरत जिस्म की नुमाइश करना अच्छा लग रहा था। उसे इस बात से भी कोई फ़र्क़ महसूस नहीं हो रहा था कि उसके इस खूबसूरत जिस्म का नज़ारा करने वाला कोई इंसान नहीं बल्कि एक जानवर… एक कुत्ता था। उसे तो बस यही पता था कि उसे ये सब कुछ अच्छा लग रहा था… और उसका जिस्म एक बार फ़िर से टॉमी की ज़ुबान को महसूस करना चाहता था… फ़िर से उसकी ज़ुबान से मिलने वाले मज़े को हासिल करना चाहता था… मगर कैसे… कैसे वो टॉमी के दोबारा बुलाये… उसकी इस में हिम्मत नहीं पैदा हो रही थी।

लेकिन समीना को ज्यादा देर इंतज़ार और फिक्र नहीं करनी पड़ी क्योंकि बे-ज़ुबान मगर समझदार टॉमी शायद अपनी मालकिन की ख्वाहिश और झिझक को समझ गया था। इसी लिये वो अपनी जगह पे उठ के खड़ा हुआ… सोफ़े पर ही… अपने जिस्म को खींचते हुए एक अंगड़ायी ली और फ़िर सोफ़े से नीचे उतर आया और अपनी चारों टाँगों पर आहिस्ता-आहिस्ता बेड की तरफ़ चलने लगा। ये देख कर समीना का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसे थोड़ी घबड़ाहट सी होने लगी मगर फ़िर भी वो बिना कोई हरकत किये बेड पर अपनी जगह लेटी रही… टॉमी की तरफ़ उसकी आँखों में देखती हुई।

समीना सारा दिन घर पर रहते हुए अपना इंटरनेट भी इस्तेमाल करती रहती थी और अपने वक़्त गुज़ारी के लिये इंटरनेट पर नंगी फ़िल्में भी देखती थी और कईं बार तो जमाल भी उसके साथ ये सब कुछ देखता था। इसलिये ऐसी बात भी नहीं थी कि समीना को इंसानों के जानवरों के साथ चुदाई करने का इल्म नहीं था बल्कि वो इंटरनेट पर कईं बार खूबसूरत लड़कियों को कुत्तों, घोड़ों, गधों, बकरों और दूसरे जानवरों से चुदते हुए और उनके लौड़े चूसते हुए देख चुकी थी। लेकिन उसे यक़ीन था कि ये कुत्ता उसके साथ वैसा कुछ नहीं करेगा और ना ही उसने खुद ऐसा कुछ करने का सोचा था कि वो कुत्ते के साथ इस हद तक जायेगी। वो तो बस अपने जिस्म पर टॉमी की लंबी और खुरदरी ज़ुबान की रगड़ का मज़ा लेना चाहती थी… और इससे आगे कुछ नहीं।

समीना की नज़रें टॉमी की नज़रों से मिली हुई थीं और वो उसे अपनी तरफ़ आता हुआ देख रही थी। टॉमी समीना के बेड के करीब आकर खड़ा हो गया। समीना का पैर बेड के किनारे पर था। टॉमी ने अपना बड़ा सा मुँह आगे ला कर उसके सैंडल और पैर को अपनी नाक के साथ ज़ोर-ज़ोर से सूँघा तो समीना के पूरे जिस्म में सनसनाहट फैल गयी। अगले ही लम्हे टॉमी ने अपनी ज़ुबान बाहर निकाली और अपनी लंबी ज़ुबान से समीना के सैंडल के तलवे और फिर उसके पैर के ऊपर एक बार लंबा चाटा। समीना का पूरा जिस्म काँप सा गया। उसने अपना पैर थोड़ा पीछे खींच लिया… बेड के किनारे से दूर। जैसे ही समीना का सैंडल पहना हुआ गोरा-गोरा पैर टॉमी के मुँह से दूर हुआ तो उसने एक बार समीना की तरफ़ देखा। उसके मुँह से हल्की सी गुर्राहट निकली… जैसे उसे समीना की ये हरकत पसंद नहीं आयी हो और अगले ही लम्हे टॉमी ने एक छलांग लगायी और समीना के बेड पर चढ़ गया।

टॉमी समीना के नरम-नरम बिस्तर पे चढ़ा हुआ था। उसका भारी भरकम जिस्म जैसे पूरे बेड को कवर कर रहा था। उसके सामने बेड पर सिर्फ़ ब्रा, पैंटी और ऊँची हील वाले सैंडल पहने लेटी हुई समीना को अपना जिस्म उसके मुकाबले में बहोत छोटा लग रहा था। सच मनो तो समीना को अब टॉमी से थोड़ा-थोड़ा खौफ़ सा भी महसूस होने लगा था। खौफ़ आता भी क्यों नहीं। एक तो वो जानवर था… इतने नोकीले लंबे-लंबे दाँतों वाला… और फ़िर उसका जिस्म भी समीना के नाज़ुक जिस्म से ज्यादा ताक़तवर और वज़नी था। समीना हौले से आवाज़ निकालती हुई कसमसायी, “ट…ट…टॉमी ये… ये… ये क्या कर रहे हो… चलो नीचे उतरो बेड से!”

समीना की आवाज़ में अपने पालतू जानवर के लिये हुक्म नहीं था। बल्कि उसकी आवाज़ से तो ऐसा लग रहा था कि जैसे वो टॉमी की मिन्नत कर रही हो बिस्तर से नीचे उतरने के लिये। मगर वो दरिंदा तो इस वक़्त अपनी मालकिन की कोई भी बात सुनने और मानने को तैयार नहीं था। उसने दोबारा से अपना मुँह नीचे किया और अपनी ज़ुबान बाहर निकाल कर समीना के सैंडल कि पट्टियों में से उसके पैर को चाटने लगा। कभी उसके सैंडल के तलवे को चाटता और कभी पैर के ऊपरी हिस्से को। आहिस्ता-आहिस्ता टॉमी की ज़ुबान समीना के पैर से ऊपर को आने लगी और उसकी टाँग के निचले हिस्से को चाटने लगी। टॉमी की ज़ुबान तेज़ी के साथ उसके मुँह के अंदर-बाहर हो रही थी और वो तेज़ी से समीना की टाँग को चाट रहा था। आहिस्ता-आहिस्ता वो और ऊपर को जाने लगा और उसके घुटने को चाटते हुए उसकी नंगी गोरी रान पर आ गया और उसकी ज़ुबान अब समीना की रानों का चाटने लगी… कभी एक रान तो कभी दूसरी रान को चाटती।

अब टॉमी की आवाज़ में कोई गुर्राहट नहीं थी। बल्कि वो तो बहोत ही प्यार के साथ समीना की रानों को चाट रहा था। समीना को जो थोड़ी देर पहले टॉमी से थोड़ा-सा खौफ़ महसूस हो रहा था वो भी जाता रहा था। बल्कि अब उसके मुँह से हल्की हल्की सिसकारियाँ निकल रही थीं। उसकी टाँगें खुद-ब-खुद ही खुलती जा रही थीं… टॉमी की ज़ुबान को अपनी रानों के दर्मियान का हिस्सा दिखाने के लिये कि वो वहाँ भी अपनी ज़ुबान का जादू चलाये। और टॉमी ने भी अपनी प्यारी सी खूबसूरत सी मालकिन को मायूस नहीं किया था। वो अब समीना की रानों का अंदर का हिस्सा भी चाट रहा था। उसकी ज़ुबान समीना की चूत के करीब हरकत कर रही थी मगर एक बार भी उसकी ज़ुबान समीना की चूत से नहीं टकरायी थी। समीना की चूत ने गरम होते हुए थोड़ा-थोड़ा पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। उसकी चूत के पानी की मखसूस महक टॉमी को भी आ रही थी और फ़िर उसने अपनी थूथनी समीना की पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पे रखी और समीना की चूत को सूँघने लगा।

जैसे ही टॉमी का मुँह समीना की चूत से टकराया तो समीना को बहोत ही अजीब सा मगर बहोत ही अच्छा लगा। उसका दिल चाहा कि जैसे टॉमी अपना मुँह उसके पैरों पर हमेशा रगड़ता है वैसे ही यहाँ उसकी चूत को भी अपने मुँह से ज़ोर ज़ोर से रगड़ दे। टॉमी ने अपना मुँह समीना की चूत के ऊपर उसकी पैंटी के ऊपर से ही रगड़ा। अपनी लंबी सी ज़ुबान बाहर निकाली और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत के फूले हुए हिस्से को दो-तीन बार चाटा और फ़िर उसके नंगे पेट की तरफ़ बढ़ा। समीना की चूत उसकी मोटी ज़ुबान के चाटने से फड़कने लगी थी। उसके अंदर जैसे पानी-पानी सा होने लगा था। जैसे ही टॉमी ने अपना सिर हटाया तो समीना का दिल चाहा कि वो उसकी चूत को और भी कुछ देर के लिये चाटे मगर टॉमी ने इस बार अपनी मालकिन की ख्वाहिश का एहतराम नहीं किया और अपने मुँह को समीना की चूत पर से हटा कर आगे ऊपर की तरफ़ बढ़ गया।

टॉमी अब बेड पर ही चलता हुआ समीना के मुँह के करीब आ चुका था। उसने अपनी ज़ुबान बाहर निकाली और समीना के गाल को चाट लिया। टॉमी ने आज तक सिर्फ़ समीना के पैरों को ही चाटा था मगर आज वो उसके पैरों से आगे बढ़ आया था और उसके चेहरे… उसके गालों तक पहुँच गया था और अपनी लंबी गुलाबी खुरदरी ज़ुबान से समीना के गाल को चाट रहा था। समीना भी कोई मुज़ाहमत नहीं कर रही थी… उसे रोकने की कोई कोशिश नहीं कर रही थी। शायद इसलिये कि उसे खुद भी मज़ा आ रहा था टॉमी की ज़ुबान को अपने गालों पर महसूस करते हुए।

टॉमी ने अपनी ज़ुबान को समीना के होंठों पर फेरते हुए उसके होंठों को चाटने की कोशिश करने लगा। आज पहली बार ऐसा हो रहा था कि टॉमी उसके होंठों को चाटना चाह रहा था, जोकि समीना के लिये नयी बात थी और थोड़ी मुश्किल भी। इसी लिये समीना उसका मुँह परे हटाने की कोशिश करने लगी ताकि टॉमी की ज़ुबान उसके होंठों को नहीं चाटे और वो अपना थूक उसके होंठों पर नहीं लगा दे। मगर टॉमी कहाँ मानने वाला था। उसने अपने अंदाज़ में ही समीना के साथ खेलते-खेलते अपनी पोज़िशन तबदील की और समीना के नाज़ुक से जिस्म को अपनी टाँगों के दर्मियान ले लिया… वो ऐसे कि अब समीना का जिस्म टॉमी की दोनों तरफ़ की टाँगों के बीच में था। टॉमी की अगली टाँगें समीना के सीने और उसकी दोनों बाज़ुओं के दर्मियान थीं और पिछली टाँगें उसके गोरे-गोरे चूतड़ों के गिर्द। टॉमी अब पूरी तरह से समीना के जिस्म पर छाया हुआ था। बिल्कुल ऐसा नज़र आ रहा था कि जैसे कोई मर्द समीना के जिस्म पर सवार हो उसे रौंदने के लिये… उसका रेप करने के लिये। अब दोबारा से टॉमी ने अपना मुँह नीचे ला कर समीना के होंठों को चाटना चाहा।

 

समीना टॉमी की इस पोज़िशन से घबरा गयी थी। वो डर गयी थी कि टॉमी जैसे सेहतमंद और भारी जिस्म के कुत्ते के नीचे थी वो। उसे डर लगने लगा के कहीं टॉमी उसे कोई नुकसान ही ना पहुँचा दे… कहीं अपने बड़े-बड़े नोकीले दाँतों के साथ उसे काट ही ना दे। इसी लिये वो थोड़ी सहम सी गयी और अब की बार जब टॉमी ने अपना मुँह नीचे ला कर समीना के होंठों को चाटने की कोशिश की तो समीना अपना मुँह उसके आगे से नहीं हटा सकी और अपने चेहरे को टॉमी के सामने बिल्कुल एक ही जगह पर रखते हुए खौफ़ज़दा नज़रों से उसकी आँखों में देखती रही। टॉमी ने जब देखा कि उसकी मालकिन अब कोई मुज़ाहमत नहीं कर रही है तो उसने अपनी लंबी सी ज़ुबान निकाली और समीना के गुलाबी पतले-पतले होंठों को चाटने लगा। उसकी लंबी खुरदरी गुलाबी ज़ुबान एक ही बार में उसके दोनों होंठों को और पूरे मुँह को चाट लेती और वो उसके होंठों को अपने थूक से गीला करने लगा।

समीना को भी महसूस होने लगा कि टॉमी के अंदाज़ में कोई गुस्सा या वहशियानापन नहीं है बल्कि वो अब अपनी रोज़ की रूटीन की तरह ही समीना को चाट रहा है तो समीना भी थोड़ा रिलैक्स होने लगी। उसने अपने दोनों हाथों को नीचे से उठाया और टॉमी की कमर को सहलाने लगी और कभी-कभी उसके पेट को सहलाने लगती ताकि टॉमी भी कुछ और खतरनाक हरकत करते हुए उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचाये। टॉमी भी जैसे इस खेल में मज़ा लेने लगा। वो बार-बार अपनी ज़ुबान से समीना के चेहरे और उसके होंठों को चाट रहा था। एक बार समीना ने टॉमी को पीछे करते हुए उसे रोकने के लिये उसका नाम लेने के लिये अपना मुँह खोला तो जैसे ही समीना का मुँह खुला ठीक इसी वक़्त टॉमी की ज़ुबान समीना के होंठों पर आयी और मुँह खुला पाते हुए सीधी उसके मुँह के अंदर घुस गयी। जैसे ही टॉमी की ज़ुबान समीना के मुँह के अंदर दाखिल हुई तो बे-इख्तियारी तौर पर उसे रोकने के लिये समीना का मुँह बंद हो गया। लेकिन इससे पहले काफ़ी देर हो चुकी थी और जो होना था या जो टॉमी करना चाहता था वो हो चुका था। बल्कि इससे कुछ ज्यादा ही हुआ था और वो ये कि जैसे ही समीना ने अपने मुँह को बंद किया तो टॉमी की लंबी ज़ुबान जोकि पहले ही समीना के मुँह के अंदर दाखिल हो चुकी थी अब समीना का मुँह बंद होने की वजह से उसके होंठों के बीच में जकड़ी गयी… एक जानवर… एक कुत्ते की ज़ुबान एक इंसान… एक इंतेहाई खूबसूरत औरत के मुँह के अंदर। उफफफ क्या मंज़र था। समीना खुद भी हैरान रह गयी कि ये क्या हो गया है। मगर अब तो वो कुछ भी नहीं कर सकती थी।

टॉमी की ज़ुबान अभी भी समीना के मुँह के अंदर थी और अभी भी वो उसे हरकत दे रहा था और अब इस जानवर की ज़ुबान समीना जैसी खूबसूरत औरत की ज़ुबान से रगड़ खा रही थी और उसके मुँह को अंदर से जैसे चाट रही थी। समीना ने अपने दोनों हाथों को उसके बड़े से मुँह पर रखते हुए उसे पीछे करने की कोशिश की और अपना मुँह खोल कर दूसरी तरफ़ किया और टॉमी की ज़ुबान अपने मुँह से निकाली। टॉमी ने भी कोई मुज़ाहमत नहीं की और ना ही कोई ज़बरदस्ती करने की कोशिश की। समीना अपनी जगह से उठने लगी तो अब की बार टॉमी समीना के ऊपर से उतर गया और समीना जल्दी से उठ कर बेड से टेक लगा कर बैठ गयी। टॉमी अभी भी उसके सामने खड़ा था और अभी भी जैसे उसके ऊपर ही चढ़ा हुआ था। मगर अब फ़िर से उसका अंदाज़ प्यार और लाड़ भरा था… खेलने के अंदाज़ में और अब भी वो बार-बार समीना के गालों को अपनी ज़ुबान से छूने की कोशिश कर रहा था और इसमें वो कामयाब भी हो जाता था।

समीना बोली, “बस! बस! इट्स इनफ टॉमी…! गो… गो नाओ!”

टॉमी भी समीना की बात समझ गया हमेशा की तरह और समीना के पास ही बेड के ऊपर बैठ गया समीना के पैरों के करीब और उसके सैंडलों और पैरों को चाटने लगा और अपना सिर और मुँह समीना के पैरों पर रगड़ने लगा। समीना भी आहिस्ता-आहिस्ता टॉमी के जिस्म पर हाथ फिराने लगी और उसके फ़र को सहलाने लगी। आज एक बार तो टॉमी ने समीना को डरा ही दिया था मगर उसके साथ-साथ जो उसने मज़ा दिया था वो भी अलग ही था। ये इसी लज़्ज़त और मज़े का ही नतीजा था कि समीना अभी भी नंगी हालत में सिर्फ़ ब्रा-पैंटी और हाई हील सैंडल पहने हुए अपने टॉमी के पास बेड पे लेटी हुई थी और वो भी बार-बार अपना मुँह और जिस्म समीना के नंगे जिस्म से रगड़ रहा था। दोनों की ही साँसें तेज़-तेज़ चल रही थीं। समीना को अपना मुँह अभी भी टॉमी के थूक से गीला महसूस हो रहा था और अपने मुँह के अंदर उसे अभी भी टॉमी की ज़ुबान का लम्स महसूस हो रहा था और यही सब सोचते हुए समीना मुस्कुराती हुई टॉमी के जिस्म को सहला रही थी।

कुछ देर के बाद समीना ने अपने बेड से उठ कर कपड़े पहने और दरवाज़ा खोल कर बाहर निकलने लगी। टॉमी ने अपनी मालकिन को बाहर जाते हुए देखा तो वो भी बेड से नीचे उतरा और अपनी दुम्म हिलाता हुआ समीना के पीछे-पीछे चल पड़ा। किचन में समीना ने जा के खानसामा के साथ किचन का काम देखा और टॉमी लाऊँज में ही था। समीना को बस यही डर था कि टॉमी जमाल या किसी के भी सामने कोई वैसी हरकत नहीं कर दे जैसी वो उसके साथ कमरे में करता हुआ आया है। मगर शुक्र है कि टॉमी बिल्कुल अपनी रोज़ की रूटीन की तरह रहा। अपने अंदाज़ में कोई भी तबदीली ज़ाहिर नहीं हुई उसके अंदर जिससे समीना भी खुश और मुतमाइन हुई। लेकिन ये बात ज़रूर है कि उसकी नज़रें सारी शाम टॉमी पर ही टिकी रहीं। वो उसके अंदर आज पैदा होने वाली तबदीली और उसके इस नये अंदाज़ पर गौर करती रही। जैसे-जैसे वो उसके बारे में सोचती जाती, वैसे-वैसे ही उसे अच्छा लगने लगता… कुछ भी बुरा नहीं लगता। तभी उसे ये भी याद आया कि उसने उठ कर अपना मुँह भी नहीं धोया था और ना ही कुल्ली की थी और अभी तक वो टॉमी का थूक वैसे ही अपने चेहरे और मुँह के अंदर लिये हुए फ़िर रही थी। लेकिन इस बात के याद आने पर भी वो बस मुस्कुरा ही दी… बिना खुद से या टॉमी से नफ़रत किये। जब-जब समीना को खयाल आता उस मज़े का जो टॉमी की ज़ुबान ने उसके जिस्म को और खास तौर पर उसकी चूत को चाट कर दिया था तो उसका दिल ज़ोरों से धड़क जाता और दिल चाहता कि बस अभी के अभी एक बार फ़िर उसके सामने नंगी हो जाये और उससे अपने जिस्म को चटवाये और वो ही लज़्ज़त दोबारा हासिल करे मगर उसे पता था कि अभी इस बात का मौका नहीं है। उसे इस लज़्ज़त को दोबारा पाने के लिये अगले दिन तक का इंतज़ार करना होगा जब वो घर में अकेली होगी अपने टॉमी के साथ… सिर्फ़ वो और टॉमी… और फ़िर ही वो मस्तियाँ कर सकेंगे। इस वक़्त तो अपने जज़बातों और ख्वाहिशों पर काबू पाने के लिये समीना ने वोडका का एक बैड़ा पैग बनाया और पीने लगी।

अगली सुबह जमाल नाश्ता कर के अपने दफ़्तर जाने के लिये तैयार हुआ और साढ़े नौ बजे के करीब अपनी कार में बैठ कर निकल गया। समीना को भी एक किट्टी-पार्टी में जाना था तो वो भी तैयार होने लगी। टॉमी उसके पीछे-पीछे अपनी दुम्म हिलाता हुआ फिर रहा था और समीना जानती थी कि वो उसे खुश करने की कोशिश कर रहा है। समीना ने बड़े प्यार से उसके सिर सहलाते हुए कहा कि उसके पार्टी से वापस लौटने तक सब्र करे। फिर समीना हमेशा की तरह नये फ़ैशन का डिज़ाऑयनर सलवार-कमीज़ पहन कर अच्छे से तैयार हुई और साथ में पाँच इंच ऊँची पेन्सिल हील के बेहद सैक्सी सैंडल पहने। फिर वो ग्यारह बजे के करीब ड्राइवर के साथ मर्सिडीज़ कार में पार्टी में जाने के लिये निकल गयी। ये अमीर घरों की औरतों की किट्टी-पार्टी थी जिसमें हर दो हफ़्ते में एक बार बीस-पच्चीस औरतें सज-धज कर शरीक़ होती थीं और पैसे लगा कर ताश खेलती… इधर-उधर की बातें और गॉसिप करतीं थीं। इसके अलावा शराब पीना इन किट्टी-पार्टियों में मामुल था। उस दिन समीना ने पार्टी में काफी इंजॉय किया। जब वो चार घंटे बाद वहाँ से निकली तो काफी शराब पी हुई थी और काफ़ी नशे मे थी लेकिन नशा इतना भी नहीं था कि वो खुद को संभाल ना सके।

घर पहुँच कर ड्राइवर ने कार गेट के अंदर ला कर जैसे ही खड़ी की तो टॉमी भागता हुआ कार तक आया। समीना कार से उतरी तो टॉमी हमेशा की तरह प्यार से उसके सैंडल और पैर चाटने लगा। फिर चौंकीदार ने गेट बंद किया और समीना घर के अंदर की तरफ़ चल दी। चलते हुए उसके कदम ज़ाहिर तौर पे नशे में थोड़े लड़खड़ा से रहे थे। चौंकीदार और ड्राइवर के लिये नयी बात नहीं थी इससे पहले भी बहोत बार उनकी मालकिन कभी अपने शौहर के साथ और कभी अकेली इससे भी ज्यादा नशे की हालत में घर वापस आयी थी। समीना थोड़ा लड़खड़ाती हुई अंदर जा रही थी और टॉमी भी समीना के पीछे-पीछे था अठखेलियाँ करता हुआ… कभी उससे आगे निकलता तो कभी पीछे चलने लगता और कभी उसकी टाँगों से अपना जिस्म सहलाता। समीना उसकी हरकतों को देख-देख कर मुस्कुरा रही थी कि कैसे वो अपनी मालकिन को खुश करने की कोशिश कर रहा है ताकि आज फ़िर वो कल वाला खेल खेल सके। समीना की मुस्कुराहट टॉमी को बता रही थी के उसकी मालकिन को भी कोई एतराज़ नहीं है।

घर के अंदर आकर समीना ने अंदर से दरवाज़ा लॉक कर लिया। अब वो घर के अंदर टॉमी के साथ बिल्कुल अकेली थी। उसे थोड़ी सी बेचैनी भी हो रही थी कि पता नहीं अब क्या होगा। समीना सोफ़े की कुर्सी पर बैठी थी और टॉमी भी उसके करीब ही नीचे ज़मीन पर इधर-उधर फ़िर रहा था… समीना के इर्द गिर्द… उसको लुभाने और अपनी तरफ़ मुत्वज्जाह करने के लिये। समीना ने टेबल पर प्लेट में रखी ब्रेड का एक टुकड़ा कुछ दूर नीचे क़लीन पर फेंका और टॉमी को उसे खाने का इशारा किया। टॉमी ने उस ब्रेड के टुकड़े की तरफ़ देखा और फ़िर से अपना सिर समीना के पैरों पर रगड़ते हुए समीना के गिर्द घूमने लगा। समीना ने दो चार टुकड़े ब्रेड के और भी नीचे फ़ेंके मगर टॉमी ने उनकी तरफ़ भी तवज्जो नहीं दी। समीना समझ गयी कि आज टॉमी की दिलचस्पी कुछ खाने पीने में नहीं बल्कि उसके साथ कल वाला खेल खेलने में है।

कुछ देर के बाद समीना अपनी जगह से उठी और अलमारी में रखे हुए कुत्तों के स्पेशल बिस्कुट निकाल कर एक प्लेट में रख कर नीचे कार्पेट पर टॉमी के आगे रखे। टॉमी उनको खाने लगा और समीना टॉमी को वहीं किचन में छोड़ कर अपने कमरे में आ गयी। समीना ने अपने कमरे में आते ही सैंडल छोड़ कर अपने बाकी सारे कपड़े उतार दिये और बाथरूम में चली गयी फ्रेश होने के लिये। समीना फ्रेश होकर फ़ारिग़ हुई तो कपड़े पहनने की बजाय एक बड़ा सा तौलिया अपने जिस्म पर लपेट कर बाहर निकल आयी। तौलिया उसके मम्मों के ऊपरी हिस्से से ले कर उसकी आधी रानों तक था और बाकी का पूरे का पूरा गोरा-गोरा जिस्म बिल्कुल नंगा था। समीना के लिये ये कोई नयी बात नहीं थी। वो अक्सर नहाने के बाद भी ऐसे ही बिना तौलिया लपेटे ही बाहर आकर सबसे पहले अपने सैंडल पहनती और फ़िर बाल ब्रश करने के बाद फ़िर कपड़े पहनती थी। आखिर घर के अंदर और कोई होता ही नहीं था तो वो किससे डरती या पर्दा करने की कोशिश करती। आज भी समीना नहा कर तौलिया लपेट कर बाहर आयी और बेडरूम में सोफ़े की कुर्सी पर बैठ गयी। सैंडल तो उसने पहले उतारे ही नहीं थे।

शराब का नशा समीना पर अभी भी छाया हुआ था और समीना को ये सुरूर बहोत खुशगवार लग रहा था। शराब के नशे की कैफ़ियत में हमेशा ही समीना के जिस्म की गर्मी बढ़ जाती थी और चूत में मीठी सी मस्ती भरी कसक उठने लगती थी। वो आँखें बंड करके बैठी हुई टॉमी के बारे में सोचने लगी। वो कुछ फ़ैसला नहीं कर पा रही थी कि कल की तरह आज भी टॉमी के साथ मज़े और लज़्ज़त का वो ही खेल खेले या कि नहीं। एक तरफ़ उसे ये बात रोक रही थी कि वो एक इंसान है तो कैसे किसी जानवर को अपने जिस्म से इस तरह खेलने दे सकती है जबकि ये बात मुआशरे… मज़हब… और इख्लाकियत… सबके खिलाफ़ थी। मगर दूसरी तरफ़ शैतान उसे बहका रहा था कि जो मज़ा उसे कल एक कुत्ते की ज़ुबान से मिला है वो कभी उसे मर्द… एक इंसान की ज़ुबान से नहीं मिला था। और फ़िर अंग्रेज़ औरतें तो पता नहीं क्या-क्या करती हैं जानवरों के साथ… और वो तो सिर्फ़ थोड़ा बहोत अपने टॉमी के साथ खेल ही रही है ना। वो औरतें तो कुत्तों से ही नहीं बल्कि गधे-घोड़ों से भी अपनी चूत तक चुदवा लेती हैं और वो तो बस अपने जिस्म को ही अपने कुत्ते से चटवा रही है ना। यही सब सोचते हुए उसका हाथ तौलिये के नीचे अपनी चूत तक पहुँच चुका था और वो अपनी चूत को सहला रही थी। उसे इस बात का पता भी नहीं चला था कि कब उसका हाथ अपनी चूत पे पहुँच के उसे सहलाने लगा था। आखिर में समीना ने सब कुछ हालात पर छोड़ दिया कि जो होगा देखा जायेगा।

बेडरूम का दरवाज़ा लॉक नहीं था… बस हल्का सा ही बंद था। थोड़ी देर में समीना को दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनायी दी। उसने आँखें खोल कर दरवाज़े की तरफ़ देखा तो खुले हुए दरवाज़े में से टॉमी कमरे में दाखिल हो रहा था। उसे अपने कमरे में दाखिल होता हुआ देख कर समीना का दिल ज़ोर से उछल पड़ा और उसके हाथ भी एक लम्हे के लिये तो काँप ही गये और उसने अपनी चूत सहलाना बंद कर दिया। टॉमी छोटे-छोटे क़दमों के साथ आहिस्ता-आहिस्ता दौड़ता हुआ समीना की तरफ़ आया और आकर अपना मुँह समीना की नंगी बाज़ू से रगड़ने लगा। समीना ने भी अपने एक हाथ के साथ टॉमी के सिर को सहलाना शुरू कर दिया।

समीना सोफ़े की कुर्सी पर ऐसे बैठी हुई थी के सिर्फ़ उसका तौलिया उसके जिस्म पर था। उसके मम्मों का ऊपरी हिस्सा और उनके दर्मियान बनती हुई गहरी लकीर भी साफ़ नज़र आ रही थी। निचले हिस्से में उसका तौलिया उसकी आधी रानों तक चढ़ा हुआ था और उसकी गोरी-गोरी आधी रानें और उनसे नीचे पूरी की पूरी चिकनी टाँगें बिल्कुल नंगी थीं। पैरों में बेशक ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल मौजूद थे। टॉमी ने जब अपनी मालकिन को उसकी मोहब्बत का जवाब मोहब्बत से देते हुए देखा तो वो फ़ौरन ही समीना के घुटनों को अपनी ज़ुबान से चाटने लगा।

समीना हौले से चिल्लायी, “ऐऐऐ टॉमी! क्या कर रहे हो यार! अभी मैं पार्टी में से थकी हुई आयी हूँ और तुम फ़िर से मेरा जिस्म चाटने लगे हो… हटो पीछे प्लीज़्ज़्ज़!”

समीना उसे कह तो रही थी मगर उसे अपने पास से हटाने के लिये कोई ज़ोर नहीं लगा रही थी। बल्कि उसके सिर पे हाथ फेरते हुए उसे पीछे हटाना चाह रही थी। मगर टॉमी कहाँ मानने वाला था। था तो कुत्ता ही ना… उसने भला किसी की क्या बात माननी है। वो अपनी मर्ज़ी की मुताबिक़ नीचे समीना के सैंडलों के तलवों से ले कर उसकी घुटनों तक उसकी टाँगों को चाटने लगा और अपनी लंबी सी गुलाबी गीली-गीली ज़ुबान से समीना की टाँगों को गीला करने लगा। बूरा तो समीना को भी नहीं लग रहा था। अभी जो काफ़ी देर तक यहाँ बैठी वो सोच रही थी वो सब कुछ एक बार फ़िर उसके साथ होने लगा था। एक बार फ़िर उसका जिस्म-ओ-दिल, दिमाग का साथ छोड़ कर लज़्ज़त का साथ देने लगे थे और बहकने लगे थे… इस अनोखे प्यार… अनोखी चाहत में खोने लगे थे। “आह… हे.. हे… हे… ऊँममम… सीईईई!” उसके मुँह से सिसकारियाँ सी निकलने लगी थीं। वो टॉमी को खुद से दूर करने की बजाय आहिस्ता-आहिस्ता उसका जिस्म और सिर सहला रही थी। टॉमी को और भी शह दे रही थी।

टॉमी था तो कुत्ता… मगर था ज़हीन। अपनी मालकिन की मर्ज़ी को समझ गया था। वो भी अब समीना के पैरों और घुटनों को चाटना छोड़ कर अब समीना के नंगे बाज़ुओं को चाटने लगा था। टॉमी भी पूरे जोश में था। उसकी ज़ुबान बड़ी तेज़ी के साथ उसके मुँह में अंदर-बाहर हो रही थी और समीना के नंगे गोरे-गोरे बाज़ुओं को चाट रही थी। फ़िर वो उसके कंधों तक पहुँच गया और समीना के कंधों को अपनी ज़ुबान से चाटने लगा। फ़िर टॉमी ने अपना मुँह खोल कर समीना के कंधे की गोलाई को अपने अगले नोकदार दाँतों के बीच में लिया और आहिस्ता से उसे अपने अगले दाँतों में दबाने लगा जैसे कि वो समीना को काटने लगा हो। मगर वो काट नहीं रहा था बल्कि जानवरों के मखसूस अंदाज़ में वो समीना से… अपनी मालकिन से… प्यार कर रहा था। पहले-पहल तो समीना को डर लगा कि टॉमी उसे काटने लगा है मगर जब टॉमी के नोकीले दाँतों का बस हल्का-हल्का दबाव ही उसे अपने कंधों पर महसूस हुआ तो उसका खौफ़ कम हुआ और जब टॉमी के इस तरह से हौले-हौले काटने से समीना को लुत्फ़ आया तो उसके मुँह से भी बे इख्तियार सिसकरी निकल गयी और साथ में ही लज़्ज़त के मारे उसकी आँखें बंद हो गयीं। टॉमी के दाँत समीना को अपने गोश्त में धंसते हुए महसूस तो हो रहे थे मगर उसे लग रहा था कि इस में उसे कोई तकलीफ नहीं हो रही थी। इसी लिये वो भी उसे अब रोक नहीं रही थी। टॉमी ने अपने दाँत हटाये तो समीना के कंधे पर उसके दाँतों के हल्के-हल्के निशान पड़ रहे थे और टॉमी ने इसी जगह को अपनी ज़ुबान से चाटना शुरू कर दिया।

लज़्ज़त के मारे समीना की आँखें बंद हो रही थीं। टॉमी उसके नंगे गोरे-गोरे कंधे को चाटता हुआ उसकी गर्दन की तरफ़ बढ़ने लगा और उसकी गर्दन को अपनी ज़ुबान से चाटने लगा। टॉमी से समीना का हर तरह का खौफ़ खतम हो चुका हुआ था। अब वो उसे रोक नहीं रही थी बल्कि उसके जिस्म पर अपना हाथ फ़ेर रही थी और उसके जिस्म को सहला रही थी… उसकी गर्दन को सहला रही थी। जैसे ही टॉमी की ज़ुबान… लंबी खुरदरी ज़ुबान समीना के चेहरे पर पहुँची तो उसने आज एक बार फ़िर से समीना के गोरे-गोरे गालों को चाटना शुरू कर दिया। वो गाल जो आज तक सिर्फ़ उसके शौहर ने ही चूमे और चाटे थे और अब एक कुत्ता भी इस में उसके शौहर का हिस्सेदार हो चुका था। जमाल खान जैसे बड़े आदमी की खूबसूरत बीवी के गोरे-गोरे गालों को एक कुत्ता… उनका अपना कुत्ता चाट रहा था और अपने थूक से उसका पूरे का पूरा चेहरा भर रहा था। अब तो उसकी ज़ुबान समीना के होंठों पर भी पहुँच रही थी और उसके होंठों को चाटने लगी। आज समीना ने टॉमी की इस हरकत का कुछ बुरा नहीं मनाया। बल्कि अपने सामने खड़े हुए टॉमी की गर्दन को सहलाती रही। समीना सोफ़े की कुर्सी पर बैठी हुई थी और टॉमी उसके सामने खड़ा था। इस पोज़िशन में टॉमी का मुँह समीना के चेहरे के बराबर आ रहा था। इस क़दर बड़ा कद और जसामत थी टॉमी की।

जैसे-जैसे टॉमी की ज़ुबान समीना के होंठों को चाटती जाती थी, वैसे-वैसे समीना की मस्ती में इज़ाफ़ा होता जा रहा था। उसे आज ये सब कुछ बुरा नहीं लग रहा था और उसने एक बार भी टॉमी को पीछे हटाने की कोशिश नहीं की और अपने होंठों को उसके सामने से हटाये बगैर टॉमी के सामने बैठी थी। आहिस्ता-आहिस्ता समीना के होंठ खुलने लगे। दोनों होंठों के दर्मियान में खला बनने लगा और पता नहीं क्यों और कैसे, बिना सोचे समझे, बंद आँखों के साथ ही। समीना की ज़ुबान उसके मुँह से बाहर निकल आयी और अगले ही लम्हे समीना की ज़ुबान टॉमी की ज़ुबान से टकरा रही थी। टॉमी की ज़ुबान तेज़ी के साथ हरकत करती हुई समीना की ज़ुबान को चाट रही थी और अब तो समीना की ज़ुबान ने भी थोड़ी हरकत शुरू कर दी हुई थी। दोनों की ज़ुबानें एक दूसरे से टकरा रही थीं और समीना टॉमी के साथ ऐसे मस्त थी जैसे कि वो कोई जानवर नहीं बल्कि उसका कोई आशिक़ हो जिसके साथ वो मस्ती कर रही हो। एक बार तो समीना ने खुद टॉमी की लंबी सी ज़ुबान को अपने होंठों में पकड़ने की कोशिश की और एक-दो बार की कोशिश के बाद इसमें कामयाब हुई। मगर सिर्फ़ थोड़ी देर के लिये ही वो उसकी ज़ुबान को चूस सकी और फ़िर टॉमी की ज़ुबान उसके मुँह में से सरक गयी और फिसल कर बाहर निकल गयी।

ऐसे ही टॉमी के साथ कीसिंग करते हुए और उसके साथ ज़ुबान लड़ाते हुए समीना को पता भी नहीं चला कि कब उन दोनों के जिस्मों की हरकत से समीना के जिस्म पर लिपटा हुआ तौलिया जो उसके सीने के उभारों को… उसके मम्मों को ढाँपे हुए था, वो खुल कर उसके सीने से सरक कर उसकी गोद में आ गिरा। उसके साथ ही समीना के खूबसूरत गोरे-गोरे मम्मे टॉमी के सामने नंगे हो गये। समीना के होंठों और फ़िर ठोढ़ी को चाटता हुआ टॉमी नीचे उसके सीने की तरफ़ आने लगा और फ़िर समीना के गोरे-गोरे सीने को अपनी लंबी ज़ुबान से चाटने लगा। उसकी ज़ुबान जैसे ही समीना के मम्मे से टकरायी तो समीना के मुँह से सिसकारी निकल गयी। मगर टॉमी कहाँ रुकने वाला था। वो तेज़ी के साथ समीना के मम्मों को चाटने लगा… कभी एक को तो कभी दूसरे को। जैसे-जैसे टॉमी की ज़ुबान समीना के निप्पलों को रगड़ने लगी तो समीना तो जैसे तड़पने लगी। मुँह से सिसकारियाँ निकालते हुए वो टॉमी के सिर को अपने सीने की तरफ़ खींचने लगी। अजीब हालत हो रही थी समीना की। आज तक कभी पहले समीना को अपने निप्पलों के छुए जाने से इस क़दर मज़ा नहीं आया था जितना आज उसे टॉमी की ज़ुबान अपने निप्पलों से छूने की वजह से मिल रहा था।

कुछ देर तक समीना के सीने और मम्मों को चाटने के बाद एक बार फ़िर से टॉमी ने समीना को अपने तरीके से काटना शुरू कर दिया। इस बार टॉमी ने अपना मुँह खोला और समीना के पूरे के पूरे मम्मे को अपने बड़े से मुँह के अंदर लेने लगा। अपने दाँतों के दर्मियान और अपने दाँतों में लेकेर उसने एक बार फ़िर से आहिस्ता-आहिस्ता समीना के मम्मे को काटना शुरू कर दिया और अपने दाँतों के बीच में उनको दबाने लगा। समीना के मुँह से हल्की-हल्की चींखें निकलने लगीं… दर्द और खौफ़ के मारे नहीं बल्कि लज़्ज़त के साथ। टॉमी समीना के मम्मों को बारी-बारी ऐसे जगह-जगह से काट रहा था कि जैसे वो उनको खाने की कोशिश कर रहा हो। ऐसे ही तेज़ी के साथ अपनी काटने की जगह तबदील करते हुए समीना का एक निप्पल उसके दाँतों के बीच आ गया और जैसे ही टॉमी ने उसे काटा तो समीना की तो जैसे जान ही निकल गयी। एक तेज़ सिसकारी और चींख उसके हलक़ से निकली… अपने निप्पल में होने वाले हल्के से दर्द की वजह से। मगर उसके साथ ही उसके सारे जिस्म में लज़्ज़त-अमेज़ लहरें दौड़ने लगीं। उसकी चूत गीली होने लगी जोकि इस वक़्त उसके जिस्म का वाहिद हिस्सा था जोकि तौलिये से ढका हुआ था।

समीना को इस क़दर लज़्ज़त मिली… इतना मज़ा आया कि उसने टॉमी का सिर अपने दोनों हाथों में पकड़ा और अपने मुँह की तरफ़ लाते हुए अपने होंठ टॉमी के मुँह के अगले काले हिस्से यानी उसके होंठों पर रख दिये और एक बार उसे चूमने के बाद उसके होंठों पर अपनी ज़ुबान फिराने लगी। टॉमी की हरकतें समीना को मस्त करती जा रही थीं। कुछ देर पहले तक वो टॉमी के साथ कुछ करने या ना करने का फ़ैसला नहीं कर पा रही थी और अब वो खुद को टॉमी के रहम-ओ-करम पर छोड़ चुकी थी और हालात की लहरों पर बहती चली जा रही थी… टॉमी के साथ… जो मस्ती और अनोखी लज़्ज़त के सफ़र में समीना के साथ था। बल्कि इस सफ़र पे समीना को ले जाने वाला भी टॉमी ही था।

कुछ देर के बाद समीना ने अपने जिस्म पर मौजूद आखिरी मगर बे-मक़सद कपड़ा… अपनी रानों पर पड़ा हुआ तौलिया भी उतार के नीचे कार्पेट पे फेंक दिया और अब वो टॉमी के सामने ऊँची हील के सैंडल के अलावा बिल्कुल नंगी थी और टॉमी…वो तो अज़ल से ही नंगा था। जैसे ही टॉमी ने समीना की नंगी रानों को देखा तो फ़ौरन ही नीचे को आकर उसकी रानों को चाटने लगा… कभी एक तो कभी दूसरी को… कभी यहाँ से तो कभी वहाँ से… समीना की रानों को चाटता हुआ टॉमी उसकी रानों के अंदर के हिस्सों की तरफ़ आने की कोशिश कर रहा था और हवस की मारी समीना उसे रोक भी नहीं सकी। उसकी टाँगें खुद-ब-खुद ही खुल गयीं और टॉमी की ज़ुबान समीना के जिस्म के सबसे नाज़ुक और सबसे खास और सब से प्राइवेट हिस्से उसकी चूत की तरफ़ बढ़ने लगी। जैसे ही टॉमी की ज़ुबान ने एक बार में ही समीना की फूल जैसी खुली हुई चूत को पूरे का पूरा चाटा तो समीना का तो पूरे का पूरा जिस्म ही अपनी जगह से उछल कर रह गया। उसने खुद को गिरने से बचाने के लिये टॉमी के मज़बूत जिस्म को जल्दी से दोनों हाथों से पकड़ लिया। अब टॉमी बिना किसी रोकटोक के समीना की चूत को चाट रहा था।

दो दिन के अंदर ही समीना जैसी इज़्ज़तदार और खूबसूरत औरत इस हद तक खुल चुकी हुई थी कि इस वक़्त वो बिल्कुल नंगी हो कर बैठी हुई अपने कुत्ते से अपनी चूत चटवा रही थी। इसमें इस बेचरी औरत का भी कोई क़सूर नहीं था। ये तो कमाल था टॉमी जैसे समझदार और तजुर्बेकार कुत्ते का जो अपनी हरकतों और अपनी ज़ुबान के साथ किसी भी औरत को मदहोश करके अपने सामने बेबस कर देने में माहिर था। हक़ीकत में टॉमी कोई आम कुत्ता नहीं था। वो खास तौर से तरबियत-याफ़्ता था। अपने काम में माहिर था यानी उसे तरबियत ही ये दी गयी हुई थी कि एक औरत को कैसे गरम करना और कैसे उसे चोदना है। अपनी इसी खूबी और अपने काम में मुकम्मल महारत की वजह से ही टॉमी अपनी पुरानी मालकिन ज़हरा का पसंदीदा कुत्ता था जिससे चुदवा-चुदवा कर ज़हरा कभी भी बोर नहीं हुई थी। और आज समीना भी सिर्फ़ एक दिन की मुज़ाहमत के बाद ही टॉमी के सामने अपनी सारी मुज़ाहमत खतम कर बैठी हुई थी और इस वक़्त इस कुत्ते के सामने अपनी चूत खोल के बैठी इससे अपनी चूत चटवाती हुई मज़े ले रही थी। कुत्ता भी ऐसे मज़े ले-ले के समीना की चूत से बह कर निकलने वाले पानी को ऐसे चाट रहा था कि जैसे अंदर से कोई शहद निकल रहा हो जिसका वो एक क़तरा भी ज़ाया जाने नहीं देना चाहता हो।

टॉमी की खुरदरी, लंबी गुलाबी ज़ुबान इतनी बुरी तरह से समीना की चूत को चाट रही थी कि समीना के जिस्म से उसकी जान निकली जा रही थी। उसके मुँह से ज़ोर दार सिसकरियाँ निकल रही थीं जोकि पूरे कमरे में फैल रही थीं। शराब के नशे और कुत्ते की ज़ुबान के चाटने की मस्ती में चूर समीना के लिये सोफ़े की कुर्सी पर टिक कर बैठना और अपना तवज़ुन बरकरार रखना बहोत मुश्किल हो रहा था क्योंकि उसके चूतड़ फिसल कर आगे किनारे पे टिके हुए थे और सोफ़े की कुर्सी भी बिना हथों वाली थी। मगर फ़िर भी वो किसी ना किसी तरह टॉमी को पकड़ कर अपने थरथराते हुए जिस्म को सहारा देने की कोशिश कर रही थी। अचानक टॉमी की लंबी ज़ुबान फिसल कर समीना की चूत के सुराख के अंदर चली गयी… सिर्फ़ एक लम्हे के लिये। मगर वो लम्हा तो जैसे कोई करंट सा लग गया समीना के जिस्म में और समीना का पूरे का पूरा जिस्म अपनी जगह से उछल पड़ा और अगले ही लम्हे समीना नीचे कार्पेट पे गिरी हुई थी। उसने नीचे कार्पेट से उठने की कोई कोशिश नहीं की और ना ही टॉमी ने उसे उठने का कईं मौका दिया। वो जल्दी से अपनी जगह से घूम कर एक बार फ़िर से समीना की चूत की तरफ़ आ गया और समीना की रानों को चाटने लगा। समीना ने भी फौरन अपनी टाँगों को खोलते हुए टॉमी को दोबारा अपनी चूत की तरफ़ मुतवज्जह कर लिया था। अब तो जैसे टॉमी चाहता था… जो चाहता था… समीना के साथ वो ही कर रहा था और समीना भी बिल्कुल वैसा ही कर रही थी… बिना कोई मुज़ाहमत किये… बिना कोई इंकार किये।

मुज़ाहमत और इंकार… ये तो वहाँ होते हैं ना जहाँ इंसान को मज़ा नहीं आ रहा हो जबकि यहाँ… यहाँ तो समीना को इस सब में पूरा-पूरा मज़ा आ रहा था। टॉमी की ज़ुबान समीना की चूत पर चल रही थी और उसके पूरे जिस्म को जला रही थी उसमें पैदा होने वाली आग के साथ। समीना तो अपनी रानों को पूरा खोले हुए टॉमी के आगे पड़ी हुई थी और वो उसकी दोनों टाँगों के बीच में खड़ा… अपना सिर झुकाये… अपना मुँह समीना की चूत पर रखे हुए… अपनी लंबी ज़ुबान के साथ समीना की चूत को चाटता जा रहा था। टॉमी की लंबी ज़ुबान तेज़ी के साथ चल रही थी। कभी वो उसकी पूरी की पूरी चूत को अपनी ज़ुबान से एक साथ ही चाटने लगता और कभी उसकी चूत के ऊपरी हिस्से पर अपनी पूरी तवज्जो लगा देता। समीना की चूत के दोनों लबों के दर्मियान… बिल्कुल ऊपर के हिस्से में उसकी चूत का दाना… टॉमी की बेरहम खुरदरी ज़ुबान के रहम-ओ-करम पर था… जिसे टॉमी की ज़ुबान मुसलसल रगड़ रही थी… चाट रही थी और कुछ ही देर पहले तक टॉमी को रोकने का इरादा करने वाली समीना अब अपनी आँखें बंद किये हुए उसके सामने सिर्फ सैंडल पहने बिल्कुल नंगी पड़ी हुई थी… तड़प रही थी… सिसक रही थी। मगर ये तड़प और सिसक किसी तकलीफ या दर्द के मारे नहीं थी बल्कि लज़्ज़त की वजह से थी और उसके मुँह से निकलने वाली तेज़ सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं। उसके दोनों हाथ टॉमी के सिर पर थे… उसे अपने से दूर करने के लिये नहीं बल्कि उसके मुँह को और भी अपनी तरफ़ खींचने के लिये।

कुछ ही देर में समीना ने अपनी दोनों टाँगें उठायीं और उनको टॉमी की कमर के ऊपर रखते हुए उसके हेवानी जिस्म को अपनी गोरी-गोरी नाज़ुक और सैक्सी टाँगों के बीच में दबाने लगी ताकि वो कहीं भाग ना जाये। समीना अपने सैंडल के तलवों और गोरे-गोरे पैरों के ऊपरी हिस्से के साथ टॉमी की नरम-नरम फ़र को सहला रही थी। उसके पैर उसकी पूरी कमर पर सरक रहे थे और कभी वहाँ से नीचे उसकी टाँगों को सहलाने लगती… कुछ भी ना सोचते हुए… बस आँखें बंद किये हुए। अपनी चूत पर उसकी ज़ुबान के मज़े लेते हुए उस जानवर के जिस्म को अपने पैरों से सहलाना उसे अच्छा लग रहा था। टॉमी के जिस्म और उसकी टाँगों को अपने सैंडल और पैरों के साथ सहलाते हुए पता नहीं कब और कैसे उसका पैर नीचे जाने लगा… टॉमी के पेट के नीचे की तरफ़ और ऐसे ही उसका पैर किसी सख्त सी चीज़ से टकराया… जिसकी समीना को फौरी तौर पे कुछ समझ नहीं आयी। वो उसे भी उसकी टाँग की कोई हड्डी ही समझी… सख्त सी लंबी सी।

आँखें बंद थीं समीना की मगर दिमाग जैसे किसी नशे से बाहर आ रहा था और अपने पैरों के साथ इस चीज़ को जाँचने की कोशिश कर रहा था। जानने की कोशिश में था कि ये क्या है जो उसके पैरों के साथ टकरा रहा है। दोनों पैर अब उसके दिमाग की मदद कर रहे थे… इस चीज़ को कोई नाम देने के लिये और फ़िर समीना के दिमाग में एक छनका सा हुआ… लंड… लौड़ा… लन्न… एक साथ ही इस चीज़ के कईं नाम उसके दिमाग में आये और अचानक से ही उसके दोनों पैर इस चीज़ से दूर हट गये। मगर टॉमी की ज़ुबान की उसकी चूत पर रगड़ और चूत से बहते हुए चिकने पानी ने उसे सब कुछ एक बार फ़िर से भूलने पर मजबूर कर दिया और वो फ़िर से सिसकने लगी। थोड़ी ही देर में उसका पैर एक बार फ़िर से टॉमी के पेट के नीचे उसके लंड की तरफ़ बढ़ा और अगले ही लम्हे उसके पैरों ने एक बार फ़िर से टॉमी के लंड को छूना शुरू कर दिया… आहिस्ता-आहिस्ता… टॉमी को डिस्टर्ब किये बिना। फ़िर वो आहिस्ता-आहिस्ता टॉमी के लंड को अपने दोनों पैरों के बीच में ले कर… एक सैंडल के तलवे से दूसरे पैर के ऊपर दबाते हुए… सहलाने लगी। टॉमी की ज़ुबान के लम्स के साथ ही वो अपनी मंज़िल को पहुँच रही थी। उसकी चूत के अंदर गर्मी बढ़ती जा रही थी और वो पानी छोड़ने वाली थी

अगले ही लम्हे समीना ने मज़बूती से टॉमी के सिर को अपने हाथों से जकड़ लिया और फ़िर उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया। चंद लम्हों में ही समीना का जिस्म ढीला पड़ने लगा। उसकी साँसों की रफ़्तार तेज़ हो गयी। वो लंबे-लंबे साँस लेती हुई अब खुद को नॉर्मल कर रही थी और टॉमी अपनी ज़ुबान के साथ समीना की चूत से निकलने वाला गाढ़ा-गाढ़ा पानी चाटता जा रहा था। चूत का पानी निकलने के बाद समीना ने टॉमी को खुद से आहिस्ता से पीछे को ढकेला और इस बार टॉमी उसको छोड़ कर उससे दूर हो गया… मगर उसके सिर की तरफ़… उसके हाथों की पहोंच में ही उसके करीब बैठ कर हाँफने लगा। उसका जिस्म भी हिल रहा था और ज़ुबान भी बाहर लटक रही थी। समीना उसी की तरफ़ देख रही थी… बड़े ही प्यार से… बड़ी ही चाहत से… क्योंकि आज जिस कदर इस जानवर ने उसे मज़ा दिया था वो उसे कभी पहले नहीं आया था और इस मज़े के लिये वो दिल से टॉमी की शुक्र गुज़ार थी। वहाँ क़लीन पर से उठने को उसका दिल भी नहीं कर रहा था… चेहरे पर सुकून ही सुकून था… और एक मुस्कान…!

समीना का बेडरूम अजीब मंज़र पेश कर रहा था। समीना जैसी खूबसूरत औरत अपने खूबसूरत जिस्म के साथ बिल्कुल नंगी… सिर्फ़ ऊँची पेन्सिल हील की सैंडल पहने अपने कमरे के कार्पेट पर पड़ी हुई थी और उसका वफ़ादार कुत्ता उसके करीब ही बैठा हुआ था। चूत का पानी निकलने के बाद समीना ने अपना सिर घुमा के टॉमी की तरफ़ देखा और फ़िर मुस्कुरा के अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसके मुँह को सहलाने लगी। कुत्ता भी अपनी मालकिन की तरफ़ से अपने काम को… अपनी करकरदगी को पसंद किये जाने पर खुश हो रहा था। समीना आहिस्ता-आहिस्ता उसके सिर को सहला रही थी। समीना मुस्कुराते हुए उसको देखते हुए अपनी उंगली को उसके नोकीले दाँतों पर फिराने लगी। उसे थोड़ा अजीब लग रहा था मगर उसे ये भी पता था… ये भी एहसास था कि उसके उन दाँतों ने उसे किस तरह मज़ा दिया था… उसके मम्मों को काटते हुए।

टॉमी के मुँह पर से समीना का हाथ उसकी गर्दन पर आ गया और फिर उसके पेट को सहलाने लगी। जब समीना की नज़र टॉमी की खुली और फ़ैली हुई टाँगों पर पड़ी… और उसे वहाँ वो ही चीज़ नज़र आयी जिसे वो थोड़ी देर पहले अपने पांव और सैंडल से सहला रही थी। समीना की नज़र उसी पर जम कर रह गयी… टॉमी के लंड पर! वो उसे देखे जा रही थी… बिना किसी और तरफ़ देखे… बिना अपनी पलकें झपकाये। वो सुर्ख रंग का लंबा सा… चमकता हुआ किसी हड्डी की तरह ही लग रहा था। मगर इस वक़्त बहोत ज्यादा अकड़ा हुआ नहीं था फ़िर भी काफ़ी लंबा लग रहा था। करीब-करीब आठ इंच तो होगा वो इस वक़्त भी। आगे से बिल्कुल पतला सा नोकदार और पीछे को जाते हुए मोटा होता जाता था… फैलता जाता था। उसके लंड के अगले सुराख में से भी हल्का-हल्का पानी रिस रहा था। समीना का हाथ अभी भी टॉमी के जिस्म पर था और उसकी पसलियों को सहला रहा था। समीना का हाथ आहिस्ता-आहिस्ता आगे को सरकने लगा… टॉमी के लंड की तरफ़! उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। वो खुद को रोकना चाह रही थी मगर उसका जिस्म उसके काबू में नहीं था। हाथ आहिस्ता-आहिस्ता सरकता हुआ आगे को बढ़ रहा था। चंद लम्हों में ही समीना का हाथ टॉमी के लंड के करीब पहुँच चुका हुआ था। अपने धड़कते हुए दिल के साथ समीना ने अपनी उंगली से उसके लंड की नोक को छुआ और फ़ौरन ही अपना हाथ वापस खींच लिया… जैसे उसमें कोई करंट हो… या जैसे उसका लंड उसकी उंगली को काट लेगा… या उसे डंक मार देगा! मगर टॉमी के लंड में ज़रा सी हरकत पैदा होने के सिवा और कुछ भी नहीं हुआ। उसका लंड वैसे का वैसे ही उसकी रान के ऊपर पड़ा रहा।

कुछ ही देर के बाद समीना ने दोबारा से अपनी उंगली से टॉमी के लंड को छूना शुरू कर दिया। इस पोज़िशन में लेटे हुए समीना का हाथ बड़ी ही मुश्किल से टॉमी के लंड तक पहुँच रहा था। कुछ सोच कर समीना थोड़ा सी हरकत करते हुए टॉमी के जिस्म के निचले हिस्से की तरफ़ सरक गयी। अब उसकी उंगली बड़ी आसानी के साथ टॉमी के पूरे लंड पर सरक रही थी… उसे सहला रही थी। समीना ने टॉमी के चेहरे की तरफ़ देखा मगर उस जानवर ने कौनसा कोई अपने चेहरे से तासुरात देने थे जो वो समीना की हरकत से खुशी का इज़हार करता। लेकिन एक बात की समीना को तसल्ली थी कि टॉमी कोई नापसंदीदगी भी नहीं दिखा रहा था और उसी की तरफ़ देखते हुए समीना के हाथ की पूरी उंगलियाँ उसके लंड के गिर्द लिपट गयीं। बहोत ही गरम… चिकना-चिकना और सख्त और लंबा और मज़बूत महसूस हो रहा था उसे टॉमी का लंड। समीना ने उसे अपने हाथ में ले कर आहिस्ता-आहिस्ता अपनी मुठ्ठी के अंदर ही उसे आगे पीछे करना शुरू कर दिया। टॉमी का लंड उसकी मुठ्ठी में आगे पीछे को सरक रहा था और उसके लंड के चिकनेपन से समीना का हाथ भी चिकना हो रहा था। उसके लंड को महसूस करती हुई वो उसका मवाज़ना इंसानी लंड के साथ भी कर रही थी यानी अपने शौहर के लंड के साथ और बिना किसी चीज़ को नापे वो आसानी से कह सकती थी कि टॉमी का लंड उसके शौहर के लंड से लंबा और मोटा है।

समीना के सहलाने से… उसकी मुठ मारने से… टॉमी को भी शायद मज़ा आने लगा था। वो पहले तो उसी तरह लेटा रहा मगर फ़िर अपनी जगह से उठ कर खड़ा हो गया। समीना अभी भी टॉमी के करीब नीचे कार्पेट पर ही लेटी हुई थी और अब टॉमी उसके सामने खड़ा था। मगर अब समीना को उससे कोई भी… किसी किस्म का भी खौफ़ महसूस नहीं हो रहा था। उसके अचानक उठ कर खड़ा होने से उसका लंड समीना के हाथ से निकल गया था मगर उसे अपनी जगह से कहीं आगे ना जाते हुए देख कर समीना ने एक बार फ़िर से उसका लंड पकड़ लिया और आहिस्ता-आहिस्ता उसे सहलाने लगी। टॉमी अगर अपने लंड को अभी भी समीना के हाथ में दिये रखना चाहता था तो समीना का दिल भी उसके लंड को अपने हाथ से छोड़ने को नहीं चाह रहा था। अब वो नीचे कार्पेट पर पड़ी हुई टॉमी के पेट के नीचे उसके फ़र में से खाल में हो रहे हुए सुराख में से निकालते हुए लंड को देख रही थी… उसे छू रही थी और अपने हाथ में ले कर एक बार फ़िर से उसे आगे-पीछे कर रही थी। टॉमी के लंड में से निकलने वाला कोई लेसदार सा मवाद… साफ़ ज़ाहिर है कि… टॉमी की मनी ही थी वो… निकल-निकल कर समीना के हाथ पर लग रही थी। मगर वो अपनी ही इस नयी दुनिया में मगन… उसे अपने हाथ आयी हुई ये नयी चीज़ अच्छी लग रही थी। समीना को महसूस हुआ कि अब टॉमी का लंड पहले की निस्बत अकड़ चुका हुआ है… और भी सख्त हो चुका है! समीना का हाथ उसके लंड पर पीछे को जाने लगा… उसकी जड़ तक… और पीछे उसे कुछ और ही चीज़ महसूस हुई… कुछ मोटी सी… गोल सी… बहोत बड़ी सी! समीना अब थोड़ा और भी टॉमी के लंड की तरफ़ सरक आयी। काफ़ी करीब पहुँच चुकी थी वो उसके लंड के और अब वो उसकी तरफ़ देखने लगी। ये टॉमी के लंड का आखिरी हिस्सा था जोकि किसी गेंद की तरह मोटा और फूला हुआ था… मुर्गी के अंडे के जितना मोटा और बड़ा। अब बहोत करीब से टॉमी का लंड देखने पर उसे और भी ये अजीब लग रहा था। लंबा सा मोटा सा हथियार था कुत्ते का जिस पर छोटी-छोटी रग़ें ही रग़ें थीं…. गहरे नीले रंग की! उन गहरी नीली रग़ों की तादाद इतनी ज्यादा थी उसके लंड पर कि उसके लंड का सुर्ख रंग अब जामुनी सा हो रहा था।

अपने हाथ में पकड़ कर टॉमी के सुर्ख लंड को सहलाते हुए समीना की नज़रों में वो तमाम फ़िल्में चल रही थीं जानवरों से चुदाई की जो उसने पहले देख रखी थीं। उसके दिमाग में घूम रहा था कि कैसे औरतें कुत्तों के लन्न मुँह में ले कर चूसती हैं… कैसे उसे अपनी ज़ुबान से चाटती हैं! पहले जब उसने ये सब देखा था तो उसे हैरत होती थी मगर अब इस वक़्त हक़ीक़त में एक कुत्ते का लंड अपने हाथ में पकड़ कर उसे सहलाते हुए उसका ज़हन कुछ बदल रहा था। अब उसे इतना अजीब नहीं लग रहा था। बल्कि उसका दिल चाह रहा था कि आज एक बार… सिर्फ़ एक बार… पहली और आखिरी बार… वो भी इस कुत्ते के लंड को अपनी ज़ुबान लगा कर चेक तो करे कि कैसा लगता है उसका ज़ायका! और क्या सच में कोई मज़ा भी आता है या कि नहीं! यही सोचते हुए बिल्कुल ग़ैर-इरादी तौर पर और ऐसे कि जैसे वो किसी जादू के ज़ैर असर हो… आहिस्ता-आहिस्ता टॉमी के लंड की तरफ़ बढ़ रही थी… बिल्कुल करीब! उसके होंठ टॉमी के लंड के बिल्कुल करीब पहुँच चुके थे। उसका अपना दिमाग बिल्कुल बंद हो चुका हुआ था। वो कुछ भी और नहीं सोच रही थी। बस उसे टॉमी का लंड ही नज़र आ रहा था। बिना सोचे समझे आखिरकार समीना ने अपने होंठों के साथ टॉमी के लंड को छू लिया… सिर्फ़ एक लम्हे के लिये… और फ़ौरन ही उसका मुँह पीछे हट गया। समीना को हैरत हुई कि उसे ये बुरा नहीं लगा था। डरते-डरते समीना ने टॉमी की तरफ़ देखा… फ़िर अपने इर्द गिर्द एक नज़र दौड़ायी… ये देखने के लिये कि कोई उसे देख तो नहीं रहा। फ़िर अपनी तसल्ली करने के बाद उसने दोबारा अपने होंठ टॉमी के लंड की तरफ़ बढ़ाये और एक बार फ़िर उसके लंड को अपने होंठों से छुआ। अपना हाथ पीछे के हिस्से में ले जा कर समीना ने उसके लंड के मोटे गोल हिस्से के पीछे से टॉमी के लंड को अपने हाथ की गिरफ़्त में लिया और अपने होंठों को जोड़ कर उसके लंड पर लंबाई के रुख फिराने लगी। अजीब सा मज़ा आने लगा था समीना को। वो अपने होंठों से जैसे उसके लंड को सहला रही थी… चूस रही थी!

कुछ देर तक ऐसे ही अपने होंठों के साथ टॉमी के लंड को सहलाने के बाद समीना का खौफ़ और झिझक खतम हो रही थी। उसे जैसे-जैसे ये सब अच्छा लग रहा था… वो वैस- वैसे ही खुलती जा रही थी। साथ ही उसके होंठ भी खुले और उसकी ज़ुबान बाहर निकली और उसने अपनी ज़ुबान की नोक के साथ टॉमी के लंड को सहलाना शुरू कर दिया। वो उसके लंड पर अपनी ज़ुबान आहिस्ता-आहिस्ता फिराने लगी… उसकी नोक से ले कर उसकी पीछे की मोटी गोलाई तक। समीना अब अपनी ज़ुबान फिराती हुई उसके लंड को महसूस कर रही थी। कुछ अजीब सी चीज़ लग रही थी… नयी सी… जमाल के लंड से मुखतलीफ़… अजीब सा मगर अच्छा! समीना ने अपनी ज़ुबान को टॉमी के लंड की नोक पर रखा और उसे अपनी ज़ुबान से चाटने लगी। समीना को हैरत हुई कि उसमें से वक्फ़े-वक्फ़े से थोड़ा-थोड़ा पानी निकल रहा था… हल्की सी धार की सूरत में और एक बार तो जब समीना की ज़ुबान उसकी नोक पर थी तो वो ही पानी उसकी ज़ुबान पर आ गया। समीना ने फ़ौरन अपन मुँह पीछे हटा लिया मगर ज़ुबान पर उसका ज़ायका रह गया। तभी समीना को लगा… एहसास हुआ कि उसका ज़ायका कुछ इतना भी बुरा नहीं है। समीना ने अब एक बार फ़िर अपनी ज़ुबान से उसके लंड को चाटना शुरू कर दिया और फ़िर पीछे अपनी ज़ुबान ले जा कर उसकी मोटी गेंद को चाटा। समीना ने एक बार फ़िर हिम्मत करके उसके लंड की टोपी को अपने होंठों के बीच में लिया और उसे चूसने लगी… आँखें बंद करके… कुछ भी ना सोचते हुए… मगर उसके लंड से निकलने वाले पानी को कबूल करते हुए!

 

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