फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 11

होस्टल के खुले माहोल में जाकर उसकी सोच अंशिका से कितनी अलग हो चुकी थी, इसे मैं अब समझ रहा था..वो अपनी बहन के बॉय फ्रेंड पर डाका डाल रही थी, उसे शेयर करने की बात कर रही थी, अंशिका और मेरे बीच क्या चल रहा है, सब पता है इसे, पर फिर भी वो मेरे पीछे पड़ी हुई थी..ऐसा न हो की इसकी वजह से अंशिका भी मेरे हाथ से निकल जाए.

मैं : देखो कनिष्का..ये सब तो ठीक है…पर अगर अंशिका को पता चल गया तो वो मुझसे कभी बात नहीं करेगी..
कनिष्का : अरे तो घबराते क्यों हो..मैं हु न..तुम्हे मैं संभाल लुंगी..और फिर देखना, दीदी से भी ज्यादा मजे ना दिए तो बात है..

मैं उसकी बात सुनकर हेरान रह गया, कहाँ तो अंशिका अपनी इस छोटी बहन को इतने प्रोटेक्टिव तरीके से रखती है और दूसरी तरफ उसकी बहन चालू किस्म की लडकियों की तरह बाते कर रही है.

मैं : पर तुम ये सब क्यों कर रही हो, और भी तो लड़के है , अगर तुम कहो तो मैं अपने एक दोस्त से तुम्हे मिलवा दू..

कनिष्का (गुस्से में) : देखो, अब कुछ ज्यादा ही हो रहा है…एक लड़की तुमसे खुले तरीके से मजे लेने के लिए कह रही है और तुम हो की ना नुकुर कर रहे हो..मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है की तुम दुनिया में किसी के भी साथ मजे लो, चाहे मेरी बहन या फिर कोई और, पर जो कुछ भी हम करेंगे वो तुम्हारे और मेरे बीच की बात रहेगी, अगर तुम्हे ये मंजूर है तो बोलो, वर्ना आज के बाद मैं न तो तुमसे इस बारे में बात करुँगी और ना ही कुछ और..

मैं उसकी बात सुनकर घबरा गया, मेरे दिल के अन्दर तो वैसे भी अंशिका के बाद इसको भी चोदने के प्लान बनने लगे थे, और अगर मैंने ज्यादा नखरे दिखाए तो ये मेरे हाथ से निकल न जाए, वैसे भी अंशिका ने कहा था की उसे चोदने के बाद मैं किसी को भी चोद सकता हु.

मैं : अरे यार, तुम और अंशिका एक जैसी हो, दोनों को जल्दी ही गुस्सा आ जाता है..ठीक है..पर ध्यान रहे, अंशिका को कुछ पता न चल पाए..

कनिष्का : अब आये न रास्ते पर..वैसे मैं तुम्हे देखते ही समझ गयी थी की तुम चालू किस्म के लड़के हो..

मैं : फिर क्यों इस चालू लड़के के पीछे पड़ी हो..

कनिष्का : क्योंकि मैंने ये भी नोट किया की तुम बेड पर एक जंगली की तरह से पेश आओगे..

मैं उसकी बात सुनते ही उठकर बैठ गया.

मैं : तुमने…तुमने ये कैसे पता किया..मैंने तो ..

कनिष्का : अरे , तुम हम लडकियों के फिफ्थ सेन्स को नहीं जानते, हमें सब पता चल जाता है, तुम्हारी बॉडी लेंगुएज , स्टाईल, फिसिक ..सब कुछ यही बता रहे है की यु विल रोक द बेड ..है न..

मैं : पता नहीं..वैसे क्या तुमने पहले कभी ..मेरा मतलब है..किसी के..
कनिष्का :अरे साफ़-२ पूछो न..सेक्स किया है ..तुम तो लडकियों की तरह से शर्माते हो..
हां..किया है..अपने उसी बॉय फ्रेंड के साथ…और एक टीचर के साथ भी..और कुछ.

यार..ये तो हम सबकी माँ निकली…है तो इतनी छोटी..और तेवर देखो..सबसे आगे निकल चुकी है ये तो..और अंशिका इसे अभी भी बच्ची ही समझती है.

कनिष्का : क्या हुआ…क्या सोचने लगे..
मैं : कुछ नहीं..
कनिष्का : तो बात पक्की..
मैं : हाँ..पक्की..
कनिष्का : तो इसी बात पर एक और किस्स तो दे दो..
मैं : ये लो..पुच..पुच..
कनिष्का : अब ये भी तो बता दो की कहाँ दी है ये दोनों किस्स.

मेरा लंड तन कर खड़ा होने लगा..रात के 1 :30 बज रहे थे..और ये लड़की मुझे उठाने के बाद अब मेरे लंड को भी उठाने में लगी हुई थी.

मैं : ये..एक तो तुम्हारे..गालो पर..और दूसरी तुम्हारे लिप्स पर..
कनिष्का : वैसे सच बताना…वो हॉल में तुम्हे मुझे किस्स करते हुए कैसा लगा..
मैं : बहुत अच्छा..तुम्हारे लिप्स इतने स्वीट है..जैसे तुमने इन पर लिपस्टिक की जगह शहद लगा रखा हो..
कनिष्का : ओह्ह…विशाल..यु आर ..मेकिंग मी वेट , आई वांट मोर ..मोर किस्सेस ..
मैं : ये लो फिर…पुच पुच पुच पुच….
कनिष्का (गहरी साँसे लेते हुए) : अब ये कहाँ दी है..बोलो..बोलो न..

मैंने अपना लंड पायजामे से बाहर निकाल लिया और उसे हिलाने लगा.

मैं : ये..पहली है तुम्हारी पतली गर्दन पर…
कनिष्का : ओह्ह्ह्ह….विशाल….मम्म
मैं : और दूसरी है तुम्हारी सोफ्ट सी..पिंक सी…ब्रेस्ट पर…
कनिष्का : उम्म्मम्म……और…..
मैं : और तीसरी है…तुम्हारी दूसरी ब्रेस्ट के निप्पल पर…
कनिष्का : ओह्ह्हह्ह….विशाल्ल्ल………..एंड….
मैं : एंड लास्ट इस ….इट्स ओन…यूर ..स्वीट..पुसी…
कनिष्का : ओह्ह्हह्ह…….आई एम् फीलिंग…ईट …तुम अगर मेरे सामने होते न…तुम्हे तो मैं अब तक कच्चा चबा जाती..

मैं : तो समझ लो…की मैं तुम्हारे सामने ही हु…और वो भी बिलकुल नंगा…
कनिष्का : उम्म्म……आई केन इमेजिन…..युवर पेनिस इस इरेक्ट….आई विल…सक यु ऑफ…ओफ्फ्फ…विशाल….ये क्या कर दिया…तुमने…पता है मेरी..मेरी चूत से कितना पानी निकल रहा है..
मैं : वो पानी तो मैं पी जाऊंगा…देख लेना..

कनिष्का शायद मेरी ही तरह मास्टरबेट कर रही थी…उसकी गहरी साँसों की आवाज के साथ साथ हाथ की चुडिया हिलने की भी आवाज आ रही थी..

कनिष्का : कैसे पीयोगे…तुम मेरा…सारा रसीला पानी…बोलो…
मैं : तुम्हे अपने ऊपर लिटा लूँगा…तुम मेरा लंड चुसना….और मैं तुम्हारी चूत..
कनिष्का :ओह्ह्हह्ह्ह्ह…..विशाल्ल्ल……सक मी…सक मी…येस..येस…येस…ओह्ह्ह…..माय…..गोडsssssssss

वो शायद झड़ने लगी थी..मैंने भी अपने हाथो को लंड पर तेजी से मसला और जल्दी ही उसमे से भी सफ़ेद रंग का गाड़ा रस निकलने लगा…मैंने जल्दी से अपने पिल्लो के कवर को उतारा और उसमे सारा रस समेट लिया..वर्ना रात के समय , कोन सी पिचकारी कहाँ जा रही है, पता ही नहीं चलता.

कुछ देर तक हम दोनों कुछ ना बोले…मैंने अंशिका के साथ भी कई बार फोन सेक्स किया था…पर कनिष्का के साथ करने में कुछ और ही मजा आया था..पता नहीं चुदाई के टाइम ये क्या हाल करेगी..

कनिष्का : विशाल….थेंक्स…
मैं : किसलिए..

कनिष्का : फॉर एवेरीथिंग…मेरी कॉलेज एडमिशन में हेल्प के लिए…कल वाली किस्स के लिए…एंड फॉर मेकिंग मी कम..इतना एरोटिक तो मैंने कभी फील नहीं किया…आई एम् लोविंग इट..
मैं : मी..आल्सो.चलो अब सो जाओ..
कनिष्का : उन्…नहीं न…प्लीस..थोड़ी और देर तक बाते करो न…
मैं : नहीं..कल मम्मी पापा ने एक हफ्ते के लिए बाहर जाना है…उन्हें स्टेशन पर छोड़ने भी जाना है..मुझे जल्दी उठाना है कल..समझा करो.
कनिष्का : वाव…एक हफ्ते के लिए..सुपर..यानी एक हफ्ते तक तुम घर पर अकेले..मैं तो सोच रही थी की कैसे और कहाँ तुमसे मिलूंगी..पर तुमने तो सारी मुश्किल आसान कर दी..मजा आएगा.

हे भगवान्…ये मैंने क्या कर दिया…मैंने बिना सोचे इसे बोल तो दिया..पर अंशिका के साथ तो पहले से ही मेरी प्लानिंग चल रही है..और कभी अगर ये दोनों बहने एक साथ ही पहुँच गयी मेरे घर तो गड़बड़ हो जाएगो…पर अब जो होना था सो हो गया..

मैं : हां..वो तो है…चलो कल बात करते हैं फिर…
कनिष्का : ठीक है, तुम सो जाओ..कल मिलते हैं फिर..बाय ..गुड नाईट.
मैं : ओके…बाय…गुड नाईट ..

मैंने मोबाइल रखा और अपने मुरझाये हुए लंड को देखा…और मेरे सामने एकदम से किसी पिक्चर की तरह , अंशिका और कनिष्का मेरे ही कमरे में पूरी नंगी दिखाई देने लगी…मैं जानता था की ये मुमकिन नहीं है, पर मेरी इच्छाशक्ति पर मेरा बस नहीं चल रहा था…और ये सोचते हुए मेरे लंड ने फिर से अंगडाई लेनी शुरू कर दी…और मैंने उसी पिल्लो कवर में दो बार और अपने लंड के रस को निकाल कर, उसे लगभग गीला सा कर दिया..और फिर मुझे कब नींद आ गयी, मुझे पता ही नहीं चला.

सुबह मम्मी ने आकर मुझे उठाया, वो जल्दबाजी में थी, उन्हें जाने की काफी तय्यारी करनी थी, मुझे उठने को कहकर वो वापिस चली गयी.मैं नहा धोका नीचे आया, पापा ने मुझे हफ्ते भर के खर्चे के लिए पैसे दिए और ये करना और वो न करना जैसी कई बाते बताते हुए पेकिंग करते रहे.

उनकी ट्रेन 5 बजे की थी, नाश्ता करने के बाद मैंने भी उनकी पेकिंग में मदद की और लगभग २ बजे तक सब कुछ पेक हो चूका था.मम्मी-पापा ने हल्का फुल्का लंच किया और बाकी साथ के लिए बाँध लिया, मैंने टेक्सी बुला ली और उनके साथ ही मैं भी स्टेशन की और चल दिया.चार बजे तक हम स्टेशन पहुँच गए , ट्रेन आधे घंटे बाद आई और फिर लगभग 5 बजे वो चल दी, मैंने उन्हें बाय कहा और वापिस चल दिया.

जिन्दगी में आज पहली बार मुझे अजीब सी आजादी का एहसास हो रहा था. मन कर रहा था की सभी दोस्तों को बुलाऊ और घर पर पार्टी दू, खूब मौज मस्ती करू.. पर उस मौज मस्ती से पहले मुझे अपनी वर्जिनिटी की फिकर थी, जिसे अब मुझे हर हाल में खोना हो था..मैंने अंशिका को फोन मिलाया.

मैं : हाय..
अंशिका : हाय..कहाँ हो..मम्मी पापा गए क्या..
मैं : हाँ…बस अभी उन्हें छोड़ कर आ रहा हु, तुम कहाँ हो.?
अंशिका : मैं तो घर पर ही हु..
मैं : कब तक आओगी फिर..
अंशिका : आज नहीं आ पाऊँगी..अभी पांच बज गए हैं, ज्यादा देर तक नहीं रह पाऊँगी इसलिए आज आने का ओई फायेदा नहीं है..पर कल आउंगी, सोच रही हु की कल की छुट्टी ले लेती हु, घर पर तो कॉलेज के लिए ही निकलूंगी पर वहां जाउंगी नहीं.

मैं उसकी बात सुनकर थोडा मायूस हो गया, मुझे लगा था की आज ही हो जाएगा सब..पर वो भी अपनी जगह पर सही थी.

मैं : कोई बात नहीं, जहाँ इतने टाईम तक इन्तजार किया है, एक दिन और सही..

अंशिका मेरी बात सुनकर चुप सी हो गयी.

अंशिका : जानते हो..आई एम् डाईंग टू मीट यु .. सुबह से तुम्हारे फ़ोन का वेट कर रही थी, पर चार बजे तक नहीं आया तो मैं समझ गयी की ट्रेन शायद शाम की है और इसलिए आज का तो सीन पोसिबल ही नहीं है..
मैं : मैं समझ सकता हु…पर कल ज्यादा इन्तजार मत कराना ..समझी न..
अंशिका : नहीं करवाउंगी …रात को फोन करती हु अब..बाय..

मैं घर चल दिया, रास्ते से मैंने बियर के केन की पेटी ले ली..क्योंकि अब मैं पूरा एक हफ्ता मस्ती से गुजारना चाहता था.

कल मुझे कनिष्का ने भी मिलने को कहा था..मुझे लग रहा था की कहीं वो न आ धमके आज शाम को. मैं घर पहुंचा और बेडरूम में बैठ कर मैंने कनिष्का को फोन मिलाया..

कनिष्का : हाय…कैसे हो..आज तो पूरा दिन तुमने फोन ही नहीं किया..मम्मी – पापा गए क्या..?
मैं : हाँ चले गए..बस अभी घर आया हु..तुम कहाँ हो..?
कनिष्का : ओहो..बड़ी जल्दी हो रही है मुझसे मिलने की..दरवाजा खोलो, अभी मिल लेती हु.

जिस बात का मुझे डर लग रहा था, वही हुआ, मैंने भाग कर दरवाजा खोला , वो बाहर ही खड़ी थी, उसके हाथ में काफी सामान था.

मैंने उसे अन्दर बुलाया और दरवाजा बंद कर दिया.

मैं : अरे, बता तो देती, की आ रही हो, अगर मैं घर पर ना मिलता तो..
कनिष्का : नहीं मिलते तो मैं इन्तजार कर लेती…वैसे मैं पिछले एक घंटे से तुम्हारे घर के सामने वाली मार्केट में ही घूम रही थी..
मैं : एम् ब्लोक मार्केट में…क्यों..?

कनिष्का : मैं घर से 3 बजे निकली थी की अपनी फ्रेंड के साथ मार्केट जाना है, ताकि दीदी मेरे साथ ना चल दे, वैसे वो भी शायद सुबह से तुम्हारे फोन का वेट कर रही थी..उनका मूड थोडा खराब सा था..लगता है दीदी के साथ प्रोग्राम था आपका..है न..

मैं कुछ न बोला.

कनिष्का : वैसे एक बात बताओ…कितनी बार फक कर चुके हो अभी तक तुम दीदी को..
मैं : एक बार भी नहीं..दुसरे सभी मजे लिए है , पर फकिंग नहीं..

कनिष्का मेरी बात सुनकर हेरान रह गयी..पर फिर मैंने उसे बताया की किस तरह से वो और मैं मिले और कभी टाईम की तो कभी सही जगह की कमी की वजह से हम दोनों कुछ न कर पाए..मैंने उसे अपने वर्जिन होने वाली बात भी बता दी..और ये भी की मैं अपनी वर्जिनिटी अंशिका के साथ ही खोना चाहता हु..और हमने आज घर पर प्रोग्राम भी बनाया था..

कनिष्का : ओहो..तभी शायद वो आज इतना अपसेट थी…पर कोई बात नहीं, अब तो पूरा हफ्ता है, कभी भी मस्ती कर सकते हो तुम दोनों..पर उनके चक्कर में मुझे मत भूल जाना..दीदी को तुम अपनी वर्जिनिटी दे दो, फिर तुम्हे भी मैं अपनी एक दूसरी वर्जिनिटी दूंगी…जिसे मैंने आज तक किसी और को नहीं दिया..

उसने अपनी कमर पर हाथ रखकर बड़े कामुक अंदाज में मुझसे कहा. उसका इशारा अपनी गांड की तरफ था..मेरा तो लंड उसकी बात सुनकर फुफकारने सा लगा.मैंने उसे अपनी तरफ खींचा, वो सीधा मेरी गोद में आ बैठी और अपनी बाहे मेरी गर्दन से लपेट दी..

मैं : तुम्हे कैसे भूल जायेंगे…पर मेरी एक रेकुएस्ट है तुमसे ..मैंने तुम्हारी दीदी से वायदा किया है की पहले मैं उसके साथ और फिर किसी और के साथ करूँगा..सो…प्लीस…तुम समझ रही हो न …की मैं क्या कहना चाहता हु..

कनिष्का (मुस्कुराते हुए) : समझ गयी मेरे भोंदू राजा..एक बात बताओ..क्या तुम मेरी दीदी से प्यार करते हो..
मैं : नहीं तो..बस ऐसे ही मयूचुअल अट्रेक्शन है बस…और कुछ नहीं..क्यों तुम्हे ऐसा क्यों लगा..
कनिष्का : नहीं बस ऐसे ही…वर्ना इस तरह की बाते तो कोई भोंदू ही करेगा, जब उसकी गोद में एक गर्म और जवान लड़की बैठी हो…हूँ…

और मेरी आँखों में देखते हुए उसने मेरे होंठो पर अपने गर्म होंठ रख दिए..

मेरा हाथ अपने आप उसकी ब्रेस्ट पर जा पहुंचा और उसके निप्पल्स को ढूंडने लगा..जो जल्दी ही मेरी उँगलियों के बीच आ गया..जिसके दबाते ही उसने अपनी रसीली गांड को मेरे उठते हुए लंड के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया..

तभी मेरे दिमाग में फिर से अंशिका की तस्वीर कोंध गयी…और मैंने उसके होंठो और ब्रेस्ट से अपनी पकड़ हटा ली.

मैं : ओह्ह…कनिष्का…तुम इतनी हॉट हो यार ..पर तुम तो मेरी सिचुएशन जानती हो…मैं इससे आगे गया तो मैं शायद अपने आप पर कण्ट्रोल नहीं कर पाउँगा..

कनिष्का (मेरे चेहरे को पकड़कर) : मैं जानती हु….मुझसे पहले दीदी का हक है तुमपर…चलो कोई बात नहीं..आज नहीं तो कल सही..जब तुम कहोगे अब तभी आउंगी तुम्हारे पास..

और ये कहते हुए वो उठ गयी..और अपना सामान लेकर, मुझे एक और बार गुड बाय किस करके , घर चली गयी..

रात को मैं बीयर पीकर, अंशिका से देर तक बाते करता रहा..और रात को लगभग एक बजे मैं सो गया.

अगली सुबह मेरे घर की बेल बजी..मैं आँखे मलता हुआ बाहर गया..बाहर अंशिका खड़ी थी..उसे देखते ही मैं अपनी पलके झपकाना भूल गया…वो ब्लू कलर की साडी में आई थी..चेहरा खिला हुआ सा..कंधे पर बेग और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान…

अंशिका : मैं जानती थी…तुम अभी तक सो रहे होगे…टाईम देखो..आठ बजने वाले हैं…चलो अन्दर..
वो मुझे धकेल कर अन्दर आ गयी..

मैंने दरवाजा बंद किया और उसे देखने की वजह से खड़े हुए लंड को अपने पायजामे में लेकर उसके पीछे चल दिया.

वो सीधा किचन में गयी और फ्रिज से पानी निकाल कर पीने लगी..उसकी सुनहरी गर्दन पर हलके पसीने की बूंदे चमक रही थी, बड़ी प्यास लगी हुई थी उसे, थोडा पानी बाहर निकल कर गर्दन से होता हुआ उसकी छाती पर बनी गहरी घाटियों के अन्दर जा पहुंचा.

मैं उसके पीछे गया और उसके नंगे पेट पर अपने हाथ लपेट कर उसकी गर्दन को चूमने लगा..

अंशिका : उन् …मत करो न…चलो पहले नहा कर , ब्रश करलो…उसके बाद पूरा दिन है…मैं नाश्ता बनाती हु..

मैंने उसकी बात मानकर जल्दी से अपने कपडे लेकर बाथरूम गया और शेव करने के बाद, नहा कर , बाहर आ गया…वो मेरे बेडरूम की चादर को सही कर रही थी.

मैंने पीछे से जाकर उसे पकड़ लिया और फिर से उसकी गर्दन को चूमने लगा..

अंशिका : ओह्ह्ह…विशाल..पहले नाश्ता तो कर लो..उसके बाद..
मैं : मेरा नाश्ता , लंच और डिनर तो तुम हो आज…तुम्हे ही खाऊंगा मैं आज….
मेरी बात सुनकर वो मेरी तरफ पलटी और मुझसे जोर से लिपट गयी…

ओह्ह्ह्ह विशाल्ल्ल्ल….तभी तो आई हु मैं…खा जाओ तुम…आज अपनी अंशिका को..मैं पूरी तरह से तैयार हु, तुम्हारे सामने हु..जैसे मर्जी, वैसे खाओ, पर आज मुझे इतना प्यार करो की मेरे अन्दर की सारी कसक मिट जाए …

मैंने उसकी साडी के पल्लू को नीचे गिरा दिया और ब्लाउस के अन्दर कसमसा रहे उसके दोनों कबूतरों को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा

मैं : आज तो बस तुम देखना, तुम्हे ऐसे खाऊंगा की तुम्हारी भूख और भी बड़ जायेगी और तुम मेरे लंड की गुलाम हो जाओगी

अंशिका : अच्छा जी…देखते हैं…कोन किसका गुलाम होता है आज…मैं तुम्हारे लंड की या तुम्हारा लंड मेरी चूत के रस का…..

उसने मुझे बेड पर धक्का दिया और मेरी गोद में आ बैठी..

मैं उसके मुंह से पहले भी लंड और चूत जैसे शब्द सुन चूका था..पर मेरे सामने बैठ कर उसके गुलाबी होंठ जब अपनी चूत से निकलते रस की बात कर रहे थे तो बड़ा मजा आ रहा था , मैंने एक हाथ सीधा उसकी चूत पर और दुसरे हाथ से उसका चेहरा अपनी तरफ खींच कर अपने होंठो पर टिका दिया और उन्हें चूसने लगा..मैंने हाथ नीचे करके उसकी साडी को खींचा और उसे उतार दिया…और फिर उसकी पेटीकोट को भी खींच कर उसे भी घुटने तक खींच कर उतार दिया..उसके ठन्डे चुतड मुझे अपने गर्म लंड पर साफ़ महसूस हो रहे थे…उसने भी मेरे होंठ चूसते हुए ही मेरे पायजामे को खोला और उसे मेरे जोकि समेत नीचे उतार दिया…और अपनी जांघो के बीच से मेरे उफान खाते लंड को भींच दिया.

मेरे मुंह से एक मादक सी सिसकारी निकल गयी..

उसकी मुलायम गांड मेरी टांगो के ऊपर थी..और उसकी टांगो के बीच से होता हुआ मेरा लंड उसकी चूत से टक्कर मारता हुआ ऊपर तक आ रहा था, जिसे वो बड़े प्यार से सहला रही थी.

मैंने ब्लाउस के हूक खोले और उसे भी उतार दिया…और एक झटके से उसकी ब्रा के दोनों स्ट्रेप भी खींच कर नीचे कर दिए और उसके दोनों मुम्मे बाहर की और आते ही मैंने उनपर हमला सा बोल दिया..

वो चीख रही थी..हम दोनों लगभग नंगे होकर एक दुसरे से चुपके हुए से, चूमा चाटी करने में लगे हुए थे..मैंने अपने मुंह की लार से उसकी ब्रेस्ट को पूरा गीला कर दिया था, उसके स्तनों को पीने में बड़ा मजा आ रहा था… अपने मुंह को उनपर रगड़ने से ऐसा लग रहा था की किसी रबड़ के गुब्बारे पर मुंह रगड़ रहा हु.. उसे इतना मजा आ रहा था की अपनी आँखे बंद किये हुए वो मेरे मुंह को अपनी पूरी ब्रेस्ट पर रगड़े जा रही थी..

अह्ह्हह्ह विशाल्ल्ल…..सक…..सक…मी……अह्ह्हह्ह…..

मैंने उसके दोनों निप्पल अपने हाथो से पकडे और उनपर चुंटी काटकर उन्हें अपने दांतों के बीच चुभलाने लगा..जैसे कोई सुपारी चूसता है..

मेरा टावल भी निकल चूका था, और अब मैं पूरा नंगा था..

उसकी चूत से बड़ा पानी निकल रहा था, जिसे उसने अपने हाथो में समेटा और मेरे लंड के ऊपर वही हाथ लगाकर उसे ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया..

मैंने उसे अपने बेड के ऊपर पटक दिया..अंशिका अपने एक हाथ को अपनी चूत के अन्दर और दुसरे को अपने मुंह में डालकर , पूरी नंगी होकर मेरे बेड के ऊपर पड़ी हुई, किसी पोर्न मूवी की एक्ट्रेस जैसी लग रही थी…

वो मेरे लंड को देखकर अजीब से चेहरे बना रही थी…मानो अपने आप को तैयार कर रही हो, मेरा लंड लेने के लिए..

अंशिका ने अपनी दोनों टाँगे फेला कर अलग -२ दिशा में फेला ली और अपनी चूत के अन्दर तक की झलक मुझे दिखाई ..वो शायद चाह रही थी की मैं सीधा उसकी चूत मारना शुरू कर दू..पर मैं आज कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता था..
मैंने उसकी फेली हुई टांगो के ऊपर अपने हाथ रखे और अपना मुंह सीधा उसकी चूत के ऊपर लगा दिया..

वो आनंद के मारे किलकारियां मारने लगी…

अह्ह्ह्हह्ह……विशाल्ल्ल……ये क्या….अह्ह्ह्ह……मम्म……म……ओह्ह्ह्हह्ह…..येस्स्स्स……अह्ह्हह्ह……… म्म्म्मम्म्म्मम्म….

मैंने उसकी क्लीन शेव पुस्सी को अपनी पेनी जीभ से चाटना शुरू किया और ये सब करते हुए मेरी नाक , ठोडी और आधे से ज्यादा चेहरा उसकी चूत की चाशनी में भीगकर गीला हो गया…

ओह्ह्ह्ह विशाल्ल्ल्ल….मत तरसाओ न….प्लीस्स्स….कम एंड टेक मी…..

वो मेरा लंड लेने के लिए मरी जा रही थी…और इसलिए उसने एकदम से मुझे घुमा कर बेड पर पीठ के बल लिटा दिया…मेरा मुंह अभी तक उसकी चूत के अन्दर फंसा हुआ था…जिसे उसने छुड़ाया…और उस रस टपकाती हुई चूत को मेरी छाती और पेट से रगड़ते हुए..मेरे लंड के ऊपर जाकर टिका दिया…

अंशिका : उम्म्मम्म….बड़ा मजा आता है ना…तड़पाने में…हूँ…

उसके दोनों हाथ मेरे हाथो को बेद के ऊपर दबाये हुए थे…और उसके दोनों रसीले फल मेरे चेहरे पर टक्कर मार रहे थे..मेरा लंड नीचे से उसकी चूत के दरवाजे पर खड़ा होकर अन्दर जाने का इन्तजार कर रहा था..

अंशिका : जानते हो की मैं कितना तड्पी हु..पिछले चार महीने में…उसके बाद भी चूसने में वक़्त गँवा रहे हो…कल रात से इस वक़्त का इन्तजार कर रही थी..पता है…और तुम हो की…

मैंने एक झटका दिया ताकि मैं अपने हाथ छुड़ा कर उसकी कमर पकड़ लू और लंड डाल दू अन्दर…पर उसकी पकड़ काफी मजबूत थी…

मैं : देखो…अब तुम तडपा रही हो मुझे…

अंशिका : मैं तो खुद तड्पी हु इस पल के लिए…मैं कैसे तडपा सकती हु तुम्हे…..तुमने अपनी वर्जिनिटी इतने टाईम तक मेरे लिए संभाल कर रखी उसके लिए थेंक्स…और आज मुझे इतने मजे देना की मेरी सारी ख्वाहिशे पूरी हो जाए…और याद है..तुमने एक बार मुझे कहा था की तुम मुझे प्रेग्नेंट करना चाहते हो…तो मेरा भी आज वादा है तुमसे..मेरी चाहे किसी से भी शादी हो, मेरे पेट में आने वाला पहला बच्चा तुम्हारा ही होगा…और फिर तुम्हे में अपनी छाती का दूध भी पिलाउगी…

वो जज्बात में आकर ना जाने क्या -२ बोले जा रही थी…शायद मेरी वर्जिनिटी के बदले ही उसने ये इनाम देने की सोची थी मुझे..ये वो सब बाते थी जो मैंने उसे पहले बताई थी और उसने उन्हें टाल दिया था…

पर अब ये बाते करने का वक़्त नहीं था…उसकी चूत से निकलता रस सीधा मेरे लंड के ऊपर गिर रहा था..और किसी मक्खन की तरह से उसे चिकना बनाने में लगा हुआ था..मैंने ऊपर होकर उसके होंठो को फिर से चूम लिया…और उसने मेरे हाथ छोड़कर मेरे चेहरे को पकड़कर अपने होंठो को मेरे होंठो पर स्मेश करते हुए जोर से सिसकना चालू कर दिया..मेरे हाथ सीधा उसकी गांड के ऊपर गए और उन्हें हल्का सा धक्का देते हुए नीचे की तरफ लाने लगे…

अंशिका की चूत मेरे लंड के ऊपर आकर धंस सी गयी..उसका पूरा शरीर अकड़ गया…शायद उसे दर्द हो रहा था..पर मैं जानता था की ये दर्द तो होगा ही…मैंने उसे थोडा और अपनी तरफ खींचा और मेरा लंड उसकी चूत की सुरंग में जगह बनता हुआ थोडा और अन्दर तक आ गया…

अंशिका : अह्ह्ह्ह……विशाल्ल्ल…..दर्द हो रहा है….
मैं : ओह्ह बेबी….इतना तो होगा ही ….बस हो गया….

और इतना कहकर मैंने उसकी कमर पर हाथ रखकर अपनी छाती से भींचा और नीचे से एक करार झटका मारा…मेरा लंड अब आधे से ज्यादा उसकी चूत के अन्दर घुस गया…

अंशिका ने अपना चेहरा मेरी गर्दन के अन्दर घुसा लिया…उसकी गर्म साने और आँखों से निकलते गर्म आंसू मुझे साफ़ महसूस हो रहे थे…पर वो मुझे रोक नहीं रही थी…मैंने उसकी कमर को खींचा और अपना लंड थोडा बाहर निकाला ताकि अगला धक्का मार सकू…पर मुझसे पहले अंशिका ने अपना चेहरा ऊपर उठाया…और मेरे झटका देने से पहले ही उसने ऊपर उठकर, अपना पूरा भार मेरे लंड पर डालते हुए, उसे अपनी चूत के अन्दर ले लिया…

अह्ह्हह्ह्ह्हह्हsssssssssssssssssssss विशाल्ल्ल……ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…..माय गोड……. म्मम्म……

उसकी कमर कमान की तरह से पीछे की तरफ मुड गयी, उसके बाल मेरे पैरो के ऊपर आकर उनपर गुदगुदी से करने लगे…
मैंने एक हाथ ऊपर लेजाकर उसकी ब्रेस्ट को पकड़ा और उन्हें मसलने लगा…अंशिका ने अपने दोनों हाथ मेरे हाथो को ऊपर रख दिए और उन्हें मसलने लगी…और फिर मेरी तरफ देखकर..मेरे लंड के ऊपर उछलने लगी…

ओह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह उम्म्म्म .विशाल…ओह्ह्हू.. फक… अह्ह्ह फक मी…अह्ह्ह्ह …ऑफ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ्फ़….

मेरा लंड तो मानो किसी वेलवेट जैसी जगह में था, अन्दर से निकलती गर्मी और रसीला पानी, दोनों को मैं साफ़ तरीके से महसूस कर पा रहा था अपने लंड पर..

मैंने अचानक से अंशिका को अपनी गोद में उठा लिया और बेड के किनारे पर खड़ा हो गया..और उसे लेकर में बाहर की तरफ चल दिया..

वो कुछ समझ नहीं पा रही थी…पर वो कुछ ना बोली..अपनी कमर हिला कर वो मेरे लंड से चिपकी रही, और अपनी बाहे मेरी गर्दन से लपेट कर लम्बी-२ सिस्कारियां लेती रही…

मैं उसे लेकर बाहर आया और डाईनिंग टेबल के ऊपर लेजाकर लिटा दिया..अब उसकी चूत सीधा मेरी कमर के बराबर थी, मैंने एक टांग उठा कर चेयर के ऊपर रख दी और इस तरह के एंगल से मेरा पूरा लंड अब अंशिका की चूत के अन्दर तक जा रहा था…

मैंने धक्के मारने शुरू किये, मेरे सामने उसके हिलते हुए मुम्मे बड़े ही सेक्सी लग रहे थे…मेरे हर धक्के से वो ऊपर की तरफ जाते और फिर नीचे आते…

मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया..और उसकी चूत के बाहर की तरफ ही रगड़ने लगा…

अब तक अंशिका की चूत पूरी तरह से जलने लगी थी…मेरे लंड को उसने हाथ से पकड़कर वापिस छेद पर टिकाया और उसे फिर से निगल गयी….

अंशिका : अह्ह्ह्ह……ऐसा मत करो…..बाहर मत निकालो…..इसे….इतना मजा आ रहा है…इतना तद्पाने के बाद तो आज आया है ये मेरे अन्दर….अब नहीं निकालना…कभी नहीं निकालना….कभी नहीं….कभी नहीं…..

वो ये बोलती गयी और नीचे से धक्के मारकर मेरे लंड को अन्दर निगलती गयी…मैं तो बस अब खड़ा हुआ था, सारा काम नीचे लेटी हुई अंशिका कर रही थी…पर उसकी चूत की पकड़ भी अब तेज थी मेरे लंड पर…जिसकी वजह से मुझे लगने लगा था की जल्दी ही मेरा लंड पानी छोड़ देगा…वो भी शायद समझ गयी थी…और वो और तेजी से मेरे साथ झटके खाकर चुदाई करने लगी..

अह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह म्मम्मम ओह्ह्ह्ह ……. म्मम्मम……. अह्ह्ह्हह्ह ….. याआअ… हाआअ…..अह्ह्ह्ह…..

वो इतनी तेजी से झटके मार रही थी की मुझे लगा की टेबल ही ना टूट जाए…मैंने उसे फिर से उठा लिया….और उसने मेरी गर्दन में हाथ डालकर अपने नर्म और गीले होंठ फिर से मुझपर रख दिए…और मेरी गोड में ही उछल उछल कर चुदवाने लगी….

मैं बस यही चाहता था की अंशिका से पहले मैं न झड जाऊ…अपनी पहली चुदाई में ही मैं उससे पीछे नहीं रहना चाहता था…

पर जिस तरह से वो मेरी गोद में उछल रही थी मुझे लगने लगा की शायद वो भी झड़ने वाली है…

मैंने उसे टाईल वाली ठंडी दिवार से सटा दिया…और उसके कंधे पर हाथ रखकर नीचे से ऊपर की तरफ अपने लंड के झटके देने लगा…

अचानक उसका चेहरा ओ के अकार में खुला का खुला रह गया…मैं समझ गया की वो झड़ने लगी है…मैंने उसके खुले हुए मुंह में अपने होंठ डाल दिए और उन्हें चाटने लगा…और ऐसा करते ही मेरे लंड से भी एक साथ कई पिचकारियाँ निकल कर सीधा उसकी चूत के अन्दर जाने लगी…जिसे उसने साफ़ महसूस किया…और अपनी थकी हुई चूत को वो फिर से मेरे लंड के ऊपर और तेजी से रगडती हुई… सिसकती हुई..झड़ने लगी.

अह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल……ओह्ह्ह्हह्ह……म्मम्मम….

और जब तूफ़ान थमा तो उसके पसीने से भीगा हुआ बदन और रस से भीगी हुई चूत मेरे सामने थी…
उसने मेरी तरफ बड़े प्यार से देखा..और मुझे चूम लिया..

अंशिका :आज तो तुम मुझे खा ही गए…कैसा लगा ये नाश्ता..हूँ…
मैं : अभी पेट भरा है…मन नहीं…और भी खाने को मन कर रहा है अभी तो..
अंशिका : तो खा लो ना बेबी..मैं आज पूरा दिन तुम्हारे पास ही हु..

मैंने उसे फिर से चूम लिया..मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर से फिसल कर बाहर आ गया..और उसके पीछे-२ हम दोनों का रस भी..

हम बाथरूम की तरफ चल दिए…एक साथ नहाने के लिए.

अंशिका अपनी गांड मटका कर मेरे आगे चल रही थी, बड़ी ही सेक्सी लग रही थी वो पीछे से..

तभी उसका फ़ोन बजने लगा..

उसने बेग से अपना सेल निकाला और देखा, मेरी तरफ देखकर बोली : कनिष्का का फ़ोन है..

और फिर फ़ोन उठा कर बोली : हाँ…कन्नू बोल..हां..अच्छा…ठीक है…हाँ बस ऐसे ही…घूम रहे है अभी तो…हां हां…अच्छा …ले ..ले बात कर ले फिर..

उसने सेल मुझे दे दिया और फुसफुसा कर बोली : कन्नू है, तुमसे बात करना चाहती है, वैसे मैंने इसे रात को बता दिया था की मैं तुम्हारे साथ आज घुमने जाउंगी..लो बात करो..

मैं : हेलो ..
कनिष्का : हूँ…कैसे हो…क्या कर रहे हो..

मैं शर्मा कर रह गया, उसे अच्छी तरह से मालुम था की हम घूम नहीं रहे बल्कि घर पर ही चुदाई कर रहे हैं…

मैं : बस ऐसे ही…तुम बताओ..कैसे फ़ोन किया..
कनिष्का : अच्छा जी, लगता है, दीदी पास ही खड़ी है..बोलो न..एक सेशन तो हो ही चूका होगा अब तक फकिंग का…है न…बोलो..अच्छा, हां या ना ही बोल दो..

मैं : हाँ…

कनिष्का : वाव…मेरा तो मन कर रहा है की अभी वहां आ जाऊ..और तुम्हे दीदी के साथ सेक्स करते हुए देखू..पर ये अभी मुमकिन नहीं है..

उसकी बात सुनकर मेरे दिमाग ने इमेजिन करना शुरू कर दिया की मैं अंशिका की चुदाई कर रहा हु और कनिष्का सामने नंगी बैठ कर हमें देख रही है और अपनी चूत में ऊँगली डाल रही है…

मैंने ये सोचते हुए अपने लंड के ऊपर हाथ रखा और मसलना शुरू कर दिया..पर तभी मैंने देखा की अंशिका मुझे ही देख रही है, अपनी बहन से बात करते हुए और मुझे लंड हिलाते हुए..मैंने जल्दी से टोपिक बदला

मैं : अरे हाँ बिलकुल, मैं करवा दूंगा… आज नहीं, कल…अभी तो हम बाहर है, मूवी देखने का प्रोग्राम है..चलो बाद में बात करते हैं..

और फिर मैं अंशिका की तरफ मूढ़ कर बोला : ये तुम्हारी बहन भी न, कह रही थी की एक और कोलेज में फार्म भरना है, उसी के बारे में पूछ रही थी की मेरी कोई जान पहचान है या नहीं…

अंशिका कुछ देर तक मुझे घूरती रही और फिर बाथरूम की तरफ चल दी…

मैंने चेन की सांस ली.

अन्दर जाते ही मैंने शावर चला दिया और उसे लेकर नीचे खड़ा हो गया…पानी थोडा ठंडा था..अंशिका मुझसे चिपक सी गयी…हम दोनों के शरीर से निकल रही गर्मी की वजह से पानी अब ज्यादा ठंडा नहीं लग रहा था..मैंने अंशिका का चेहरा ऊपर उठाया, और उसे शावर के बिलकुल नीचे कर दिया, चेहरे पर पड़ रही पानी की तेज बोछार की वजह से उसकी आँखे बंद हो गयी…बड़ी ही प्यारी लग रही थी वो..मैंने उसके फड़कते हुए गुलाबी होंठो के ऊपर अपनी जीभ फेराई..मेरे दोनों हाथ उसके भीगे हुए बदन पर फिसल रहे थे…और मेरे होंठ उसके भीगे चेहरे पर..

उसने घूम कर शावर बंद कर दिया..और अपनी आँखे खोलकर मुझे बड़े प्यार से देखा..उसके चेहरे पर और पुरे बदन पर पानी की बुँदे ऐसी लग रही थी मानो गुलाब के फूल पर ओस की बुँदे..मैंने एक एक करके उन्हें चाटना शुरू कर दिया..

उसने भी अपनी जीभ निकाल कर मेरे पानी भरे चेहरे को अपनी लार से ढक दिया.

फिर वो मुझसे एकदम से अलग हुई और बोली : एक मिनट…मैं अभी आई…

और ये कहकर वो बाहर निकल गयी..

मैं सोचने लगा की ये इस वक़्त कहाँ गयी है…

थोड़ी ही देर में वो आई , उसके हाथ में चार बीयर के केन का पेक था ..शायद उसने तब देखे होंगे जब वो फ्रिज से पानी पी रही थी..

मैं : ये क्या…बीयर पीने का इरादा है क्या.

अंशिका : नहीं…तुम्हे पिलाने का इरादा है. और वो भी मेरे थ्रू..

मैं : मैं कुछ समझा नहीं..

अंशिका :अभी बताती हु..

और उसने एक केन को खोला और बीयर को ऊपर करके अपने चेहरे पर गिराया…वो इतनी ठंडी थी की उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी…पर मैं समझ गया की वो क्या चाहती है…मैं झट से आगे आया और उसके चेहरे से बह कर नीचे आ रही बीयर को गर्दन पर मुंह लगा कर चाटने लगा…वाव….क्या टेस्ट था..अंशिका के शराबी बदन के साथ बीयर का टेस्ट और भी मजेदार लग रहा था..या ये कह लो की बीयर का नशा और भी बढ़ गया था..

मैं : ये…कहाँ से आया तुम्हारे दिमाग में…

अंशिका : एक मूवी में देखा था..और जब से तुम्हारे फ्रिज में बीयर देखि है, मैंने तभी से सोच लिया था की मैं भी ट्राई करुँगी..अब तुम टाईम वेस्ट मत करो..जल्दी से चाटो…एक बूँद भी नीचे नहीं गिरनी चाहिए…समझे..

वो अपने चेहरे पर धीरे-२ बीयर की बूंदे टपका रही थी…और मैं उन्हें चाटने में लगा हुआ था…

मैंने उसके हाथ से केन लिया और सीधा उसके मुंह के ऊपर बीयर टपकाई…

अंशिका : उन्…मुझे इसका टेस्ट अच्छा नहीं लगता…

मैं :अच्छा लगेगा…थोडा मुंह तो खोलो…

पर उसने नहीं खोला..मैंने केन को मुंह लगा कर एक बड़ा सा घूँट भरा और सीधा उसके होंठो पर अपना मुंह लगा दिया…और उन्हें खोलकर अपने मुंह के बीयर उसके मुंह में डालने लगा..ठीक उसी अंदाज में जैसे बोंटे पार्क में मैंने उसे पानी पिलाया था..

मेरे मुंह से बीयर सीधा उसके गले में जाने लगी…वो कसमसाई पर फिर जब एक-दो घूंट नीचे उतरे तो शायद उसे भी मजा आने लगा…मैंने अपना मुंह हटाया और फिर ऊपर की तरफ से केन से सीधा उसके मुंह पर बीयर टपकाई…इस बार उसने मुंह खुला ही रखा..जितनी उसके मुंह के अन्दर गयी…वो पी गयी…और बाकी उसकी गर्दन से नीचे होती हुई आई जिसे मैंने अपनी जीभ से चाटकर पी लिया…सच में, बड़ा ही मजा आ रहा था..

थोड़ी ही देर में वो केन खाली हो गयी…

मैंने अंशिका को नीचे लिटाया और दूसरी केन खोलकर उसके मोटे मुम्मो पर बीयर गिराई…और फिर उन्हें चाटने लगा..

अंशिका : आआआह्ह्ह स्सस्सस्सस…..म्मम्मम्मम…..अह्ह्हह्ह…

ठंडी बीयर के बाद मेरी गर्म जीभ के एहसास से वो बाथरूम के फर्श पर किसी मछली की तरह से तड़प रही थी…

मैंने उसके दोनों मुम्मो पर बीयर गिराई और उन्हें चाटा, फिर थोडा नीचे लेजाकर नाभि वाले हिस्से में भी बीयर डाल दी, उसकी गहरी नाभि के अन्दर बीयर डालने से जब वो भर गयी तो मैंने वहां भी अपना मुंह लगा कर उसे पी लिया…अंशिका ने मेरे सर के पीछे हाथ रखकर मुझे अपनी नाभि के ऊपर रगड़ सा दिया..

अंशिका : ऊऊओह्ह्ह्ह…..विशाल…..म्मम्मम्मम…..यु आर किलिंग मी……अह्ह्हह्ह…..

उसकी दोनों टाँगे मेरी पीठ के ऊपर आ चुकी थी, शायद वो भी जान चुकी थी की अब उसकी चूत के अन्दर बीयर डालूँगा मैं…और जब मैंने अपना चेहरा उसकी नाभि से हटा कर उसकी चूत के ऊपर किया…तो वहां से निकल रही गर्मी के थपेड़ो को मैं अपने चेहरे पर साफ़ महसूस कर पा रहा था…वो भी अपनी कोहनियों के बल आधी लेती हुई मुझे ही अपनी चूत को निहारते हुए देख रही थी…मैंने बीयर का केन उसकी चूत के ऊपर लेजाकर थोडा टेड़ा किया..और जैसे ही ठंडी बीयर की बूंदे उसकी गरमा गरम चूत के अन्दर गयी, उसके मुंह से एक तेज चीख निकल गयी…

आआआआआह्ह्ह्ह….ओह्ह्ह्हह्ह गोड….. म्मम्म…..

मैंने अपनी एक ऊँगली से उसकी चूत को फेलाया और फिर से बीयर अन्दर डाली…इस बार ठंडी बीयर और भी अन्दर गयी…और फिर मैंने उसकी आँखों में देखते हुए, अपना चेहरा उसकी चूत के ऊपर झुका दिया…और अन्दर से वापिस बाहर आती हुई बीयर को गटागट पीने लगा…

ओह्ह्ह….माय….बेबी….सक….मी….आआअह्ह्ह ….ओह्ह्ह …गोश……अह्ह्ह्ह……

मैं उसकी चूत के अन्दर बीयर डालता जा रहा था और बाहर निकलने से पहले ही उसे पी जाता था..

मेरे दिमाग में अब बीयर का सरुर चड़ने लगा था..जिसमे अंशिका की चूत का रस भी मिल चूका था..यानी अल्कोहोल की मात्रा भी बड़ गयी थी..

मेरी जीभ उसकी शराबी चूत के अन्दर जाकर धमाल मचा रही थी…मेरा एक हाथ ऊपर की तरफ था, जो उसके मोटे मुम्मे मसलने में
उसने एक और केन खोला और अपने मोटे-२ पर्वतो पर ठंडी बीयर गिराने लगी…मेरे हाथो में उसके बीयर से भीगे स्तन आ रहे थे, जिन्हें मैं अच्छी तरह से मालिश करने में लगा हुआ था..

वैसे किसी ने मुझे बताया भी था की बीयर से नहाने के कई फायदे हैं और कई लड़कियां बीयर ने नहा कर अपनी स्किन पर ग्लो बनाये रखती है…शायद अंशिका भी ये बात जानती थी.

उसे भी बीयर का स्वाद चढ़ चूका था..वो बीच-२ में अपने चेहरे पर केन लेजाती और एक-दो घूँट पीकर वापिस नीचे अपने बदन के ऊपर बीयर गिराने लगती..मेरा केन भी खाली हो चूका था.

मैं उठकर बैठ गया..अंशिका ने मेरे उफान खाते हुए लंड को देखा और घूमकर मेरे सामने अपनी ब्रेस्ट के बल पर लेट गयी…मैंने दिवार से कमर लगा कर अपना लंड उसके चेहरे के सामने कर दिया और अपनी दोनों टाँगे उसके दोनों तरफ फेला दी..

अब उसने अपने हाथ मे पकडे हुए केन से मेरे लंड के ऊपर बीयर डाली..ठंडी बीयर का एहसास जब मुझे अपने लंड पर हुआ तब मुझे पता चला की उसकी क्या हालत हुई थी जब मैंने उसकी चूत में बीयर डाली थी..

वो थोड़ी सी बीयर मेरे लंड के ऊपर टपकाती और झटके से उसे मुंह में लेकर चूसने लगती..फिर टपकाती और फिर चूसने लगती…इसी तरह से करते हुए उसने अपना केन भी खाली कर दिया…अब सिर्फ एक और केन बचा हुआ था..

अब हम दोनों की हालत काफी खराब होने लगी थी…वो उठी और मेरे सामने खड़ी होकर अपनी दोनों टाँगे मेरे दोनों तरफ कर ली, अब उसकी रसीली चूत, जिसमे से अभी भी बीयर की बुँदे बाहर निकल रही थी..मेरे सामने थी..

नीचे मेरा खड़ा हुआ लंड था..उसने आखिरी केन भी खोला..और अपनी छाती पर उसे उडेलना शुरू कर दिया..उसके नशीले बदन से बहकर नीचे आती हुई बीयर किसी झरने की तरह मेरे ऊपर गिर रही थी..हम दोनों का शरीर पूरा चिपचिपा सा हो चूका था..वो धीरे -२ नीचे की और आने लगी, और मेरे लंड के ऊपर आकर उसने अपनी चूत को टिका दिया..और ऊपर से केन से निकलती हुई धार को सीधा हम दोनों के लंड और चूत के मिलन वाले हिस्से पर गिराते हुए उसने मेरे लंड को अन्दर लेना शुरू कर दिया..

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….ओग्गग्ग्ग्ग…..फक्क्क्क……..म्मम्मम…….

बीयर के रस से भीगा हुआ मेरा लंड उसकी गर्म चूत के अन्दर घुसता चला गया…और जब वो पूरी तरह से अन्दर घुस गया तो उसने खली केन एक तरफ फेंका और अपनी बाहे मेरी गर्दन के चारो तरफ लपेट दी..और अपनी छाती से लटके हुए मोटे मुम्मे मुझे चुभाते हुए, मेरे कानो को अपने मुंह में डालकर, चुसना शुरू कर दिया..

और फिर उसने धीरे-२ ऊपर नीचे होना शुरू किया..बीयर का सरुर हम दोनों पर हावी हो चूका था…हलके नशे की खुमारी में उसने और मैंने दोनों तरफ से धक्के मारने शरू किये…

अह्ह्ह्ह ….ओह्ह्ह…विशाल….आई एम्…फीलिंग…होट …..अह्ह्ह्ह….ऊऊ…..ओग्गग्ग्ग्ग…. म्मम्म…..फक मीई. फक मी…हार्ड…बेबी…..

मैं अब नीचे की और पूरा लेट गया और अंशिका को अपने ऊपर पूरा लिटा लिया, उसने अभी भी मेरी गर्दन पर अपने हाथ लपेट रखे थे, मैंने सामने वाली दिवार पर अपने पंजे गाड़कर उसकी गांड के ऊपर हाथ रखा, और नीचे से जानदार झटके मारने लगा…मेरे हर झटके से उसके मोटे मुम्मे ऊपर उछलते और मेरे मुंह पर लगते..और उसके मुंह से अलग किस्म की आह सी निकल जाती…

अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ….

और जल्दी ही मेरे लंड से माल निकल कर उसकी चूत में शिफ्ट होने लगा….और मैंने उसके दांये निप्पल को अपने मुंह में डालकर जोर से चुसना शुरू कर दिया…और मेरे ऐसा करते ही उसने एक दहाड़ मारकर अपना रस भी निकाल दिया…और जोर से हांफती हुई मेरे ऊपर ही झड़ने लगी…

अह्ह्हह्ह्ह्ह ह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल्लल्ल्ल….अह्ह्ह्हह्ह आई…..एम्म्मम्म….कम्म्मम्म….इन्न्न्गग्ग…..अह्ह्ह्हह्ह ….

उसने अपनी ब्रेस्ट को मेरे मुंह से छुड़ाने की बहुत कोशिश की पर जब तक मेरे लंड से रस निकलता रहा , मैं उसकी ब्रेस्ट को अपने मुंह में डालकर चूसता रहा..

और जब हम दोनों सामान्य हुए तो उसने हँसते हुए मेरी तरफ देखा

अंशिका : यु आर बेड बॉय…यु नो देट …

और मेरे होंठो को जोर-२ से चूसने लगी.

बाथरूम में जिस काम के लिए गए थे, वो हमने सबसे बाद में किया, एक साथ नहा कर हम बाहर निकल आये, अन्दर आते ही अंशिका ने अपने कपडे पहनने चाहे पर मैंने उसके कपडे छीन लिए.

मैं : आज तुम पूरा दिन मेरे साथ नंगी ही रहोगी..
अंशिका : नहीं न…मुझे शर्म आती है…प्लीस मेरे कपडे दे दो..अच्छा चलो, सिर्फ ब्रा-पेंटी ही दे दो..
मैं : मैंने कहा न , नहीं तो नहीं…क्या पता तुम्हे नंगा देखकर मेरा फिर से मन कर जाए तुम्हारी चुदाई करने का.
अंशिका मेरे पास आई और मेरे गले में अपनी बाहें डालकर बोली : वो तो तुम कुछ भी करो आज मैं तुम्हे नहीं रोकूंगी…पर मेरे कपडे तो दे दो न..
मैं : नहीं..
अंशिका : तुम बड़े जिद्दी हो..

और वो मेरे सीने पर हलके-२ मुक्के मारने लगी

मैं :अच्छा एक बात तो बताओ…वो जो तुमने कहा था की मैं तुम्हे प्रेग्नेंट कर सकता हु…क्या सच में तुम ये चाहती हो..
अंशिका (शरमाते हुए अपना सर मेरी गर्दन में घुसाते हुए) : यार, तुम उस समय की बातो को याद करके मुझे परेशान मत करो…
मैं : अच्छा जी…पर बताओ तो सही…क्या सच में तुम ये चाहती हो..और ये भी की मैं तुम्हारी ब्रेस्ट का मिल्क पीऊ ..
अंशिका : ये दोनों चीजे तो तुमने ही कही थी…मैंने तो सिर्फ तुम्हारी बात मान ली..तुम खुश तो मैं भी खुश..
मैं : मतलब , अगर मैं जो भी कहूँ तो तुम उसे मना नहीं करोगी..
अंशिका : हूँ..नहीं करुँगी…ट्राई कर के देख लो..
मैं : तो मैं चाहता हु की तुम मेरे दोस्त के साथ भी ये सब करो जो तुमने मेरे साथ किया है..

अंशिका एक झटके से मेरे से अलग हो गयी..और मुझे घूरकर देखने लगी..

मैं : अरे..क्या हुआ, अभी तो तुमने कहा की तुम कुछ भी करोगी, जो मैं करने को कहूँगा..
अंशिका : इसका मतलब ये तो नहीं की तुम मुझे रंडी बना दो..
मैं : इसमें रंडी बनने वाली क्या बात है..मैंने तो वोही कहा जो मेरे मन में था..वैसे अगर ये बात तुम कहती की तुम मुझे अपनी किसी सहेली से शेयर करना चाहती हो तो मैं भी मान लेता..
अंशिका : लड़के और लड़की में फर्क होता है..तुम लड़के तो किसी के साथ भी शुरू हो सकते हो, पर ये हम लडकियों के लिए पोसिबल नहीं है…वैसे भी, मुझे पता है की तुम मजाक कर रहे हो.
मैं : नहीं, मैं मजाक नहीं कर रहा..मैं सच में चाहता हु की तुम मेरे दोस्त के लम्बे लंड को अपनी चूत में डालकर बहुत मजे लो.

मैंने ये बात उसकी आँखों में देखकर बोली थी…उसकी फेली हुई आँखे एकदम से गुलाबीपन में डूब गयी…उसकी साँसे तेज होने लगी, इतनी तेज की मुझे उनकी आवाज साफ़ सुनाई दे रही थी..लगता था मानो वो अपने जहन में वो सब सोचकर उत्तेजित हो रही थी.

उसने अपनी छाती के ऊपर टावल लपेट रखा था, जो उसकी जांघो तक आ रहा था, पर मोटी ब्रेस्ट की वजह से आगे की तरफ से उस छोटे से टावल में गाँठ नहीं लग पा रही थी, इसलिए उसने अपने हाथो से उसे सामने की तरफ से पकड़ा हुआ था. मेरी बाते सुनकर वो अपनी सुध-बुध खोकर बस मुझे घूरे जा रही थी..और इस बेहोशी के आलम में उसके हाथ से कब टावल छुट कर नीचे गिर गया, उसे भी पता नहीं चला.

वो अपने दांये हाथ को अपनी छाती के ऊपर दबाये खड़ी थी अब..उसे क्या मालुम था की टावल तो कब का उसका साथ छोड़ गया है और उसका हुस्न अब बेपर्दा होकर मेरे सामने अपने पुरे जलवे बिखेर रहा है.

मैंने झुक कर अपना मुंह उसके ठन्डे से मुम्मे के ऊपर रख दिया और उसे चूसने लगा.

मेरे दांतों की चुभन महसूस करते ही वो जैसे नींद से जागी.

अंशिका : अह्ह्ह्ह…..ये क्या कर रहे हो…बदमाश..अभी तो किया है..थोडा तो वेट करो न…प्लीस….अह्ह्ह्ह…

पर मैंने उसके निप्पल्स को चुसना चालु रखा.

और जल्दी ही उसने भी अपनी तरफ से रिस्पोंस देना शुरू कर दिया..

अंशिका : अह्ह्ह्हह्ह……तुम न….बड़े गंदे हो…..मेरी बात ही नहीं मानते…ओह्ह्ह…येस्सस्सस्स….

मैं अंशिका के सामने ही नीचे जमीं पर बैठ गया. और अपना चेहरा ऊपर करके उसकी चिकनी चूत को निहारने लगा.
वो मेरी मंशा समझ गयी, उसने अपना एक पैर ऊपर उठाया और मेरे कंधे पर रख दिया..और मेरे सर के पीछे हाथ लगाकर, मेरे मुंह के ऊपर अपनी चूत को लगा दिया.

ऊओयीईई…….माय…….गोड….अह्ह्हह्ह….स्सस्सस्स……

उसने अपना दूसरा पैर पंजो के बल उठा रखा था, मेरे दोनों हाथ उसके मोटे ताजे कुल्हो के ऊपर थे और मैं उसकी चूत को स्ट्राबेरी आइसक्रीम की तरह से चाटने में लगा हुआ था.

अंशिका : ओह्ह…..गंदे बच्चे….मुझे अपने दोस्त से चुदवाओगे….हूँ….यु बेड ब़ोय…तुम्हारे दोस्त मेरे अन्दर अपना…अपना…लंड डालेंगे…और तुम्हे मजा आएगा क्या…बोलो…बोलो न..

मैंने तो वो बात उसे गरम करने के लिए कही थी, मुझे क्या मालुम था की उसकी सुई अभी तक वहीँ अटकी हुई है…पर उसकी बातो से तो यही लग रहा था की उसे मेरी बात काफी पसंद आई थी..मैंने उसकी रसीली चूत से मुंह हटाया और उसकी तरफ देखकर कहा.

मैं : हाँ….मुझे बड़ा मजा आएगा…मुझे मालुम है की मेरी अंशिका कितनी गरम है…उसकी चूत की आग मेरे लंड से नहीं बुझेगी…उसके लिए और भी लंड मंगवाने पड़ेंगे, जो तुम्हारी चूत के अन्दर अपना पानी निकाल कर अन्दर की आग को बुझा देंगे.

मैंने अब खुल कर चूत-लंड की बाते उसके सामने करनी शुरू कर दी थी.

अंशिका : ओह्ह्ह्ह…..माय स्वीटहार्ट …..मेरा कितना ख्याल है तुम्हे….ओह्ह्ह्ह….डलवा देना…मरवा देना …चुदवा देना …अपनी अंशिका को फिर अपने दोस्तों से…सब के लंड का रस अपनी चूत में समेत कर मैं तुम्हे खुश कर दूंगी..पर अभी तो तुम मुझे खुश करो…मेरी चूत के अन्दर की आग जो तुमने भड़काई है…उसे शांत करो.

मुझे किसी दुसरे इनविटेशन की जरुरत नहीं थी..अंशिका की चूत की आग पूरी तरह से फेल चुकी थी..और उसके पुरे जिस्म को झुलसा रही थी.

मैं उठा और उसे उठाकर अन्दर की तरफ ले जाने लगा…पर अंशिका ने मुझे चुमते हुए कहा : नहीं….अन्दर नहीं…बाहर सीडियो के ऊपर…

मैंने कोई विरोध नहीं किया, मैं उसे उठाकर अपने कमरे से बाहर निकला और कमरे से नीचे की और जाती सीडियो के बीचो बीच लेजाकर उसे लिटा दिया…उसने सीडियो के साईड की रेलिंग पकड़ ली..और अपनी दोनों टाँगे ऊपर की और उठाकर मेरे लंड को सादर आमंत्रित किया..मैं भी उसके निमंत्रण लंड से स्वीकारकर उसके ऊपर झुका और जैसे ही मेरे लंड ने उसकी चूत के गेट के अन्दर एंट्री मारी, वहां पर मोजूद फिसलन और टपकते हुए पानी की वजह से मेरा लंड अन्दर तक फिसलता हुआ चला गया…सीडियो वाला एंगल भी ऐसा मस्त था की मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर तक जा रहा था…

अंशिका : ओह्ह्हह्ह…..विशाल….फक में…हार्ड…मेक मी युअर होर..अह्ह्हह्ह……
मैं (उसकी चूत मी धक्के मारते हुए) : होर तो मैं तुम्हे बनाऊंगा ही…मेरे लंड से चुदोगी तुम…और फिर मेरे दोस्त तुम्हे पूरा नंगा करके चोदेंगे…अपने लम्बे और मोटे लंड डालेंगे तुम्हारी चूत मी…और मैं तुम्हारी गांड मारूंगा…

अंशिका को तो जैसे गांड मारने वाली बात सुनकर झटका सा लगा….उसने मुझे एक ही बार मी ऊपर से नीचे की और लिटाते हुए…खुद मेरे ऊपर लेट गयी..सीडियो के ऊपर अब मेरी पीठ थी…और अंशिका मेरे ऊपर झुकी हुई थी, अब उसने मेरे ऊपर उछलना शुरू कर दिया.

अंशिका : अह्ह्हह्ह…..चदुंगी….तुमसे…तुम्हारे दोस्तों से…किसी से भी…जिसे तुम लेकर आओगे…उसका लंड डालूंगी..अपनी चूत मी…तुम्हारे लिए…सिर्फ तुम्हारे लिए…और मेरी कुंवारी गांड भी तुम मारना…डाल देना अपना ये मोटा लंड ….मेरी गांड मी…यहाँ….

और ये कहते हुए उसने मेरी एक ऊँगली पकड़कर अपनी गांड के छेद पर टिका दी…उसकी हिप्स पर मांस की इतनी मोटी परत थी की मेरी ऊँगली को अन्दर जाने मे भी काफी मुश्किल हो रही थी…मैंने उसकी गांड के रिंग के अन्दर अपनी ऊँगली फंसाई और अंशिका ने उसे पकड़कर अन्दर की तरफ धकेल दिया…उसे मालुम था की तकलीफ तो उसे ही होनी थी..पर फिर भी अपनी चूत और गांड के अन्दर एक साथ भराव महसूस करने का लालच वो छोड़ नहीं पायी…पर पीछे के छेद मे हुए दर्द की वजह से वो चिल्ला पड़ी…

अंशिका : अझ्ह्ह्हह्ह ……म्मम्मम्म …….मर गयी…अह्ह्हह्ह….

और अगले ही पल उसने अपनी चूत से ढेर सारा रस मेरे लंड के ऊपर छोड़ दिया..मेरा लंड उसकी चूत मे और ऊँगली गांड मे फंसी हुई थी…वो झड़ने के बाद मेरे ऊपर लेट गयी और अपने बेजान शरीर को मुझपर बिछा दिया..मैंने नीचे से धक्के मारने शुरू किये और उसके एक मुम्मे को मुंह में भरकर चूसने लगा…और जल्दी ही आज की डेट मे, तीसरी बार, मैं झड़ने लगा, और अपना सारा दूध उसकी चूत के बर्तन में डाल दिया.

सीडिया मेरी पीठ पर चुभ रही थी…इसलिए मैंने अंशिका को अपनी गोड में ही उठा कर, ऊपर की तरफ चल दिया…और उसे अपने बेड के ऊपर लिटा कर, साथ ही लुडक गया.

उसकी आँखे अभी भी बंद थी..पर वो मंद -२ मुस्कुरा रही थी..मुझे नहीं मालुम था की वो मेरी चुदाई से संतुष्ट होकर मुस्कुरा रही है या मेरी कही हुई बातो को सोचकर..

मैंने टाइम देखा 4 बजने वाले थे…मैंने नीचे गया और हम दोनों के लिए ब्रेड टोस्ट और चाय बनाकर टेबल पर रख दिया..

मैंने नीचे से ही अंशिका को आवाज लगायी : अंशिका…नीचे आओ…मैंने चाय बना दी है..

और टेबल पर बैठकर उसका वेट करने लगा..

थोड़ी ही देर में वो बाहर निकली..और वो भी पूरी नंगी.

और अपनी कमर मटकाती हुई वो नीचे की तरफ आने लगी..उसकी नजरे नीचे ही झुकी हुई थी, उसके पैर जब भी नीचे पड़ते तो उसके दोनों उभार झटके खाते..मैं तो बस यही सोचकर खुश हो रहा था की अंशिका मेरी बातो को कितना मानती है…तभी तो उसने अभी तक कोई कपडा नहीं पहना.
यानी की मैंने जो भी उसे उत्तेजित करने के लिए कहा था, अपने दोस्त से चुदवाने वाली बात , उसे भी वो मना नहीं करेगी…ये सोचते हुए ही मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा..और मैं सोचने लगा की अपने किस दोस्त को अंशिका की चूत मारने के लिए बोलू.

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