चाची का कमाल

मै यह एक सच्ची कहनो बताने जा रहा हूँ, यह कहानी आज से २ साल पहले शरू होती है .जब मैं USA से वापस आ कर जयपुर मैं नोकरी करने लगा था . मरे आहे तब २६ कि थी , मरे माँ पापा आज से ८ साल पहले मर गरी थे , उस समर मै अपनी इंजीनियरिंग कि पड़े कर रहा था. मेरे एक चाचा थे जो कि गॉंव मैं रहते थे , मेरे पिताजी के डेथ के बाद चाचा से मेरे बनी नहीं . चाचा सोचा करते थे मुझे घर के माकन मैं हिस्सा चाहिये . इसलिये उन्होंने मुझे काफी उस्ता सीदह कहा , और मैंने उसके बाद घर छोड़ दिया .
आज मौजे अपने गाव के एक चाचा मिले , उन्होने जो बताया तो मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और सन्डे कि छुटी मैं अपने गाव चची से मिनले आ गया .
चाची मुझसे मिलके बुहत रोई , तब पता लगा कि चाचा की एक साल पहले जियादा शराब पिने से मृतु हो चुकी थी , और उनके घर कि हालत दीक नहीं थी. दोनों बेटियों कि पढ़ाई फीस न देने कारन छूट गयी थी , घर के खर्चे के लिये चाची ने अपने दो कमरे किराय पे दे रखे थे , और अपने आप एक कमरे पे रहने लगे थे.
मुझे यह सब सुनके / देख के अच्छा नहीं लगा , आखिर वो सब मेरे अपने थे . चाची ने मुझे बचपन मैं पला था . हम सब लोग बहुत मिलके रहते थे .

तब मैंने चाची से कहा ,आप लोग चिंता मत करो ,अब मैं हूँ ना , हम सब मिलके रहंगे .और मैंने उनको अपने साथ जयपुर लाने का प्लान बना दिया . चाची और

बेटियों एक दम से तैयार हो गयी शायद अपनी मुसीबतों के वजह से

अब मैं आपको अपनी चाची के बारे मैं बता दूँ , जब मैं ***edited*** साल का था तब मेरे चाचा कि शादी हुई थी ,मेरे चाची का नाम बिमला है और वो उस समय २२-२३ साल कि मस्त जवान दुल्हन थे , मैं भी उस समय जवान होने लगा था दोस्तों के साथ मूठ मरण सीख गया था और चाची के नाम पे बाथरूम मैं उसके ब्रा और चड्डी के साथ मूठ मरता था .

जब भी मोका मिलता चाची को नंगा देखने कि कोशीस करता , चाची भी मेरे सामने ही कपडे बदला देती , वो हमको अभी तब बच्चा ही समजती थी .

यह सब करते हुयी मै जवान हुआ . देखते ही देकते चाची ने दो लड़कियों को जैम दिया मीना और मीतू . एक दो बार चाची ने मुझे मूठ मरते हुयी भी देख लिया था , पर बात कुछ आगे नहीं बड़ी . जिस साल मैंने इंजीनियरिंग मैं प्रवेश लिया , उसके बाद. मेरे माँ पापा कि डेथ हो गयी और चाचा के कारन मैंने घर जाना छोड़ दिया.

आज भी चाची जवान लगती है गरीबी मैं रहने के कारण थोड़ी , कमजोर हो गयी है , थोड़े गंदे से कपडे पहने थे ,
मैंने चाची से कहा
चाची थोडा बाज़ार जाके सब के लिये अच्छे से कपडे ले के आओ , कुछ खाने का सामन भी,..?
थोड़ी देर बाद हम लोग बाज़ार से कुछ कपड़े लेके आये .
उसके बाद चाची , मीना और मीतू ने नहा के नए कपड़े पहने , और फिर खाना बनाने लगी . शयद बुहत दिन बाद उनको अच्छा खाने को मिलेगे , यह देख के मीना और मीतू बहुत खुस हो रही थी. मीना के आगे अब 18 साल कि और मीतू की . अपना तो सारा धयान चाची तरफ था. शायद अब मेरे बचपन का सपना पूरा होगा , चाची को चोद कर , क्या चाची कि छूट आज भी वैसी ही होगी जैसा कि मैं बचपन मैं देखा करता था . यह सोच सोच कर मेरा लुंड मचलने लगा .
मैं मीना और मीतू से उनके स्कूल के बारे बात करने लगा . मैंने कहा कि अब तुमको भी अचछे से स्कूल मैं एडमिशन दिल दूंगा . धीरे धीरे दोनों मुझसे खुलने लगी और बातें करने लगी.
एस बीच चाची ने खाना बाबा दिया और हम सब मिलके खाना खाने लगे . वो सब बुहत खुश थे अब रात को सोने के बारी थे उनके पास एक ही डबल बीएड था . चाची ने कहा हम सब इसमे ही सो जाते हैं. मीना और मे एक बेड पे और चाची और मीतू एक बेड पे लेट गए . हमारे पास बस एक एक पुराना कम्बल था .
मुझे चाची के बदन के खुसबू परेशान करने लगी वो मेरे साथ ही सोई थे बीच मैं मीना थी . मीना भी सो नहीं पा रही थी और मैं भी . रात हो मैं पेसाब करने गया , जब वापस आ रहा था तो चाची बहार ही मिल गयी.
वो मुझे देख के हलके से मुस्कराई और पूछी क्या नींद नहीं आ रही है . मैंने कहा तोड़ी सी बैचेनी हो रही है . वो हसने लगी..
बोली शायद मीना को भी नींद नहीं आ रही है आपके साथ
अभी दो दिन पहले ही महीने से उठी है.. थोडा बेकार है , अपने से चिपका के सुला लो ना .
मुझे यह सब सुनके थोडा अजीब सा लगा . एक माँ अपनी बेटी के लिये ऐसा कह रही है. मैंने भी कह दिया मैं तो आपको चिपका के सुलाना चाहता हूँ.
वो हंस दी ,,और बोली जानती हूँ , तुम बचपन से ही… ना
मैंने भी हाँ मैं सर हिला दिया …
बोली कोई बात नहीं ,जब तुम हमारा ख्याल रख रहे हो तो हमको भी तुम्हारा ख्याल तो खाना पड़ेगा ना .. मुझे भी चिपका के सुला लेना पास अभी नहीं अपनी तो मीना के साथ ही सो जाओ .और केवल ऊपर से मज़ा ले लो …और खिलखिला के हसने लगी…
लड़कियों जब महीने ( MC ) से होती है तो उसके बाद उनका सेक्स के लिये बहुत मन करता है .
थोडा सा टच वच कर लोगे तो वो भी मज़े से सो जायेगी .
पर हमको तो तुम जैसी ही पसंद है हमने कहा , बोली जानती हम तुमको बड़ी उम्र कि ही पसंद हैं , पर एक बार कमसिन का मज़ा चख लोगी तो सब भूल जाओगे
मैं अभी महीने से हूँ इसलिए तुम्हारे साथ नहीं सो सकती , ..फिर अब तो हम लोग तुम्हारे साथ ही रहने वाले हैं ..खूब मज़ा लो किसने रोका हैं..

और फिर वो मचलती हुई बाथरूम के अंदर मै चली गयी ,
मैं उसके पेसाब के आज सुनने लगा , थोड़ी देर बाद वो बाथरूम से बहरा निकली तो उसके हाथ मैं एक गन्दा कपडा था ..मुझे देकते ही बोली अबी तक एहिं पे हो..
मैं कहा तुम्हारा इंतजार कर रहा था .और यह क्या है ..नैपकिन नही लगाती क्या ,? वो बोली अब तुम आ गया ना अब नैपकिन ही खरीद के लगाएंगे हम लोग , अबी तक तो बस गंदे कपडे से काम चलते थे ना..
अभी कितने दिन हुए तुमको मैंने पूछा ..
किस बात के …और वो हंस दी ….
महीने कि..मैं बोला …..
आज दूसरा है ..अबी तीन दिन बाकि हैं,… मीना कि दो दिन पहले ही ख़तम हुई है ना…
और वो हाथ धोने लगी…
अब हम से रहा नहीं जा रहा था. तो हम जाके पीछे से अपनी चाची से चिपक गए ..वो हस्ती रही..और मेरा हाथ धीरे धीरे उसके चूची तह पाउच गया …
ओह क्या बड़ी बड़ी चूची थे चाची कि .. बचपन से उनको पकड़ने कि तमन्ना थी.. वो आज पूरी हुई..
है चची इनको तो मैं बचपन से पकड़ना चाहता था .. आज १५ साल बाद ईनको पकड़ पाया हूँ …
मैं भी तो तुमको ..देखती थी पर तुमने कभी आगे कुछ किया ही नहीं… और मरे लुंड पे अपना हाथ रख दिया..
तुमहरा बहूत बड़ा है ना , अपने चाचा से भी ..अब तो और होगया होगा ना……म्म्म्म्म्म..
और वो हाथ धोने लगी…
अब हम से रहा नहीं जा रहा था. तो हम जाके पीछे से अपनी चाची से चिपक गए ..वो हस्ती रही..और मेरा हाथ धीरे धीरे उसके चूची तह पाउच गया …
ओह क्या बड़ी बड़ी चूची थे चाची कि .. बचपन से उनको पकड़ने कि तमन्ना थी.. वो आज पूरी हुई..
है चची इनको तो मैं बचपन से पकड़ना चाहता था .. आज १५ साल बाद ईनको पकड़ पाया हूँ …
मैं भी तो तुमको ..देखती थी पर तुमने कभी आगे कुछ किया ही नहीं… और मरे लुंड पे अपना हाथ रख दिया..
तुमहरा बहूत बड़ा है ना , अपने चाचा से भी ..अब तो और होगया होगा ना…
म्म्म्म्म्म कहो तो माल निकल दूँ तुम्हारा ..या फिर इंतजार करो अच्छी तरह से सुहाग रात मनाएंगी . हमको भी करो और मीना और मीतू को भी .. यह कह कर वो हमको जन्नत दिखा दी …
ठीक है , हम सुहागरात ही मनाएगी तुम्हारे साथ …
.चाची हंस दी और बोली … अभी तुम जाओ ..और मीना के साथ सो जाओ ….थोडा उसको भी मज़ा दे दो …
हम भी उसकी उम्र मैं बहूत तरसते थे ..कि कास कोई हमको भी चिपका के सुला लेता .बहूत बार अपनी पापा से चिपक के सोती थे पर …
मैंने कहा पर क्या.. पर उन्होंने कुछ नहीं किया ..वो बातें बाद पूरी बातें बाटूंगी तुमको ,,, मैं अब जा के सो जाओ..
और मैं बुझे मन से बिस्तर पे आ गया .
अब मेरा मन मीना के बारे मैं सोचने लगा . वो कमर के बल सोयी थी. मैं भी उसके बगल मै जाके लेट गया और कम्बल ओड लें लगा
…..???

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