रंडीबाजी

बादशाह अकबर को एक बार रंडीबाजी का शौक लग गया ! रोज़ शिकार के बहाने नगर की रंडियों के पास जाते ताकि जोधाबाई को पता ना चले ! और अगले दिन बीरबल को अपनी रंडीबाजी के किस्से सुनाते ! बीरबल की झांटो में आग लग जाती थी कि बादशाह अकेले अकेले चले जाते हैं मुझे छोड़ कर !
एकदिन बादशाह अकबर इसे ही बीरबल को अपनी बीती रात की रंडी बाज़ी की घटना का बखान कर रहे थे !
बीरबल की गांड में मिर्चें लग रही थी !
बीरबल अचानक बोल पड़ा – जहाँपना ! अगर बुरा ना माने तो एक बात कहूँ !
“बोलो बीरबल ! ” अकबर बादशाह ने इजाज़त दी !
“जहाँपना ! जितनी रंडियां आपने सपने में भी नहीं देखी होंगी उससे कहीं ज्यादा तो मैं चोद चुका हूँ ! इस नगर की किसी भी रंडी की चूत का बाल सूंघकर उसका नाम बता सकता हूँ ! ” ताव खाकर बीरबल ने बोल तो दिया पर डर के मारे उसकी गांड हवा लेने लगी कि अब बादशाह सलामत उसका क्या करेंगे !
अकबर ने कहा -” ठीक है बीरबल ! हम तुम्हे रंडी की चूत का बाल लाके देंगे लेकिन अगर तुमने नहीं पहचाना तो हम सबके सामने तुम्हारी गांड नगर के कुत्तो से मरवायेंगे ! ”
बीरबल भी अपने एरिया का महान रंडीबाज़ था इसलिए उसने भी चैलेंज एक्सेप्ट कर लिया और सोच लिया कि जो होगी देखी जायेगी !
अब अगले दिन अकबर ने बीरबल को रंडी की चूत का बाल लाके दिया -“बीरबल ! बता सूंघकर कौन ?”
“ये तो धन्नोबाई की चूत का बाल है !” बीरबल सूंघते ही बोला !
अकबर की गांड पानी -पानी हो गयी ! अगले दिन फिर रंडी की चूत का बाल लाया -” मुन्नीबाई !”
“जमनाबाई “!
बीरबल सब के बाल सूंघकर बताता गया ! अब बादशाह अकबर की हवा खिसकने लगी कि ये मादरचोद बीरबल तो सही में उनसे भी बड़ा रंडीबाज़ है ! पर हार मान जाते तो बेईज्ज़ती होती ! इस डर से अगले दिन बादशाह सलामत अपनी बेगम जोधाबाई की चूत का बाल बीरबल को लाकर देते है यह सोच कर कि बीरबल इसे तो बिलकुल पहचान ही नहीं पायेगा !
” लो बीरबल जरा ये बाल सूंघकर बताओ !” बादशाह अकबर जोधाबाई की चूत का बाल बीरबल को देते हुए बोले !
बीरबल ने बाल को सुंघा और एकदम सकपकाकर बोला – गुस्ताखी माफ़ हो जहाँपना ! मैं शर्त हार गया पर ये तो बताये कि बेगम साहिबा को रंडीपने की बीमारी कब से लगी ! ”

अकबर बादशाह बहुत ही समझदार किस्म के इंसान थे ! अपने राज्य की हर समस्या को चुटकियों में सुलझा देते थे ! पर कई बार वो खुद फंस जाते थे तो बीरबल को याद करते थे ! बीरबल उनसे भी ज्यादा बुद्धिमान आदमी था ! कितनी भी बड़ी से बड़ी समस्या हो बीरबल उसका हल निकल ही लेता था !
बादशाह अकबर को बीरबल से जलन होने लगी कि ये साला बीरबल हर झांटो की तरह उलझी समस्या को भी ऐसे सुलझा देता है जैसे कोई समस्या हो ही नहीं !अकबर हर समय बीरबल को नीचा दिखने की सोचता रहता है !पर मौका नहीं मिलता !
एक दिन अकबर बीरबल से कहता है कि -” बीरबल ! शहर के किसी अच्छे चित्रकार को बुलवाओ !”
बीरबल-“जो हुक्म जहाँपनाह !”
चित्रकार को पेश किया जाता है ! अकबर चित्रकार को अकेले में ले जाकर कहता है कि भई दो पेंटिंग बनानी हैं !
एक मेरे बाप की यानि कि हुमायूं की और एक बीरबल के बाप की !
चित्रकार-” ठीक है जहाँपनाह ! काम हो जायेगा !”
“अबे पहले सुन तो ले लंडरदीन चित्रकार कि पेंटिंग बनानी कैसे हैं !”-बादशाह ने चित्रकार को धमकाया !
चित्रकार -” बोलिए हुज़ूर !”
मेरे अब्बाजान की पेंटिंग में उनका पोज़ हाथ जोड़े हुए होना चाहिए और बीरबल के बाप का पोज़ कुछ इस तरह हो कि एक हाथ में रोटी और एक हाथ में लंड पकडे हों !”-बादशाह अकबर ने चित्रकार को समझाया !
चित्रकार मन ही मन अकबर की मादरचोदगिरी पे हँसता हुआ चला जाता है यह बोल कर कि १ महीने में वो पेंटिंग बना देगा !
१ महीने बाद चित्रकार पेंटिंग भरे दरबार में ले कर पहुचता है ! अकबर पेंटिंग देखकर गांडू हंसी हंसते हुए बीरबल कि चुटकी लेते हैं !
“बीरबल ये देखो हमारे अब्बूजान कितने शरीफ और सज्जन आदमी थे कैसे हाथ जोड़े खड़े हैं ! और तुम्हारे पिता जी कितने हरामी और बेशरम किस्म के इंसान थे देखो कैसे एक हाथ में लंड और एक हाथ में रोटी लिए खड़े हैं !”
जिसका नाम बीरबल वो भला कैसे चुप रहे बीरबल ने बड़े ही शालीनता से जवाब दिया -” गुस्ताखी माफ़ हो जहाँपनाह ! जहाँ तक पेंटिंग देखकर मेरी समझ में आता है वो ये है कि आपके वालिद साहब हाथ जोड़कर मेरे पिता जी से रोटी मांग रहे हैं और मेरे पिता जी कह रहे है कि रोटी नहीं दूंगा लंड चाहिए तो ले ले !”
यह सुनकर अकबर का मुंह मुरझाये लंड कि तरह लटक जाता है !

अकबर बादशाह को मुर्गियां पालने का बड़ा शौक था , उनके पास कई किस्म की मुर्गियां थी ! उनमे से एक देसी मुर्गी अकबर को बड़ी पसंद थी वो उस मुर्गी को दरबार में अपने साथ भी ले जाते थे !
बीरबल की गद्दी अकबर बादशाह की गद्दी के पास ही थी !
मुर्गी अक्सर बीरबल की गद्दी पे बीट कर देती थी जिससे बीरबल के कपडे ख़राब हो जाते थे ! बीरबल की गांड बहुत सुलग जाती थी ये देखकर पर ,क्या करे बादशाह से मुर्गी कि शिकायत कैसे करे !
एक दिन तो हद ही हो गयी भरे दरबार में मुर्गी ने बीरबल के सर पे बैठ कर बीट कर दी !बीरबल की झांटे फुंक गयी !
“जहाँपनाह ! इस मुर्गी को यहाँ मत लाया कीजिये वर्ना में इसे मार डालूँगा !”
“ख़बरदार! बीरबल अगर तुम इस मुर्गी को मारोगे तो मैं भी तुम्हे उसी तरीके से मारूँगा जिस तरीके से तुम मुर्गी को मारोगे !”
यह सुनकर बीरबल की गांड फट गयी ! पर बीरबल भी पक्का मादरचोद था ! उसने अपनी गांड खुजाई !और बोला –
“ठीक है जहाँपनाह ! मैं मरने के लिए तैयार हूँ बशर्ते आप मुझे खुद वैसे ही मारें जैसे मैं मुर्गी को मारूँ ! ”
अकबर की गांड में मिर्ची सी लग गयी !
“ठीक है बीरबल अगर तू मरना ही चाहता है तो मार ले मेरी मुर्गी “!
बीरबल ने मुर्गी पकड़ी और नाडा खोलकर अपना पायजामा उतारा और मुर्गी की गरदन अपनी गांड में डालकर तोड़ दी..

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