फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 8

मैं :तो ठीक है, कल ही तुम्हे एक ऐसी जगह ले जाता हूँ, जहाँ जाकर प्यार करने में तुम्हे मजा आएगा..

अंशिका : कोन सी जगह ?

मैं :वो तो मैं कल ही बताऊंगा..तुम घर पर बोल देना की तुम लेट आओगी..मैं तुम्हे कॉलेज से पिक कर लूँगा..

अंशिका : देखो…कोई मुसीबत ना आ जाए, मेरा मतलब वो भी नहीं था…जैसा तुम समझे….

मैं : अब तो मैंने सोच लिया है…तुम्हे उस जगह लेकर ही जाऊंगा..कोई अगर मगर नहीं..समझी.

अंशिका : ठीक है…तुम दो बजे आ जाना कॉलेज.वहीँ से चलेंगे..

मैं :ठीक है..अब एक पप्पी तो दे दो..

अंशिका (इठलाते हुए) : कल ही दे दूंगी…जहाँ कहोगे..

मैं : वो तो मैं ले ही लूँगा..पर अभी के लिए तो कुछ करो..मेरे लंड पर एक किस करो ना..

अंशिका : आज मैं तुम्हे लंड पर नहीं, उसके नीचे वाली जगह यानी तुम्हारी बाल्स पर किस दूंगी..ऊऊउम्म्म्माअ …और उसपर किस …कल ही मिलेगी..हे हे…

मैं : ठीक है…हंस लो…कल देख लूँगा.

अंशिका : देख लेना..जो चाहे..जैसे चाहे.

साली बड़ी दिलदार बन रही है…कल बताऊंगा इसे तो.

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अब आगे
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आज पता नहीं अंशिका से बात करने के बाद मुझे एक अजीब तरह की ख़ुशी मिल रही थी, जिस तरह से वो बात करने लगी है आजकल, मैं उसका श्रेय खुद को दे रहा था, कहाँ वो कॉलेज की सिंपल सी मेडम और कहाँ अब ये लंड और चूत की बातें करने वाली, और पब्लिक प्लेस में प्यार का खेल खेलने को तेयार गर्म और रसीली जलेबी.

मैंने अंशिका के बारे में सोचते हुए सो गया..

अगले दिन मैंने स्नेहा को फोन करके बोल दिया की मैं आज नहीं आ पाउँगा, वो थोड़ी निराश तो हुई पर उसने जाहिर नहीं होने दिया..वैसे भी जब से मैंने उसके साथ फोन सेक्स किया था उसके बाद मेरा और उसका सामना आज ही होना था और शायद खेल उसके आगे बढ़ सकता था, जहाँ पर हमने उसे छोड़ा था…पर अभी तो मुझे अंशिका की प्यास पहले बुझानी थी.

ठीक २ बजे मैं उसके कॉलेज के पास पहुँच गया, आज मौसम बड़ा अजीब सा था, बादल थे लाल से रंग के, शायद बारिश हो जाए.

मैं किटी मेम से बच रहा था, कहीं उन्होंने मुझे आज यहाँ देख लिया तो गड़बड़ हो जायेगी, वो पूछेंगी, की आज मैं उनकी बेटी को पड़ाने क्यों नहीं गया..मैंने अंशिका को पहले से ही ये बात बता दी थी.

वो थोड़ी देर बाद मुझे आती हुई दिखाई दी.

उसने आज पिंक कलर का सूट पहना हुआ था, और सफ़ेद रंग की पायजामी. बाल खुले और चुन्नी से ढके उसके विशाल पर्वत.

वो मेरे पास आई और मुझे एक क्यूट सी स्माईल करी और मेरी बाईक पर बैठ गयी..थोड़ी ही दूर जाकर उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया. अब उसकी ब्रेस्ट की हलचल में अपनी पीठ पर महसूस कर पा रहा था.

अंशिका : हां जी…अब बोलो, कहाँ ले जा रहे हो.

मैं : यूनीवर्सिटी में एक बहुत बड़ा गार्डेन है…कमला नेहरु रिड्ज पार्क …वहीँ पर.

अंशिका : बोंटे पार्क…पागल हो क्या…तुम मरवाओगे…हमारे कॉलेज के कई लड़के लड़कियां वहां जाते हैं…कहीं किसी ने देख लिया तो मर जाउंगी मैं..ना बाबा ना.कहीं और चलो..नहीं तो मुझे घर छोड़ दो.

मैं : देखो, तुम अब पलट रही हो…तुमने ही कहा था की तुम्हे ऐसी जगह प्यार करवाने में मजा आता है, जहाँ किसी के आने का डर हो..और वैसे भी, हमने अभी तक जहाँ भी प्यार किया है, वहां भी तो कोई जान पहचान वाला आ सकता था..तुम फिकर मत करो, वहां इतनी झाड़ियाँ है की कोई किसी को नहीं देख पाता..

वो कुछ देर तक और बोलती रही पर मैंने उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया..और लगभग आधे घंटे में हम वहां पहुँच गए..

मैं बाईक से उतरा और हम अन्दर चल दिए, अंशिका ने थोड़ी समझदारी दिखाई और अपनी चुन्नी से अपने चेहरे को पूरी तरह से ढक लिया, सिर्फ उसकी आँखें ही दिखाई दे रही थी..पर ऐसा करने से उसके मोटे-२ चुच्चे साफ़ दिखाई देने लग गए थे..मैंने एक हाथ आगे करके उसके दांये चुच्चे को दबा दिया..उसने अपनी आँखें फेला कर मुझे घुर.

अंशिका : ये क्या कर रहे हो…कोई देख लेगा.

मैं अंशिका को लेकर अन्दर तक चला गया, वहां काफी हरियाली थी, और आज मौसम भी थोडा सुहाना था, इसलिए आशिको की भीड़ भी थी..पर अभी तक अंशिका ने मुझे ये नहीं कहा की वो देखो, वो है मेरे कॉलेज के लड़के/लड़कियां…

वहां जो भी छुप कर बैठने की जगह थी, वहां पहले से ही कोई न कोई बैठा हुआ था..हर जोड़ा एक दुसरे को चूसने और चाटने में लगा हुआ था, किसी को दिन दुनिया की कोई खबर नहीं थी, मेरी जींस में मेरे लंड ने अंगडाई लेनी शुरू कर दी थी, अंशिका मेरा हाथ पकड़ कर चल रही थी, जिसकी वजह से उसका मुम्मा मेरी बाजू से रगड़ खा रहा था..

अंत में मुझे अपनी मनचाही जगह मिल ही गयी, वो एक बड़ी सी झाडी थी और उसके नीचे घांस में बैठने की जगह थी, ऊपर से वो झाडी किसी छतरी की तरह से थी, उसके नीचे हम दोनों घुस गए..अब अगर कोई सामने से निकले भी तो उसे नीचे बैठकर देखना होगा की अन्दर कोन है और क्या कर रहा है…

बैठते के साथ ही अंशिका ने अपने पर्स से पानी की बोतल निकाली और उसका ढक्कन खोला.

मैंने उसके हाथों से पानी छीन लिया.

अंशिका : दो न प्लीस….मुझे बड़ी प्यास लगी है..

मैंने बोतल को अपने मुंह से लगा कर पानी अपने मुंह में भर लिया और अपना चेहरा उसके आगे किया..और आँखों से इशारा करके उसे कहा…लो पी लो फिर.

उसने मेरा इरादा समझ लिया और अपने चेहरे पर कातिल मुस्कान बिखेरते हुए अपने बालों को एक तरफ किया और अपने हाथों की उँगलियाँ मेरे चेहरे पर फिराते हुए उसने अपने पिंक लिपस्टिक वाले होंठ मेरे मुंह से लगा दिए और मैंने अपने होंठ उसके दोनों होंठों के चारों तरफ लपेट दिए और अगले ही पल ठंडा पानी मेरे मुंह से झरने की तरह दूसरी तरफ जाने लगा, मैं धीरे -२ पानी छोड़ रहा था और हर घूँट के साथ उसके होंठ चूस रहा था, गीले-२ होंठ चूसने में आज बड़ा मजा आ रहा था..अचानक उसका एक हाथ मेरे लंड के ऊपर आ गया..मैंने भी उसकी ब्रेस्ट को अपने हाथों से नापना शुरू कर दिया…जल्दी ही मेरे मुंह से सारा पानी ख़त्म हो गया, पर हमने एक दुसरे को चुसना नहीं छोड़ा..थोडा पानी निकल कर अंशिका की चिन से होता हुआ, उसकी गर्दन को भिगोता हुआ, अन्दर की और चल दिया…मैंने अपनी जीभ से उस पानी की लकीर का पीछा करना शुरू कर दिया और जैसे ही मेरे गर्म होंठ उसकी लम्बी गर्दन के ऊपर आये, उसने मेरे सर को अपने हाथों से जोर से दबा कर अपनी छाती में समां लिया..मेरे मुंह में उसकी नर्म ब्रेस्ट आ गयी और मैंने उसे सूट के ऊपर से ही उसे चुसना शुरू कर दिया..

आह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल्लल्ल्ल ….सक में…..सक में हार्ड…

और ये कहते हुए उसने अपने सूट के गले से अपना एक मुम्मा बाहर निकाल दिया..

उसका निप्पल तन कर खड़ा हुआ था, मैंने ठंडी जीभ उसके ऊपर फेराई तो वो तड़प सी उठी…उसने मेरे बालों में ऊँगली फेरते हुए मेरे मुंह को अपनी ब्रेस्ट पर दबा दिया…

अंशिका : क्यों तदपा रहे हो….चुसो न…सक इट….बाईट मी…

मैंने उसके निप्पल को मुंह में भरा और उसपर दांत गडा दिए…

उसका निप्पल तन कर खड़ा हुआ था, मैंने ठंडी जीभ उसके ऊपर फेराई तो वो तड़प सी उठी…उसने मेरे बालों में ऊँगली फेरते हुए मेरे मुंह को अपनी ब्रेस्ट पर दबा दिया…

अंशिका : क्यों तदपा रहे हो….चुसो न…सक इट….बाईट मी…

मैंने उसके निप्पल को मुंह में भरा और उसपर दांत गडा दिए…

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अब आगे
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अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल्लल्ल्ल्ल ……म्मम्मम्म…….ओह्ह्ह्हह्ह गोड….. अह्ह्हह्ह

मैं : धीरे बोलो अंशिका……इतना तेज बोलोगी तो पुरे पार्क वाले लोग यहाँ आकर तुम्हे चोद देंगे..

अंशिका की आँखें गुलाबी सी हो गयी थी, वो समझ नहीं पा रही थी की मैंने जो कहा वो मैं चाहता हूँ या फिर ऐसे ही…पर शायद वो इमेजिन करने की कोशिश कर रही थी की अगर वहां सब लोग इकठ्ठा हो जाएँ और उसके साथ….ये सोचते ही उसने थूक से भीगे होंठ मेरे होंठों पर रगड़ने शुरू कर दिए…मैंने इतना गरम अंशिका को कभी नहीं देखा था..उसकी एक ब्रेस्ट बहार निकली हुई थी और वो बुरी तरह से मुझसे लिपट कर मुझे किस कर रही थी…और एक हाथ से वो मेरी जींस के ऊपर से ही मेरे लंड को रगड़ रही थी..

मैंने उसे सीधा किया और उसकी दूसरी ब्रेस्ट को भी बाहर निकलने की कोशिश करने लगा, पर वो दोनों एक साथ बाहर नहीं आ पा रही थी, मैं उसका सूट ऊपर से उतारना नहीं चाहता था…पर मेरी सोच और अंशिका की सोच में अंतर निकला, उसने एक ही झटके में सूट को नीचे से पकड़ा और सर से घुमा कर उतार दिया और मेरी मुश्किल आसान कर दी.

मैं उसकी हिम्मत देखकर अवाक रह गया, दिन के 3 बजे, अंशिका जैसी कॉलेज में पड़ाने वाली टीचर , मेरे सामने एक पार्क में टोपलेस हो गयी , अपने आप…सच में उसकी अन्दर से जो हालत हो रही होगी, मैं ये सोचकर ही उत्तेजित सा होने लगा.

अब मेरे सामने ब्लेक ब्रा के अन्दर सिमटी उसकी जवानी थी, एक बाहर और एक अन्दर…उसने मेरी आँखों में देखते हुए अपनी ब्रा के दोनों स्ट्रेप कंधे से नीचे खिसका दिए..और अगले ही पल उसकी दोनों बाल्स मेरे चेहरे के सामने नंगी होकर नाच रही थी..मुझसे और सब्र नहीं हुआ…मैंने अपना मुंह खोला और उनपर टूट सा पड़ा..मैंने उसे नीचे घांस पर लिटा दिया और उसके दोनों मोम्मो के रस को एक एक करके निचोड़ने लगा अपने मुंह में..

अह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल……लव मी ….अह्ह्हह्ह …..अह…..ओह्ह्हह्ह्ह्ह…….म्मम्म…….सक ईट…सक हार्ड…..और जोर से…चुसो…इन्हें….अह्ह्हह्ह……म्मम्मम्म…..बाईट मी हेयर…….ओ येस …ओ येस……..गोड…….म्मम्मम……..

वो मेरे सामने लेटी हुई ऊपर से नंगी होकर तड़प रही थी और मैं उसके ताजा फलो का रस पीकर मजे ले रहा था…

उसके दोनों निप्पल इतने बड़े हो चुके थे की मैं उसपर अपनी शर्ट टांग सकता था..

मेरे दांतों से बनाया हुआ निशान अभी तक उसकी ब्रेस्ट के ऊपर था….मैंने उसपर फिर जीभ और दांत लगा दिए और चूस चूसकर उसे फिर से रीचार्ज कर दिया…वो भी हलकी -२ मुस्कुराते हुए मुझे अपनी ब्रेस्ट पर वो ख़ास टाटू बनाते हुए देख रही थी और मेरे बालों में अपनी उँगलियाँ फेरा रही थी…

मैं जब ऊपर उठा तो अंशिका बोली : इसे ऐसे ही हमेशा मेरी ब्रेस्ट पर बनाये रखना…जैसे ही हल्का होने लगे, दोबारा बना दिया करो…समझे..

मैं : समझ गया मेडम.

अंशिका ने मुझे पीछे किया और झुक कर मेरी जींस के बटन खोलने लगी..

और फिर हाथ अन्दर डालकर उसने मेरा लंड बाहर निकाल लिया..जो इतना गर्म हो चूका था की मुझे लगा उसका मुंह ही ना जल जाए आज..लंड के ऊपर मेरी नसे चमक रही थी, जिन्हें वो बड़े गोर से देख रही थी…फिर उसने अपनी जीभ बाहर निकली और मेरे लंड के ऊपर से जाती हुई हरे रंग की नस के ऊपर फिराने लगी…और उसका पीछा करते -२ वो नीचे मेरी बाल्स तक पहुँच गयी..

अंशिका : ये मेरी वो किस, जो मैंने तुम्हे कल फोन पर दी थी.

और ये कहर उसने एक गीली सी किस्स मेरी बाल्स के ऊपर कर दी..

अंशिका : अब हिसाब साफ़ हो गया सब..

बड़ी हिसाब वाली है ये तो..मैं मन ही मन सोचने लगा.

और फिर उसी नस का पीछा करते हुए उसकी जीभ ऊपर तक आई और मेरे लंड के टॉप तक आकर रुक गयी और बड़ी ही नजाकत के साथ उसकी गुलाबी जीभ ने लंड से निकलते प्रीकम को समेटा और उसे निगल गयी…रस का स्वाद मिलते ही वो जैसे पागल सी हो गयी और अगले ही पल उसने अपना पूरा मुंह खोला और मेरे लंड को एक ही बार में अपने मुंह के अन्दर भर लिया.

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अंशी……..का…….अह्ह्ह्हह्ह………आई लव….द वे यु सक……अह्ह्ह्हह्ह….सक मी बेबी….सक में हार्ड……अह्ह्ह….

अब चूसने का काम अंशिका का था..

वो मेरे लंड का पूरा स्वाद लेते हुए, उसे ऊपर से नीचे तक चूस रही थी…

तभी मेरा मोबाइल बज उठा..मैंने देखा तो वो स्नेहा का फोन था…मैं सोच रहा था की उसे उठाऊ या नहीं..तभी अंशिका बोल पड़ी..”उठाते क्यों नहीं…किसका है..”

मैं : “दोस्त का है…”

अंशिका (शरारती लहजे में) : तो फोन उठाओ और उसे बताओ की तुम क्या कर रहे हो…

मैं : पागल हो गयी हो क्या..

अंशिका : अरे मजा आएगा…उठाओ न प्लीस..

मैं : उसे नहीं मालूम की मेरी कोई गर्लफ्रेंड है…तुमने ही तो मन किया था न किसी को भी बताने के लिए..

अंशिका : ओह हां…कोई बात नहीं, उसे कहो की तुम अपनी टीचर को सोचकर मास्टर बेट कर रहे हो…प्लीस…मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकते क्या..

और उसने ललचाने के लिए अपने दोनों मुम्मे मेरे लंड के चरों तरफ लपेट दिए..और उनमे फंसा कर वो मेरे लंड को अजीब सा मजा देने लगी..

मैंने फोन उठा लिया

अंशिका ने मेरा लंड अपने मुंह में डाला और उसे फिर से चुसना शुरू कर दिया.

मैं : हाय…क्या हाल है.

स्नेहा : कितनी देर से फोन कर रही हूँ…इतनी देर क्यों लग गयी…

मैं : मैं कुछ कर रहा था.

स्नेहा : क्या ??

अचानक अंशिका ने मेरे लंड पर हलके से बाईट किया और मेरे मुंह से आह निकल गयी..

स्नेहा : आर यू मास्टरबेटिंग…??

मैं : येस….आई एम् मास्टरबेटिंग …

स्नेहा : वाव…किसे सोचकर कर रहे हो.. (उसने धीमी आवाज और तेज साँसों के बीच कहा.)

मैं अब सोच में पड़ गया की क्या बोलू, मैंने अंशिका को देखा , वो अपनी आँखें बंद करे लंड चूसने में लगी हुई थी..मैंने रिस्क ले ही लिया

मैं : यु…

मैंने ये “यु” इतना जल्दी और धीरे से कहा की अंशिका को सुनाई न दे…और ऐसा हुआ भी, अंशिका ने उस बात को नोट नहीं किया…और ऐसा करने में मुझे इतना अडवेंचर मिला की मैं आपको बता नहीं सकता…एक तरफ अंशिका मेरा लंड चूस रही थी और दूसरी तरफ वो स्नेहा ये सुनकर की मैं उसके बारे में सोचकर मुठ मार रहा हूँ….थोड़ी देर तक तो बात करना ही भूल गयी…सिर्फ उसकी साँसों की आवाज आ रही थी फोन पर..

अंशिका भी मेरे लंड को आज ऐसे चूस रही थी..जैसे आज वो उसे कच्चा खा जायेगी..

मेरे मुंह सी हलकी-२ सिस्कारियां सी निकलने लगी…

अह्ह्ह्हह्ह……मम्म…

मैं : तुम भी मेरे साथ मास्टरबेट करो, मजा आएगा..

अब यहाँ अंशिका को क्या मालुम था की मैं ये बात अपने दोस्त संजय को नहीं बल्कि किटी मेम की बेटी स्नेहा को कह रहा हूँ…

स्नेहा : …..ह..हाँ….ठीक….है…

और फिर उसकी जींस के उतरने की आवाज और फिर उसने जब अपनी एक ऊँगली अपनी चूत में डाली तो एक लम्बा सा मोन उसके मुंह से निकल गया

..अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ……म्मम्मम्मम ….ऊऊऊऊ………..

मैंने फ़ोन का वोल्यूम थोडा कम कर दिया, ताकि अंशिका को दूसरी तरफ से लड़की की आवाज न सुनाई दे जाए.

अंशिका के दोनों मुम्मे मेरी झांघो के ऊपर धपक धपक पड़ रहे थे…उसके पुरे बाल खुल कर उसका चेहरा ढक चुके थे…

मैंने उसकी जुल्फों को ऊपर किया और उसके होंठो में फंसे अपने लंड को छटपटाते हुए देखने लगा.

दूसरी तरफ तो स्नेहा की हालत कुछ ज्यादा ही बुरी हो चुकी थी..

स्नेहा : ऊऊऊ विशाल……म्मम्मम्म…….ई एम् फीलिंग….हॉट…..कम टू मी….प्लीस…..अह्ह्ह्हह्ह……..आई वांट टू सक यौर पेनिस….अह्ह्हह्ह…….विशाल्लल्ल्ल……आई एम् कमिंग…..अह्ह्हह्ह…..ओह्ह्ह्ह विशाल्ल्ल्ल….ओ ओह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह……..

और फिर अपनी तेज साँसों के बीच जब वो झड़ने लगी तो उससे फ़ोन पकड़ा नहीं गया और वो बेड पर गिर गया, अब उसकी मद्धम सी सिस्कारियां मुझे सुनाई दे रही थी…

मैं भी अपना रस निकलने ही वाला था….ये जानकार अंशिका ने उसे और तेजी से चुसना शुरू कर दिया.

दूसरी तरफ से सनेहा का फोन कट चूका था..

मैंने भी फोन उठा कर साईड मैं रख दिया और अंशिका के सर के ऊपर हाथ रखकर उसे और तेजी से लंड चूसने को उकसाने लगा..

और फिर मेरे मुंह से आग के गोले निकल कर उसके मुंह में जाने लगे..

अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह आंशिक…आआ…….अह्ह्ह्हह्ह……म्मम्म…..या..बेबी……ऊऊ येस…अह्ह्ह्ह…….

और फिर अपने उसी अंदाज में उसने अपने चेहरा ऊपर उठाया और अपनी ठोडी पर लगे सफ़ेद वीर्य को मुंह में समेटते हुए जोर से एक चटखारा लिया…और बोली…यम्मी…..

और वो ऊपर आई और मेरे मुंह को चूसने लगी…मुझे फिर से अपने ही रस की खुशबू उसके मुंह से सुंघनी पड़ी…पर अब मुझे भी इसमें मजा आने लगा था..

तभी बाहर से किसी लड़के की आवाज आई : “आओ…डार्लिंग…यहाँ बैठते हैं…ये सबसे सेफ जगह है यहाँ की…कोई भी बाहर से नहीं देख सकता की अन्दर क्या हो रहा है…”

ये कहते हुए वो अपना सर झुका कर नीचे झाडी के अन्दर घुस गया..

और अगले ही पल उसका चेहरा मेरे और अंशिका से थोडी ही दूर पर था…हम सभी एक दुसरे को आँखे फाड़े देख रहे थे, वो इतनी तेजी से अन्दर आया था की मुझे उसे रोकने का मौका भी नहीं मिला, और जब उसकी नजरे अंशिका की खुली हुई छाती पर पड़ी..तो वो हडबडा कर सॉरी कहता हुआ बाहर निकल गया…और थोडी ही देर बाद उसके और उसकी गर्ल फ्रेंड के हंसने की आवाज आई और वो कहीं और चले गए.

उनके हंसने की आवाज सुनकर मुझे और अंशिका को भी हंसी आ गयी…

मेरा तो मन कर रहा था की अंशिका को अपने लंड के ऊपर बिठा कर आज उसकी चूत मार ही लूँ…पर यहाँ काफी रिस्क था..कोई भी आ सकता था…मैं तो झड ही चूका था, मैंने अपनी पेंट के अन्दर लंड ठुंसा और अंशिका को भी ब्रा ठीक करके अपना सूट पहनने को कहा..और फिर मैंने उसे नीचे लिटा दिया और उसकी पयजामी का नाड़ा खोल दिया..उसने भी बिना कोई विरोध करे मेरी सब बाते मानते हुए अपनी पेंटी नीचे खिसका दी…और अब मेरे सामने अंशिका की रस से भीगी हुई गीली चूत थी…जिसे मैंने जैसे ही अपनी जीभ से साफ़ करना शुरू किया उसकी सिस्कारियां बड़ी तेजी से निकलने लगी..

अह्ह्ह्हह्ह …..ओह्ह्ह्हह्ह….विशाल्ल्ल्ल…..मार डालोगे तुम तो मुझे….अह्ह्ह……आई एम् डाईंग तो टेक यूर कोक्क…..सक माय पुसी…हार्ड…ओ य़ा…..हा….ऐसे ही……गुड….एस ऐसे ही…..और तेज…..अह्ह्हह्ह्ह्ह….मम्म…….

और फिर उसकी चूत का झरना मेरे मुंह के अन्दर फूट पड़ा..मैंने सारा गरमागरम पानी पी लिया..और उसी अंदाज में उसे देखकर कहा…यम्मी…

उसने मुस्कुराते हुए मुझे ऊपर खींच लिया और मेरे गीले होंठों को चूसने लगी…अब मेरे मुंह से उसके रस का स्वाद अंशिका के मुंह में जा रहा था.

अब काफी देर हो चुकी थी….हम अलग हुए ही थे की बाहर से फिर से एक और तेज आवाज आई…ओ रे छोरे…चल बाहर निकल…जल्दी से…

और डंडा खडकाने की आवाज आई….

मर गया, ये तो कोई हवलदार है…पोलिस को देखते ही अंशिका की तो हवा ही खिसक गयी…मैंने उसे आश्वासन दिया की कुछ नहीं होगा…और मैं बाहर आ गया..अंशिका अभी भी अन्दर थी, नीचे से नंगी.

बाहर खड़े हवलदार ने मुझे देखा और पूछा : क्यों भाई…कहाँ से आया है…और क्या कर रहा है अन्दर…निकाल अपनी मेडम को भी बाहर, चलो थाने.

मैं : अरे सर…क्यों गुस्सा हो रहे हो…बस थोडा मस्ती कर रहे थे….समझा करो…

हवलदार : हमें भी करा दे फिर थोडी मस्ती…जाऊ के , मैं भी अन्दर..बोल..साला….सीधी तरह से थाने चल..

मैं समझ गया की बात ऐसे नहीं बनेगी…और मैंने जेब में हाथ डालकर 100 रूपए उसके हाथ में रख दिए..

हवलदार : ये क्या हे रे…भिखारी समझा है क्या…मैं कह रहा हूँ…जल्दी निकल मेडम को बाहर और थाने चलो.

वापिस पहुंचकर मैंने अंशिका को उसके घर पर उतारा और वापिस चल दिया, मैंने टाईम देखा तो अभी 4 ही बजे थे….मैंने जल्दी से स्नेहा को फ़ोन किया…

स्नेहा :हेल्लो…

मैं : क्या कर रही हो…

स्नेहा : कुछ नहीं…तुम.?

मैं : आज मजा आया…

स्नेहा : हूँ..तुम्हे..?

मैं : मुझे भी….सुनो, मैं आ रहा हूँ शाम को तुम्हे “पड़ाने” ..मेरा वो दूसरा प्रोग्राम केंसल हो गया.

स्नेहा : (ख़ुशी से चिल्लाते हुए) : मैं आज भगवान् से कुछ और भी मांगती तो मिल जाता, तुम्हारे फ़ोन के आते ही मैं सोच रही थी की काश ये आने के लिए ही कह रहा हो..

मैं : तो तुम तैयार रहना …आज..

स्नेहा (ख़ुशी को दबाते हुए) : किस लिए …?

मैं : वो तुम जानती हो..

और ये कहते हुए मैंने फ़ोन रख दिया.

मैं जल्दी से बाईक उठा कर स्नेहा के घर पहुंचा, बेल बजायी तो उसने ही दरवाजा खोला

उसने अपनी स्कूल की युनिफोर्म अभी तक पहनी हुई थी, ग्रे कलर की शोर्ट स्कर्ट पहनी हुई थी और ऊपर कसी हुई सी व्हाईट शर्ट..बड़ी ही सेक्सी लग रही थी वो..

मैं : ये क्या, तुमने अभी तक चेंज नहीं किया..

स्नेहा : मन नहीं कर रहा था, तुमने आज आने को मना कर दिया था, इसलिए मन उदास था, ऐसे ही लेटी हुई थी स्कूल से आकर..

मैं : अब तो मैं आ गया हूँ, अब तो उतार दो अपनी स्कूल की ड्रेस…

और मैंने उसे एक आँख मार दी

उसका चेहरा शर्म से लाल सुर्ख हो गया..

स्नेहा : तुम बहुत बदमाश हो…चलो अन्दर आओ..

मैं अन्दर आ गया..स्नेहा ने दरवाजा बंद किया और एकदम से आकर पीछे से मुझसे लिपट गयी…

ओह्ह्ह्ह विशाल…..आई मिस्स्ड यु सो मच…..

उसकी ब्रेस्ट मेरी पीठ से पिस कर दबी जा रही थी…और उसके दोनों हाथ मेरी छाती से चिपके हुए थे..

वो मुझसे ऐसे लिपटी हुई थी मानो मुझसे बरसों के बाद मिली हो..ये सब दोपहर में हुए फोन सेक्स का नतीजा था…उसकी चूत शायद मुझे देखकर फिर से गीली हो गयी थी..सच में बड़ी आग है इस लड़की में, अभी तो हमने सही तरह से एक दुसरे से बात भी नहीं की और ये चुदने को तैयार सी लग रही है..

घर पर कोई भी नहीं था, उसकी मम्मी भी नहीं और शायद नौकरानी को उसने पहले ही भगा दिया था, मेरे आने की खबर सुनकर..

मैं पलटा और उसकी तरफ मुंह घुमा कर खड़ा हो गया, मेरी जींस में से मेरा लंड खड़ा होकर उसकी स्कर्ट में छुपी चूत को ठोकरे मार रहा था..

वो मुझसे लिपटी रही, मैंने उसका चेहरा ऊपर किया, उसकी आँखें बंद थी, हाथ मेरी कमर से लिपटे हुए और गहरी साँसे लेने की वजह से उसकी ऊपर नीचे होती छाती की गुद्दुदाहत मुझे मदहोश सा कर रही थी..

मैं : आँखे खोलो…स्नेहा..

और मैंने उसके चेहरे पर होंठ गोल करके फूंक मारनी शुरू कर दी..

स्नेहा : उन….हूँ…नहीं…ऐसे ही खड़े रहो…अच्छा लग रहा है…

ये कहकर वो और जोर से मुझसे लिपट गयी..

मैंने भी अपने हाथ उसकी पीठ पर लगा दिए और उसे एक जोर से हग किया..उसके दोनों कलश मेरी छाती से लगकर मानो चटक से गए..

स्नेहा : उम्म्म्म …धीरे…तुम तो मार ही डालोगे मुझे..

मैं : तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे आई एम् ट्राईंग टु फक यु….

स्नेहा के चेहरे पर फिर से लालिमा सी तेर गयी…

स्नेहा : बड़ी आगे की सोचने लगे हो मिस्टर….ह्म्म्म..

मैं : और मैं कभी गलत नहीं सोचता..

और ये कहते हुए मैंने उसके लरजते हुए होंठों पर अपने गर्म होंठ रख दिए..

ओफ्फ्फ क्या नर्म होंठ थे साली के….मजा आ गया, मैंने अंशिका को भी किस किया था पर जो नर्मपन स्नेहा के होंठों में था वो अंकिता के नहीं…मैंने उन्हें अपने मुंह में लेकर चुसना शुरू किया, स्नेहा भी अपने आपको मेरे हवाले करके आराम से फ्रेंच किस करने में लग गयी, मैंने उसके मुंह में अपनी जीभ डाली तो उसके पैने दांतों ने उसपर काट लिया…मैंने झटके से उसके मुंह से अपनी जीभ बाहर निकाल ली..

वो हंसने लगी..

मैं : यु बिच …

स्नेहा (अपने चेहरे पर अलग किस्म के भाव लाते हुए) : यु काल्ल्ड मी बिच…नाव आई विल शो यु ..हाउ बिच बाईट…

और अगले ही पल उसने अपने मुंह से मेरे होंठों को ऐसी बुरी तरह से चुसना और काटना शुरू किया मानो वो उनमे से खून निकलना चाहती हो..पूरी जंगली लग रही थी…मैंने मौके का फायेदा उठाते हुए उसके दोनों मुम्मो को दबाना शुरू कर दिया, पता नहीं क्यों पर मैं उसकी हर बात को अंशिका से कम्पेयर कर रहा था..पहले किस और अब उसकी ब्रेस्ट भी..पर यहाँ स्नेहा मात खा गयी..उसकी छोटे संतरे जैसी चूचियां, अंशिका के रसीले आमों के आगे कुछ भी नहीं थे..

पर उन्हें दबाने में काफी मजा आ रहा था..खाने में कितना आएगा वो तो वक़्त ही बताएगा..

मेरे हाथ उसकी ब्रेस्ट को दबा रहे थे और होंठ उसके होंठों को चूस रहे थे, वो खड़ी-2 बडबडाने लगी…

उम्म्मम्म उह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़…..अह्ह्हह्ह .विशाल……येस….हियर…..प्रेस…..प्रेस…हार्डर…ओ या…..

उसकी सिस्कारियों को सुनकर मुझे उसके बर्थडे वाला दिन याद आ गया जब वो अपने “फ्रेंड” के साथ ऊपर छत्त पर किस करने में लगी हुई थी…उस समय भी ऐसी ही सिस्कारियां निकल रही थी उसके मुंह से…

थोड़ी देर तक एक दुसरे को चूसने के बाद हम अलग हुए..उसकी पोनिटेल खुल चुकी थी और उसके लाल चेहरे पर बिखरी जुल्फे उसकी खूबसूरती को चार चाँद लगा रहे थे..मैं थोडा पीछे हुआ और सोफे पर जाकर बैठ गया..वो धीरे-२ चलती हुई मेरे पास आई, नंगे पैर, बदहवास सी, सुबह से अपनी स्कूल ड्रेस में लिपटी हुई, जिसकी शर्ट अब उसकी शोर्ट स्कर्ट से आधी बाहर निकली हुई थी..और उसके गले में अभी तक उसकी टाई भी लटक रही थी..

वो मेरे सामने आकर खड़ी हो गयी.

मैं अपने हाथ सोफे के दोनों तरफ ऊपर रखकर किसी राजा की तरह बैठ गया..और उससे कहा : अनड्रेस फॉर मी..

स्नेहा मेरी बात सुनकर भोचक्की रह गयी…पर कुछ बोली नहीं..मैंने थोडा और रोबीली आवाज में उससे कहा : सुना नहीं…अनड्रेस फॉर मी..

वो कुछ देर तक ऐसी ही खड़ी रही और फिर उसके चेहरे पर नशीले भाव आये और उसके हाथ ने हरकत की और उसने अपने गले में लिपटी हुई टाई उतार कर मेरी तरफ फेंक दी..जो सीधा मेरे लंड के ऊपर आकर गिरी.

और फिर उसने अपनी शर्ट के बटन खोलने शुरू किये..और इस बीच उसकी निगाहें मेरी नजरों से मिली रही..मैं कभी उसकी नशीली आँखों को देखता और कभी उसके नंगे होते शरीर को..

जल्दी ही उसने सारे बटन खोल दिए..और उसके अन्दर से मुझे व्हाईट कलर की स्पोर्ट्स ब्रा दिखाई देने लगी..मेरे लंड का तो बुरा हाल था, जींस की वजह से उसे अडजस्ट करने में काफी मुश्किल हो रही थी…मन तो कर रहा था की लंड को निकाल दूँ जींस से…पर ये काम मैं स्नेहा से करवाना चाहता था…

उसने सारे बटन खोल दिए और दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी शर्ट को उतार दिया…

ओह्ह गोड…क्या सीन था…

और फिर उसने अपनी स्कर्ट के साईड में लगे हूक को खोला और उसके नीचे लगी हुई चैन को खींच कर नीचे किया…और फिर उसे छोड़ दिया..और अगले ही पल उसकी स्कर्ट भी नीचे आ गिरी..

माय गोड……साली ने डिसाईनर पेंटी पहनी हुई थी…फ्रिल वाली..डार्क ब्राउन कलर की..जो आगे से काफी गीली सी लग रही थी..और उसके नीचे उसकी मोटी-२ टाँगे, जिनपर एक भी बाल नहीं था…पता नहीं वो आये नहीं थे या उसने साफ़ किये हैं..

उसने थोड़ी देर रुक कर मुझे देखा, मानो पूछ रही हो की और भी उतारूँ क्या ?

मैंने सर हिला कर उसे बाकी के दोनों कपडे भी उतारने को कहा..

बड़ा ही रोमांटिक सा माहोल बना हुआ था…पुरे कमरे में हलकी सी रोशनी आ रही थी…कोने में AC चल रहा था..पर हम दोनों के जिस्म अभी भी जल रहे थे..

मेरा इशारा पाकर उसने अपनी कमर को हलके-२ मटकाना शुरू कर दिया, मानो कमरे में कोई मयूसिक चल रहा हो, और वो मेरे सामने केबरे कर रही हो..उसने अपने दोनों हाथ अपनी सपोर्ट ब्रा के ऊपर रखे और उसे सर से घुमा कर उतार दिया.

और अगले ही पल उसके रसीले से गुलाबी रंग के संतरे मेरी आँखों के सामने नंगे थे..बिलकुल तने हुए और उसके ऊपर लगे हुए निप्पल का साईज देखकर तो मैं हेरान रह गया..इतने बड़े भी निप्पल हो सकते हैं किसी के, मैंने कप्लाना भी नहीं की थी, और उसके चारों तरफ का एरोहोल भी काफी फुला हुआ और लाल सुर्ख था..उसकी चूचियां तन कर किसी स्टेनगन की तरह मेरी तरफ ऐसे देख रही थी मानो मुझे भून ही डालेंगी..

और वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हो गयी और उसकी मटकती हुई गांड मेरी आँखों के सामने हिलने लगी फिर उसने अपनी पेंटी के अन्दर ऊँगली फंसाई और उसे नीचे खिसकाना शुरू कर दिया, साथ ही साथ वो अपने हिप्स को हिलाती भी जा रही थी..जैसे -२ उसके नंगे हिप्स मेरी आँखों के सामने आ रहे थे, मेरी साँसे तेज होती जा रही थी…और जब उसकी पेंटी नीचे तक पहुँच गयी तो मेरे सामने दिल के आकार में उसके हिप्स थे, जो इतने गद्देदार थे की मेरा मन कर रहा था की उनमे अपना मुंह घुसेड कर जोर से दबा दूँ और उसकी नरमी को अपने चेहरे पर महसूस करूँ.

उसके बाद स्नेहा मेरी तरफ मुड़ी और उसकी चूत को देखकर मेरा और भी बुरा हाल हो गया, जिसपर हलके-२ बाल थे, पर फिर भी उसकी बनावट साफ़ दिखाई दे रही थी, अपने रस में नहाकर उसकी चूत काफी चमक रही थी..इतनी छोटी सी उम्र में उसकी चूत काफी रसीली लग रही थी, मन कर रहा था की साली को यहीं सोफे पर पटकूं और चोद दूँ..

स्नेहा : अब क्या करूँ…बॉस..

वो मेरे सामने अब पूरी तरह से नंगी खड़ी थी और मेरी आज्ञाकारी सेक्रेटरी की तरह मुझसे आगे के काम के बारे में पूछ रही थी…

मैंने ऊँगली का इशारा करके उसे अपनी तरफ बुलाया, वो पास आई तो मैंने उसकी हिप पर हाथ रखे और उसकी चूत की खुशबु ली, लगा जैसे उसने वहां कोई पर्फयुम लगा रखा है, इतनी भीनी सी खुशबु आ रही थी वहां से..मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और वो मेरे ऊपर गिरती सी चली गयी, और उसकी चूचियां सीधा मेरे मुंह से आ टकराई, मैंने उसकी बेक को दबाते हुए उसकी एक चूची अपने मुंह में ली और उसे चुसना शुरू कर दिया..

इतना मोटा निप्पल मेरे मुंह में था जिसका एहसास अलग सा ही था. वो मेरी गोद में आधी लेटी हुई कसमसा रही थी और हलकी-२ सिस्कारियां ले रही थी..

अह्ह्ह्हह्ह विशाल्ल्ल….आई एम् लोविंग ईट …

साली कह तो ऐसे रही है जैसे मेक डी का बर्गर है.

पर उसके बर्गर जैसे चुचे मेरे मुंह में आकर मुझे अलग सा एहसास दे रहे थे..इससे पहले सिर्फ अंशिका के ही चुसे थे मैंने, और अब इसके, दोनों का अलग स्वाद और मजा था.

ओह्ह्ह्ह विशाल….म्मम्मम पुचsssssssss… पुचssssssssss ….

उसने तो फिर मेरे चेहरे पर गीली-२ किस्सेस की झड़ी सी लगा दी…और अंत में अपनी जीभ मेरे मुंह में डालकर उसे बुरी तरह से चूसने लगी..

इन सभी के बीच उसकी चूत से निकलता रस मेरी पेंट को गीला कर रहा था…मैंने उसे पेंट को उतारने को कहा…

उसने मेरे सामने अपने पंजो के बल बैठकर मेरी बेल्ट और फिर चेन को खींच कर मेरी जींस को नीचे उतार दिया..उसके सामने मेरा रेड कलर का ज़ोकी आया और उसने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए उसे भी नीचे उतार दिया, वो इतने पास से मेरे लंड को देख रही थी की जैसे ही मेरा लंड आजाद हुआ उसके चेहरे के नीचे की तरफ किसी डंडे की तरह पड़ा..और फिर पीछे होकर उसने मेरे लंड को अपनी आँखों के सामने अच्छी तरह से देखा और बोली : इट्स बीयुटीफुल ….

मैं उसे कहना चाहता था की उसकी चूत से सुन्दर नहीं पर इससे पहले ही उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भरा और उसे चुसना शुरू कर दिया..

उसके मुंह के अन्दर कोई सकिंग मशीन लगी हुई थी जैसे, मेरा लंड उसके मुंह के अन्दर खींचता चला जा रहा था..

मैंने उसके खुले हुए बाल पकडे और उसे अपने लंड के ऊपर दबाना शुरू कर दिया…उसे नंगा देखकर और अब मेरा लंड चूसते देखकर मेरा तो बुरा हाल हो चूका था…जल्दी ही मुझे पता चल गया की मेरा निकलने वाला है..

मैं : ऊऊओह्ह्ह्ह स्नेहा…अह्ह्ह्हह्ह …..आई एम् ….कमिंग……अह्ह्हह्ह……

वो और तेजी से मुझे चूसने लगी…

मैं समझ गया की वो लंड चूसने में माहिर है, और लंड से निकलने वाले रस का क्या करना है ये वो अच्छी तरह से जानती है, और उसे पीना भी चाहती है..

मैंने उसके मुंह के अन्दर ही झड़ना शुरू कर दिया..

अह्ह्हह्ह्ह्ह स्नेहा….अह्ह्हह्ह…ऊऊओ……डीयर…….म्मम्म……

मैं गहरी साँसे लेता रहा और वहीँ सोफे पर लेटा रहा.

वो ऊपर उठी और सेम अंशिका वाले अंदाज में मुझसे बोली….यम्मी……यु आर टेस्टी…

मैं : थेंक्स…

पर मुझे मालुम था की उसका थेंक्स से काम नहीं चलेगा, मैंने उसे ऊपर खींचा और सोफे पर लिटा दिया…और उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगा दिया, और अब उसकी गीली सी चूत मेरी आँखों के बिलकुल सामने थी..

वो मेरी तरफ बड़ी अजीब सी नजरों से देख रही थी…मैंने उसकी दोनों जाँघों को पकड़ा और अपना मुंह डाल दिया बीच में..

आआआअह्ह्ह्ह विशाल्लल्ल्ल…..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह…….ओह्ह्ह्ह …ऊओय ओऊ या…..म्मम्मम…..

वो इतनी तेज चीख रही थी की मुझे लगा कहीं उसके पडोसी ही ना आ जाए वहां पर..

उसकी चूत की नरमी को महसूस करके मुझे लगा की मैं किसी बच्चे के गाल को चूम रहा हूँ…जिनपर हलके -२ बाल हैं…मैंने उसकी चूत के दोनों हिस्सों को अलग किया और उसके अन्दर से निकलता नेक्टर पीने लगा…अपनी जीभ से उसकी क्लिट को कुरेदने लगा..मेरी हर हरकत को महसूस करके वो पागल सी हो रही थी…मैंने एक दो बार उसकी चूत पर दांत भी मार दिए..वो चिल्ला उठी..

आआआअह्ह्ह्ह विशाल्लल्ल्ल…..यु अआर किलिंग मी…..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह…….ओह्ह्ह्ह

मैं एक तरह से अपने सामने परोसी हुई स्नेहा की चूत को खा रहा था..और स्नेहा भी अपनी गांड उठा-उठाकर अपनी चूत मेरे मुंह में ठूसकर मेरी भूख अच्छी तरह से मिटा रही थी..

और जल्दी ही उसकी स्पीड देखकर मुझे अंदाजा हो गया की अब तूफ़ान आने ही वाला है…मैं कुछ सोच पाता इससे पहले ही उसकी चूत में से गर्म पानी का सेलाब सा निकला और मेरे मुंह को पूरी तरह से भिगो दिया..मैं भी उसकी चूत के अमृत को पीने मं लग गया.

ऊऊह्ह्ह्ह….विशाल…..यु आर रियली गुड….आई लोव ईट ….

और तब तक मेरा लंड फिर से तैयार हो चूका था…मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा..अपनी पहली चुदाई के इतने पास पहुंचकर..

मेरा हाथ अपनी जींस की पॉकेट में रखे कंडोम तक गया..स्नेहा भी शायद समझ चुकी थी की मैं उसे चोदने वाला हूँ…पता नहीं उसने पहले कभी चुदाई करवाई है या नहीं..कोई बात नहीं, अभी थोड़ी ही देर में जब मेरा लंड जाएगा उसकी चूत में तो पता चल ही जाएगा..

मैंने कंडोम निकाला…स्नेहा का चेहरा आग की तरह से जलने लगा अपनी चुदाई के बारे में सोचकर..पर उसने मुझे रोका नहीं..

मैं कंडोम खोलने ही वाला था की उझे अंशिका को दिया हुआ वादा याद आ गया की मैं सबसे पहले उसे चोदुंगा..बाद में इसी और को..पर अगले ही पल मेरे दिमाग में बैठे डेविल ने कहा की अंशिका को कैसे पता चलेगा इस चुदाई के बारे में, तू चोद इसे…ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा..

पर ना जाने क्यों मेरा दिल नहीं मान रहा था…मुझे मालुम था की अंशिका को ये बात नहीं मालुम चलेगी की मैंने स्नेहा की चूत उससे पहले मार ली है पर ना जाने क्यों अपने सामने लेटी हुई नंगी स्नेहा को देखकर भी मेरे मन में अंशिका को दिए हुए वादे को निभाने का जनून सा सवार हो गया..और मैंने वो कंडोम वापिस अपनी पॉकेट में रख दिया..

मेरी इस हरकत से स्नेहा भी हैरान रह गयी.

स्नेहा : क्या हुआ…तुम रुक क्यों गए विशाल…कम ऑन…फक मी..टेक माय चेरी……आई वांट टू लूस माय वर्जिनिटी टुडे…कम ऑन…

यानी वो वर्जिन है…बिलकुल मेरी तरह…

पर मैं अपना मन बना चूका था, की अंशिका से पहले मैं उसकी चूत नहीं मारूंगा..

मैं : सोरी…स्नेहा…पर मैं ऐसा नहीं कर सकता…ट्राई टू अंडरस्टेंड …ये हमारा पहला मौका है….और पहले ही दिन मैं तुम्हारी …तुम्हारी..चूत मारकर ये नहीं दिखाना चाहता की मैं सिर्फ इसके पीछे तुमसे ये सब…ये सब कर रहा हूँ…

वो मेरी बात समझ नहीं पा रही थी, बस फटी हुई आँखों से मुझे घूरे जा रही थी, शायद सोच रही होगी की जब मैं चूत देने को तैयार हूँ तो तुम्हे क्या प्रोब्लम है..पर उसने कुछ नहीं कहा..और अपने कपडे पहनने लगी, मैंने भी अपने कपडे ठीक किये और वहीँ सोफे पर बैठ गया..वो बाथरूम गयी और थोड़ी देर बाद चेंज करके वापिस आ गयी, अपना चेहरा भी धो लिया था और बाल भी सही कर लिए थे..

वापिस आकर वो सीधा मेरी गोद में आकर बैठ गयी और मेरे गले से लिपट कर रोने लगी…

मेरी समझ में कुछ नहीं आया की ये रो क्यों रही है…इसकी चूत नहीं मारी इसलिए क्या ?

फिर थोड़ी देर बाद उसने रोना बंद किया और सुबकते हुए मेरी तरफ देखकर बोली : थेंक्स…थेंक्स विशाल…तुम चाहते तो आज मेरे साथ सब कुछ कर सकते थे, पर तुमने ऐसा किया नहीं, अभी मेरी उम्र नहीं है ये सब करने की..इसलिए तुमने ये सब किया न…बोलो..

मैं तो बस उसकी बचकानी बातों को सुनता रहा, उसे क्या मालुम की मैंने उसे क्यों नहीं चोदा..

मैं : हाँ…स्नेहा..मैं तुम्हे इतनी तकलीफ नहीं देना चाहता था..पहले ही दिन…अभी तो और भी मौके मिलेंगे…और तब तक शायद तुम इन सबके लिए तैयार भी हो जोगी…और फिर जो मजा आएगा, उसका कहना ही क्या..

स्नेहा : कह तो ऐसे रहे हो की जैसे तुमने कई लड़कियों को फक किया है..बोलो, किया है क्या?

मैं : नहीं यार, मैंने आज तक किसी को फक नहीं किया….

(08-04-2013 08:43 AM)  Sex-Stories 3
स्नेहा ये सुनते ही मुझे फिर से चूमने लगी और अपनी जीभ से मुझे चाट चाटकर पूरा गीला कर दिया..और फिर बोली : आई प्रोमिस ..मैं ही तुम्हारी वर्जिनिटी लुंगी एक दिन…देख लेना.

मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया और फिर से उसे चूमने लगा और उसकी छोटी-२ बाल्स को दबाने लगा.

उसकी मम्मी के आने का टाईम हो रहा था, मैंने उसे अपना बेग लाने को कहा और हम वहीँ ड्राईंग रूम में ही बैठकर थोडा बहुत पढाई करने लगे.

उसकी मम्मी जैसे ही आई, और मुझे अंदर बैठे देखा तो बोली : अरे विशाल तुम, आज तो स्नेहा कह रही थी की तुम आओगे नहीं..

मैं : नहीं मेम..मैं दरअसल किसी काम से गया था और वो जल्दी निपट गया, इसलिए यहाँ आ गया.

किटी मेम : ओके…तुम बैठो..मैं चेंज करके आती हूँ.

और वो अंदर चली गयी..

उनके जाते ही स्नेहा भागकर मेरी गोद में आकर बैठ गयी और मुझे एक झक्कास वाला किस किया..और बोली : बाद में तो मम्मी के सामने गुड बाय किस कर नहीं पाऊँगी…इसलिए..

मैं भी उसकी इस बात पर मुस्कुरा दिया.

मैंने उसे दस मिनट और पढाया और फिर मैं लगभग सात बजे वापिस आ गया.

रात को खाना खाकर मैं ऊपर छत्त पर जाकर टहलने लगा, मुझे सारे दिन की बातें याद आ रही थी, आज अंशिका ने मेरा लंड चूसा और अपनी चूत चुस्वयी..और शाम को स्नेहा के साथ भी कितना मजा आया.. खासकर वो लम्हा जब स्नेहा मेरे सामने नंगी लेटी हुई थी और मैंने उसकी चूत नहीं मारी, सिर्फ अंशिका को दिए वादे की वजह से..

मैंने अंशिका को फोन मिलाया

मैं : हाय…क्या कर रही हो

अंशिका : कुछ ख़ास नहीं, बताया था न की छोटी बहन कनिष्का आई हुई है, बस उसी के साथ बैठी हुई गप्पे मार रही थी..

मैं : अच्छा जी, क्या बातें हो रही हैं दोनों बहनों में.

अंशिका : ये समझ लो की तुम्हारी ही बात कर रहे थे.

मैं : मेरी बात?? तो तुमने उसे मेरे बारे में सब बता दिया..

अंशिका (हँसते हुए) : अरे नहीं, ऐसे ही बात हो रही थी की कोई बॉय फ्रेंड है या नहीं..वो अपनी बता रही थी और मैं अपनी..

मैं : तो क्या उसका भी बॉय फ्रेंड है ?

अंशिका : हाँ है…पर हमारी तरह उनमे कुछ नहीं हुआ है..वही सब बता रही थी वो की कैसे उसका बॉय फ्रेंड हर समय उसे छुने के लिए और चूमने के लिए मिन्नतें करता रहता है..पर कनिष्का उसे मना करती रहती है..उसे इन सब बातों से बड़ा डर लगता है, मैंने ही उसे ये सब ना करने के लिए कहा हुआ है..

मैं : यार, क्यों उसके आशिक को तरसा रही हो अपनी हुकुमत अपनी बहन के ऊपर चलाकर, मजे लेने दो न दोनों को..प्रोब्लम क्या है..

अंशिका : प्रोब्लम ये है की कन्नू अभी नासमझ है, और उसकी उम्र भी कम है, उसे अच्छे बुरे की पहचान नहीं है, कोई उसका फायदा उठा कर निकल जाए, मैं ऐसा हरगिज नहीं चाहती..आई लव माय सिस्टर वैरी मच….और हर कोई तुम्हारी तरह नहीं होता..जो अपनी फ्रेंड का इतना ध्यान रखे..

मैं : अगर कहो तो तुम्हारे साथ-२ मैं उसका भी ध्यान रख लेता हूँ..

अंशिका (थोडा गुस्से में) : मैंने तुम्हे पहले भी कहा है न, मेरी बहन के बारे में गलत मत सोचना..

मैं : यार तुम भी अजीब हो, मान लो उसके फ्रेंड की जगह अगर मैं होता, तब भी क्या तुम अपनी बहन को मुझसे दूर रहने के लिए कहती..

अंशिका : नहीं, क्योंकि मैं तुम्हारा नेचर जानती हूँ, तुम उसका गलत फायेदा नहीं उठाओगे..

मैं : येही तो मैं कह रहा हूँ, मैं उसका गलत फायेदा नहीं उठाऊंगा, सिर्फ दोस्ती और कुछ नहीं..

अंशिका (खीजते हुए) : अब तुम यहाँ मुझे छोड़कर मेरी बहन से फ्रेंडशिप करने की सोच रहे हो क्या ?

मैं समझ गया की बात तो बन सकती है पर अभी अंशिका से ये सब बातें करने का कोई फायदा नहीं है, कही वो भी हाथ से ना निकल जाए..

मैं : अरे यार , तुम तो बुरा मान गयी, ऐसा कुछ नहीं है..चलो छोड़ो इन सब बातों को, ये बताओ की तुम उसे मेरे बारे में क्या कह रही थी..

अंशिका (शर्माते हुए) : यही की बड़ा प्यारा दोस्त है, मिलते भी हैं हम, और कभी-२ किस्स वगेरह भी कर लेते हैं..

मैंने मन ही मन सोचा की सत्यानाश, ये सब बताने की क्या जरुरत थी, वो तो अब मुझे लाईन देगी ही नहीं..चलो कोई बात नहीं..

मैं : और वो क्या बोली…

अंशिका : बोलना क्या है, बस मुस्कुराती रही..और कुछ नहीं..

मैं : और तुमने आज दोपहर वाली बात भी बताई उसे, बोंटे पार्क वाली..

अंशिका : पागल हो गए हो क्या, मैंने उसे सिर्फ ये कहा है की कभी कभार किस्सेस और हग्स करते हैं, और कुछ नहीं…तुम भी कैसी बाते करते हो, मैं उसे अपने बारे में इतनी अन्दर की बातें क्यों बताउंगी भला..

मैं : अरे उसे भी तो पता चले की उसकी बहन कितनी बड़ी ठरकी है…जिसे आजकल पब्लिक प्लेस में भी नंगा होने में शर्म नहीं आती…और उसकी चूत में रोज आग लगी होती है, जिसे मैं ही बुझा सकता हूँ, पर मौका नहीं मिलता…बोल देती ये सब भी .

अंशिका (शर्माते हुए) : तुम न..सच में पागल हो..वैसे भी मुझे दोपहर से कुछ हो रहा है, मेरी चूत पर तुम्हारे होंठो का एहसास अभी तक है, सच में, आज जितना मजा कभी नहीं आया, कहाँ से सीखा इतना मजा देना तुमने..

मैं : जब सामने तुम्हारी जैसी हसीन चूत हो तो ये सब अपने आप आ जाता है, वैसे एक बात बताओ, अगर वो हवलदार ना आता तो क्या तुम मुझसे वहीँ पार्क में चुदवा भी लेती क्या..?

अंशिका : शायद…

मैं (हैरानी से) : पर तुमने तो कहा था की सही मौका और सही जगह का इन्तजार करना होगा..

अंशिका : हम लड़कियों की हर बात का ऐतबार मत किया करो, हम तो ऐसी ही होती है, आज कुछ और कल कुछ और..हे हे..

मैं : समझ गया, अब देखना, अगली बार जहाँ भी मौका मिलेगा, चोद दूंगा तुम्हे..

अंशिका : चोद लेना, मैं तो आज भी तैयार थी, पर तुम्हारी किस्मत में शायद थोडा और इन्तजार लिखा है..

मैं : इन्तजार की माँ की चूत, कल ही लो, कल दोबारा चलेंगे उसी पार्क में, और मैं हवलदार को भी पहले से ही पैसे देकर बोल दूंगा की उस तरफ ना आये, ठीक है न..

अंशिका : तुम बड़ी जल्दी एक्सय्तीद हो जाते हो, पूरी बात तो सुनते नहीं मेरी…मैंने कहा था न की कनिष्का के एडमिशन के लिए जाना है दुसरे कॉलेज में, तो कल से मैं तीन दिनों की छुट्टी पर हूँ, उसके साथ चार पांच कॉलेज जाना है, और फार्मस भरने है.

मैं : यार , तुम भी न…वो अकेली नहीं जा सकती क्या..

अंशिका : नहीं..बिलकुल नहीं, अगर वो जाना भी चाहती तो नहीं जाने देती..उसे यहाँ के रास्ते सही ढंग से नहीं मालुम..

मैं : और जब वो कॉलेज जायेगी तो उसे रोज छोड़ने और लेने भी जाया करोगी क्या..

अंशिका : तुम मेरी हर बात को मजाक में क्यों लेते हो…मैं ज्यादा से ज्यादा , उसकी मदद करना चाहती हूँ…

मैं : ठीक है फिर, जब फुर्सत मिल जाए तो मुहे फोन भी कर लेना..

और मैंने गुस्से में फोन रख दिया.

उसने उसके बाद मुझे कई बार फ़ोन किया पर मैंने जान बुझकर उठाया नहीं, मुझे मालुम था की उसे थोडा बहुत सबक सिखाना ही पड़ेगा, नहीं तो वो समझेगी की उसकी कही हुई हर बात को मैं इसलिए मान लेता हूँ की मैं उसकी चूत मारना चाहता हूँ, लड़कियों को कभी-२ थोड़ी बहुत डोस देनी पड़ती है..मैंने फोन सायलेंट मोड पर रख दिया और सो गया.

अगली सुबह जब उठा तो मेरे सेल पर 27 मिस काल्स थी अंशिका की, आखिरी कॉल रात के २ बजे की थी..
मैं समझ गया की मेरा पासा सही पड़ा है.

मैं नहाने के लिए अन्दर चला गया, पापा ऑफिस जा चुके थे, मम्मी नाश्ता बना रही थी..

मैं नहा कर निकला तो बेल बजी, मैंने टावल पहना हुआ था, इसलिए मैंने वहीँ से चिल्ला कर मम्मी को दरवाजा खोलने को कहा..

मैं अलमारी से अपने कपडे निकाल कर प्रेस करने लगा, तभी पीछे से आवाज आई “गुड मोर्निंग…”

मैंने पीछे मुड कर देखा तो हैरान रह गया, मेरे सामने अंशिका खड़ी थी.

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