मैं ओर मेरी मसाला मैगी

14th फेब….. वॅलिंटाइन डे- आ डे ऑफ लवर्स…..

रीतिका: तुम क्यों मेरे पीछे पड़े हुए हो? क्या चाहते हो…. प्लीज़ लीव मे…

जॉन: देखो मुझे बस मेरे सवाल का जवाब दे दो….

रीतिका: अगर इस बार तुमने मुझसे एक वर्ड ओर कहा तो देख लेना मैं इस स्विम्मिंग पूल मे कूद जाऊंगी, ओर मुझे तैरना भी नही आता….अब अगर मुझे कुछ हो गया तो तुम्हारा क्या होगा ये तुम खुद सोच लो…

जॉन: प्लीज़ मुझे ग़लत मत समझो…. मैं ऐसा नही हूँ जैसा तुम समझ रही हो……. रीईईईटत्त्तत्त…………जॉन ओर कुछ बोल पता उससे पहले रीतिका जंप कर चुकी थी…..

चहाआअप्प्प्प्पााअक्ककककक की आवाज़ के साथ रीतिका उस गहरे स्विम्मिंग पूल मे अपने सर को बार बार उपर लाकर साँस लेने की कोशिश कर रही थी….

जॉन के दिमाग़ ने जैसे काम करना बंद कर दिया ओर अगले ही पल वो भी स्विम्मिंग पूल के गहरे पानी मे अपने हाथ पैरों को इधर उधर चला रहा था…. उसे अपने चिंता ज़रा भी नही थी,

चिंता थी तो बस रीतिका की…. वो जैसे तैसे रीतिका के पास पहुँचा ओर खुद नीचे पानी मे डूबते हुए उसके पैरों को पकड़ कर उसे उपर उठाने लगा…… उसके लंग्ज़ के अंदर ऑक्सिजन धीरे धीरे कम होने लगी…..

उसकी आँखों के सामने अंधेरा बढ़ने लगा लेकिन अपनी आखरी सांस तक वो रीतिका को उपर उठाता रहा…. ऐसा लग रहा था की जैसे वो अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा अपने से काट कर रीतिका की जिंदगी मे जोड़ देना चाहता हो….

ओर हुआ भी ऐसा ही…. जॉन की साँसें उसका साथ छोड़ने लगी उसकी आँखें उबल कर बाहर आ गयी लेकिन वो एक बार भी सांस लेने के लिए उपर नही आया

वो जनता था की अगर उसे उपर हवा मे आना पड़े तो उसके लिए उसे रीतिका को छोड़ना होगा जो उसे बिल्कुल भी मंजूर नही था…..

आख़िर कब तक उसकी सांस उसका साथ दे पाती ओर अचानक से ढेर सारा पानी उसके मूह से होता हुआ उसके पेट मे ओर उसके लंग्ज़ मे भर गया ओर जॉन की आँखें बंद हो गयी……….

रीतिका की बॉडी को जो सपोर्ट नीचे से मिल रहा था वो मिलना बंद हो गया ओर उसके पैरों पर जॉन की पकड़ भी ढीली होने लगी…..

रीतिका ने एक गहरी सांस ली ओर पानी मे नीचे जाते हुए जॉन की निर्जीव (अनकॉन्षियस) बॉडी को अपने हाथों मे भरा ओर उपर ले आई ओर उसे स्विम्मिंग पूल से बाहर लाकर

उसके पेट से पानी निकलते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर अपने मूह से उसके सिने मे अपने साँसे भरने लगी………..

ये सब करते हुए उसकी आँखों मे गुज़रा हुआ पिछला एक हफ़्ता घूमने लगा जैसे की मोविए उसके सामने शुरू हो गयी हो……

एक हफ्ते पहले……..
प्लेस: बाय्स हॉस्टिल टाइम: 6:15 (लगभग)

नितिन: उठ बे….कब तक सोता रहेगा…..

जॉन(जमहाई लेते हुए): सोने… दे ….. य्ाआरररर…. अभी …… अभी तो नींद आई थी….

नितिन: क्यों बे क्या रात भर उसी इंजिनियरिंग मेकॅनिक्स वाली कोमल मेडम के ख्वाब देखता रहा …

जॉन: शाले बोल तो ऐसे रहा है जैसे खुद कितना बड़ा शरीफ है, मैं अच्छे से जनता हूँ की अगर वो तेरे हाथ लग जाए तो तू उसका मेकॅनिसम ही बदल देगा…. शाला बात करता है…

अंड फॉर युवर काइंड इन्फर्मेशन रात 2 बजे तक जाग कर सारे असाइनमेंट्स कंप्लीट कर लिए है भाई ने…. अब बोल शाले बड़ा प्रवचन दे रहा था…..

अब वही कोमल मेडम जब तेरी इंजिनियरिंग का डिस्क्रिप्षन पूरे बॅच के सामने करेंगी तो देखूँगा की तू कितना बोलता है…

नितिन: भाई तेरे इस भाई ने भी कच्ची गोलियाँ नही खेली है, यूँ ही ना मैं उस रीना को घास डालता हूँ, आज मेरे सारे असाइनमेंट वो ही बना कर ला रही है…. अब बोल कैसी रही…

जॉन: शाले तू तो बड़ा उस्ताद निकला…..मान गये गुरु….

नितिन: शाले मानना बाद मे अब जल्दी से तैयार हो जा वरना सारे असाइनमेंट्स क्लास रूम के बाहर ही चेक कराने पड़ेंगे…..

लगभग डेढ़ घंटे बाद कॉलेज कॅंटीन मे…..

नितिन: देख भाई सारे असाइनमेंट रेडी है अपने तो….

जॉन: अच्छा ठीक है ना….अब ये बता ब्रेकफास्ट मे क्या लेगा?

नितिन: भाई आज पता नही क्यों अंदर से कुछ ख़ुसी की उम्मंगे सी उठ रहै है तो आज कुछ खास हो जाए…

जॉन: ओके आस यू विश…. तू बैठ मैं लता हूँ….

ब्रेकफास्ट करने के बाद दोनो क्लास रूम की तरफ बढ़ते है ओर अंदर जाकर दोनो अपने असाइनमेंट चेक करते है.

कोमल मेडम: जॉन हू प्रिपेर दीज़ असाइनमेंट्स……..ये असाइनमेंट किसने प्रिपेर किए है..

जॉन: वॉट हॅपन मा’आम, इस देर एनितिंग रॉंग? ये मैने खुद लिखे है रात 2 बजे तक जाग कर..

कोमल मेडम: नो नो एवेरितिंग इस फाइन…. आक्च्युयली यू डिड आ गुड जॉब. आइ’म इंप्रेस्ड…

जॉन: थॅंक्स मा’आम….

कोमल मेडम: अंड यू नितिन आप क्या काहगे अपने असाइनमेंट्स के बारे मे…

नितिन: मैने मैने भी खुद ही प्रिपेर किए है…

कोमल मेडम: मुझे तो नही लगता….टेल मे ट्रूथ…

नितिन: आक्च्युयली मा’आम योउ अरे राइट, मेरे हाथ मे मोच आ गयी थी तो ये लिखे मैने नही है बस डिकटेट किए है, ये मैने अपने एक फ्रेंड से लिखवाए है…

वैसे मा’आम यू आर जीनियस… हॅट्स ऑफ टू यू….

कोमल मेडम: ओके ओके अब जयदा बटरिंग मत करो…. अंड जॉन कॅन यू दो मे आ फेवर प्लीज़..

जॉन: वाइ नोट मा’आम…शुवर ई विल डू…

कोमल मेडम: थॅंक्स… आक्च्युयली मेरे पास टाइम नही है ओर मेरी एक स्टूडेंट सिम्मी को ये असाइनमेंट्स समझने है… तो क्या तुम उसकी हेल्प कर दोगे… मैं उसे तुम्हारा नंबर दे दूँगी…..

नितिन: ऑफ कोर्स मा’आम जॉन इस वेरी हेल्पिंग गाइ… ओर अगर ज़रूरत पड़ी तो “मैं हूँ ना…. “

नितिन ने ये बात बड़ी ही स्टाइल मे कही थी जैसे शाहरुख ख़ान को वो ही आक्टिंग कोचैंग देता हो….

लंच टाइम मे जॉन का फोन रिंग होता है ओर स्क्रीन पर एक अननोन नंबर फ्लैश होता है…..

जॉन: अब ये किसका फोन आ गया..

नितिन जॉन का फोन उससे लेता है ओर कॉल रिसीव करता है….

नितिन”: हेलो हू इस दिस?

उधर से एक बहुत ही मीठी सी आवाज़ आती है..हेलो मैं सिम्मी हूँ, मुझे आपका नंबर कोमल मा’आम ने दिया था, उन्होने अपकको बताया होगा…

नितिन: ओ एस… उन्होने बताया था…. सो हाउ कॅन आइ हेल्प यू….

सिम्मी: मुझे इंजिनियरिंग मेकॅनिक्स की कुछ यूनिट्स क्लियर नही हो रही, अगर आप मेरी कुछ हेल्प कर दो तो…

नितिन: ओक… यौर प्लेस ओर माइन…

सिम्मी: वॉट?

नितिन: आइ मीन मैं कहाँ बैठ कर आपके ये यूनिट्स क्लियर करा सकता हूँ? ये आपकी चाय्स है……

सिम्मी: ओके क्या आप कॉलेज के बाद मेरे घर आ सकते है, यहीं कॉलेज के पास मे ही है….

नितिन: ओके मुझे अपना अड्रेस स्मस कर दो…. आंड आपका कंफर्टबल टाइम भी…..

सिम्मी: ओक थॅंक्स बाइ…

जॉन: कों था बे … तू तो चिपक ही गया था फोन पर..

नितिन: भाई क्या आवाज़ है शाली की….. वो मेडम ने बताया था की जिसे कुछ यूनिट्स क्लियर करनी है… सिम्मी नाम है भाई… सोच अगर नाम ओर आवाज़ इतनी स्वीट है तो खुद क्या होगी….

जॉन: तू एक काम कर तू ही चला जाना उसे पढ़ाने…. ओर हाँ इंजिनियरिंग मेकॅनिक्स ही पढ़ना कब्भी कुछ ओर ही पढ़ा दे…..

तभी उसका स्मस आया जिसमे उसका अड्रेस ओर टाइम लिखा था…. उसके दो मिनट बाद ही सिम्मी का एक ओर स्मस आया की अगर उसे कोई प्राब्लम ना हो तो क्या उसकी एक फ्रेंड भी आ सकती है क्या…

नितिन: ये लड़कियाँ भी ना… कितनी डरती है यार, अब मैं क्या उसे अकेला पाकर उसे खा जाता… सहेली साथ मे रहेगी… आ गयी कबाब मे हड्डी….

जॉन (हेस्ट हुए): बेटा तुझे नही पता की लड़कियों की सिक्स्त सेन्स बड़ी सॉलिड होती है….उसे भी तेरे नापाक इरादो का एहसास हो गया होगा….

नितिन: चल ठीक है अब तो तू भी मेरे साथ चल सकता है ना …. दोनो भाई मिलकर पढ़ा देंगे….. ओर उसने सिम्मी को रिप्लाइ स्मस भेज दिया…

शाम 5 बजे सिम्मी के घर पर….

जॉन ओर नितिन सिम्मी के बताए अड्रेस पर पहुँचे ओर गार्ड ने उन्हे ड्रॉयिंग रूम तक पहुँचा दिया, नितिन ने सिम्मी को पहले ही स्मस कर दिया था जिस कारण सिम्मी पहले से ही वहाँ मोजूद थी ओर उसने उन दोनो का वेलकम किया…..उनके बीच इंट्रो हुआ.

सिम्मी अपने नाम की ही तरह बहुत स्वीट थी ओर ये कह पाना बहुत मुस्किल था की कों ज़्यादा स्वीट है वो या उसकी आवाज़….. नितिन तो उसे देखते ही उसका दीवाना हो गया ओर बिना पलके झुकाए उसे निहारने लगा….

सिम्मी नितिन ओर जॉन को स्टडी रूम ले गयी, ये रूम वेल अरेंज्ड था ओर स्टडी टेबल के पास चार चेर्स थी ओर साथ मे एक बुक सेल्फ़ थी जो बुक्स से अच्छी तरह सुससज्जित थी.

सिम्मी ने दोनो को बैठा कर पूछा की आप क्या लेंगे टी ओर कोल्ड ड्रिंक…..

इससे पहले की जॉन या नितिन कुछ बोल पाते एक आवाज़ ने उन दोनो को अपनी तरफ मुड़ने को मजबूर कर दिया…

स्वीटहार्ट पेश है तुम्हारे सामने गरमा गर्म लज़ीज़ “मैं ओर मेरी मशाला मैगी” ……

जॉन ओर नितिन ने जैसे ही पलट कर देखा सामने एक पतली दुबली लड़की दो प्लेट्स लेकर खड़ी थी ओर उसमे से जो स्टीम निकल रही थी वो बड़ी ही टेंप्टिंग थी….

देखने मे रीतिका एक सिंपल सी लड़की थी उसने स्पेक्ट्स पहने थे ओर उसके कर्ली हेर्स उसकी चेहरे के दोनो तरफ लटक रहे थे….

सिम्म्मी: गाइस मीट माइ फ्रेंड रीतिका…..अंड रीतिका ये …..

नितिन: हाई आइ अम नितिन अंड ही इस माइ फ्रेंड जॉन…..

रीतिका: ही नितिन, ग्लॅड तो मीट यू….. हाई जॉन…… उसने जॉन की तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन जॉन तो ना जाने कहाँ खो चुका था…

नितिन ने जॉन का कंधा हिला कर उसे उसके ख़यालो से निकाला ओर जॉन ओर रीतिका का इंट्रो करवाया…..

इंट्रो होने के बाद सिम्मी ने कहा: अब जल्दी से ये गर्मागर्म मैगी फिनिश कर लेते है वरना ये ठंडी हो जाएगी….

उसके बाद चारो ने मिलकर मैगी का टेस्ट लिया ओर फिर अपनी स्टडीस करी…. लेकिन इस पूरे टाइम मे जॉन के दिलो-दिमाग़ मे रीतिका पल पल बस्ती जा रही थी……

नितिन का तो ठीक था की वो पहले से ही थोड़ा प्ले बॉय टाइप का था लेकिन जॉन के साथ आज ये सब कुछ पहली बार हो रहा था ओर उसकी समझ मे कुछ नही आ रहा था…..

खैर जैसे तैसे जॉन ने उन दोनो को पढ़ाया ओर नितिन के साथ वापस अपने हॉस्टिल आ गया.

3
डिन्नर टाइम पर नितिन ने जॉन से पूछा की भाई आज क्या मूड है, बड़े गुम शुम से दिख रहे हो…डिन्नर करना है ना…

जॉन: ह्म्म्म्म

नितिन तो क्या ऑर्डर किया जाए आज…

जॉन: मशाला मैगी…

नितिन: ओक….मुझे भी शाम को सिम्मी के साथ खाई मैगी की याद आ रही है. आज तो मैं पेट भर कर मैगी ख़ौँगा….

दोनो ने डिन्नर किया ओर फिर अपनी स्टडीस करके दोनो सो गये, मॉर्निंग मे ब्रेकफास्ट मे भी जॉन ने मशाला मैगी ही खाई…..

नितिन ने सिम्मी से बात करके सारी बात बी क्लियर कर दी थी की लास्ट डे जॉन ने नही बल्कि उसने सिम्मी से बात करी थी फोन पर ओर अब उसने अपना नंबर भी सिम्मी को दे दिया था…..

सिम्मी भी उसी के नेचर जैसी ही लड़की थी एक दम फ्रॅंक ओर मस्त रहने वाली तो उसने भी माइंड नही किया…

इसी तरह कंबाइंड स्टडीस का ये सिलसिला 4 दिन तक चला ओर नितिन ने अपना ट्रैक रेकॉर्ड कायम रखते हुए सिम्मी को अपने प्यार की नय्या मे बिठा लिया था अब वो दोनो बॉय फ्रेंड-गर्लफ्रेंड बन चुके थे

जबकि जॉन अभी भी सबकुछ अपने मन मे छिपाए बैठा था…..उसके अंदर इतनी हिम्मत नही थी की वो अपनी चाहत का इज़हार कर सके रीतिका के सामने….

नितिन: स्वीतू एक बात बताऊं….

सिम्मी: ह्म बोलो…

नितिन: यू नो पिछले पाँच दीनो मे हमारे जॉन भाई ने मैगी के अलावा कुछ ओर खाया ही नही है….. ब्रेकफास्ट मे मैगी…. लंच मे मैगी ओर डिन्नर मे भी मैगी……

सिम्मी: क्या बात कर रहे हो…. सिर्फ़ मैगी…..ये तो बड़ी कमाल की बात है..

नितिन: अरे कमाल तो ये है की अबसे पहले उसे मैगी बिल्कुल भी पसंद नही थी…. पर जिस दिन से उसने तुम्हारे घर पर मैगी खाई है पता नही उसे क्या हो गया है….

सिम्मी: मुझे पता है की उसे क्या हुआ है… यू नो डार्लिंग ही इस इन लव…

नितिन: नही यार अगर ऐसा होता तो वो मुझे ज़रूर बताता…. वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त ह्म ओर हम दोनो के बीच कुछ भी सिक्रेट नही रहता….

सिम्मी: आक्च्युयली उसे भी ये नही पता की हे इस इन लव…..

नितिन: मीन्स….

सिम्मी: मीन्स वेन्स छ्चोड़ो ओर ये बताओ की अभी वो कहाँ होगा….

नितिन: होगा कहाँ उसका तो एक ही ठिकाना है.. लाइब्ररी…. चलो चलते है

जैसा की नितिन ने कहा था जॉन लाइब्ररी मे बैठा बुक्स मे खोया हुआ था….

सिम्मी: हाई जॉन हाउ आर यू?

जॉन: ओह हाई…. सिम्मी मी फाइन, हाउ’स यू…

सिम्मी: यार वो रीतिका पूछ रही थी…

जॉन : क्या… क्या पूछ रही थी रीत….

सिम्मी: ओह हो… रीत……क्या बात है….

जॉन: यार सॉरी वो ग़लती से मूह से निकल गया तो क्या कह रही थी रीतिका…..

सिम्मी: वो सब छोड़ो, वो बाद मे बता दूँगी…. डॉन’त बी सॉरी ओर वैसे भी तुम्हारे मूह से रीत ही अच्छा लगता है…. तुमने उससे बात करी…

जॉन: बात.. किस बारे मे…..

सिम्मी: किस बारे मे क्या मतलब? डियर तुम्हारे दोनो के बारे मे…. अब प्लीज़ ये मत कहना की तुम ऐसा कुछ नही सोचते….

जॉन: नही… असल मे…..वो मैं….

नितिन: क्या भाई… प्यार करते भी हो ओर कहने से डरते भी हो…. आपने सुना नही अपने सलमान भाई ने क्या कहा है की “प्यार किया तो डरना क्या”…… अब अपनी हिम्मत दिखाओ ओर हमसे मत छिपाओ, चलो जल्दी बताओ सच्चाई क्या है….

जॉन: नितिन भाई….. पता नही क्यों लेकिन मुझे हर जगह रीत का ही चेहरा दिखाई देता है….. किसी भी काम मा मान नही लगता…. मुझे समझ मे नही आ रहा की मैं क्या करूँ?

सिम्मी: सोचना क्या जाओ ओर अपने दिल की बात रीतिका के सामने रख दो…… वो बहुत लकी है की उसे तुम जैसा चाहने वाला लड़का पसंद करता है…. अगर उसकी जगह मैं होती तो कबकि पहल कर चुकी होती…..

जॉन: अगर उसने माना कर दिया तो…..

सिम्मी: वैसे मुझे नही लगता की वो ऐसा करेगी लेकिन अगर वो ऐसा करती भी है तो ये उसका बदलुक्क होगा….

जॉन: मुझे बड़ा दर लग रहा है..

नितिन: भाई दो दिन बाद 14त फेब है वॅलिंटाइन दे, उस दिन उसे प्रपोज़ करना देखना वो माना नही करेगी……….

सिम्मी ने ये बात जब रीतिका को बताई तो उसे बहुत गुस्सा आया ओर उसने सोच लिया था की 14त फेब को वो सबके सामने जॉन को माना कर देगी…..

नेक्स्ट दे ईव्निंग मे इन्सिडेंटली जॉन की मुलाकात रीतिका से हुई थी जब वो सिम्मी के साथ कुछ पेपर्स आइयीरॉक्स करने गयी थी ओर वहीं पर जॉन ओर नितिन भी थे,

सिम्मी तो नितिन को देख कर मान ही मान बहुत खुस हुई ओर ये ख़ुसी उसकी आँखों मे आई चमक जाहिर कर रही थी वहीं जॉन कुछ सहम सा गया क्योंकि जब उसने रीतिका की तरफ देखा तो उसे रीतिका की आँखों मे गुऊस्सा दिखाई दिया…..

सिम्मी ने नितिन को कुछ इशारा किया तो नितिन ने कहा की क्यों सब साथ मे मिलकर पास वेल म्सी-द चलते है ओर कुछ खा लेते है, उसने खुद को भूखा होने का बहाना बनाया…

वहाँ पहुँच कर सिम्मी ओर नितिन एक टेबल पर बैठ गये ओर जॉन ओर रीतिका को अकेला छोड़ दिया….ओर वो दोनो रीतिका के ठीक पीछे थे लेकिन जॉन उन दोनो को अच्छे से देख सकता था

ओर वहीं से वो दोनो जॉन को अपने दिल की बात कहने के लिए इशारे से बोल रहे थे…..बहुत हिम्मत करने के बाद जॉन ने बहुत धीरे से कहा….

जॉन: रीतिका, मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ…

रीतिका: लिसन जॉन, मैं तुमसे पहले ही एक बात क्लियर करना चाहती हूँ, मेरे पेरेंट्स ने मुझे कोल्लगे मे अड्मिशन पढ़ने के लिए भेजा है, बेकार के कामों मे अपना टाइम वेस्ट करने के लिए नही, मुझे इन सब ब्फ-गफ़ वाली बातों मे कोई इंटेरेस्ट नही है…..

जॉन: रीतिका ई अग्री वित योउ बुत मैं अपने आप को तुम्हे लीके करने से नही रोक पा रहा हूँ, बिलीव मे मैं भी ऐसा नही हूँ ओर ना ही मेरी अबसे पहले कोई गफ़ रही है तुम पहली वो लड़की हो जो ना चाहते हुए भी मेरे ख्यालो मे घूमती रहती हो…….

प्लीज़ मुझे ग़लत मत समझो ओर मैं ये भी नही कहता कीट उम मेरी गफ़ बनो पर अतलेआसट हम अच्छे फ्रेंड्स तो बन ही सकते है ना….

रीतिका: मैं सब जानती हूँ तुम बाय्स का नेचर, आज कहोगे अच्छे फ्रेंड्स, कल कहोगे वॅलिंटाइन ओर परसो वो सब….. छि….. मुझे तो सोच कर ही शर्म आत है….सेम ओन यू….

जॉन (सर झुका कर): रीतिका कुछ देर पहले तक मैने भी यही सोचा था की मैं कल तुमसे पूछूँगा की…बुत अब कल तुम्हारे सामने मैं कुछ नही बोल पाऊँगा…. तो अभी मैं तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ….

रीतिका: क्या????? क्या कहना है तुम्हे सॉफ सॉफ कहो…

जॉन: रीतिका….विल यू बी माइ वॅलिंटाइन…….

जॉन अपना सेंटेन्स पूरा भी नही कर पाया था की एक जोरदार तमाचे की आवाज़ के साथ म्सी-द गूंजा ओर रीतिका उठ कर चली गयी…………

14त फेब को जॉन के दिल मे एग्ज़ाइट्मेंट ओर फियर दोनो के मिक्स एमोशन्स थे….. जहाँ एक तरफ उसे इस बात की एग्ज़ाइट्मेंट थी की आज वो रीतिका के सामने दोबारा अपने दिल की बात रखने वाला है तो उसे इस बात का भी डर था की कहीं वो माना ना कर दे…

वो सुबह जल्दी उठ गया ओर तैयार होकर नितिन के साथ कॉलेज गया. नितिन ने सिम्मी से फोन पर बात करी ओर दोनो ने जॉन ओर रीतिका को स्पोर्ट्स कॉंप्लेक्स मे बने स्विम्मिंग पूल के पास मिलने का प्रोग्राम फिक्स कर दिया….

सिम्मी ने रीतिका को वही जॉन के साथ छ्चोड़ा ओर नितिन के साथ चली गयी….

रीतिका को ये सब सोचते हुए अचानक से जॉन की हिचकी सुनाई दी ओर वो दोबारा जी तोड़ मेहनत करने लगी जॉन की खोई हुई साँसों को वापस लाने के लिए……

आख़िर जॉन ने उससे बस यही तो पूछा था की विल यू बी मी वॅलिंटाइन?….. ओर इसी का रिप्लाइ तो वो माँग रहा था….ओर इसके लिए उसने अपनी जान भी दाव पर लगा दी…. अपनी जान खोकर भी वो पागल बस उसकी जान बचाने की कोशिश करता रहा अपनी आख़िरी सांस तक….

एक मिनट की मेहनत के बाद रीतका की मेहनत रंग लाई ओर जॉन की आँकें खुली, उसने अपने उपर रीतिका को देखा ओर उसने एक ही बात कही रीत विल यू बी मी वॅलिंटाइन?

रीतिका: एस जॉन आइ विल….. ई विल………ई विल बी यौर वॅलिंटाइन……

ओर रीतिका जॉन के सिने मे समा गयी ओर जॉन की आँखों से भी ख़ुसी के अंशुन निकल कर उसके गालो की तरफ बढ़ गये…….

हॉट लड़की और भाभियों का शहर दिल्ली

कोई अगर मुझे यह पूछे की मुझे अगले जन्म में कहा पैदा होना है तो मेरा जवाब दिल्ली ही होगा, यहाँ पर क्या रंगत है यारो, चारो और तितली जैसी हॉट लड़की कभी घरवाले के साथ तो कभी बहार वाले के साथ रास्तो पर नजर आती हैं | अब मै इस शहर का हिस्सा बन चूका हूँ क्यूंकि पिछले 7 साल से मैं यही रहता हूँ, गोल्डन सिनेमा के पास एक ब्रा पेंटी की दुकान में मैं सेल्समेन हूँ और अच्छी अच्छी भाभियाँ, आंटियाँ और देसी लडकियाँ मेरे सामने अपने स्तन रख देती है | एकाद दो भाभियाँ तो मुझ से चुदवा भी चुकी है, लेकिन एक दो बार की चुदाई के बाद यह आंटी और भाभियाँ धोखा कर देती है और दिखती ही नहीं, लेकिन एक हॉट लड़की है जो मुझ से नियमित चुदाई करवाती है और कभी भागती नहीं, वह मेरे चाल की रूपा है | इस हॉट लड़की रूपा से मुझे अपनी चुदाई का क्वोटा मिल जाता है तभी तो मैं शोलापुर से अपनी बीवी और बेटे को यहाँ नहीं बुलाता | आइये आपको 21 साल की रूपा के साथ मेरी पहेली चुदाई के बारे में बताऊँ…..!

सुबह मैं दुकान पर जाने को निकल ही रहा था की शंकर भैया आये, मैं मनोमन बोला, मर गए…बुढ्ढा जरुर किराया मांगेगा, पर उसने तो आके दूसरा ही राग छेड़ा |

“हम लोग दो दिन के लिए मेरठ जा रहे है, रूपा के एग्जाम है इसलिए वोह यहीं रुकेगी ! उसकी मासी रात देर तक आ जाएगी | कृपया तब तक उसे कुछ काम हो तो आप देखेंगे?”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं शंकर भैया”

हॉट लड़की को सेक्स मैगज़ीन पढ़ते पकड़ा

मैंने जॉब पर जाने से पहेले रूपा को अपना मोबाइल नंबर दे दिया और उस शाम को मैं जॉब से जल्दी घर आ गया, मुझे लगा की शायद रूपा को कुछ काम हो यह सोच मैं सीधा दुसरे मजले पर शंकर भैया के फ्लेट मैं चढ़ा | मैंने दरवाजे को हाथ लगाते ही वह खुल गया और अन्दर का द्रश्य देख मैं चोंक उठा…! अंदर रूपा एक सेक्स मैगज़ीन पढ़ रही थी और उसने स्कर्ट के अंदर हाथ करके अपनी चूत को ऊँगली देना शरू कर दी थी | वह दरवाजे को केवल धकेल के बैठी थी, निचे मेईन गेट की चाबी केवल मेरे और शंकर भैया के पास थी इसलिए उसने सोचा होंगा के अभी कोन आएगा और आएगा भी तो निचे तो मेईन गेट बंध ही है | लेकिन मेरे भाग्य अच्छे थे की मैं आज जल्दी आया था…! रूपा के अंदर छूपी हॉट लड़की पहली बार मेरे सामने आई थी, वैसे भी 21-23 साल की लडकियाँ लंड लेने के लिए बेताब रहती है | जब मैंने रूपा के हॉट स्तन और उसकी सेक्सी गांड का ख़याल किया तो मेरा लंड इस हॉट लड़की की चुदाई का मन करने लगा | अगर रूपा आज लोहा ले ले तो कुछ साल चुदाई की छुट्टी….!

रूपा की जवानी
मैंने रूपा से पूछा, “क्या कर रही हो, बताओ तो…”

मैं फट से उसके निकट गया और उसकी मैगज़ीन ले ली, रूपा कुछ नहीं बोली | मैगज़ीन में एक इंडियन लड़की के गेंगबेंग की तस्वीरे थी जिसमे यह लड़की गांड, चूत और मुहं में लंड लिए हुए चुदवाते हुए नजर आती है | मैंने रूपा की तरफ देखा और मैं हंस पड़ा,

“रूपा, तू इन सब चीजो के लिए तैयार हो गई है, मुझे तो पता ही न था….!”

मैं इस हॉट लड़की के पास गया और उसके स्तन पर अपना हाथ रख दिया | मेरे स्तन को हाथ लगाते ही रूपा एक कदम पीछे हठ गई, मैंने उसे कहा,

“रूपा, घबराओ मत, मैं हम दोनों के सबंध के बारे में किसीको कुछ नहीं कहूँगा | जितनी सेक्स की भूख तूम को है उससे शायद मुझे कुछ ज्यादा ही है…!”

रूपा को चुदाई के लिए राजी किया

हॉट लड़की के दिमाग में मेरी बात उतर गई और उसने अपना कदम मेरी तरफ वापस लिया और मैंने उसके चुंचे अब मस्त दबाने शरू कर दिए, शायद रूपा का यह अनुभव बिलकुल नया था क्यूंकि उसके चहेरे पे नए ही भाव थे और वह अपना एक हाथ चूत पर रख के सहेलाने लगी | मैंने बिलकुल वक्त गवाँए बिना उसके व्हाईट टी-शर्ट और काले स्कर्ट को निकाल दियां | 34D साइज़ के बूब्स भी तुरंत मैंने ब्रा के हुक निकाल कर आजाद कर दिएँ, रूपा के झूलते हुए चुंचे मेरे सामने थे और मेरा लंड शीर्षासन करने लगा था | मैंने अपनी उँगलियाँ रूपा के सेक्सी निपल्स पर फेरनी शरू की और रूपा के शरीर में जैसे की करंट दौड़ गया हो | मेरे स्तन पर हाथ फेरते ही मुझे लगा की यह हॉट लड़की अंदर से उबल रही थी और अगर जो उसे आज मेरा लंड न मिलता तो वोह कोई और लंड जरुर ढूंढ लेती…!

मैंने हाथ अब निचे किया और छोटे छोटे बाल वाली चूत को सहेलाने लगा, रूपा को मैंने हलका धक्का दे कर वही पड़ी एक कुर्सी पर बैठा दिया और उसके स्तन मुहं में भरने लगा | मैंने पहेले चोदी कुछ कुछ भाभिओं के स्तन के निपल्स तो पांच रूपये के सिक्के जितने बड़े होते थे और मुहं मैं नहीं आते थे लेकिन इस हॉट लड़की के छोटे निपल्स मस्त कड़े और नौक वाले थे जिनको मैं मुहं में दबा दबा के चुसाई कर रहा था | मैंने धीमे धीमे से इन निपल्स को दांत से काटना भी शरू कर दिया | मैं खड़ा हुआ और मैंने अपनी पेंट और अंडरवेर उतारी, मेरा औजार देख के रूपा चोंक गई क्यूंकि मेरा लंड 8 इंच लम्बा और 2.5 इंच चौड़ा था जो अच्छी अच्छी चुतो को पानी भरा सकता था |

मैंने रूपा के पाऊं वही कुर्सी के अंदर फेला दिए और मैं अपने लंड के ऊपर थूंक के उसे चिकना बनाने लगा, रूपा भी अपने चूत को दोनों हाथ से फेलाने लगी…उसको पता चल गया था की उसकी चुदाई का वक्त आ गया है | मैंने लंड को इस हॉट लड़की की चूत पर रखा और उसे वहाँ रगड़ने लगा, रूपा की चूत को मेरे लंड की गर्मी अच्छी लग रही थी क्यूंकि वह अपना हाथ मेरे लंड को लगा के उसे रगड़ने में मदद करने लगी | मैंने बिना कोई संकेत दिए एक झटका दे दिया और इस देसी लड़की की आँख में आंसू आ गए क्यूंकि मेरा बेलन जैसा लंड आधा उसकी चूत में घुस गया था, उसकी चीख निकल पड़ी और मैंने उसकी चीख दबाने के लिए उसके होंठो से अपने होंठ लगा दिए |

रूपा को मस्त पेल दिया…!

रूपा के लिए यह सब बर्दास्त के बहार हो चला था और वह सिसकारियाँ निकाल रही थी, एकाद मिनिट के बाद जैसे ही यह हॉट लड़की थोड़ी स्वस्थ दिखी मैंने लंड पूरा उसकी चूत में पेल दिया…अब की बार चीख तो नहीं निकली पर मोनिंग चालू ही थी | रूपा मुहं से उह आह..मम्मी…आह आह ओह ऐसे आवाज निकाल रही थी और मैंने अब उसको सही तरह पेलना शरु कर दिया…! रूपा थोड़ी देर में लंड का मजा लेने लगी और अपनी गांड को हिला हिला के चुदाई करवाने लगी, मैंने भी अब रूपा को पूरा लंड अंदर दे के उसके स्तन को चुसना शरू किया…उसके निपल्स अकड गए थे और वह बहुत उत्साहित हो गई थी..रुपाने तभी मुझे कमर पर नाख़ून मारे और मुझे कस के पकड लिया…इस हॉट लड़कीका चूत का पानी मेरे लंड के उपर निकल गया था | मैंने भी अब अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से लंड को चूत के अंदर बहार करने लगा | रूपा मुझे कस के पकड़ रही थी और मेरा लंड उसकी चूत को चोदता रहा, तभी मेरा लंड एक फ़व्वारा मार कर इस हॉट लड़की की चूत में झड गया, रूपा की चूत के अंदर मैंने लंड को ऐसे ही दो मिनट तक रहने दिया और उसके बाद मैं उठ गया और मैंने कपडे पहन लिए | रूपा चाय ले आई और मैं चाय पी के उसको एक किस करके अपने फ्लेट की तरफ चल दिया….!

इस किस्से के बाद यह हॉट लड़की रूपा मुझ से रेग्युलर चुदाई करवाने लगी है और अब मुझे आंटियों और भाभियो से चुदाई की राह नहीं देखनी पड़ती क्यूंकि रूपा अक्सर मेरे फ्लेट में रात के वक्त चुपके से आ जाती है और हम मस्त चुदाई कर लेते है………………….

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