अनछुआ प्यासा सावन part 2

मेरी शादी को लगभग 12 साल हो गए। मेरा एक बेटा है जो लगभग दस साल का है। वो देहरादून बोर्डिग स्कूल में पढ़ता है। मैंने बी.एस सी. (बायो) और फिर बी. फ़ार्मेसी किया। इस लम्बी पढ़ाई और कालेज की जिन्दगी के दौरान कई लड़कियाँ मेरी जिंदगी में आई। कई लड़कियॉ मेरी खास गर्लफ्रैंडस बनी। मैने अपनी कालेज लाईफ में अपनी कई गर्लफ्रैंडस के साथ सैक्स के मज़े लिए। सबसे पहले तनु मेरी जिंदगी में आई। फिर नीता, फिर रेनु, चाँद, नीना, शैलजा, कल्पना, मिनी, लीनू, रेखा और आखिर में सुमिता मेरी जिंदगी में आई। इन सभी के साथ में मैने किसी के साथ एक बार, किसी के साथ दो बार तथा मिनी के साथ सबसे जयादा 19 बार सैक्स किया। बड़े मजे के दिन थे वो।
फिर 12 साल पहले शादी हो गई। शादी के बाद लगभग आठ साल तक अपनी पत्नी के साथ सैक्स का आनन्द लिया। लगभग 4 साल पहले मेरी वाईफ के गर्भाशय को बीमारी के कारण निकालना पडा। इसके बाद सैक्स में उसकी रुचि लगभग खत्म हो गई। इसलिये हम महीने में लगभग एक या दो बार सैक्स करते।
अब मेरी पत्नी ने लगभग तीन साल से बुटीक का काम शुरु कर रखा है। वो सारा दिन उसमें व्यस्त रहती है। शाम को लेट हो जाती है और काफी थकी भी होती है। इसलिये अब हम महीने में लगभग मुश्किल से एक बार ही सैक्स कर पाते हैं। खैर छोड़िये………।
शादी के बाद भी कुछ लड़कियाँ मेरी जिंदगी में आई जिनके साथ मैंने सैक्स किया। सबसे पहले मेरी साली रजनी उर्फ “बेबो” मेरी जिंदगी में आई। फिर मेरे पड़ोस की प्रिया, फिर मेरे दोस्त देवेन्द्र की दोस्त पायल और आखिर में मेरी पत्नी की सहेली ………… उसका नाम मैं अभी नहीं बताउंगा क्योंकि उससे मेरा रोमांस अभी चल रहा हैं, मेरी जिंदगी में आई। इन सभी के साथ में मैंने कई बार सैक्स किया हैं।
इनमें से मैने अपनी साली रजनी उर्फ “बेबो” के साथ सबसे जयादा 17 बार सैक्स किया। हर एक के साथ सैक्स की अपनी अलग और एक मजेदार कहानी हैं। काश स्टिरियो की तरह से जिंदगी में भी रिवाइन्ड बटन होता तो मैं इन कहानियों को फिर से रिवाइन्ड करके देखता और आप लोगों को भी बताता। पर ऐसा नहीं हो सकता। इसलिये मैं अपनी कुछ खास घटनाएं आपके साथ बांट रहा हूँ।

छुट्टी वाले दिन पत्नी तथा बेटे के ना होने की वजह से मैं जब भी फ्री होता हूँ तो इंटरनेट से गर्म और सेक्सी चित्र, अंग्रेज़ी और हिन्दी की कहानियाँ डाऊनलोड करता हूँ और अन्तर्वासना हिंदी कहानियाँ जरूर पढ़ता और डाऊनलोड करता हूँ।
आज मेरे पास ऐसे चित्रों तथा ऐसी कहानियों का बहुत बड़ा संग्रह है। अन्तर्वासना की ज्यादातर कहानियां बहुत अच्छी तथा दिल को छू लेने वाली और अपनी सी लगती हैं। इन्हीं सब कहानियों से प्रेरणा पाकर मैं भी अपनी कुछ कहानियां लिख रहा हूँ। ये सारी कहानियां बिल्कुल सच्ची हैं, आप मानो या न मानो। खैर ……
अब मैं आपको अपनी पहली सच्ची कहानी बताने जा रहा हूं। जल्दी ही और भी कहानियाँ आपके सामने आने वाली हैं। तो मज़े लो दोस्तो, पर पढ़ने के बाद मुझे मेल जरूर करना।
मेरे माता-पिता दोनों टीचर थे। मेरी एक बड़ी बहन है। लगभग 18 साल तक किराए के मकान में रहने के बाद मम्मी-पापा ने सैक्टर में मकान बना लिया। जब हम उस मकान में गए तब मेरी उमर लगभग 18 साल थी। मैं ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता था। मेरा मकान उन दिनो में शहर के सबसे अच्छे सैक्टर में था। कार्नर का मकान था। मुझे बचपन से सैक्सी किताबें पढ़ने तथा सैक्सी तस्वीरें व पोस्टर देखने का बड़ा शौक था। इसी वजह से मैं वक्त से पहले ही सैक्स के बारे में सब कुछ जान गया था।
मेरे अगले तथा साथ वाले मकान में तनु अपने माता-पिता और एक छोटे भाई के साथ रहती थी। तनु के पिता मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी थे। तनु भी मेरी तरह ग्यारहवीं क्लास में मगर किसी दूसरे स्कूल में पढ़ती थी। वो थोड़े लम्बे कद की, पतले और नाजुक जिस्म की तथा बड़े-बड़े स्तनों वाली बहुत सुंदर लड़की थी। मुझे उससे पहली ही नजर में प्यार हो गया था।
पड़ोस का मकान होने की वजह से हम अकसर रोज ही मिलते तथा बात करते थे। मैं और तनु कभी-कभी किताबें या नोट्स लेने के बहाने एक-दूसरे के घर आने-जाने लगे।
एक दिन तनु अपने गेट पर खड़ी होकर अपनी सहेली नीता से बात कर रही थी। वो दोनों कुछ अजीब सी बातें कर रही थी। फिर एक में तीन, एक में जीरो कह कर हंसने लगी।
तनु की सहेली के जाने के बाद मैंने तनु से पूछा- एक में तीन, एक में जीरो क मतलब क्या था?
तनु ने नहीं बताया। मेरे काफी जिद्द करने के बाद उसने बताया कि लड़कियों के नीचे से महीने में दो-तीन दिन खून निकलता है। एक में तीन एक में जीरो का मतलब कल तो तीन बार खून निकला था। मगर आज एक बार भी नहीं निकला।
मैं समझ गया कि वो मासिक-धर्म के बारे में बात कर रही थी क्योंकि मैंने इस बारे में पढ़ा और दोस्तो से सुना था। फिर भी मैंने अनजान बन कर तनु से पूछा- ऐसा क्यों होता है?
तनु बताना नही चाहती थी मगर मेरे काफी जिद्द करने के बाद उसने बताया कि जब लड़कियाँ जवान होती हैं तो लड़कियों के नीचे से हर महीने में दो-तीन दिन खून निकलता है। फिर वो अपने आप बन्द हो जाता है। इसका मतलब अब लडकी माँ बन सकती है।
मैंने फिर अनजान बन कर तनु से पुछा कि ऐसा कैसे होता है? लडकी माँ कैसे बन सकती है?
तनु बताना नही चाहती थी मगर एक बार फिर मेरे काफी जिद्द करने के बाद उसने बताया कि जब लड़के और लड़कियों का मिलन होता है तो लडकी गर्भवती हो जाती है और उसके खून निकलना बन्द हो जाता है। फिर नौ महीने बाद बच्चा हो जाता है।
मैंने फिर अनजान बन कर तनु से पूछा कि लड़के और लड़कियों का मिलन कैसे होता है।
एक बार फिर मेरे काफी जिद्द करने के बाद तनु ने बताया कि जब लड़का अपने लिन्ग को लड़की की योनि के अन्दर डाल कर आगे-पीछे करता है। फिर उसके लिंग से शुक्राणु लड़की की योनि के अन्दर गिर जाते हैं और उससे लड़की गर्भवती हो जाती है।
मैंने इसी तरह से बहुत सी बातें तनु से पूछी और उसने बताई भी। फिर मैंने उससे पूछा कि उसे ये सब कैसे पता चला। तो उसने बताया कि उसके ताऊ जी की लड़की की शादी कुछ दिन पहले ही हुई है। उसी ने उसे ये सब कुछ बताया है।
इस तरह मैं और तनु काफी खुल गये थे। अब मैं अकसर उससे सैक्स की बातें करने लगा। फिर धीरे-धीरे उसको छेड़ने लगा। फिर हमारी छेड़-छाड़ चूमने तक, फिर होंठों पर होंठ का चुम्बन और आखिर में एक-दूसरे के अँगो को चूने, हाथ फिराने और दबाने तक पहुँच गई।
हम जब भी एकांत में होते तो एक-दूसरे से लिपट कर किस करते। मैं हाथों से तनु के बड़े-बड़े स्तन दबाता और वो हाथों से मेरा लण्ड दबाती। हम दोनों को ऐसा करना बहुत अच्छा लगता था। एक बार हम दोनों एक-दूसरे से लिपट कर होंठों का प्रगाढ़ चुम्बन कर रहे थे।
मैं किस करते-करते अपने हाथों से तनु के कुरते के ऊपर से उसके बड़े-बड़े स्तन दबा रहा था और वो अपने हाथों से पैंट के ऊपर से मेरा लण्ड पकड़ कर दबा रही थी। मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया। मैने पैंट की जिप खोल कर अपना लण्ड बाहर तनु के हाथ में पकड़ा दिया। तनु ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था।
तनु मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैंने तनु की सलवार के अन्दर हाथ डाल दिया। फिर मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। फिर कुछ देर बाद मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और ऊपर से ही रगड़ने लगा।
फिर मैं तनु की चूत पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ तनु की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों से तनु की चूत के फाँको में डाल कर रगड़ने लगा। लगभग 5-7 मिनट बाद तनु की चूत से कुछ बहुत चिकना सा निकलने लगा।
इतने में मेरी बहन कालेज से आ गई और हम अलग हो गये। हम सोफे पर आ कर बैठ गये। मेरा लण्ड अभी तक खड़ा था, इसलिए मैं उसे अपनी टांगों के बीच में दबा कर बैठ गया। खैर उस दिन हम बच गये। लेकिन तनु की की चूत से जो कुछ बहुत चिकना सा निकला था, उसकी वजह से मैं उसे चिकनी-चिकनी कह कर चिड़ाने लगा।
इस तरह हम दोनों काफी खुल गऐ थे और एकांत में अकसर ही ये सब करने लगे थे। हमें अकसर ही मौका भी मिल जाता क्योंकि मेरे मम्मी-पापा नौकरी से तथा बहन कालेज से शाम को 5-6 बजे तक आते थे। जबकि मैं और तनु दोनो ही लगभग 2 बजे स्कूल से आ जाते थे।
फिर तनु मेरे यहाँ ह्फ्ते में दो-तीन बार बुक्स य नोटस लेने के बहाने से आ जाती और हम एक-दूसरे को बाँहो में भर कर खूब प्यार करते। हाँ, सैक्स नहीं किया क्योंकि हमें कभी भी दो-तीन घंटे या ज्यादा समय नहीं मिला। बस एक दिन ऐसा समय मिला और उस ही दिन सब कुछ हो गया।
तनु की मेरी बहन से बहुत अच्छी दोस्ती हो ग़ई थी। शाम को अकसर तनु हमारे घर आ जाती। फिर वो और मेरी बहन दोनों पार्क में घूमने चले जाते। हमारा परीक्षा परिणाम आ गया। हम दोनो बहुत अच्छे नम्बरों से पास हो गए। बारहवीं में बोर्ड के पेपर होने थे। इसलिए पापा कहीं बाहर नहीं जाने देते थे। बस घर में रहो और पढ़ते रहो। मम्मी-पापा मार्केट भी अकेले जाते और हम दोनों भाई-बहन को घर ही छोड़ जाते।

एक दिन शाम को तनु घर आई तो मैं घर में अकेला था। मेरी बहन और मम्मी-पापा मार्केट गए थे। हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बातें करने लगे। हमने कुछ देर बातचीत की। फिर तनु घर जाने के लिये खड़ी हो गई।
मैंने उससे कहा,“थोड़ी देर और रुकोगी नहीं? प्लीज़, कुछ देर और रुको ना।”
वो रुकी नहीं और जाने लगी। मैने उसका हाथ पकड़ लिया। वो अपना हाथ छुड़ाने लगी। मैंने उसे धकेल कर दीवार से सटा दिया और उसके माथे को चूमा। फिर उसके गालों को चूमने लगा। तनु के सर के पीछे स्विच-बोर्ड था। अचानक उसका सर स्विच पर लगा और लाईट बन्द हो गई। तनु एकदम अन्धेरा होने से डर गई और मुझसे लिपट गई।
मैंने उसे अपने सीने से चिपका लिया। मैंने अपने हाथो में तनु का चेहरा थाम लिया और फिर मैंने अपने जलते हुए होंठ तनु के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।
तनु ने भी मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मैं तनु को किस करते-करते मै उस के बालों में हाथ फिराने लगा, उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी टी-शर्ट के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। कुछ देर बाद मैं उसकी टी-शर्ट के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके वक्ष को दबाने लगा और उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा।
तनु बोली “क्या करते हो? दीदी और अंकल-आन्टी आने वाले होंगे।”
मैंने कहा,“चिंता मत करो। वो सब दो-तीन घंटे तक नही आँएंगे और जब आएँगे तो गाड़ी का हॉर्न बजा कर सामान ले जाने के लिये मुझे बुलाएँगे। जब मै सामान लेने जाउँगा तब तुम कपड़े पहन कर पिछ्ले दरवाजे से घर चली जाना। किसी को पता भी नही चलेगा।”
हमारा मकान कॉर्नर का है, जिसका पिछला दरवाजा पीछे गली में खुलता है। तनु यह बात जानती थी। इसलिये वो कुछ नहीं बोली।
मैंने मुख्य दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मैं तनु का हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम में ले आया और बेडरूम की फुट-लाईट जला दी। कमरा धीमी लाल रौशनी से भर गया। मैंने तनु को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।
तनु ने भी मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ तनु के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैने तनु को बैड पर लिटा दिया। फिर उसकी बगल में लेट कर उसके गालों को चूमने लगा। फिर मैंने तनु की टी-शर्ट ऊपर करके उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुऐ होंठ रख दिए और उसके नरम-नरम, गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों से चूमने लगा। तनु के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी।

मैं उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा तो तनु ने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसकी टी-शर्ट उतार कर बैड पर फैंक दी। तनु के बड़े-बड़े ओर गोरे-गोरे स्तन सफेद ब्रा में फँसे थे। मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। तनु ने अपनी आंखें बंद कर ली। फिर मैं उसकी ब्रा के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी सख्त हो चुकी चूचियों को दबाने लगा।
कुछ देर बाद मै उसकी ब्रा के हुक खोल कर उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिराने लगा। फ़िर मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी और दोनो कबूतरों को आज़ाद कर दिया और उन्हें पकड़ कर मसलने लगा। साथ-साथ उसके गुलाबी चूचुकों को हल्के-हल्के मसलने लगा।
फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे स्तनों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। फिर मैं उसके पेट पर हाथ फिराते हुऐ उसकी लोअर के अन्दर ले गया और उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा। फिर कुछ देर तक उसकी चूत पर हाथ फेरने के बाद मैं अपनी हथेली से उसकी चूत को दबाने लगा। वो बहुत गरम हो चुकी थी और मेरे सर पर हाथ फेर रही थी, अपने होंठ चूस रही थी। फिर मैं उसके लोअर को खींच कर उतारने लगा।
तनु बोली “प्लीज़ ! इसे मत उतारो। कोई आ जाएगा।”
मैंने कहा “ओफोह तनु, चिंता मत करो, कोई नही आँएंगा।”
तनु बोली “प्लीज़ ! मुझे डर लगता है।”
मैंने कहा “प्लीज़ ! तनु डरने की क्या बात है। मेरे होते हुऐ तुम चिंता मत करो। कोई नही आँएंगा। मैं तुम्हें प्यार करता हूँ ! बहुत प्यार करता हूँ ! तुम मेरी हो ! प्लीज़ ! मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ ! प्लीज़ ! तनु, मैं आज तुम्हें अपने सामने नंगी देखना चाहता हूँ ! प्लीज़ !”
तनु यह बात सुनकर कुछ नही बोली। मैं फिर उसके लोअर को उतारने लगा। अब तनु ने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसका लोअर उतार कर फेंक दिया। तनु ने लाल पैन्टी पहनी हुई थी। फिर मैंने अपने भी सारे कपड़े उतार दिये और सिर्फ चड्डी में तनु से लिपट गया।
फिर मैं उसकी पैन्टी के उपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। तनु ने अपनी आंखे बंद कर रखी थी। फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर बाद मै उसकी पैन्टी को खींच कर उतारने लगा।
तनु बोली “क्या कर रहे हो। प्लीज़ ! इसे मत उतारो। कोई आ जाएगा। मुझे शरम आ रही है।”
मैंने कहा “अपनी आँखें बन्द कर लो। नहीं आएगी।”
तनु बोली “प्लीज़ ! इसे मत उतारो। मुझे डर लगता है।”
मैंने कहा “प्लीज़ ! तनु डरने की क्या बात है।”
तनु बोली “प्लीज़ ! राज़, मैं भी तुम्हें प्यार करती हूं लेकिन यह ठीक नहीँ है ! प्लीज़ ! इसे मत उतारो। मुझे बहुत ही गलत लग रहा है।”
मैंने कहा “प्लीज़ ! तनु, इसमें कुछ गलत नहीं है। प्यार में कुछ गलत नहीं होता। प्लीज़ ! तुम अपनी आँखें बन्द कर लो और मुझ पर भरोसा रखो।”
तनु बोली “प्लीज़ ! मुझे डर लगता है।”
मैंने कहा “प्लीज़ ! तनु कुछ करेंगे नही। बस कपड़े उतार कर नंगे एक दूसरे से लिपट कर लेटेंगे और खूब प्यार करेंगें।”
यह कह कर मैंने लगभग जबरदस्ती ही उसकी पैन्टी उतार दी। तनु का नंगा बदन लाल रोशनी में नहाकर लाल हो गया।
मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और चड्डी फाड़ कर बाहर आने को हो रहा था। मैंने चड्डी उतार कर फेंक दी। फिर मैं तनु से लिपट गया। मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया और एक हाथ उसके वक्ष पर रख कर उसे दबाने लगा। वो और गरम होने लगी थी। फिर मैंने तनु को अपने साथ सटा कर लिटा लिया। मेरा लण्ड तन कर तनु की चिकनी टांगों से टकरा रहा था। मैं तनु की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। वो सिस्कारियां लेने लगी।
मौके की नज़ाकत को समझते हुए मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और ऊपर से ही रगड़ने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगली तनु की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों से तनु की चूत के फाँको को खोलने और बन्द करने लगा।

फिर तनु की चूत के ज़ी-पॉन्यट को रगड़ने लगा। तनु ने मस्त होकर अपनी आंखे बंद कर ली। मेरा लण्ड तनु की जांघों से रगड़ खा रहा था। मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। तनु ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया और अपने हाथ में दबाने लगी। लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। तनु मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर आगे-पीछे करने लगी। मैं तनु की चूत मारने को बेताब हो रहा था।
मैंने तनु को कहा “प्लीज़ ! तनु ! प्लीज़ ! बहुत मन हो रहा है। प्लीज़ ! हम कर लें क्या?”
तनु कुछ नहीं बोली। मैंने इसे ही तनु की हाँ समझ लिया। मै तनु के ऊपर लेट गया। तनु का नंगा जिस्म मेरे नीचे दबा हुआ था। वो मदहोश होने लगी और उसकी आंखें बंद होने लगी। मैं उसके बूब्स चूसने लगा। वो बस सिसकारियां ले रही थी। मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाल दी, वो मछली की तरह छटपटाने लगी और अपने हाथों से मेरा लण्ड टटोलने लगी। मेरा लण्ड पूरे जोश में आ गया था और पूरा खड़ा हो कर लोहे जैसा सख्त हो गया था। वो मेरा लण्ड पकड़ कर जोर जोर से हिलाने लगी। फिर तनु मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी। कुछ देर बाद तनु की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था।
अब मैंने उसकी टांगें चौड़ी की और अपने 8″ लम्बा और ३” मोटे लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख कर धीरे से उसकी चूत में घुसा दिया। वो चिल्लाने लगी “प्लीज़ इसे बाहर निकालो, मैं मर जाउंगी !”
मेरा और तनु का यह पहला ही सैक्सपिरियन्स था और मैंने पढ़ भी रखा था और अपने कुछ सैक्सपिरियन्स दोस्तों से सुन भी रखा था कि पहली बार लड़की की चूत में लण्ड घुसाने से लड़की को बहुत दर्द होता है और खून भी निकलता है। इसलिए मैं वहीं रुक गया और उसे प्यार से सहलाने लगा, उसके बूब्स चूसने लगा।
फिर मैंने तनु को अपनी बाँहो में भर लिया, अपने जलते हुऐ होंठ तनु के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए। कुछ देर बाद उसका दर्द भी कम हो गया। मैंने फिर जोर से एक झटका मारा और मेरा लगभग ३’ लण्ड उसकी चूत के अंदर घुस गया। उसकी आंख से आंसू निकल आये थे।
मैं फिर रुक गया और उसे फिर से प्यार से सहलाने लगा। तनु सिसक रही थी। फिर थोड़ी देर बाद मैंने तीसरा और आखिरी धक्का दिया तो मेरा पूरा लण्ड तनु के कौमार्य को चीरता हुआ चूत में समा गया।
तनु के मुँह से जोर से आह निकली और वो जोर से चिल्लाई “आहह्ह, मर गई।” और उसने अपने दोनो हाथों से बैड के गद्दों को पकड़ लिया।
मैं रुक गया और बोला “प्लीज़ ! तनु, अब दर्द नहीं होगा।”

उसने बैड के गद्दों को छोड़ कर मुझे अपनी बाँहो में से कस लिया। मैंने भी तनु को अपनी बाँहो में भर लिया। मेरा पूरा लण्ड तनु की चूत के अन्दर समाया हुआ था। जब थोड़ी देर में वो सामान्य हो गई तब उसने मुझे अपनी बाँहो में पूरी ताकत से कस लिया और हम एक दूसरे में पूरे तरीके से समा गए थे।
कुछ देर हम ऐसे ही एक-दूसरे से चिपके रहे। तब मैं धीरे धीरे लण्ड को उसकी चूत में आगे-पीछे करने लगा। अब उसका दर्द भी खत्म हो गया था, वो जोश में आ रही थी और अपनी कमर हिलाने लगी थी। उसकी चूत में से खून बाहर आ रहा था जो इस बात का सबूत था कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी थी और आज उसकी सील मैंने तोड़ी है। उसकी चूत बहुत टाइट थी और मेरा लण्ड बहुत मोटा इसलिए बहुत मजा आ रहा था।
मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे से तनु की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। फिर कुछ देर बाद तनु ने अपनी टांगें ऊपर की तरफ मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। धीरे-धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी। अब मेरा लण्ड तनु की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मैं तनु की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मार रहा था। हम दोनों सैक्स के नशे में चूर हो रहे थे। तनु को भी मजा आने लगा था। वो जोर जोर से अपने चूतड़ हिला रही थी और मैं तेज़ तेज़ धक्के मार रहा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी।
उसने मेरे हिप्स को अपने हाथों में थाम लिया। अब वो भी नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने हिप्स ऊपर-नीचे कर रही थी। जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपने हिप्स ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने हिप्स पीछे खींच लेती। मैं तेज-तेज धक्के मार कर तनु को चोदने लगा। फिर मैं बैड पर हाथ रख कर तनु के ऊपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड तनु की चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था। तनु भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। वो मदहोश हो रही थी।
मैंने रुक कर तनु से पूछा,“तनु ! अच्छा लग रहा है क्या?”
तनु बोली “हाँ बहुत अच्छा लग रहा है। प्लीज़ ! रुको मत। तेज-तेज करते रहो। ओर हा प्लीज़ ! मेरे अन्दर डिस्चार्ज मत होना। मुझे डर लगता है। कहीं कुछ हो ना जाये। इसलिये प्लीज़ ! जैसे ही तुम होने लगो तो इसे बाहर निकाल लेना और बाहर ही डिस्चार्ज हो जाना। प्लीज़ ! ध्यान रखना। कहीं मेरे अन्दर मत हो जाना। जैसे ही होने लगो तो इसे तुरन्त ही बाहर निकाल लेना। ओके। चलो अब रुको मत। और तेज-तेज करते रहो।”

तनु के मुँह से ये सुन कर मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मैंने तनु के हिप्स को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शाट मार कर तनु को चोदने लगा।
तनु के मुँह से मस्ती में निकल रहा था,“ओह्ह्ह्ह्ह्होहोहोह सिस्स्स्स्स्स्सह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाहाह्ह्हआआआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ ! तेज-तेज करो।”
तनु ने अपने हाथों से मेरी कमर को जकड़ लिया और अपनी टांगें ऊपर की तरफ करके मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। मैं तनु के होंठों अपने होंठों से चूसते हुऐ उसे तेजी से चोदने लगा। मेरा लण्ड सटासट तनु की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मैं तनु की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मार रहा था।
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ने वाली थी, तभी हम दोनों एक साथ अकड़ गये। एक साथ जोर जोर से धक्के मारने लगे। फिर अचानक तनु ने मुझे कस कर अपनी बाँहों में भर लिया। उसने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग करके एक जोर से आह भरी। मै समझ गया कि तनु डिस्चार्ज हो गई है। मैं थोड़ा रुक सा गया।
तभी तनु मेरे कान में फुसफुसा कर बोली,“राज, मैं तो हो गई हूँ। प्लीज़ ! तुम भी जल्दी से हो जाओ। और हाँ प्लीज़ ! मेरे अन्दर मत होना। मुझे डर लगता है। जब तुम होने लगो तो इसे बाहर निकाल लेना और मेरे बाहर ही डिस्चार्ज हो जाना। प्लीज़ ! जैसे ही होने लगो तो इसे तुरन्त ही बाहर निकाल लेना। ओके। चलो अब रुको मत। ओर तेज-तेज करके जल्दी से हो जाओ।”
मै भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये मैं तेज-तेज धक्के मारने लगा। लगभग 1 मिनट तक तनु को तेज-तेज चोदने के बाद मैंने अपना लण्ड तनु की चूत के बाहर खींच लिया और उसकी चूत के ऊपर डिस्चार्ज हो गया। तनु की चूत के काले घुंघराले बालो में मेरे वीर्य की बून्दें लाल रौशनी में चमक रही थी।
फिर मैं उसकी बगल में लेट कर अपनी तेज चलती साँसों के सामान्य होने का इन्तज़ार करता रहा। फिर मैंने अपने अन्डरवियर से तनु की चूत के ऊपर पड़े अपने वीर्य को साफ कर दिया और फिर तनु की बगल में लेट गया। तनु भी मेरे साथ अपनी आँखें बंद करके लेटी हुई अपनी सांसों के काबू में आने का इंतजार कर रही थी। फिर हमने उठ कर कपड़े पहन लिये। बैड की चादर पर तनु की चूत से निकला खून पड़ा था। मैंने तुरन्त डस्टिग़ वाला कपड़ा लेकर चादर से खून साफ कर दिया और पंखा चला दिया ताकि चादर जल्दी सुख जाए। फिर तनु घर जाने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
फिर मैंने उससे कहा “प्लीज़ ! कुछ देर ओर रुको ना।”
वो अपना हाथ छुड़ाने लगी और बोली,“क्या करते हो? दीदी और अंकल-आन्टी आने वाले होंगे। मैं जा रही हूँ।”
वो जाने लगी। मैने उसे धकेल कर दिवार से सटा दिया, उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। फिर मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी टी-शर्ट के उपर से उसके स्तनों को दबाने लगा।
वो एकदम छिटक कर अलग हो गई और बोली,“क्या करते हो? बड़े गन्दे हो। इतना सब कुछ हो गया। फिर भी चैन नहीं है।”
उसने हाथ हिला कर बाय किया। फिर वो दरवाजा खोल कर तेजी से अपने घर जाने लगी। मै उसे जाते देखता रहा। मेरा तनु के साथ ये मेरा पहला और आखिरी सैक्सपिरियस था। इसके बाद हम चाहते हुऐ भी दोबारा सैक्स नहीं कर सके क्योंकि पहले तो बारहवीं के पेपर, फिर दोबारा इतने समय के लिये ना मिल पाना तथा पेपर के बाद तनु के पापा का जीन्द ट्रांस्फर हो जाना। पेपर के बाद तनु अपने परिवार के साथ जीन्द चली गई। फिर चाहते हुऐ भी दोबारा नही मिल सके और हमारे प्यार की कहानी यहीं खत्म हो गई।

loading...

Leave a Reply